Aranya Kanda
Sarga 46: Lakshmana departs from the hermitage -- Ravana arrives in a saint's robes -- praises Sita and enquires of her -- Sita reveals details about her family to Ravana.
अरण्यकाण्डम् · सर्ग 46
34 shlokas
ShlokaShloka 1
तया परुषमुक्तस्तु कुपितो राघवानुजः।
स विकाङ्क्षन्भृशं रामं प्रतस्थे नचिरादिव।।3.46.1।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सीता के कठोर वचन कहने पर कुपित हुए लक्ष्मण श्रीराम से मिलने की विशेष इच्छा रखकर शीघ्र ही वहाँ से चल दिये
Show English TranslationEnglish Translation
Lakshmana, brother of Rama, hurt by the harsh words of Sita, hastened with Rama's wellbeing in mind.
ShlokaShloka 2
तदासाद्य दशग्रीवः क्षिप्रमन्तरमास्थितः।
अभिचक्राम वैदेहीं परिव्राजकरूपधृक्।।3.46.2।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
लक्ष्मण के चले जाने पर रावण को मौका मिल गया, अतः वह संन्यासी का वेष धारण करके शीघ्र ही विदेहकुमारी सीता के समीप गया
Show English TranslationEnglish Translation
The tenheaded Ravana who was in hiding assumed the guise of a wandering mendicant and approached Sita.
ShlokaShloka 3
श्लक्ष्णकाषायसंवीतश्शिखी छत्री उपानही।
वामे चांसेऽवसज्याथ शुभे यष्टिकमण्डलू।।3.46.3।।
परिव्राजकरूपेण वैदेहीमन्वपद्यत।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह शरीर पर साफ-सुथरा गेरुए रंग का वस्त्र लपेटे हुए था। उसके मस्तक पर शिखा, हाथ में छाता और पैरों में जूते थे। उसने बायें कंधे पर डंडा रखकर उसमें कमण्डलु लटका रखा था
Show English TranslationEnglish Translation
And then Ravana wearing fine orange robes, with hair knotted on the head, carrying a parasol, wearing sandals, hanging a kamandalu (waterpot), and a staff on the auspicious left shoulder walked towards Vaidehi like a mendicant.
ShlokaShloka 4
तामाससादातिबलो भ्रातृभ्यां रहितां वने।।3.46.4।।
रहितां चन्द्रसूर्याभ्यां सन्ध्यामिव महत्तमः।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
अत्यन्त बलवान् रावण उस वन में परिव्राजक का रूप धारण करके श्रीराम और लक्ष्मण दोनों बन्धुओं से रहित हुई अकेली विदेहकुमारी सीता के पास गया
Show English TranslationEnglish Translation
Mighty Ravana approached Sita deprived of both the brothers, Like darkness encompasses the evening twilight in the absence of the Sun and the Moon.
ShlokaShloka 5
तामपश्यत्ततो बालां रामपत्नीं यशस्विनीम्।।3.46.5।।
रोहिणीं शशिना हीनां ग्रहवद्भृशदारुणः।
Show English TranslationEnglish Translation
The extremely cruel Ravana saw the illustrious young wife of Rama just as Ketu looks at Rohini star in the absence of the Moon.
ShlokaShloka 6
तमुग्रतेजःकर्माणं जनस्थानरूहा द्रुमाः।।3.46.6।।
समीक्ष्य सम्प्रकम्पन्ते न प्रवाति च मारुतः।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
Seeing the ferocious Ravana, the huge trees at Janasthana shook vidently. Even the wind ceased to blow.
ShlokaShloka 7
शीघ्रस्रोताश्च तं दृष्ट्वा वीक्षन्तं रक्तलोचनम्।।3.46.7।।
स्तिमितं गन्तुमारेभे भयाद्गोदावरी नदी।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
Seeing Ravana with his bloodred eyes, the swiftflowing river Godavari slowed down out of fear.
ShlokaShloka 8
रामस्य त्वन्तरप्रेप्सुर्दशग्रीवस्तदन्तरे।।3.46.8।।
उपतस्थे च वै देहीं भिक्षुरूपेण रावणः।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
The tenheaded Ravana who was waiting for Rama's absence now got it. Disguised as a mendicant he stepped toward to where Sita was.
ShlokaShloka 9
अभव्यो भव्यरूपेण भर्तारमनुशोचतीम्।।3.46.9।।
अभ्यवर्तत वैदेहीं चित्रामिव शनैश्चरः।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
The evilminded Ravana in the guise of a holy man, like Saturn moves towards Chitra star, came close to Sita who was brooding over her husband.
