Aranya Kanda

Sarga 43: Sita pleads with Rama and Lakshmana to get the deer-- Lakshmana says it is the magic of Maricha-- Rama asks Lakshmana to take care of Sita and proceeds to catch the deer.

अरण्यकाण्डम् · सर्ग 43

46 shlokas

ShlokaShloka 1
सा तं सम्प्रेक्ष्य सुश्रोणी कुसुमान्यपचिन्वती। हेमराजतवर्णाभ्यां पार्श्वाभ्यामुपशोभितम्।।3.43.1।। प्रहृष्टा चानवद्याङ्गी मृष्टहाटकवर्णिनी। भर्तारमपि चक्रन्द लक्ष्मणं चापि सायुधम्।।3.43.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
वह मृग सोने और चाँदी के समान कान्तिवाले पार्श्व-भागों से सुशोभित था। शुद्ध सुवर्ण के समान कान्ति तथा निर्दोष अङ्गोंवाली सुन्दरी सीता फूल चुनते-चुनते ही उस मृग को देखकर मन-ही-मन बहुत प्रसन्न हुईं और अपने पति श्रीराम तथा देवर लक्ष्मण को हथियार लेकर आने के लिये पुकारने लगीं
Show English Translation
Sita while plucking flowers Sita who had fine hips, flawless beautiful limbs and pure golden complexion felt delighted to see the deer with gold and silver colours on both sides of his body. She called out to Rama and Lakshmana who were equipped with arms.
ShlokaShloka 2
तयाऽऽहूतौ नरव्याघ��रौ वैदेह्या रामलक्ष्मणौ। वीक्षमाणौ तु तौ देशं तदा ददृशतुर्मृगम्।।3.43.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
वह मृग सोने और चाँदी के समान कान्तिवाले पार्श्व-भागों से सुशोभित था। शुद्ध सुवर्ण के समान कान्ति तथा निर्दोष अङ्गोंवाली सुन्दरी सीता फूल चुनते-चुनते ही उस मृग को देखकर मन-ही-मन बहुत प्रसन्न हुईं और अपने पति श्रीराम तथा देवर लक्ष्मण को हथियार लेकर आने के लिये पुकारने लगीं
Show English Translation
When Sita called Rama and Lakshmana, the two tigers among men, they looked around and saw the deer.
ShlokaShloka 3
शङ्कमानस्तु तं दृष्ट्वा लक्ष्मणो राममब्रवीत्। तमेवैनमहं मन्ये मारीचं राक्षसं मृगम्।।3.43.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे बार-बार उन्हें पुकारती और फिर उस मृग को अच्छी तरह देखने लगती थीं। वे बोलीं, ‘आर्यपुत्र ! अपने भाई के साथ आइये, शीघ्र आइये’
Show English Translation
Seeing the deer, Lakshmana suspected him to be Maricha and said this to Rama.
ShlokaShloka 4
चरन्तोमृगयां हृष्टाः पापेनोपाधिना वने। अनेन निहता राजन् राजानः कामरूपिणा।।3.43.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
विदेहकुमारी सीता के द्वारा पुकारे जाने पर नरश्रेष्ठ श्रीराम और लक्ष्मण वहाँ आये और उस स्थान पर सब ओर दृष्टि डालते हुए उन्होंने उस समय उस मृग को देखा
Show English Translation
Many kings, while on hunting expedition in the forest, have been deceitfully killed by malicious Maricha, who could assume any form at his free will.
ShlokaShloka 5
अस्य मायाविदो मायामृगरूपमिदं कृतम्। भानुमत्पुरुषव्याघ्र गन्धर्वपुरसन्निभम्।।3.43.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
उसे देखकर लक्ष्मण के मन में संदेह हुआ और वे बोले—’भैया! मैं तो समझता हूँ कि इस मृग के रूप में वह मारीच नाम का राक्षस ही आया है
Show English Translation
O tiger among men, this deceitful demon (Maricha) has been transformed into the illusory form of a radiant deer which does not exist.
