Aranya Kanda

Sarga 39: Maricha describes his escape to Dandaka forest -- advises Ravana against the idea of encountering Rama.

अरण्यकाण्डम् · सर्ग 39

23 shlokas

ShlokaShloka 1
एवमस्मि तदा मुक्तः कथञ्चित्तेन संयुगे। इदानीमपि यद्वृत्तं तच्छृणुष्व निरुत्तरम्।।3.39.1।।
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‘इस प्रकार इस समय तो मैं किसी तरह श्रीरामचन्द्रजी के हाथ से जीवित बच गया। उसके बाद इन दिनों जो घटना घटित हुई है, उसे भी सुन लो
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I was somehow saved by him this way in the combat.Listen without any reply to what has taken place recently.
ShlokaShloka 2
राक्षसाभ्यामहं द्वाभ्यामनिर्विण्णस्तथा कृतः। सहितो मृगरूपाभ्यां प्रविष्टो दण्डकावनम्।।3.39.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम ने मेरी वैसी दुर्दशा कर दी थी, तो भी मैं उनके विरोध से बाज नहीं आया। एक दिन मृगरूपधारी दो राक्षसों के साथ मैं भी मृग का ही रूप धारण करके दण्डक वन में गया
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Having done so, I picked up courage and entered Dandaka forest, accompanied by the two other demons in the form of deer .
ShlokaShloka 3
दीप्तजिह्वो महाकायस्तीक्ष्णदंष्ट्रो महाबलः। व्यचरं दण्डकारण्यं मांसभक्षो महामृगः।।3.39.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं महान् बलशाली तो था ही, मेरी जीभ आग के समान उद्दीप्त हो रही थी। दाढ़ें भी बहुत बड़ी थीं,सींग तीखे थे और मैं महान् मृग के रूपमें मांस खाता हुआ दण्डकारण्य में विचरने लगा
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I wandered in Dandaka forest in the form of a huge animal with a big and strong body, a flaming red tongue and sharp teeth feeding on flesh.
ShlokaShloka 4
अग्निहोत्रेषु तीर्थेषु चैत्यवृक्षेषु रावण। अत्यन्तघोरो व्यचरं तापसान्सम्प्रधर्षयन्।।3.39.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रावण! मैं अत्यन्त भयंकर रूप धारण किये अग्निशालाओं में, जलाशयों के घाटों पर तथा देववृक्षों के नीचे बैठे हुए तपस्वीजनों को तिरस्कृत करता हुआ सब ओर विचरण करने लगा
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O Ravana, assuming a very dreadful form, I wandered about sacrificial spots, sacred places, river banks, under huge trees planted at quadranglestorturing the ascetics.
ShlokaShloka 5
निहत्य दण्डकारण्ये तापसान्धर्मचारिणः। रुधिराणि पिबंस्तेषां तथा मांसानि भक्षयन्।।3.39.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘दण्डकारण्य के भीतर धर्मानुष्ठान में लगे हुए तापसों को मारकर उनका रक्त पीना और मांस खाना यही मेरा काम था
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I wandered about the Dandaka forest slaying righteous ascetics, drinking their blood and eating their flesh.
ShlokaShloka 6
ऋषिमांसाशनः क्रूरस्त्रासयन्वनगोचरान्। तथा रुधिरमत्तोऽहं विचरन्धर्मदूषकः।।3.39.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरा स्वभाव तो क्रूर था ही, मैं ऋषियों के मांस खाता और वन में विचरने वाले प्राणियों को डराता हुआ रक्तपान करके मतवाला हो दण्डक वन में घूमने लगा
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While thus roaming, I harmed the wanderers of the forest. Intoxicated with their blood I used to frighten the righteous.
ShlokaShloka 7
आसादयं तदा रामं तापसं धर्मचारिणम्। वैदेहीं च महाभागां लक्ष्मणं च महारथम्।।3.39.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हम तीनों को आते देख श्रीराम ने अपने विशाल धनुष को खींचकर तीन पैने बाण छोड़े, जो गरुड़ और वायु के समान शीघ्रगामी तथा शत्रु के प्राण लेने वाले थे
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I encountered again the righteous Rama who was in the form of an ascetic, with venerable Sita and the great warrior Lakshmana.