ShlokaShloka 10
स पापो भव्यरूपेण तृणैः कूप इवावृतः।।3.46.10।।
अतिष्ठत्प्रेक्ष्य वैदेहीं रामपत्निं यशस्विनीम्।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
Just like a well is concealed by an overgrowth of grass, Ravana guised as a holy man stood looking at illustrious Sita, the wife of Rama.
ShlokaShloka 11
शुभां रुचिरदन्तोष्ठीं पूर्णचन्द्रनिभाननाम्।।3.46.11।।
आसीनां पर्णशालायां बाष्पशोकाभिपीडिताम्।
स तां पद्मपलाशाक्षीं पीतकौशेयवासिनीम्।।3.46.12।।
अभ्यगच्छत वैदेहीं दुष्टचेता निशाचरः।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
The wicked demon came close to that auspicious princess from Videha sitting in the cottage Her face was like the full moon. Her teeth and lips were lovely. She was clad in yellow silk. Her eyes were like lotus petals tormented by tears of grief.
ShlokaShloka 12
स मन्मथशराविष्टो ब्रह्मघोषमुदीरयन्।।3.46.13।।
अब्रवीत्प्रश्रितं वाक्यं रहिते राक्षसाधिपः।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
ShlokaShloka 13
तामुत्तमां स्त्रियं लोके पद्महीनामिव श्रियम्।।3.46.14।।
विभ्राजमानां वपुषा रावणः प्रशशंस ह।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
Sita was the most lovely lady of the world shining in beauty. She was like the goddess of wealth (Laxmi) without her lotus. Ravana praised her thus:
ShlokaShloka 14
का त्वं काञ्चनवर्णाभे पीतकौशेयवासिनि।।3.46.15।।
कमलानां शुभां मालां पद्मिनीव हि बिभ्रती।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उन्हें देखते ही कामदेव के बाणों से घायल हो राक्षसराज रावण वेदमन्त्र का उच्चारण करने लगा और उस एकान्त स्थान में विनीतभाव से उनसे कुछ कहने को उद्यत हुआ
Show English TranslationEnglish Translation
Who are you with a golden complexion, clad in yellow silk, and looking like a lotuspond and wearing an auspicious lotus garland?
ShlokaShloka 15
ह्रीः कीर्तिः श्रीश्शुभा लक्ष्मीरप्सरा वा शुभानने।।3.46.16।।
भूतिर्वा त्वं वरारोहे रतिर्वा स्वैरचारिणी।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
त्रिलोकसुन्दरी सीता अपने शरीर से कमल से रहित कमलालया लक्ष्मी की भाँति शोभा पा रही थीं। रावण उनकी प्रशंसा करता हुआ बोला-
Show English TranslationEnglish Translation
O lady with a beautiful face, with lovely thighs, are you 'hri', shyness personified? Are you the auspicious lovely Lakshmi, the goddess of wealth? Are you the goddess of fame? Are you an apsara? Are you Bhuti, the goddess of fortune? Or are you Rati, the goddess of love moving at your free will ?
ShlokaShloka 16
समाश्शिखरिणस्स्निग्धाः पाण्डुरा ���शनास्तव।।3.46.17।।
विशाले विमले नेत्रे रक्तान्ते कृष्णतारके।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘उत्तम सुवर्ण की-सी कान्तिवाली तथा रेशमी पीताम्बर धारण करने वाली सुन्दरी! (तुम कौन हो?) तुम्हारे मुख, नेत्र, हाथ और पैर कमलों के समान हैं, अतः तुम पद्मिनी (पुष्करिणी) की भाँति कमलों की सुन्दर-सी माला धारण करती हो
Show English TranslationEnglish Translation
Your teeth are even and pointed, white and beautiful.Your eyes are large and clear and sparkling with dark pupils with a red tinge at the corner.
ShlokaShloka 17
विशालं जघनं पीनमूरू करिकरोपमौ।।3.46.18।।
एतावुपचितौ वृत्तौ संहतौ सम्प्रवल्गितौ।
पीनोन्नतमुखौ कान्तौ स्निग्धौ तालफलोपमौ।।3.46.19।।
मणिप्रवेकाभरणौ रुचिरौ ते पयोधरौ।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘शुभानने! तुम श्री, ह्री, कीर्ति, शुभस्वरूपा लक्ष्मी अथवा अप्सरा तो नहीं हो? अथवा वरारोहे ! तुम भूति या स्वेच्छापूर्वक विहार करने वाली कामदेव की पत्नी रति तो नहीं हो?