ShlokaShloka 6
मृगो ह्येवंविधो रत्नविचित्रो नास्ति राघव। जगत्यां जगतीनाथ मायैषा हि न संशयः।।3.43.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! पृथ्वीनाथ! इस भूतलपर कहीं भी ऐसा विचित्र रत्नमय मृग नहीं है; अतः निःसंदेह यह माया ही है’
Show English Translation
O Rama, lord of the world nowhere on earth does exist this kind of wonderful deer sparkling with gems. That it is a mere trick, an illusion there is no doubt.
ShlokaShloka 7
एवं ब्रुवाणं काकुत्स्थं प्रतिवार्य शुचिस्मिता। उवाच सीता संहृष्टा चर्मणा हृतचेतना।।3.43.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! पृथ्वीनाथ! इस भूतलपर कहीं भी ऐसा विचित्र रत्नमय मृग नहीं है; अतः निःसंदेह यह माया ही है’
Show English Translation
Sita was too enchanted by the skin of the deer to retain her sense of discrimination. Intervening, she said to Rama joyfully with a pure smile on her face:
ShlokaShloka 8
आर्यपुत्राभिरामोऽसौ मृगो हरति मे मनः। आनयैनं महाबाहो क्रीडार्थं नो भविष्यति।।3.43.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! पृथ्वीनाथ! इस भूतलपर कहीं भी ऐसा विचित्र रत्नमय मृग नहीं है; अतः निःसंदेह यह माया ही है’
Show English Translation
O prince O longarmed one, this deer has captivated my mind. Fetch him for me.This will be our playmate.
ShlokaShloka 9
इहाश्रमपदेऽस्माकं बहवः पुण्यदर्शनाः। मृगाश्चरन्ति सहिताश्चमरास्सृमरास्तथा।।3.43.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आर्यपुत्र ! यह मृग बड़ा ही सुन्दर है। इसने मेरे मन को हर लिया है। महाबाहो! इसे ले आइये। यह हमलोगों के मन-बहलाव के लिये रहेगा
Show English Translation
Here at the hermitage there are many lovely deer, yaks and antelopes wandering in herds.
ShlokaShloka 10
ऋक्षाः पृषतसङ्घाश्च वानराः किन्नरास्तथा। विचरन्ति महाबाहो रुपश्रेष्ठा मनोहराः।।3.43.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आर्यपुत्र ! यह मृग बड़ा ही सुन्दर है। इसने मेरे मन को हर लिया है। महाबाहो! इसे ले आइये। यह हमलोगों के मन-बहलाव के लिये रहेगा
Show English Translation
O longarmed one, most beautiful animals like bears, antelopes and groups of monkeys and kinneras are wandering here.
ShlokaShloka 11
न चास्य सदृशो राजन्दृष्टपूर्वो मृगो मया। तेजसा क्षमया दीप्त्या यथाऽयं मृगसत्तमः।।3.43.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजन्! महाबाहो! यद्यपि हमारे इस आश्रम पर बहुत-से पवित्र एवं दर्शनीय मृग एक साथ आकर चरते हैं तथा सृमर (काली पूँछवाली चवँरी गाय), चमर (सफेद पूँछवाली चवँरी गाय), रीछ, चितकबरे मृगों के झुंड, वानर तथा सुन्दर रूपवाले महाबली किन्नर भी विचरण करते हैं, तथापि आज के पहले मैंने दूसरा कोई ऐसा तेजस्वी, सौम्य और दीप्तिमान् मृग नहीं देखा था, जैसा कि यह श्रेष्ठ मृग दिखायी दे रहा है
Show English Translation
O prince this kind of beautiful, tame and glittering deer I have never seen before.
