Aranya Kanda

Sarga 15: Rama, Lakshmana and Sita enter Panchavati --Lakshmana makes a thatched cottage at Panchavati -- performance of traditional sacrifices before entering the cottage --description of the beautiful nature around Panchavati and river Godavari.

अरण्यकाण्डम् · सर्ग 15

25 shlokas

ShlokaShloka 1
ततः पञ्चवटीं गत्वा नानाव्यालमृगायुताम्। उवाच भ्रातरं रामस्सौमित्रिं दीप्ततेजसम्।।3.15.1।।
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नाना प्रकार के सर्पो, हिंसक जन्तुओं और मृगों से भरी हुई पञ्चवटी में पहुँचकर श्रीराम ने उद्दीप्त तेजवाले अपने भाई लक्ष्मण से कहा-
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On reaching Panchavati, which was full of various vicious animals, Rama said to Lakshmana, his brother who was glowing like fire:
ShlokaShloka 2
आगताः स्म यथोद्दिष्टममुं देशं महर्षिणा। अयं पञ्चवटीदेशस्सौम्य पुष्पितपादपः।।3.15.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्य! मुनिवर अगस्त्य ने हमें जिस स्थान का परिचय दिया था, उनके तथाकथित स्थान में हमलोग आ पहुँचे। यही पञ्चवटी का प्रदेश है। यहाँ का वनप्रान्त पुष्पों से कैसी शोभा पा रहा है
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O handsome one, following the directions of the great sage, we have arrived at Panchavati, a place full of blossoming trees.
ShlokaShloka 3
सर्वतश्चार्यतां दृष्टिः कानने निपुणोह्यसि। आश्रमः कतरस्मिन्नो देशे भवति सम्मतः।।3.15.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! तुम इस वन में चारों ओर दृष्टि डालो; क्योंकि इस कार्य में निपुण हो। देखकर यह निश्चय करो कि किस स्थान पर आश्रम बनाना हमारे लिये अच्छा होगा
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O Lakshmana cast your eyes all around the forest for a suitable place (for building a hermitage). Indeed, you are good at judging things.
ShlokaShloka 4
रमते यत्र वैदेही त्वमहं चैव लक्ष्मण। तादृशो दृश्यतां देशस्सन्निकृष्टजलाशयः।।3.15.4।। वनरामण्यकं यत्र स्थलरामण्यकं तथा। सन्निकृष्टं च यत्र स्यात्समित्पुष्पकुशोदकम्।।3.15.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
“लक्ष्मण! तुम किसी ऐसे स्थान को ढूँढ़ निकालो, जहाँ से जलाशय निकट हो, जहाँ विदेहकुमारी सीता का मन लगे, जहाँ तुम और हम भी प्रसन्नतापूर्वक रह सकें, जहाँ वन और जल दोनों का रमणीय दृश्य हो तथा जिस स्थान के आस-पास ही समिधा, फूल, कुश और जल मिलने की सुविधा हो’
Show English Translation
Look, O Lakshmana for a place to the liking of Sita, a place where there is water source nearby where both of us can enjoy. Find a beautiful location where the surrounding forest is beautiful and where faggots, flowers, water and kusa grass are available at hand.
ShlokaShloka 5
एवमुक्तस्तु रामेण लक्ष्मण संयताञ्जलिः। सीतासमक्षं काकुत्स्थमिदं वचनमब्रवीत्।।3.15.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
“लक्ष्मण! तुम किसी ऐसे स्थान को ढूँढ़ निकालो, जहाँ से जलाशय निकट हो, जहाँ विदेहकुमारी सीता का मन लगे, जहाँ तुम और हम भी प्रसन्नतापूर्वक रह सकें, जहाँ वन और जल दोनों का रमणीय दृश्य हो तथा जिस स्थान के आस-पास ही समिधा, फूल, कुश और जल मिलने की सुविधा हो’
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Having been thus instructed by Rama, Lakshmana said with folded palms in the presence of Sita:
ShlokaShloka 6
परवानस्मि काकुत्स्थ त्वयि वर्षशतं स्थिते। स्वयं तु रुचिरे देशे क्रियतामिति मां वद।।3.15.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीरामचन्द्रजी के ऐसा कहने पर लक्ष्मण दोनों हाथ जोड़कर सीता के सामने ही उन ककुत्स्थकुलभूषण श्रीराम से इस प्रकार बोले-
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O Rama, I shall be dependent on you, even if I live for a hundred years. You only need to indicate a beautiful place of your choice.