ShlokaShloka 8
तापसं नियताहारं सर्वभूतहिते रतम्। सोऽहं वनगतं रामं परिभूय महाबलम्।।3.39.8।। तापसोऽयमिति ज्ञात्वा पूर्ववैरमनुस्मरन्। अभ्यधावं हि संक्रुद्धस्तीक्ष्ण शृङ्गो मृगाकृतिः।।3.39.9।। जिघांसुरकृतप्रज्ञस्तं प्रहारमनुस्मरन्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हम तीनों को आते देख श्रीराम ने अपने विशाल धनुष को खींचकर तीन पैने बाण छोड़े, जो गरुड़ और वायु के समान शीघ्रगामी तथा शत्रु के प्राण लेने वाले थे
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Although Rama was very strong, he was living on restricted diet, engaged in the welfare of all beings. Treating him as a mere ascetic living in the forest, remembering my past hostility with him and disregarding his (fatal) blow, I ran towards him angrily, assuming the form of a sharphorned animal with an intention to kill him.
ShlokaShloka 9
तेन मुक्तास्त्रयो बाणाश्शिताश्शत्रुनिबर्हणाः।।3.39.10।। विकृष्य बलवच्चापं सुपर्णानिलनिस्स्वनाः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हम तीनों को आते देख श्रीराम ने अपने विशाल धनुष को खींचकर तीन पैने बाण छोड़े, जो गरुड़ और वायु के समान शीघ्रगामी तथा शत्रु के प्राण लेने वाले थे
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His mighty bow drawn, Rama released three sharp darts that came whizzing like Garuda or the wind. They could destroy the enemy.
ShlokaShloka 10
ते बाणा वज्रसङ्काशास्सुमुक्ता रक्तभोजनाः। आजग्मुस्सहितास्सर्वे त्रयस्सन्नतपर्वणः।।3.39.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हम तीनों को आते देख श्रीराम ने अपने विशाल धनुष को खींचकर तीन पैने बाण छोड़े, जो गरुड़ और वायु के समान शीघ्रगामी तथा शत्रु के प्राण लेने वाले थे
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All the three tightly jointed, welltargetted darts, strong as thunderbolt, and which could feed on blood came together all at once.
ShlokaShloka 11
पराक्रमज्ञो रामस्य शठो दृष्टभयः पुरा। समुद्भान्तस्ततोमुक्तस्तावुभौ राक्षसौ हतौ।।3.39.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हम तीनों को आते देख श्रीराम ने अपने विशाल धनुष को खींचकर तीन पैने बाण छोड़े, जो गरुड़ और वायु के समान शीघ्रगामी तथा शत्रु के प्राण लेने वाले थे
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Having known Rama's prowess earlier and experienced tremendous fear, I ran away in a bewildered state as I was deceitful. The other two demons (who had accompanied me) succumbed.
ShlokaShloka 12
शरेण मुक्तो रामस्य कथञ्चित्प्राप्य जीवितम्। इह प्रव्राजितो युक्तस्तापसोऽहं समाहितः।।3.39.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘झुकी हुई गाँठवाले वे सब तीनों बाण, जो वज्र के समान दुःसह, अत्यन्त भयंकर तथा रक्त पीने वाले थे, एक साथ ही हमारी ओर आये
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With my escape from Rama's darts I somehow got a fresh lease of life. Now I am composed. I have started living the life of a recluse here. I have turned an ascetic.
ShlokaShloka 13
वृक्षे वृक्षे च पश्यामि चीरकृष्णाजिनाम्बरम्। गृहीतधनुषं रामं पाशहस्तमिवान्तकम्।।3.39.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब मुझे एक-एक वृक्ष में चीर, काला मृगचर्म और धनुष धारण किये श्रीराम ही दिखायी देते हैं, जो मुझे पाशधारी यमराज के समान प्रतीत होते हैं
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I see Rama in every tree, clad in bark and deerskin, wielding the bow, holding a noose in hand like the god of death.
ShlokaShloka 14
अपि रामसहस्राणि भीतः पश्यामि रावण। रामभूतमिदं सर्वमरण्यं प्रतिभाति मे।।3.39.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब मुझे एक-एक वृक्ष में चीर, काला मृगचर्म और धनुष धारण किये श्रीराम ही दिखायी देते हैं, जो मुझे पाशधारी यमराज के समान प्रतीत होते हैं
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O Ravana I see in my fear thousands of Ramas. The entire forest appears to me as though filled with Rama.
ShlokaShloka 15
राममेव हि पश्यामि रहिते राक्षसाधिप। दृष्ट्वा स्वप्नगतं राममुद्भ्रमामि विचेतनः।।3.39.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब मुझे एक-एक वृक्ष में चीर, काला मृगचर्म और धनुष धारण किये श्रीराम ही दिखायी देते हैं, जो मुझे पाशधारी यमराज के समान प्रतीत होते हैं
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O king of the demons I see only Rama even in solitude. When I see him in a dream I lose my senses in a state of bewilderment.