ShlokaShloka 12
नानावर्णविचित्राङ्गो रत्नबिन्दुसमाचितः। द्योतयन्वनमव्यग्रं शोभते शशिसन्निभः।।3.43.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजन्! महाबाहो! यद्यपि हमारे इस आश्रम पर बहुत-से पवित्र एवं दर्शनीय मृग एक साथ आकर चरते हैं तथा सृमर (काली पूँछवाली चवँरी गाय), चमर (सफेद पूँछवाली चवँरी गाय), रीछ, चितकबरे मृगों के झुंड, वानर तथा सुन्दर रूपवाले महाबली किन्नर भी विचरण करते हैं, तथापि आज के पहले मैंने दूसरा कोई ऐसा तेजस्वी, सौम्य और दीप्तिमान् मृग नहीं देखा था, जैसा कि यह श्रेष्ठ मृग दिखायी दे रहा है
Show English Translation
Its body glittering with different colours, speckled with gems of different kinds, is like the Moon shining and illuminating the forest.
ShlokaShloka 13
अहो रूपमहो लक्ष्मीस्स्वरसम्पच्च शोभना। मृगोऽद्भुतो विचित्राङ्गो हृदयं हरतीव मे।।3.43.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजन्! महाबाहो! यद्यपि हमारे इस आश्रम पर बहुत-से पवित्र एवं दर्शनीय मृग एक साथ आकर चरते हैं तथा सृमर (काली पूँछवाली चवँरी गाय), चमर (सफेद पूँछवाली चवँरी गाय), रीछ, चितकबरे मृगों के झुंड, वानर तथा सुन्दर रूपवाले महाबली किन्नर भी विचरण करते हैं, तथापि आज के पहले मैंने दूसरा कोई ऐसा तेजस्वी, सौम्य और दीप्तिमान् मृग नहीं देखा था, जैसा कि यह श्रेष्ठ मृग दिखायी दे रहा है
Show English Translation
Oh what a beauty, Oh what rich call what delightful, wonderful, graceful limbs This deer captivates my heart.
ShlokaShloka 14
यदि ग्रहणमभ्येति जीवन्नेव मृगस्तव। आश्चर्यभूतं भवति विस्मयं जनयिष्यति।।3.43.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नाना प्रकार के रंगों से युक्त होने के कारण इसके अङ्ग विचित्र जान पड़ते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो यह अङ्गों का ही बना हुआ हो। मेरे आगे निर्भय एवं शान्तभाव से स्थित होकर इस वन को प्रकाशित करता हुआ यह चन्द्रमा के समान शोभा पा रहा है
Show English Translation
If this deer can be caught alive, it will be thrilling, it will work wonders.
ShlokaShloka 15
समाप्तवनवासानां राज्यस्थानां च नः पुनः। अन्तःपुरविभूषार्थो मृग एष भविष्यति।।3.43.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसका रूप अद्भुत है। इसकी शोभा अवर्णनीय है। इसकी स्वरसम्पत्ति (बोली) बड़ी सुन्दर है। विचित्र अङ्गों से सुशोभित यह अद्भुत मृग मेरे मन को मोहे लेता है
Show English Translation
After the completion of exile in the forest, when we are back in the kingdom, this deer will add beauty to the harem.
ShlokaShloka 16
भरतस्यार्यपुत्रस्य श्वश्रूणां मम च प्रभो। मृगरूपमिदं व्यक्तं विस्मयं जनयिष्यति।।3.43.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि यह मृग जीते-जी ही आपकी पकड़ में आ जाय तो एक आश्चर्य की वस्तु होगा और सबके हृदय में विस्मय उत्पन्न कर देगा
Show English Translation
O king this deer will create amazement in Bharata, in mothersinlaw, in you and in me as well.
ShlokaShloka 17
जीवन्न यदि तेऽभ्येति ग्रहणं मृगसत्तमः। अजिनं नरशार्दूल रुचिरं मे भविष्यति।।3.43.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जब हमारे वनवास की अवधि पूरी हो जायगी और हम पुनः अपना राज्य पा लेंगे, उस समय यह मृग हमारे अन्तःपुर की शोभा बढ़ायेगा
Show English Translation
O best among men, if this great deer cannot be captured alive, I will wear its beautiful skin.
