Sundara Kanda

Sarga 30: Hanuman decides to praise Rama within Sita's earshot.

सुन्दरकाण्डम् · सर्ग 30

43 shlokas

ShlokaShloka 1
हनुमानपि विक्रान्तः सर्वं शुश्राव तत्त्वतः। सीतायास्त्रिजटायाश्च राक्षसीनां च तर्जनम्।।5.30.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
पराक्रमी हनुमान जी ने भी सीताजी का विलाप, त्रिजटाकी स्वप्नचर्चा तथा राक्षसियों की डाँट-डपट— ये सब प्रसंग ठीक-ठीक सुन लिये
Show English Translation
The valiant hero Hanuman heard everything including the lamentation of Sita and the dream of Trijata and the threats of the demonesses.
ShlokaShloka 2
अवेक्षमाण��्तां देवीं देवतामिव नन्दने। ततो बहुविधां चिन्तां चिन्तयामास व���नरः।।5.30.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
सीताजी ऐसी जान पड़ती थीं मानो नन्दनवन में कोई देवी हों। उन्हें देखते हुए वानरवीर हनुमान जी तरह-तरह की चिन्ता करने लगे-
Show English Translation
The sight of Sita who seemed a deity in the Nandana garden of Indra, set a chain of reflections in his mind :
ShlokaShloka 3
यां कपीनां सहस्राणि सुबहून्ययुतानि च। दिक्षु सर्वासु मार्गन्ते सेयमासादिता मया।।5.30.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
“जिन सीताजी को हजारों-लाखों वानर समस्त दिशाओं में ढूँढ़ रहे हैं, आज उन्हें मैंने पा लिया
Show English Translation
"This is Sita whom thousands of vanaras are searching in all directions.
ShlokaShloka 4
चारेण तु सुयुक्तेन शत्रोश्शक्तिमवेक्षता। गूढेन चरता तावदवेक्षितमिदं मया।।5.30.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं स्वामी द्वारा नियुक्त दूत बनकर गुप्तरूप से शत्रु की शक्ति का पता लगा रहा था। इसी सिलसिले में मैंने राक्षसों के तारतम्य का, इस पुरी का तथा इस राक्षसराज रावण के प्रभाव का भी निरीक्षण कर लिया
Show English Translation
"Roaming everywhere incognito to ascertain carefully the strength of the enemy, I have seen everything.
ShlokaShloka 5
राक्षसानां विशेषश्च पुरी चेयमवेक्षिता। राक्षसाधिपतेरस्य प्रभावो रावणस्य च।।5.30.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं स्वामी द्वारा नियुक्त दूत बनकर गुप्तरूप से शत्रु की शक्ति का पता लगा रहा था। इसी सिलसिले में मैंने राक्षसों के तारतम्य का, इस पुरी का तथा इस राक्षसराज रावण के प्रभाव का भी निरीक्षण कर लिया
Show English Translation
"I have seen the ability of the demons and the citadel of Lanka. I have seen the power of Ravana the demon king.
ShlokaShloka 6
युक्तं तस्याप्रमेयस्य सर्वसत्त्वदयावतः। समाश्वासयितुं भार्यां पतिदर्शनकाङ्क्षिणीम्।।5.30.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीसीताजी असीम प्रभावशाली तथा सब जीवों पर दया करने वाले भगवान् श्रीराम की भार्या हैं। ये अपने पतिदेव का दर्शन पाने की अभिलाषा रखती हैं, अतः इन्हें सान्त्वना देना उचित है
Show English Translation
"It is the opportune time for me to comfort Sita eagerly waiting to see her husband who is of immeasurable prowess and who is compassionate to all beings.
ShlokaShloka 7
अहमाश्वासयाम्येनां पूर्णचन्द्रनिभाननाम्। अदृष्टदुःखां दुःखार्तां दुःखस्यान्तमगच्छतीम्।।5.30.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इनका मुख पूर्णचन्द्रमा के समान मनोहर है। इन्होंने पहले कभी ऐसा दुःख नहीं देखा था, परंतु इस समय दुःखका पार नहीं पा रही हैं। अतः मैं इन्हें आश्वासन दूंगा
Show English Translation
"The moonfaced Sita had never experienced sorrow before. She sees no end to her sorrow and suffering. I will console her.
ShlokaShloka 8
