Aranya Kanda

Sarga 29: Encounter between Rama and Khara.

अरण्यकाण्डम् · सर्ग 29

28 shlokas

ShlokaShloka 1
खरं तु विरथं रामो गदापाणिमवस्थितम्। मृदुपूर्वं महातेजाः परुषं वाक्यमब्रवीत्।।3.29.1।।
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खर को रथहीन होकर गदा हाथ में लिये सामने उपस्थित देख महातेजस्वी भगवान् श्रीराम पहले कोमल और फिर कठोर वाणी में बोले-
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Effulgent Rama looked at Khara who stood with a mace in hand minus his chariot and said to him first in a gentle voice and then harshly :
ShlokaShloka 2
गजाश्वरथसम्बाधे बले महति तिष्ठता। कृतं सुदारुणं कर्म सर्वलोकजुगुप्सितम्।।3.29.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निशाचर! हाथी, घोड़े और रथों से भरी हुई विशाल सेना के बीच में खड़े रहकर (असंख्य राक्षसों के स्वामित्व का अभिमान लेकर) तूने सदा जो क्रूरतापूर्ण कर्म किया है, उसकी समस्त लोकों द्वारा निन्दा हुई है। जो समस्त प्राणियों को उद्वेग में डालने वाला, क्रूर और पापाचारी है, वह तीनों लोकों का ईश्वर हो तो भी अधिक काल तक टिक नहीं सकता। जो लोकविरोधी कठोर कर्म करने वाला है, उसे सब लोग सामने आये हुए दुष्ट सर्प की भाँति मारते हैं
Show English Translation
Although you command a huge army with many elephants, horses, chariots, etc. you have done such cruel deeds that the entire world despises you.
ShlokaShloka 3
उद्वेजनीयो भूतानां नृशंसः पापकर्मकृत्। त्रयाणामपि लोकानामीश्वरोऽपि न तिष्ठति।।3.29.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निशाचर! हाथी, घोड़े और रथों से भरी हुई विशाल सेना के बीच में खड़े रहकर (असंख्य राक्षसों के स्वामित्व का अभिमान लेकर) तूने सदा जो क्रूरतापूर्ण कर्म किया है, उसकी समस्त लोकों द्वारा निन्दा हुई है। जो समस्त प्राणियों को उद्वेग में डालने वाला, क्रूर और पापाचारी है, वह तीनों लोकों का ईश्वर हो तो भी अधिक काल तक टिक नहीं सकता। जो लोकविरोधी कठोर कर्म करने वाला है, उसे सब लोग सामने आये हुए दुष्ट सर्प की भाँति मारते हैं
Show English Translation
One who is wicked, does sinful deeds and causes distress to all beings, will not survive even if he is the lord of the three worlds.
ShlokaShloka 4
कर्म लोकविरुद्धं तु कुर्वाणं क्षणदाचर। तीक्ष्णं सर्वजनो हन्ति सर्पं दुष्टमिवागतम्।।3.29.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निशाचर! हाथी, घोड़े और रथों से भरी हुई विशाल सेना के बीच में खड़े रहकर (असंख्य राक्षसों के स्वामित्व का अभिमान लेकर) तूने सदा जो क्रूरतापूर्ण कर्म किया है, उसकी समस्त लोकों द्वारा निन्दा हुई है। जो समस्त प्राणियों को उद्वेग में डालने वाला, क्रूर और पापाचारी है, वह तीनों लोकों का ईश्वर हो तो भी अधिक काल तक टिक नहीं सकता। जो लोकविरोधी कठोर कर्म करने वाला है, उसे सब लोग सामने आये हुए दुष्ट सर्प की भाँति मारते हैं
Show English Translation
O nightranger, one who does a horrific deed which is against the world will be killed like an evil serpent come near.
ShlokaShloka 5
लोभात्पापानि कुर्वाणः कामाद्वा यो न बुध्यते। भ्रष्टः पश्यति तस्यान्तं ब्राह्मणी करकादिव।।3.29.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो वस्तु प्राप्त नहीं हुई है, उसकी इच्छा को ‘काम’ कहते हैं और प्राप्त हुई वस्तु को अधिक-से अधिक संख्या में पाने की इच्छा का नाम ‘लोभ’ है। जो काम अथवा लोभ से प्रेरित हो पाप करता है और उसके (विनाशकारी) परिणाम को नहीं समझता है, उलटे उस पाप में हर्ष का अनुभव करता है, वह उसी प्रकार अपना विनाशरूप परिणाम देखता है जैसे वर्षा के साथ गिरे हुए ओले को खाकर ब्राह्मणी (रक्तपुच्छिका) नाम वाली कीड़ी अपना विनाश देखती है *
Show English Translation
Whoever commits sinful deeds out of greed or passion and without realisation will be ruined at the end like a lizard that eats hailstone (and dies).