ShlokaShloka 18
निहतस्यास्य सत्त्वस्य जाम्बूनदमयत्वचि। शष्पबृस्यां विनीतायामिच्छाम्यहमुपासितुम्।।3.43.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुरुषसिंह ! यदि कदाचित् यह श्रेष्ठ मृग जीते-जी पकड़ा न जा सके तो इसका चमड़ा ही बहुत सुन्दर होगा
Show English Translation
If this animal is killed and its golden skin is spread on a tender grass cushion, there will I like to sit.
ShlokaShloka 19
कामवृत्तमिदं रौद्रं स्त्रीणामसदृशं मतम्। वपुषा त्वस्य सत्त्वस्य विस्मयो जनितो मम।।3.43.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुरुषसिंह ! यदि कदाचित् यह श्रेष्ठ मृग जीते-जी पकड़ा न जा सके तो इसका चमड़ा ही बहुत सुन्दर होगा
Show English Translation
This kind of request arising out of a woman's desire may sound terrible, still then the beauty of this animal's skin has produced in me a wonder.
ShlokaShloka 20
तेन काञ्चनवर्णेन मणिप्रवरशृङ्गिणा। तरुणादित्यवर्णेन नक्षत्रपथवर्चसा।।3.43.21।। बभूव राघवस्यापि मनो विस्मयमागतम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘घास-फूसकी बनी हुई चटाई पर इस मरे हुए मृग का सुवर्णमय चमड़ा बिछाकर मैं इस पर आपके साथ बैठना चाहती हूँ
Show English Translation
By his golden colour resembling the rising Sun, by his horns with excellent gems shining like the milkyway, even Rama's mind was wonderstruck.
ShlokaShloka 21
एवं सीतावचः श्रुत्वा तं दृष्ट्वा मृगमद्भुतम्।।3.43.22।। लोभितस्तेन रूपेण सीतया च प्रचोदितः। उवाच राघवो हृष्टो भ्रातरं लक्ष्मणं वचः।।3.43.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यद्यपि स्वेच्छा से प्रेरित होकर अपने पति को ऐसे काम में लगाना यह भयंकर स्वेच्छाचार है और साध्वी स्त्रियों के लिये उचित नहीं माना गया है तथापि इस जन्तु के शरीर ने मेरे हृदय में विस्मय उत्पन्न कर दिया है (इसीलिये मैं इसको पकड़ लाने के लिये अनुरोध करती हूँ)’
Show English Translation
On hearing Sita's words and seeing the wonderful deer, Rama was tempted by its appearance.Prompted by Sita,he joyfully said this to Lakshmana:
ShlokaShloka 22
पश्य लक्ष्मण वैदेह्याः स्पृहां मृगगतामिमाम्। रूपश्रेष्ठतया ह्येष मृगोऽद्य न भविष्यति।।3.43.24।। न वने नन्दनोद्धेशे न चैत्ररथसंश्रये। कुतःपृथिव्यां सौमित्रे योऽस्य कश्चित्समो मृगः।।3.43.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुनहरी रोमावली, इन्द्रनील मणि के समान सींग, उदयकाल के सूर्य की-सी कान्ति तथा नक्षत्रलोक की भाँति विन्दुयुक्त तेज से सुशोभित उस मृग को देखकर श्रीरामचन्द्रजी का मन भी विस्मित हो उठा। सीता की पूर्वोक्त बात को सुनकर, उस मृग के अद्भुत रूप को देखकर, उसके उस रूपपर लुभाकर और सीता से प्रेरित होकर हर्ष से भरे हुए श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण से कहा-
Show English Translation
O Lakshmana, see the eagerness of Sita. Such a deer of exceptional beauty will not be found in this forest. There is no equal to this animal even in the Nandan garden of Indra, or the Chaitraratha, the garden of Kubera. Where can such an animal be found on earth?