ShlokaShloka 7
सुप्रीतस्तेन वाक्येन लक्ष्मणस्य महात्मनः। विमृशन्रोचयामास देशं सर्वगुणान्वितम्।।3.15.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘काकुत्स्थ! आपके रहते हुए मैं सदा पराधीन ही हूँ। मैं सैकड़ों या अनन्त वर्षों तक आपकी आज्ञा के अधीन ही रहना चाहता हूँ; अतः आप स्वयं ही देखकर जो स्थान सुन्दर जान पड़े, वहाँ आश्रम बनाने के लिये मुझे आज्ञा दें-मुझसे कहें कि तुम अमुक स्थान पर आश्रम बनाओ’
Show English Translation
Rama was pleased with the words of great Lakshmana. Deliberating over it, he agreed upon a site suitable in all respects.
ShlokaShloka 8
स तं रुचिरमाक्रम्य देशमाश्रमकर्मणि। हस्तौ गृहीत्वा हस्तेन रामस्सौमित्रिमब्रवीत्।।3.15.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
लक्ष्मण के इस वचन से अत्यन्त तेजस्वी भगवान् श्रीराम को बड़ी प्रसन्नता हुई और उन्होंने स्वयं ही सोच-विचारकर एक ऐसा स्थान पसंद किया, जो सब प्रकार के उत्तम गुणों से सम्पन्न और आश्रम बनाने के योग्य था। उस सुन्दर स्थान पर आकर श्रीराम ने लक्ष्मण का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा –
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Having come to a beautiful spot suitable for the asram, Rama took both the hands of Lakshmana in his own and said:
ShlokaShloka 9
अयं देशस्समश्रीमान् पुष्पितैस्तरुभिर्वृतः। इहाऽश्रमपदं सौम्य यथावत्कर्तुमर्हसि।।3.15.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
लक्ष्मण के इस वचन से अत्यन्त तेजस्वी भगवान् श्रीराम को बड़ी प्रसन्नता हुई और उन्होंने स्वयं ही सोच-विचारकर एक ऐसा स्थान पसंद किया, जो सब प्रकार के उत्तम गुणों से सम्पन्न और आश्रम बनाने के योग्य था। उस सुन्दर स्थान पर आकर श्रीराम ने लक्ष्मण का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा –
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This place is level, surrounded by beautiful trees in full bloom. O handsome one, you may build the hermitage here.
ShlokaShloka 10
इयमादित्यसङ्काशैः पद्मैस्सुरभिगन्धिभिः। अदूरे दृश्यते रम्या पद्मिनी पद्मशोभिता।।3.15.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पवित्र अन्तःकरण वाले अगस्त्य मुनि ने जिसके विषय में कहा था, वह विकसित वृक्षावलियों से घिरी हई रमणीय गोदावरी नदी यही है
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There, not very far, is a beautiful lotustank shining like the Sun, fragrant with lotuses.
ShlokaShloka 11
यथातख्यातमगस्त्येन मुनिना भावितात्मना। इयं गोदावरी रम्या पुष्पितैस्तरुभिर्वृता।।3.15.12।। हंसकारण्डवाकीर्णा चक्रवाकोपशोभिता।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पवित्र अन्तःकरण वाले अगस्त्य मुनि ने जिसके विषय में कहा था, वह विकसित वृक्षावलियों से घिरी हई रमणीय गोदावरी नदी यही है
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As said by the selfrealised soul, sage Agastya, this Godavari is beautiful, surrounded by trees with flowers in bloom, filled with flocks of swans, ducks and ruddy geese.