ShlokaShloka 6
वसतो दण्डकारण्ये तापसान्धर्मचारिणः। किन्नु हत्वा महाभागान्फलं प्राप्स्यसि राक्षस।।3.29.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनकी जड़ खोखली हो गयी हो, वे वृक्ष जैसे अधिक कालतक नहीं खड़े रह सकते, उसी प्रकार पापकर्म करने वाले लोकनिन्दित क्रूर पुरुष (किसी पूर्वपुण्य के प्रभाव से) ऐश्वर्य को पाकर भी चिरकाल तक उसमें प्रतिष्ठित नहीं रह पाते (उससे भ्रष्ट हो ही जाते हैं)
Show English Translation
O demon what benefit will you get by killing the venerable ascetics, followers of righteous path residing in Dandaka forest?
ShlokaShloka 7
न चिरं पापकर्माणः क्रूरा लोकजुगुप्सिताः। ऐश्वर्यं प्राप्य तिष्ठन्ति शीर्णमूला इव द्रुमाः।।3.29.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनकी जड़ खोखली हो गयी हो, वे वृक्ष जैसे अधिक कालतक नहीं खड़े रह सकते, उसी प्रकार पापकर्म करने वाले लोकनिन्दित क्रूर पुरुष (किसी पूर्वपुण्य के प्रभाव से) ऐश्वर्य को पाकर भी चिरकाल तक उसमें प्रतिष्ठित नहीं रह पाते (उससे भ्रष्ट हो ही जाते हैं)
Show English Translation
Cruel people, who are despised by the world for their sinful deeds, will not be prosperous for long just like trees with decayed roots.
ShlokaShloka 8
अवश्यं लभते जन्तुः फलं पापस्य कर्मणः। घोरं पर्यागते काले द्रुमाः पुष्पमिवार्तवम्।।3.29.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जैसे समय आने पर वृक्ष में ऋतु के अनुसार फूल लगते ही हैं, उसी प्रकार पापकर्म करने वाले पुरुष को समयानुसार अपने उस पापकर्म का भयंकर फल अवश्य ही प्राप्त होता है
Show English Translation
Just as the trees bear flowers at the proper season, so also people will certainly reap the fruits of their terrible, sinful deeds at appropriate time.
ShlokaShloka 9
नचिरात्प्राप्यते लोके पापानां कर्मणां फलम्। सविषाणामिवान्नानां भुक्तानां क्षणदाचर।।3.29.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निशाचर! जैसे खाये हुए विषमिश्रित अन्न का परिणाम तुरंत ही भोगना पड़ता है, उसी प्रकार लोक में किये गये पापकर्मों का फल शीघ्र ही प्राप्त होता है
Show English Translation
O nightranger people will reap the result of their sinful actions in this world soon like one eating poisonous food.
ShlokaShloka 10
पापमाचरतां घोरं लो��स्याप्रियमिच्छताम्। अहमासादितो राजा प्राणान्हन्तुं निशाचर।।3.29.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आज मेरे छोड़े हुए सुवर्णभूषित बाण जैसे सर्प बाँबी को छेदकर निकलते हैं, उसी प्रकार तेरे शरीर को फाड़कर पृथ्वी को भी विदीर्ण करके पाताल में जाकर गिरेंगे
Show English Translation
O nightranger I have come with the orders of the king to put an end to the lives of the perpetrators of dreadful, sinful and offensive deeds in this world.
ShlokaShloka 11
अद्य हि त्वां मया मुक्ताश्शराः काञ्चनभूषणाः। विदार्यातिपतिष्यन्ति वल्मीकमिव पन्नगाः।।3.29.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आज मेरे छोड़े हुए सुवर्णभूषित बाण जैसे सर्प बाँबी को छेदकर निकलते हैं, उसी प्रकार तेरे शरीर को फाड़कर पृथ्वी को भी विदीर्ण करके पाताल में जाकर गिरेंगे
Show English Translation
Now when I unleash the golden arrows, they will pierce through your body and come out like serpents emerging from the anthill.
ShlokaShloka 12
ये त्वया दण्डकारण्ये भक्षिता धर्मचारिणः। तानद्य निहतस्सङ्ख्ये ससैन्योऽनुगमिष्यसि।।3.29.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तूने दण्डकारण्य में जिन धर्मपरायण ऋषियों का भक्षण किया है, आज युद्ध में मारा जाकर सेनासहित तू भी उन्हीं का अनुसरण करेगा
Show English Translation
Slain by me in the battle today, you and your army will follow the righteous men eaten by you in Dandaka forest.