ShlokaShloka 23
प्रतिलोमानुलोमाश्च रुचिरा रोमराजयः। शोभन्ते मृगमाश्रित्य चित्राः कनकबिन्दवः।।3.43.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुनहरी रोमावली, इन्द्रनील मणि के समान सींग, उदयकाल के सूर्य की-सी कान्ति तथा नक्षत्रलोक की भाँति विन्दुयुक्त तेज से सुशोभित उस मृग को देखकर श्रीरामचन्द्रजी का मन भी विस्मित हो उठा। सीता की पूर्वोक्त बात को सुनकर, उस मृग के अद्भुत रूप को देखकर, उसके उस रूपपर लुभाकर और सीता से प्रेरित होकर हर्ष से भरे हुए श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण से कहा-
Show English Translation
The stretches of hair on the deer's body bent both in the natural order and in the opposite direction look beautiful. The spots of gold on the skin are wonderful.
ShlokaShloka 24
पश्यास्य जृम्भमाणस्य दीप्तामग्निशिखोपमाम्। जिह्वां मुखान्निस्सरन्तीं मेघादिव शतह्रदाम्।।3.43.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुनहरी रोमावली, इन्द्रनील मणि के समान सींग, उदयकाल के सूर्य की-सी कान्ति तथा नक्षत्रलोक की भाँति विन्दुयुक्त तेज से सुशोभित उस मृग को देखकर श्रीरामचन्द्रजी का मन भी विस्मित हो उठा। सीता की पूर्वोक्त बात को सुनकर, उस मृग के अद्भुत रूप को देखकर, उसके उस रूपपर लुभाकर और सीता से प्रेरित होकर हर्ष से भरे हुए श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण से कहा-
Show English Translation
Look at his tongue stretched out of the mouth while yawning. It is glowing like flaming fire. It is like the lightning sparkling in the cloud.
ShlokaShloka 25
मसारगल्लर्कमुखश्शङ्खमुक्तानिभोदरः। कस्य नामाभिरूप्योऽसौ न मनो लोभयेन्मृगः।।3.43.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! देखो तो सही, विदेहनन्दिनी सीता के मन में इस मृग को पाने के लिये कितनी प्रबल इच्छाजाग उठी है ? वास्तव में इसका रूप है भी बहुत ही सुन्दर। अपने रूप की इस श्रेष्ठता के कारण ही यह मृग आज जीवित नहीं रह सकेगा
Show English Translation
His face is a drinking pot of emerald, the belly is a conch or a pearl. Whose mind will not be attracted by this indescribable beauty ?
ShlokaShloka 26
कस्य रूपमिदं दृष्ट्वा जाम्बूनद मयप्रभम्। नानारत्नमयं दिव्यं न मनो विस्मयं व्रजेत्।।3.43.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमित्रानन्दन! देवराज इन्द्र के नन्दन वन में और कुबेर के चैत्ररथ वन में भी कोई ऐसा मृग नहीं होगा, जो इसकी समानता कर सके। फिर पृथ्वी पर तो हो ही कहाँ से सकता है
Show English Translation
Whose mind will not be filled with wonder on seeing this divine beauty glittering like lustrous gold and studded with a variety of gems ?
ShlokaShloka 27
मांसहेतोरपि मृगान्विनोदार्थं च धन्वनः। घ्नन्ति लक्ष्मण राजानो मृगयायां महावने।।3.43.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘टेढ़ी और सीधी रुचिर रोमावलियाँ इस मृग के शरीर का आश्रय ले सुनहरे विन्दुओं से चित्रित हो बड़ी शोभा पा रही हैं
Show English Translation
O Lakshmana kings who wield bows in hunting expeditions kill deer in the forest for sport as well as for venison.