ShlokaShloka 12
नातिदूरे न चासन्ने मृगयूथपिपीडिताः।।3.15.13।। मयूरनादिता रम्याः प्रांशवो बहुकन्दराः। दृश्यन्ते गिरयः सौम्य फुल्लैस्तरुभिरावृताः।।3.15.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पवित्र अन्तःकरण वाले अगस्त्य मुनि ने जिसके विषय में कहा था, वह विकसित वृक्षावलियों से घिरी हई रमणीय गोदावरी नदी यही है
Show English Translation
O handsome one, neither far nor near are seen tall mountains and flowering trees and herds of deer. Their numerous caves echo with sounds of peacocks.
ShlokaShloka 13
सौवर्णैराजतैस्ताम्रैर्देशे देशे च धातुभिः। गवाक्षिता इवाभान्ति गजाः परमभक्तिभिः।।3.15.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसमें हंस और कारण्डव आदि जलपक्षी विचर रहे हैं। चकवे इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं तथा पानी पीने के लिये आये हुए मृगों के झुंड इसके तट पर छाये रहते हैं। यह नदी इस स्थान से न तो अधिक दूर है और न अत्यन्त निकट ही
Show English Translation
These mountains, with streaks of minerals like gold, silver and copper forming decorative designs, look beautiful like colourful windows, and appear like huge elephants.
ShlokaShloka 14
सालैस्तालैस्तमालैश्च खर्जूरपनसाम्रकैः। नीवारैस्तिमिशैश्चैव पुन्नागैश्चोपशोभिताः।।3.15.16।। चूतैरशोकैस्तिलकैश्चम्पकैः केतकैरपि। पुष्पगुल्मलतोपेतैस्तैस्तैस्तरुभिरावृताः।।3.15.17।। चन्दनैस्पन्दनैर्नीपैः पर्णासैर्लिकुचैरपि। धवाश्वकर्णखदिरैः शमीकिंशुकपाटलैः।।3.15.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्य! यहाँ बहुत-सी कन्दराओं से युक्त ऊँचे-ऊँचे पर्वत दिखायी दे रहे हैं, जहाँ मयूरों की मीठी बोली गूंज रही है। ये रमणीय पर्वत खिले हुए वृक्षों से व्याप्त हैं
Show English Translation
The place is covered with sal and palmyrah trees including mango, jackfruit, dates, kadamba, punnaga, ashoka, champak, tilaka, ketaka, sandalwood, spandan, dhava, asvakarna parnasha, khadira, sami, kimsuka and patala trees. It is full of wild paddy, flowering bushes and creepers that run on the ground.
ShlokaShloka 15
इदं पुण्यमिदं मेध्यमिदं बहुमृगद्विजम्। इह वत्स्याम सौमित्रे सार्धमेतेन पक्षिणा।।3.15.19।।
Show English Translation
This is a holy place fit for sacrifice. There are many animals and birds here.Hence we will reside here with Jatayu.
ShlokaShloka 16
एवमुक्तस्तु रामेण लक्ष्मणः परवीरहा। अचिरेणाऽश्रमं भ्रातुश्चकार सुमहाबलः।।3.15.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर शत्रुवीरों का संहार करने वाले महाबली लक्ष्मण ने भाई के लिये शीघ्र ही आश्रम बनाकर तैयार किया
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Thus directed by Rama, the mighty Lakshmana, destroyer of enemy warriors, soon built a hermitage for his brother.
