Aranya Kanda

Sarga 19: Khara gets angry seeing mutilated Surpanakha --Surpanakha's description of Rama and Lakshmana to Khara-- Khara sends fourteen demons to attack Rama.

अरण्यकाण्डम् · सर्ग 19

25 shlokas

ShlokaShloka 1
तां तथा पतितां दृष्ट्वा विरूपां शोणितोक्षिताम्। भगिनीं क्रोधसन्तप्तः खरः पप्रच्छ राक्षसः।।3.19.1।।
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‘बहिन उठो और अपना हाल बताओ। मूर्छा और घबराहट छोड़ो तथा साफ-साफ कहो, किसने तुम्हें इस तरह रूपहीन बनाया है ?
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Burning with anger to see his sister fallen down disfigured and drenched in blood, Khara enquired:
ShlokaShloka 2
उत्तिष्ठ तावदाख्याहि प्रमोहं जहि सम्भ्रमम्। व्यक्तमाख्याहि केन त्वमेवं रूपा विरूपिता।।3.19.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘बहिन उठो और अपना हाल बताओ। मूर्छा और घबराहट छोड़ो तथा साफ-साफ कहो, किसने तुम्हें इस तरह रूपहीन बनाया है ?
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Get up, give up your confusion and stupefaction. Tell me clearly by whom you have been disfigured like this ?
ShlokaShloka 3
कः कृष्णसर्पमासीनमाशीविषमनागसम्। तुदत्यभिसमापन्नमङ्गुल्यग्रेण लीलया।।3.19.3।।
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‘कौन अपने सामने आकर चुपचाप बैठे हुए निरपराध एवं विषैले काले साँप को अपनी अँगुलियों के अग्रभाग से खेल-खेल में पीड़ा दे रहा है?
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Who will hurt an innocent, venomous black serpent and stay away quietly close by for fun with his finger tip?
ShlokaShloka 4
कः कालपाशं समासज्य कण्ठे मोहान्न बुध्यते। यस्त्वामद्य समासाद्य पीतवान्विषमुत्तमम्।।3.19.4।।
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‘तुम तो स्वयं ही दूसरे प्राणियों के लिये यमराज के समान हो, बल और पराक्रम से सम्पन्न हो तथा इच्छानुसार सर्वत्र विचरने और अपनी रुचि के अनुसार रूप धारण करने में समर्थ हो, फिर भी तुम्हें किसने इस दुरवस्था में डाला है; जिससे दुःखी होकर तुम यहाँ आयी हो?
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Who is he who has tied has tied his throat with the noose of death out of ignorance and yet does not know the implications ? Who is he who has caused this injury to you, but does not understand that he has drunk deadly poison.
ShlokaShloka 5
बलविक्रमसम्पन्ना कामगा कामरूपिणी। इमामवस्थां नीता त्वं केनान्तकसमागता।।3.19.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तुम तो स्वयं ही दूसरे प्राणियों के लिये यमराज के समान हो, बल और पराक्रम से सम्पन्न हो तथा इच्छानुसार सर्वत्र विचरने और अपनी रुचि के अनुसार रूप धारण करने में समर्थ हो, फिर भी तुम्हें किसने इस दुरवस्था में डाला है; जिससे दुःखी होकर तुम यहाँ आयी हो?
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You have sufficient strength and courage. You are capable of moving as you like and taking any form at your will. By whom have you been brought to this state and drawn close to death?
ShlokaShloka 6
देवगन्धर्वभूतानामृषीणां च महात्मनाम्। कोऽयमेवं विरूपां त्वां महावीर्यश्चकार ह।।3.19.6।।
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‘देवताओं, गन्धों , भूतों तथा महात्मा ऋषियों में यह कौन ऐसा महान् बलशाली है, जिसने तुम्हें रूपहीन बना दिया?
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Which valiant person among gods, gandharvas, sages and other great people, has disfigured you like this ?
ShlokaShloka 7
न हि पश्याम्यहं लोके यः कुर्यान्मम विप्रियम्। अमरेषु सहस्राक्षं महेन्द्रं पाकशासनम्।।3.19.7।।
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‘जैसे हंस जल में मिले हुए दूध को पी लेता है, उसी प्रकार मैं आज इन प्राणान्तकारी बाणों से तुम्हारे अपराधी के शरीर से उसके प्राण ले लूँगा
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I can see none in this world who can offend me, nor even the thousandeyed Indra among the gods.
ShlokaShloka 8
अद्याहं मार्गणैः प्राणानादास्ये जीवितान्तकैः। सलिले क्षीरमासक्तं निष्पिबन्निव सारसः।।3.19.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जैसे हंस जल में मिले हुए दूध को पी लेता है, उसी प्रकार मैं आज इन प्राणान्तकारी बाणों से तुम्हारे अपराधी के शरीर से उसके प्राण ले लूँगा
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Just as the swan drinks only milk from water (mixed with milk), my arrows will (unerringly) drain the life from the enemy's body right now.