ShlokaShloka 13
अद्य त्वां निहतं बाणैः पश्यन्तु परमर्षयः। निरयस्थं विमानस्था ये त्वया हिंसिताः पुरा।।3.29.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पहले तूने जिनका वध किया है, वे महर्षि विमान पर बैठकर आज तुझे मेरे बाणों से मारा गया और नरकतुल्य कष्ट भोगता हुआ देखें
Show English Translation
The great seers whom you have earlier tortured and killed will, from their aerial vehicles, see you fallen into hell.
ShlokaShloka 14
प्रहर त्वं यथाकामं कुरु यत्नं कुलाधम। अद्य ते पातयिष्यामि शिरस्तालफलं यथा।।3.29.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
कुलाधम! तेरी जितनी इच्छा हो, प्रहार कर। जितना सम्भव हो, मुझे परास्त करने का प्रयत्न कर, किंतु आज मैं तेरे मस्तक को ताड़के फल की भाँति अवश्य काट गिराऊँगा’
Show English Translation
O vile fellow, now you may strike at me as you please. I will make your head fall down like a palm fruit.
ShlokaShloka 15
एवमुक्तस्तु रामेण कृद्धस्संरक्तलोचनः। प्रत्युवाच खरो रामं प्रहसन्क्रोधमूर्छितः।।3.29.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर खर कुपित हो उठा। उसकी आँखें लाल हो गयीं। वह क्रोध से अचेत-सा होकर हँसता हुआ श्रीराम को इस प्रकार उत्तर देने लगा—
Show English Translation
Challenged by Rama in that manner, Khara, his senses switched off, eyes turned red due to anger, replied laughing :
ShlokaShloka 16
प्राकृतान्राक्षसान्हत्वा युद्धे दशरथात्मज। आत्मना कथमात्मानमप्रशस्यं प्रशंससि।।3.29.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘दशरथकुमार! तुम साधारण राक्षसों को युद्ध में मारकर स्वयं ही अपनी इतनी प्रशंसा कैसे कर रहे हो? तुम प्रशंसा के योग्य कदापि नहीं हो
Show English Translation
O son of Dasaratha, it is not praiseworthy to kill ordinary demons in war. Why do you praise yourself for it?
ShlokaShloka 17
विक्रान्ता बलवन्तो वा ये भवन्ति नरर्षभाः। कथयन्ति न ते किञ्चित्तेजसा स्वेन गर्विताः।।3.29.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो श्रेष्ठ पुरुष पराक्रमी अथवा बलवान् होते हैं, वे अपने प्रताप के कारण अधिक घमंड में भरकर कोई बात नहीं कहते हैं (अपने विषय में मौन ही रहते हैं)
Show English Translation
The valiant, strong and the best of men do not at all speak proudly of themselves and their valour.
ShlokaShloka 18
प्राकृतास्त्वकृतात्मानो लोके क्षत्रियपांसनाः। निरर्थकं विकत्थन्ते यथा राम विकत्थसे।।3.29.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जब कि मृत्यु के समान युद्ध का अवसर उपस्थित है, ऐसे समय में बिना किसी प्रस्ताव के ही समराङ्गण में कौन वीर अपनी कुलीनता प्रकट करता हुआ आप ही अपनी स्तुति करेगा?
Show English Translation
O Rama common people, having no control over themselves and the lowest of kshatriyas boast of themselves in the world in a meaningless way as you are doing (now).
ShlokaShloka 19
कुलं व्यपदिशन्वीरस्समरे कोऽभिधास्यति। मृत्युकाले हि सम्प्राप्ते स्वयमप्रस्तवे स्तवम्।।3.29.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जब कि मृत्यु के समान युद्ध का अवसर उपस्थित है, ऐसे समय में बिना किसी प्रस्ताव के ही समराङ्गण में कौन वीर अपनी कुलीनता प्रकट करता हुआ आप ही अपनी स्तुति करेगा?
Show English Translation
When death comes in a battle no hero will name his race and boast of himself unnessarily.
ShlokaShloka 20
सर्वथैव लघुत्वं ते कत्थनेन विदर्शितम्। सुवर्णप्रतिरूपेण तप्तेनेव कुशाग्निना।।3.29.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जैसे पीतल सुवर्णशोधक आग में तपाये जाने पर अपनी लघुता (कालेपन) को ही व्यक्त करता है,उसी प्रकार अपनी झूठी प्रशंसा के द्वारा तुमने सर्वथा अपने ओछेपन का ही परिचय दिया है
Show English Translation
All your meanness is exhibited by your boasting just as the kusa grass caught by fire appears like gold.