ShlokaShloka 17
पर्णशालां सुविपुलां तत्र सङ्खातमृत्तिकाम्। सुस्तम्भां मस्करैर्दीर्घैः कृतवंशां सुशोभनाम्।।3.15. 21।। शमीशाखाभिरास्तीर्य दृढपाशावपाशिताम्। कुशकाशशरैः पर्णैस्सुपरिच्छादितां तथा।।3.15.22।। समीकृततलां रम्यां चकार लघुविक्रमः। निवासं राघवस्यार्थे प्रेक्षणीयमनुत्तमम्।।3.15.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर शत्रुवीरों का संहार करने वाले महाबली लक्ष्मण ने भाई के लिये शीघ्र ही आश्रम बनाकर तैयार किया
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Lakshmana who was quick to act dug the clay with nippers, planted long bamboo poles, put branches of sami trees across and tied them with strong ropes. He spread kusa and kasa grass and leaves on the levelled ground. He built a beautiful, spacious and nice residence for Rama.
ShlokaShloka 18
सहसा लक्ष्मणः श्रीमान् नदीं गोदावरीं तदा। स्नात्वा पद्मानि चादाय सफलः पुनरागतः।।3.15.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर शत्रुवीरों का संहार करने वाले महाबली लक्ष्मण ने भाई के लिये शीघ्र ही आश्रम बनाकर तैयार किया
Show English Translation
Lakshmana then went to river Godavari, had his bath, and returned with some lotuses.
ShlokaShloka 19
ततः पुष्पबलिं कृत्वा शान्तिं च स यथाविधि। दर्शयामास रामाय तदाश्रमपदं कृतम्।।3.15.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर शत्रुवीरों का संहार करने वाले महाबली लक्ष्मण ने भाई के लिये शीघ्र ही आश्रम बनाकर तैयार किया
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Lakshmana offered oblation of flowers, invoked peace as per tradition (before occupying a newly made home) and showed Rama the cottage he had built.
ShlokaShloka 20
स तं दृष्ट्वा कृतं सौम्यमाश्रमं सीतया सह। राघवः पर्णशालायां हर्षमाहारयत्परम्।।3.15.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर शत्रुवीरों का संहार करने वाले महाबली लक्ष्मण ने भाई के लिये शीघ्र ही आश्रम बनाकर तैयार किया
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Rama and Sita saw the beautiful hermitage built by Lakshmana, and expressed much happiness over the leafthatched cottage.
ShlokaShloka 21
सुसंहृष्टः परिष्वज्य बाहुभ्यां लक्ष्मणं तदा। अतिस्निग्धं च गाढं च वचनं चेदमब्रवीत्।।3.15.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
वह आश्रम एक अत्यन्त विस्तृत पर्णशाला के रूप में बनाया गया था। महाबली लक्ष्मण ने पहले वहाँ मिट्टी एकत्र करके दीवार खड़ी की, फिर उसमें सुन्दर एवं सुदृढ़ खम्भे लगाये। खम्भों के ऊपर बड़े-बड़े बाँस तिरछे करके रखे। बाँसों के रख दिये जाने पर वह कुटी बड़ी सुन्दर दिखायी देने लगी। फिर उन बाँसों पर उन्होंने शमीवृक्ष की शाखाएँ फैला दीं और उन्हें मजबूत रस्सियों से कसकर बाँध दिया। – इसके बाद ऊपर से कुश, कास, सरकंडे और पत्ते बिछाकर उस पर्णशाला को भलीभाँति छा दिया तथा नीचे की भूमि को बराबर करके उस कुटी को बड़ा रमणीय बना दिया। इस प्रकार लक्ष्मण ने श्रीरामचन्द्रजी के लिये परम उत्तम निवासगृह बना दिया, जो देखने ही योग्य था
Show English Translation
Deeply pleased with Lakshmana, he hugged him tightly and said those loving words :
ShlokaShloka 22
प्रीतोऽस्मि ते महत्कर्म त्वया कृतमिदं प्रभो। प्रदेयो यन्निमित्तं ते परिष्वङ्गो मया कृतः।।3.15.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
वह आश्रम एक अत्यन्त विस्तृत पर्णशाला के रूप में बनाया गया था। महाबली लक्ष्मण ने पहले वहाँ मिट्टी एकत्र करके दीवार खड़ी की, फिर उसमें सुन्दर एवं सुदृढ़ खम्भे लगाये। खम्भों के ऊपर बड़े-बड़े बाँस तिरछे करके रखे। बाँसों के रख दिये जाने पर वह कुटी बड़ी सुन्दर दिखायी देने लगी। फिर उन बाँसों पर उन्होंने शमीवृक्ष की शाखाएँ फैला दीं और उन्हें मजबूत रस्सियों से कसकर बाँध दिया। – इसके बाद ऊपर से कुश, कास, सरकंडे और पत्ते बिछाकर उस पर्णशाला को भलीभाँति छा दिया तथा नीचे की भूमि को बराबर करके उस कुटी को बड़ा रमणीय बना दिया। इस प्रकार लक्ष्मण ने श्रीरामचन्द्रजी के लिये परम उत्तम निवासगृह बना दिया, जो देखने ही योग्य था
Show English Translation
O my master, you have done a great task for which I have given you what I could give at the moment a hug.