Show English TranslationEnglish Translation
Your big hips are stout and strong, Your smooth thighs are like the trunk of an elephant, your breasts adorned with gems, are round and robust like palm fruits and drooping with heaviness with projected stiff nipples, shining and delightful, adding beauty.
ShlokaShloka 18
चारुस्मिते चारुदति चारुनेत्रे विलासिनि।।3.46.20।।
मनो हरसि मे कान्ते नदी कूलमिवाम्भसा।
करान्तमितमध्यासि सुकेशी संहतस्तनी।।3.46.21।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘सुन्दर मुसकान, रुचिर दन्तावली और मनोहर नेत्रवाली विलासिनी रमणी! तुम अपने रूप-सौन्दर्य से मेरे मन को वैसे ही हरे लेती हो, जैसे नदी जल के द्वारा अपने तट का अपहरण करती है।
Show English TranslationEnglish Translation
O lady with an elegant smile, beautiful teeth, lovely eyes you are enticing.Your slender waist can be compassed by my fist.Your hair is beautiful and your large breasts are rubbing against each other.You are capturing my mind just as the flow of water in a river touches its banks.
ShlokaShloka 19
नैव देवी न गन्धर्वी न यक्षी न च किन्नरी।
नैवंरूपा मया नारी दृष्टपूर्वा महीतले।।3.46.22।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘सुन्दर मुसकान, रुचिर दन्तावली और मनोहर नेत्रवाली विलासिनी रमणी! तुम अपने रूप-सौन्दर्य से मेरे मन को वैसे ही हरे लेती हो, जैसे नदी जल के द्वारा अपने तट का अपहरण करती है।
Show English TranslationEnglish Translation
O beautiful lady I have not seen such a beauty earlier either among goddesses or among gandharavis, or yakshis or even among kinneris.
ShlokaShloka 20
रूपमग्र्यं च लोकेषु सौकुमार्यं वयश्चते।
इह वासश्च कान्तारे चित्तमुन्मादयन्ति मे।।3.46.23।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘सुन्दर मुसकान, रुचिर दन्तावली और मनोहर नेत्रवाली विलासिनी रमणी! तुम अपने रूप-सौन्दर्य से मेरे मन को वैसे ही हरे लेती हो, जैसे नदी जल के द्वारा अपने तट का अपहरण करती है।
Show English TranslationEnglish Translation
You are the most beautiful among women in the world. With all your tenderness and youth you are living in this forlorn forest. This maddens my heart.
ShlokaShloka 21
सा प्रतिक्राम भद्रं ते नैवं वस्तुमिहार्हसि।
राक्षसानामयं वासो घोराणां कामरूपिणाम्।।3.46.24।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘सुन्दर मुसकान, रुचिर दन्तावली और मनोहर नेत्रवाली विलासिनी रमणी! तुम अपने रूप-सौन्दर्य से मेरे मन को वैसे ही हरे लेती हो, जैसे नदी जल के द्वारा अपने तट का अपहरण करती है।
Show English TranslationEnglish Translation
It is not safe for a lady like you to reside here. Move out at once. This is only fit for the dwelling of horrible demons who can change their form at will.
ShlokaShloka 22
प्रासादाग्राणि रम्याणि नगरोपवनानि च।
सम्पन्नानि सुगन्धीनि युक्तान्याचरितुं त्वया।।3.46.25।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
You deserve to stroll in the terraces of palaces, in beautiful, luxurious and fragrant city gardens.
ShlokaShloka 23
वरं माल्यं वरं भोज्यं वरं वस्त्रं च शोभने।
भर्तारं च वरं मन्ये त्वद्युक्तमसितेक्षणे।।3.46.26।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
O beautiful, blackeyed lady, I think you deserve the best of garlands, best of food, and clothes and a suitable husband.
ShlokaShloka 24
का त्वं भवसि रुद्राणां मरुतां वा वरानने।
वसूनां वा वरावोहे देवता प्रतिभासि मे।।3.46.27।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
O best of women O lady with beautiful buttocks can you be one of the Rudras or Maruts or Vasus? To me, you appear like a goddess.