ShlokaShloka 28
धनानि व्यवसायेन विचीयन्ते महावने। धातवो विविधाश्चापि मणिरत्नसुवर्णिनः।।3.43.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देखो न, जब यह जंभाई लेता है, तब इसके मुख से प्रज्वलित अग्निशिखा के समान दमकती हुई जिह्वा बाहर निकल आती है और मेघ से प्रकट हुई बिजली के समान चमकने लगती है
Show English Translation
From huge forests a variety of mineral wealth consisting of gems, stones and gold are collected with great effort.
ShlokaShloka 29
तत्सारमखिलं नृ़णां धनं निचयवर्धनम्। मनसा चिन्तितं सर्वं यथा शुक्रस्य लक्ष्मण।।3.43.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसका मुख-सम्पुट इन्द्रनीलमणि के बने हुए चषक (पानपात्र) के समान जान पड़ता है, उदर ङ्केशार और मोती के समान सफेद है। यह अवर्णनीय मृग किसके मन को नहीं लुभा लेगा
Show English Translation
O Lakshmana the essence of forest wealth is mineral wealth, which helps the growth of the treasury. It is conceived mentally as in the case of Venus.
ShlokaShloka 30
अर्थी येनार्थकृत्येन संव्रजत्यविचारयन्। तमर्थमर्थशास्त्रज्ञाः प्राहुरर्थ्याश्च लक्ष्मण।।3.43.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! राजालोग बड़े-बड़े वनों में मृगया खेलते समय मांस (मृगचर्म) के लिये और शिकार खेलने का शौक पूरा करने के लिये भी धनुष हाथ में लेकर मृगों को मारते हैं
Show English Translation
A materialist moves about thoughtlessly for making money. Economists call it material wealth.
ShlokaShloka 31
एतस्य मृगरत्नस्य परार्ध्ये काञ्चनत्वचि। उपवेक्ष्यति वैदेही मया सह सुमध्यमा।।3.43.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! राजालोग बड़े-बड़े वनों में मृगया खेलते समय मांस (मृगचर्म) के लिये और शिकार खेलने का शौक पूरा करने के लिये भी धनुष हाथ में लेकर मृगों को मारते हैं
Show English Translation
ShlokaShloka 32
न कादली न प्रियकी न प्रवेणी न चाविकी। भवेदेतस्य सदृशी स्पर्शनेनेति मे मतिः।।3.43.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मृगया के उद्योग से ही राजालोग विशाल वन में धन का भी संग्रह करते हैं; क्योंकि वहाँ मणि, रत्नऔर सुवर्ण आदि से युक्त नाना प्रकार की धातुएँ उपलब्ध होती हैं
Show English Translation
The skins of various types of deer like Priyaki, Kadali or goats or sheep cannot be compared in softness to the skin of this deer.
ShlokaShloka 33
एष चैव मृगश्श्रीमान् यश्च दिव्यो नभश्चरः। उभावेतौ मृगौ दिव्यौ तारामृगमहीमृगौ।।3.43.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! कोश की वृद्धि करने वाला वह वन्य धन मनुष्यों के लिये अत्यन्त उत्कृष्ट होता है। ठीक उसी तरह, जैसे ब्रह्मभाव को प्राप्त हुए पुरुष के लिये मन के चिन्तनमात्र से प्राप्त हुई सारी वस्तुएँ अत्यन्त उत्तम बतायी गयी हैं
Show English Translation
This majestic deer and the deer flying in heaven (the deer's figure seen in the Moon called Mrgasira) both the deer of the star in the sky and the deer of the earth are divine.
ShlokaShloka 34
यदि वाऽयं तथा यन्मां भवेद्वदसि लक्ष्मण। मायैषा राक्षसस्���ेति कर्तव्योस्य वधो मया।।3.43.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! अर्थी मनुष्य जिस अर्थ (प्रयोजन) का सम्पादन करने के लिये उसके प्रति आकृष्ट हो बिना विचारे ही चल देता है, उस अत्यन्त आवश्यक प्रयोजन को ही अर्थसाधन में चतुर एवं अर्थशास्त्र के ज्ञाता विद्वान् ‘अर्थ’ कहते हैं
Show English Translation
Lakshmana, as you say, if it is the illusion of a demon, even then it should be killed by me.