ShlokaShloka 9
निहतस्य मया सङ्ख्ये शरसंकृत्तमर्मणः। सफेनं रुधिरं रक्तं मेदिनी कस्य पास्यति।।3.19.9।।
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‘युद्ध में मेरे बाणों से जिसके मर्मस्थान छिन्न-भिन्न हो गये हैं तथा जो मेरे हाथों मारा गया है, ऐसे किस पुरुष के फेनसहित गरम-गरम रक्त को यह पृथ्वी पीना चाहती है ?
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Whose foamy, red blood will the earth drink while I strike his vital organs with my arrows in the fight ?
ShlokaShloka 10
कस्य पत्ररथाः क��यान्मांसमुत्कृत्य सङ्गताः। प्रहृष्टा भक्षयिष्यन्ति निहतस्य मया रणे।।3.19.10।।
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‘रणभूमि में मेरे द्वारा मारे गये किस व्यक्ति के शरीर से मांस कुतर-कुतरकर ये हर्ष में भरे हुए झुंडके-झुंड पक्षी खायँगे?
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Whose flesh will be eaten by cheerful flocks of (vultures), biting and tearing his body when he is killed by me in the battle ?
ShlokaShloka 11
तं न देवा न गन्धर्वा न पिशाचा न राक्षसाः। मयापकृष्टं कृपणं शक्तास्त्रातुं महाहवे।।3.19.11।।
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‘धीरे-धीरे होश में आकर तुम मुझे उसका नाम बताओ, जिस उद्दण्ड ने वन में तुम पर बलपूर्वक आक्रमण करके तुम्हें परास्त किया है’
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Neither gods nor devils nor gandharvas nor even demons will have the power to rescue that hapless creature dragged by me ruthlessly in the battle.
ShlokaShloka 12
उपलभ्य शनैस्संज्ञां तं मे शंसितुमर्हसि। येन त्वं दुर्विनीतेन वने विक्रम्य निर्जिता।।3.19.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धीरे-धीरे होश में आकर तुम मुझे उसका नाम बताओ, जिस उद्दण्ड ने वन में तुम पर बलपूर्वक आक्रमण करके तुम्हें परास्त किया है’
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You should tell me as you slowly regain your consciousness which bragart has overpowered you in the forest with his strength.
ShlokaShloka 13
इति भ्रातुर्वचश्श्रुत्वा क्रुद्धस्य च विशेषतः। ततश्शूर्पणखा वाक्यं सबाष्पमिदमब्रवीत्।।3.19.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
भाई का विशेषतः क्रोध में भरे हुए भाई खर का यह वचन सुनकर शूर्पणखा नेत्रों से आँसू बहाती हुई इस प्रकार बोली-
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On hearing her angry brother, Surpanakha replied with words choked with tears:
ShlokaShloka 14
तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ। पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ।।3.19.14।। फलमूलाशनौ दान्तौ तापसौ धर्मचारिणौ। पुत्रौ दशरथस्यास्तां भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।।3.19.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भैया ! वन में दो तरुण पुरुष आये हैं, जो देखने में बड़े ही सुकुमार, रूपवान् और महान् बलवान् हैं।उन दोनों के बड़े-बड़े नेत्र ऐसे जान पड़ते हैं मानो खिले हुए कमल हों। वे दोनों ही वल्कल-वस्त्र और मृगचर्म पहने हुए हैं
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Here are two young sons of Dasaratha, Rama and Lakshmana, who are gentle, handsome, strong, with eyes like white lotus, wearing deerskin and bark robes, living on fruits and roots, selfrestrained like ascetics and following the righteous path.
ShlokaShloka 15
गन्धर्वराजप्रतिमौ पार्थिवव्यञ्जनान्वितौ। देवौ वा मानुषौ वा तौ न तर्कयितुमुत्सहे।।3.19.16।।
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‘फल और मूल ही उनका भोजन है। वे जितेन्द्रिय, तपस्वी और ब्रह्मचारी हैं। दोनों ही राजा दशरथ के पुत्र और आपस में भाई-भाई हैं। उनके नाम राम और लक्ष्मण हैं।
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They are kings of the gandharvas with all royal insignia. I was not able to discern whether they are gods or humans.
ShlokaShloka 16
तरुणी रूपसम्पन्ना सर्वाभरणभूषिता। दृष्टा तत्र मया नारी तयोर्मध्ये सुमध्यमा।।3.19.17।।
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‘वे दो गन्धर्वराजों के समान जान पड़ते हैं और राजोचित लक्षणों से सम्पन्न हैं। ये दोनों भाई देवता अथवा दानव हैं, यह मैं अनुमान से भी नहीं जान सकती
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I saw between them a young, beautiful woman of slender waist, adorned with all kinds of jewels.