ShlokaShloka 16
रकारादीनि नामानि रामत्रस्तस्य रावण। रत्नानि च रथाश्चैव त्रासं संजनयन्ति मे��।3.39.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रावण! मैं भयभीत होकर हजारों रामों को अपने सामने खड़ा देखता हूँ। यह सारा वन ही मुझे राममय प्रतीत हो रहा है
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O Ravana, every name beginning with the letter 'Ra', such as Ratna (gems), Ratha (chariot), etc. strike terror in me.
ShlokaShloka 17
अहं तस्य प्रभावज्ञो न युद्धं तेन ते क्षमम्। बलिं वा नमुचिं वापि हन्याद्धि रघुनन्दनः।।3.39.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राक्षसराज! जब मैं एकान्त में बैठता हूँ, तब मुझे श्रीराम के ही दर्शन होते हैं। सपने में श्रीराम को देखकर मैं उद्भ्रान्त और अचेत-सा हो उठता हूँ
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I know his power.It is not proper to wage a war with him. Rama, delight of the Raghu dynasty, can slay even Bali or Namuchi.
ShlokaShloka 18
रणे रामेण युद्ध्यस्व क्षमां वा कुरु राक्षस । न ते रामकथा कार्या यदि मां द्रष्टुमिच्छसि ।।3.39.19 ।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रावण! तुम्हारी इच्छा हो तो रणभूमि में श्रीराम के साथ युद्ध करो अथवा उन्हें क्षमा कर दो, किंतु यदि मुझे जीवित देखना चाहते हो तो मेरे सामने श्रीराम की चर्चा न करो
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Missing
ShlokaShloka 19
बहवस्साधवो लोके युक्ता धर्ममनुष्ठिताः। परेषामपराधेन विनष्ठास्सपरिच्छदाः।।3.39.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रावण! तुम्हारी इच्छा हो तो रणभूमि में श्रीराम के साथ युद्ध करो अथवा उन्हें क्षमा कर दो, किंतु यदि मुझे जीवित देखना चाहते हो तो मेरे सामने श्रीराम की चर्चा न करो
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There were many pious men in this world who practise yoga and dharma .They have been destroyed along with their retinue due to mistakes committed by others.
ShlokaShloka 20
सोऽऽहं तवापराधेन विनश्येयं निशाचर। कुरु यत्ते क्षमं तत्त्वमहं त्वा नानुयामि ह।।3.39.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रावण! तुम्हारी इच्छा हो तो रणभूमि में श्रीराम के साथ युद्ध करो अथवा उन्हें क्षमा कर दो, किंतु यदि मुझे जीवित देखना चाहते हो तो मेरे सामने श्रीराम की चर्चा न करो
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O demon As such, I will perish due to your offence. You may do anything you deem appropriate. I will not follow you.
ShlokaShloka 21
रामश्च हि महातेजा महासत्त्वो महाबलः।।3.39.22।। अपि राक्षसलोकस्य न भवेदन्तकोऽपि सः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लोक में बहुत-से साधुपुरुष, जो योगयुक्त होकर केवल धर्म के ही अनुष्ठान में लगे रहते थे, दूसरों के अपराध से ही परिकरोंसहित नष्ट हो गये
Show English Translation
Rama is brilliant, powerful and strong. I hope he will not be the god of death for the world of demons.
ShlokaShloka 22
यदि शूर्पणखाहेतोर्जनस्थानगतः खरः।।3.39.23।। अतिवृत्तो हतः पूर्वं रामेणाक्लिष्टकर्मणा। अत्र ब्रूहि यथातत्त्वं को रामस्य व्यतिक्रमः।।3.39.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निशाचर! मैं भी किसी तरह दूसरों के अपराध से नष्ट हो सकता हूँ, अतः तुम्हें जो उचित जान पड़े, वह करो। मैं इस कार्य में तुम्हारा साथ नहीं दे सकता
Show English Translation
For the sake of Surpanakha, Khara of Janasthana committed excesses and got killed by Rama who can accomplish things with ease.Tell me truly if Rama did violate anything here.
ShlokaShloka 23
इदं वचो बन्धुहितार्थिनामया यथोच्यमानं यदि नाभिपत्स्यसे। सबान्धवस्त्यक्ष्यसि जीवितं रणे हतोऽऽद्य रामेण शरैरजिह्मगैः।।3.39.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि शूर्पणखा का बदला लेने के लिये जनस्थाननिवासी खर पहले श्रीराम पर चढ़ाई करने के लिये गया और अनायास ही महान् कर्म करने वाले श्रीराम के हाथ से मारा गया तो तुम्हीं ठीक-ठीक बताओ, इसमें श्रीराम का क्या अपराध है ?
Show English Translation
If you do not follow my advice given for the welfare of our kith and kin, O Ravana, you are killed today. With your relations you will succumb to his straightmoving arrows. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे एकोनचत्वारिंशस्सर्गः।। Thus ends the thirtyninth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.