ShlokaShloka 35
एतेन हि नृशंसेन मारीचेनाकृतात्मना। वने विचरता पूर्वं हिंसिता मुनिपुङ्गवाः।।3.43.38।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस रत्नस्वरूप श्रेष्ठ मृग के बहुमूल्य सुनहरे चमड़े पर सुन्दरी विदेहराजनन्दिनी सीता मेरे साथ बैठेगी
Show English Translation
The great sages were tortured and killed earlier by this cruel, evilminded Maricha while wandering in the forest.
ShlokaShloka 36
उत्थाय बहवो येन मृगयायां जनाधिपाः। निहताः परमेष्वासास्तस्माद्वध्यस्त्वयं मृगः।।3.43.39।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कदली (कोमल ऊँचे चितकबरे और नीलाग्ररोम वाले मृगविशेष), प्रियक (कोमल ऊँचे चिकने और घने रोम वाले मृगविशेष), प्रवेण (विशेष प्रकार के बकरे) और अवि (भेड़) की त्वचा भी स्पर्श करने में इस काञ्चन मृग के छाले के समान कोमल एवं सुखद नहीं हो सकती, ऐसा मेरा विश्वास है।
Show English Translation
Many kings who were great archers who set out on hunting expedition were killed by him. Therefore, this animal deserves to be killed.
ShlokaShloka 37
पुरस्तादिह वातापिः परिभूय तपस्विनः। उदरस्थो द्विजान्हन्तिस्वगर्भोऽश्वतरीमिव।।3.43.40।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह सुन्दर मृग और वह जो दिव्य आकाशचारी मृग (मृगशिरा नक्षत्र) है, ये दोनों ही दिव्य मृग हैं। इनमें से एक तारामृग और दूसरा महीमृग है
Show English Translation
Earlier in this forest, Vatapi used to humiliate the ascetic brahmins and to kill them by entering into their stomach like a womb killing the female mule.
ShlokaShloka 38
स कदाचिच्चिराल्लोभादाससाद महामुनिम्। अगस्त्यं तेजसा युक्तं भक्षस्तस्य बभूव ह।।3.43.41।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! तुम मुझसे जैसा कह रहे हो यदि वैसा ही यह मृग हो, यदि यह राक्षस की माया ही हो तो भी मुझे उसका वध करना ही चाहिये
Show English Translation
That Vatapi after a long time, once greedily entered into the stomach of the great lustrous sage Agastya and became his food.
ShlokaShloka 39
समुत्थाने व तद्रूपं कर्तुकामं समीक्ष्य तम्। उत्स्मयित्वा तु भगवान्वातापिमिदमब्रवीत्।।3.43.42।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘क्योंकि अपवित्र (दुष्ट) चित्तवाले इस क्रूरकर्मा मारीच ने वन में विचरते समय पहले अनेकानेक श्रेष्ठ मुनियों की हत्या की है
Show English Translation
When the venerable sage Agastya got up (after eating), he observed Vatapi wishing to turn into his real form. So smiling at him, he said:
ShlokaShloka 40
त्वयाऽविगण्य वातापे परिभूतास्स्वतेजसा। जीवलोके द्विजश्रेष्ठास्तस्मादसि जरां गतः।।3.43.43।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसने मृगया के समय प्रकट होकर बहुत-से महाधनुर्धर नरेशों का वध किया है, अतः इस मृग के रूप में इसका भी वध अवश्य करने योग्य है
Show English Translation
'O Vatapi you killed the best of brahmins living in this world, disregarding them because of your power. Hence you were digested by me.'