ShlokaShloka 17
ताभ्यामुभाभ्यां सम्भूय प्रमदामधिकृत्य ताम्। इमामवस्थां नीताहं यथानाथासती तथा।।3.19.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं युद्ध में उस कुटिल आचार वाली स्त्री के और उन दोनों राजकुमारों के भी मारे जाने पर उनका फेनसहित रक्त पीना चाहती हूँ
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I have been subjected to this state of an orphan unfaithful woman by both of them for the sake of that lady.
ShlokaShloka 18
तस्याश्चानृजुवृत्तायास्तयोश्च हतयोरहम्। सफेनं पातुमिच्छामि रुधिरं रणमूर्धनि।।3.19.19।।
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‘मैं युद्ध में उस कुटिल आचार वाली स्त्री के और उन दोनों राजकुमारों के भी मारे जाने पर उनका फेनसहित रक्त पीना चाहती हूँ
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I wish to drink the foamy blood of that crooked woman and of both the brothers slain on the battle front.
ShlokaShloka 19
एष मे प्रथमः कामः कृतस्तात त्वया भवेत्। तस्यास्तयोश्च रुधिरं पिबेयमहमाहवे।।3.19.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं युद्ध में उस कुटिल आचार वाली स्त्री के और उन दोनों राजकुमारों के भी मारे जाने पर उनका फेनसहित रक्त पीना चाहती हूँ
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O dear this is my first wish and you must fulfil it. I will drink her blood and of the two brothers, in the battle.
ShlokaShloka 20
इति तस्यां ब्रुवाणायां चतुर्दश महाबलान्। व्यादिदेश खरः क्रुद्धो राक्षसानन्तकोपमान्।।3.19.21।।
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‘रणभूमि में उस स्त्री का और उन पुरुषों का भी रक्त मैं पी सकूँ—यह मेरी पहली और प्रमुख इच्छा है, जो तुम्हारे द्वारा पूर्ण की जानी चाहिये
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As she was speaking, the inflamed Khara ordered fourteen very strong demons, comparable to Yama, the god of death, to proceed.
ShlokaShloka 21
मानुषौ शस्त्रसम्पन्नौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ। प्रविष्टौ दण्डकारण्यं घोरं प्रमदया सह।।3.19.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
शूर्पणखा के ऐसा कहने पर खरने कुपित होकर अत्यन्त बलवान् चौदह राक्षसों को, जो यमराज के समान भयंकर थे, यह आदेश दिया—
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Two human beings equipped with weapons, clad in bark robes and deerskin have entered the dreadful Dandaka forest along with a woman of bewitching beauty.
ShlokaShloka 22
तौ हत्वा तां च दुर्वृत्तामपावर्तितुमर्हथ। इयं च रुधिरं तेषां भगिनी मम पास्यति।।3.19.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीरो! इस भयंकर दण्डकारण्य के भीतर चीर और काला मृगचर्म धारण किये दो शस्त्रधारी मनुष्य एक युवती स्त्री के साथ घुस आये हैं
Show English Translation
I want you to get both of them along with that notorious woman killed. This sister of mine will drink their blood.
ShlokaShloka 23
मनोरथोऽयमिष्टोऽस्या भगिन्या मम राक्षसाः। शीघ्रं सम्पाद्यतां तौ च प्रमथ्य स्वेन तेजसा।।3.19.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तुमलोग वहाँ जाकर पहले उन दोनों पुरुषों को मार डालो; फिर उस दुराचारिणी स्त्री के भी प्राण ले लो। मेरी यह बहिन उन तीनों का रक्त पीयेगी
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O demons quickly go and crush them with your power and fulfil my sister's sincere wish.
ShlokaShloka 24
इति प्रतिसमादिष्टा राक्षसास्ते चतुर्दश। तत्र जग्मुस्तया सार्धं घना वातेरिता यथा।।3.19.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रणभूमि में उन दोनों भाइयों को तुम्हारे द्वारा मारा गया देख यह हर्ष से खिल उठेगी और आनन्दमग्न होकर युद्ध स्थल में उनका रक्त पान करेगी’
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Thus commanded, the fourteen demons along with Surpanakha rushed there like windblown clouds.
ShlokaShloka 25
ततस्तु ते तं समुदग्रतेजसं तथापिऽतीक्ष्णप्रदरा निशाचराः। न शेकुरेनं सहसा प्रमर्दितुं वनद्विपा दीप्तमिवाग्निमुत्थितम्।।3.19.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रणभूमि में उन दोनों भाइयों को तुम्हारे द्वारा मारा गया देख यह हर्ष से खिल उठेगी और आनन्दमग्न होकर युद्ध स्थल में उनका रक्त पान करेगी’
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The nightrangers were unable to crush him(Rama) despite their sharp, glowing weapons just as wild elephants cannot face all at once the rising flame of the forest fire. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे एकोनविंशस्सर्गः।। Thus ends the nineteenth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.