ShlokaShloka 23
भावज्ञेन कृतज्ञेन धर्मज्ञेन च लक्ष्मण। त्वया पुत्रेण धर्मात्मा न संवृत्तः पिता मम।।3.15.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
वह आश्रम एक अत्यन्त विस्तृत पर्णशाला के रूप में बनाया गया था। महाबली लक्ष्मण ने पहले वहाँ मिट्टी एकत्र करके दीवार खड़ी की, फिर उसमें सुन्दर एवं सुदृढ़ खम्भे लगाये। खम्भों के ऊपर बड़े-बड़े बाँस तिरछे करके रखे। बाँसों के रख दिये जाने पर वह कुटी बड़ी सुन्दर दिखायी देने लगी। फिर उन बाँसों पर उन्होंने शमीवृक्ष की शाखाएँ फैला दीं और उन्हें मजबूत रस्सियों से कसकर बाँध दिया। – इसके बाद ऊपर से कुश, कास, सरकंडे और पत्ते बिछाकर उस पर्णशाला को भलीभाँति छा दिया तथा नीचे की भूमि को बराबर करके उस कुटी को बड़ा रमणीय बना दिया। इस प्रकार लक्ष्मण ने श्रीरामचन्द्रजी के लिये परम उत्तम निवासगृह बना दिया, जो देखने ही योग्य था
Show English Translation
O Lakshmana with a son like you who can understand others' feelings, who has a sense of gratitude and a sense of duty my father is not dead yet.
ShlokaShloka 24
एवं लक्ष्मणमुक्त्वा तु राघवो लक्ष्मिवर्धनः। तस्मिन् देशे बहुफले न्यवसत्सुसुखं वशी।।3.15.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
उसे तैयार करके श्रीमान् लक्ष्मणने गोदावरीनदीके तटपर जाकर तत्काल उसमें स्नान किया और कमलके फूल तथा फल लेकर वे फिर वहीं लौट आये
Show English Translation
Rama who was an enhancer of fortunes and who had his senses under control said thus to Lakshmana and lived happily there in that place filled with fruits.
ShlokaShloka 25
कञ्चित्कालं स धर्मात्मा सीतया लक्ष्मणेन च। अन्वास्यमानो न्यवसत्स्वर्गलोके यथामरः।।3.15.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर शास्त्रीय विधि के अनुसार देवताओं के लिये फूलों की बलि (उपहारसामग्री) अर्पित की तथावास्तुशान्ति करके उन्होंने अपना बनाया हुआ आश्रम श्रीरामचन्द्रजी को दिखाया
Show English Translation
Righteous Rama, served by Lakshmana, and Sita lived there for some time like a god in heaven. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे पञ्चदशस्सर्गः।। Thus ends the fifteenth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.