ShlokaShloka 21
न ���ु मामिह तिष्ठन्तं पश्यसि त्वं गदाधरम्। धराधरमिवाकम्प्यं पर्वतं धातुभिश्चितम्।।3.29.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘क्या तुम नहीं देखते कि मैं नाना प्रकार के धातुओं की खानों से युक्त तथा पृथ्वी को धारण करने वाले अविचल कुलपर्वत के समान यहाँ स्थिरभाव से तुम्हारे सामने गदा लेकर खड़ा हूँ
Show English Translation
Indeed, (it is strange that) you do not see me holding a mace and standing here like an unshakeable mountain which contains minerals and supports the earth.
ShlokaShloka 22
पर्याप्तोऽहं गदापाणिर्हन्तुं प्राणान्रणे तव। त्रयाणामपि लोकानां पाशहस्त इवान्तकः।।3.29.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं अकेला ही पाशधारी यमराज की भाँति गदा हाथ में लेकर रणभूमि में तुम्हारे और तीनों लोकों के भी प्राण लेने की शक्ति रखता हूँ
Show English Translation
Just like lord Yama, holding a noose of death is alone enough to destroy the three worlds, I am alone sufficient to take away your life in war, a mace in hand.
ShlokaShloka 23
कामं बह्वपि वक्तव्यं त्वयि वक्ष्यामि न त्वहम्। अस्तं गच्छेद्धि सविता युद्धविघ्नस्ततो भवेत्।।3.29.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यद्यपि तुम्हारे विषय में मैं इच्छानुसार बहुत कुछ कह सकता हूँ तथापि इस समय कुछ नहीं कहूँगा; क्योंकि सूर्यदेव अस्ताचल को जा रहे हैं, अतः युद्ध में विघ्न पड़ जायगा
Show English Translation
Indeed, I shall not speak any more even though a lot can be said on you. But the Sun is about to set and it will be improper to wage war thereafter.
ShlokaShloka 24
चतुर्दश सहस्राणि राक्षसानां हतानि ते। त्वद्विनाशात्करोम्येषां तेषामश्रुप्रमार्जनम्।।3.29.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
ऐसा कहकर अत्यन्त क्रोध से भरे हुए खर ने उत्तम वलय (कड़े) से विभूषित तथा प्रज्वलित वज्र के समान भयंकर गदा को श्रीरामचन्द्रजी के ऊपर चलाया
Show English Translation
You have killed these fourteen thousand demons. Therefore, I will wipe their tears by destroying you.
ShlokaShloka 25
इत्युक्त्वा परमक्रुद्धस्तां गदां परमाङ्गदः। खरश्चिक्षेप रामाय प्रदीप्तामशनिं यथा।।3.29.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
ऐसा कहकर अत्यन्त क्रोध से भरे हुए खर ने उत्तम वलय (कड़े) से विभूषित तथा प्रज्वलित वज्र के समान भयंकर गदा को श्रीरामचन्द्रजी के ऊपर चलाया
Show English Translation
Having said this, highly enraged Khara adorned with large shoulder bands, hurled at Rama, his mace glowing like a thunderbolt.
ShlokaShloka 26
खरबाहुप्रयुक्ता सा प्रदीप्ता महती गदा। भस्मवृक्षांश्च गुल्मांश्च कृत्वागात्तत्समीपतः।।3.29.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
खर के हाथों से छूटी हुई वह दीप्तिमान् विशाल गदा वृक्षों और लताओं को भस्म करके उनके समीप जा पहुँची
Show English Translation
The huge, blazing mace hurled by Khara's arms reduced the trees and shrubs into ashes and came close to Rama.
ShlokaShloka 27
तामापतन्तीं ज्वलतां मृत्युपाशोपमां गदाम्। अन्तरिक्षगतां रामचशिच्छेद बहुधा शरैः।।3.29.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
मृत्यु के पाश की भाँति उस विशाल गदा को अपने ऊपर आती देख श्रीरामचन्द्रजी ने अनेक बाण मारकर आकाश में ही उसके टुकड़े-टुकड़े कर डाले
Show English Translation
The mace, which moved in the sky burning like the noose of death was shattered to pieces by Rama.
ShlokaShloka 28
सा विकीर्णा शरैर्भग्ना पपात धरणीतले। गदा मन्त्रौषधबलैर्व्यालीव ��िनिपातिता।।3.29.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
बाणों से विदीर्ण एवं चूर-चूर होकर वह गदा पृथ्वी पर गिर पड़ी, मानो कोई सर्पिणी मन्त्र और ओषधियों के बल से गिरायी गयी हो
Show English Translation
The mace shattered by the arrows of Rama , fell down scattered to pieces on the ground like a female serpent subdued by the force of mantras and medicine. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे एकोनत्रिंशस्सर्गः।। Thus ends the twentyninth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.