ShlokaShloka 25
नेह गच्छन्ति गन्धर्वा न देवा न च किन्नराः।
राक्षसानामयं वासः कथं नु त्वमिहागता।।3.46.28।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
Neither gandharvas, nor kinnaras, nor gods move here. This is only a dwelling place for the demons. How did you come here ?
ShlokaShloka 26
इह शाखामृगास्सिंहा द्वीपिव्याघ्रमृगास्तथा।
ऋक्षास��तरक्षवः कङ्काः कथं तेभ्यो न बिभ्यसि।।3.46.29।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
There are monkeys, lions, panthers, tigers, hyenas, bears, kanka birds and other wild animals here. How is it that you are not afraid of them?
ShlokaShloka 27
मदान्वितानां घोराणां कुञ्जराणां तरस्विनाम्।
कथमेका महारण्ये न बिभेषि वरानने।।3.46.30।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
O Charming lady how is it that although alone you are not afraid of the dreadful, swift, powerful wild animals like elephants in rut ?
ShlokaShloka 28
कासि कस्य कुतश्चित्त्वं किं निमित्तं च दण्डकान्।
एका चरसि कल्याणि घोरान्राक्षससेवितान्।।3.46.31।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
Who are you, O auspicious lady ? Who are your people? Why are you here? From where have you come? For what reason are you going about alone in this fierce Dandaka tract, inhabited by demons?
ShlokaShloka 29
इति प्रशस्ता वैदेही रावणेन दुरात्मना।
द्विजातिवेशेण हि तं दृष्ट्वा रावणमागतम्।।3.46.32।।
सर्वैरतिथिसत्कारैः पूजयामास मैथिली।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
Seeing Ravana, a villain in the guise of a brahmin praising her, Sita, the princess of Videha, honoured him with all hospitality.
ShlokaShloka 30
उपनीयासनं पूर्वं पाद्येनाभिनिमन्त्र्य च।।3.46.33।।
अब्रवीत्सिद्धमित्येव तदा तं सौम्यदर्शनम्।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
She offered the handsome guest a seat first and then water for washing his feet with, and then invited him for food.
ShlokaShloka 31
द्विजातिवेषेण समीक्ष्य मैथिली समागतं पात्रकुसुम्भधारिणम्।
अशक्यमुद्वेष्टुमपायदर्शनम् न्यमन्त्रयद्ब्राह्मणवत्तदाङ्गना।।3.46.34।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
Sita, being a lady, was unable to doubt him since he came in the guise of a brahmin, holding a bottlegourd and a begging bowl. Without knowing his illintention she invited him in, mistaking him for a brahmin.
ShlokaShloka 32
इयं बृसी ब्राह्मण काममास्यतामिदं च पाद्यं प्रतिगृह्यतामिति।
इदं च सिद्धं वनजातमुत्तमं त्वदर्थमव्यग्रमिहोपभुज्यताम्।।3.46.35।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
O brahmin, here is the seat for you. Feel free to sit. Here is water to wash your feet with. This is the best of food for you collected from the forest. Please partake this without hesitation.
ShlokaShloka 33
निमन्त्र्यमाणः प्रतिपूर्णभाषिणीं नरेन्द्रपत्नीं प्रसमीक्ष्य मैथिलीम्।
प्रसह्य तस्याहरणे धृतं मनः समर्पयत्स्वात्मवधाय रावणः।।3.46.36।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
Ravana was observing the princess from Mithila, wife of a king inviting him and speaking to him in cordial manner. Looking at her, he resolved to abduct her forcibly, inviting his own death.
ShlokaShloka 34
ततः सुवेषं मृगयागतं पतिं प्रतीक्षमाणा सहलक्ष्मणं तदा।
विवीक्षमाणा हरितं ददर्श तन्महद्वनं नैव तु रामलक्ष्णौ।।3.46.37।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वह ब्राह्मण के वेष में आया था, कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था। ब्राह्मण-वेष में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असम्भव थी। उसकी वेशभूषा में ब्राह्मणत्व का निश्चय कराने वाले चिह्न दिखायी देते थे, अतः उस रूप में आये हुए उस रावण को देखकर मैथिली ने ब्राह्मण के योग्य सत्कार करने के लिये ही उसे निमन्त्रित किया
Show English TranslationEnglish Translation
Sita looked out for the beautiful figure of Rama who had gone to hunt the deer along with Lakshmana. Waiting eagerly for her husband, she only saw the vast stretch of green forest but not Rama and Lakshmana. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे षट्चत्वारिंशस्सर्गः।। Thus ends the fortysixth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.