ShlokaShloka 41
तदेवं न भवेद्रक्षोवातापिरिव लक्ष्मण। मद्विधं योऽतिमन्येत धर्मनित्यं जितेन्द्रियम्।।3.43.44।। भवेद्धतोऽयं वातापिरगस्त्येनेव मां गतः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसी वन में पहले वातापि नामक राक्षस रहता था, जो तपस्वी महात्माओं का तिरस्कार करके कपटपूर्ण उपाय से उनके पेट में पहुँच जाता और जैसे खच्चरी को अपने ही गर्भ का बच्चा नष्ट कर देता है, उसी प्रकार उन ब्रह्मर्षियों को नष्ट कर देता था
Show English Translation
O Lakshmana just like Vatapi, this demon will not live. Whoever violates a person of my kind who is ever righteous and selfcontrolled will be killed
ShlokaShloka 42
इह त्वं भव सन्नद्दो यन्त्रितो रक्ष मैथिलीम्।।3.43.45।। अस्यामायत्तमस्माकं यत्कृत्यं रघुनन्दन।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वह वातापि एक दिन दीर्घकाल के पश्चात् लोभवश तेजस्वी महामुनि अगस्त्यजी के पास जा पहुँचा और (श्राद्धकाल में) उनका आहार बन गया। उनके पेट में पहुँच गया
Show English Translation
O Lakshmana, delight of the Raghu dynasty, be very alert and restrained and protect Sita. Whatever duty we have to perform depends on her protection.
ShlokaShloka 43
अहमेनं वधिष्यामि ग्रहीष्याम्यपि वा मृगम्।।3.43.46।। यावद्गच्छामि सौमित्रे मृगमानयितुं द्रुतम्।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के अरण्यकाण्ड में तैंतालीसवाँ सर्ग पूराहुआ
Show English Translation
O Lakshmana I will go quickly and either kill the deer or catch it. Now let me go.
ShlokaShloka 44
पश्य लक्ष्मण वैदेहीं मृगत्वचि गतस्पृहाम्।।3.43.47।। त्वचा प्रधानया ह्येष मृगोऽद्य न भविष्यति।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वातापे! तुमने बिना सोचे-विचारे इस जीव-जगत् में बहुत-से श्रेष्ठ ब्राह्मणों को अपने तेज से तिरस्कृत किया है, उसी पाप से अब तुम पच गये’
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See, how Vaidehi ardently longs for the skin of this deer I will not let the animal live, O Lakshmana
ShlokaShloka 45
अप्रमत्तेन ते भाव्यमाश्रमस्थेन सीतया।।3.43.48।। यावत्पृषतमेकेन सायकेन निहन्म्यहम्। हत्वैतच्चर्म चादाय शीघ्रमेष्यामि लक्ष्मण।।3.43.49।।
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‘लक्ष्मण! जो सदा धर्म में तत्पर रहने वाले मुझ-जैसे जितेन्द्रिय पुरुष का भी अतिक्रमण करे, उस मारीच नामक राक्षस को भी वातापि के समान ही नष्ट हो जाना चाहिये
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Keep vigil over Sita at the hermitage, O Lakshmana I will certainly kill the speckled antelope with a single arrow, get his skin and come back quickly.
ShlokaShloka 46
प्रदक्षिणेनातिबलेन पक्षिणा जटायुषा बुद्धिमता च लक्ष्मण। भवाप्रमत्तः परिगृह्य मैथिलीं प्रतिक्षणं सर्वत एव शङ्कितः।।3.43.50।।
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‘जैसे वातापि अगस्त्य के द्वारा नष्ट हुआ, उसी प्रकार यह मारीच अब मेरे सामने आकर अवश्य ही मारा जायगा। तुम अस्त्र और कवच आदि से सुसज्जित हो जाओ और यहाँ सावधानी के साथ मिथिलेशकुमारी की रक्षा करो
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O Lakshmana, be vigilant in guarding Sita, suspecting danger every moment from all directions. Take the help of Jatayu, the mighty and wise bird who will be on his rounds. इत्याषे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे त्रिचत्वारिंशस्सर्गः।। Thus ends the fortythird sarga in Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.