यद्यप्यहमिमां देवीं शोकोपहतचेतनाम्। अनाश्वास्य गमिष्यामि दोषवद्गमनं भवेत्।।5.30.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये शोक के कारण अचेत-सी हो रही हैं, यदि मैं इन सती-साध्वी सीता को सान्त्वना दिये बिना ही चला जाऊँगा तो मेरा वह जाना दोषयुक्त होगा
Show English Translation
"If I should return to Kishkindha without reassuring Sita, whose understanding has been clouded in grief I would be blamed.
ShlokaShloka 9
गते हि मयि तत्रेयं राजपुत्री यशस्विनी। परित्राणमविन्दन्ती जानकी जीवितं त्यजेत्।।5.30.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे चले जाने पर अपनी रक्षा का कोई उपाय न देखकर ये यशस्विनी राजकुमारी जानकी अपने जीवन का अन्त कर देंगी
Show English Translation
"If I so back, this illustrious princess, Janaki will give up her life, finding no means of deliverance (from this tragic situation).
ShlokaShloka 10
मया च स महाबाहुः पूर्णचन्द्रनिभाननः। समाश्यासयितुं न्याय्यस्सीतादर्शनलालसः।।5.30.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पूर्णचन्द्रमा के समान मनोहर मुखवाले महाबाहु श्रीरामचन्द्रजी भी सीताजी के दर्शन के लिये उत्सुक हैं। जिस प्रकार उन्हें सीता का संदेश सुनाकर सान्त्वना देना उचित है, उसी प्रकार सीता को भी उनका संदेश सुनाकर आश्वासन देना उचित होगा
Show English Translation
"I should provide some comfort to the strongarmed Rama with a face like the fullmoon yearning to see Sita.
ShlokaShloka 11
निशाचरीणां प्रत्यक्षमनर्हं चाभिभाषितम्। कथन्नु खलु कर्तव्यमिदं कृच्छ्रगतो ह्यहम्।।5.30.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘परंतु राक्षसियों के सामने इनसे बात करना मेरे लिये ठीक नहीं होगा। ऐसी अवस्था में यह कार्य कैसे सम्पन्न करना चाहिये, यही निश्चय करना मेरे लिये सबसे बड़ी कठिनाई है
Show English Translation
"I cannot talk to her in the presence of these nightroamers. How can I discharge my duty in this predicament?
ShlokaShloka 12
अनेन रात्रिशेषेण यदि नाश्वास्यते मया। सर्वथा नास्ति सन्देहः परित्यक्ष्यति जीवितम्।।5.30.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि इस रात्रि के बीतते-बीतते मैं सीता को सान्त्वना नहीं दे देता हूँ तो ये सर्वथा अपने जीवन का परित्याग कर देंगी, इसमें संदेह नहीं है
Show English Translation
"If I do not comfort her before the remaining part of the night ends, she will give up her life. There is no doubt about it.
ShlokaShloka 13
रामश्च यदि पृच्छेन्मां किं मां सीताब्रवीद्वचः। किमहं तं प्रति ब्रूयामसंभाष्य सुमध्यमाम्।।5.30.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि श्रीरामचन्द्रजी मुझसे पूछे कि सीता ने मेरे लिये क्या संदेश भेजा है तो इन सुमध्यमा सीता से बात किये बिना मैं उन्हें क्या उत्तर दूंगा
Show English Translation
"If Rama enquires about the message of Sita, this lady of beautiful waist, what can I speak without meeting and talking to her?
ShlokaShloka 14
सीतासन्देशरहितं मामितस्त्वरयाऽगतम्। निर्दहेदपि काकुत्स्य क्रुद्धस्तीव्रेण चक्षुषा।।5.30.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि मैं सीता का संदेश लिये बिना ही यहाँ से तुरंत लौट गया तो ककुत्स्थकुलभूषण भगवान् श्रीराम अपनी क्रोधभरी दुःसह दृष्टि से मुझे जलाकर भस्म कर डालेंगे
Show English Translation
"If I leave this place without any message from Sita, Rama will burn me with his eyes full of great anger.
ShlokaShloka 15
यदि चोद्योजयिष्यामि भर्तारं रामकारणात्। व्यर्थमागमनं तस्य ससैन्यस्य भविष्यति।।5.30.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि मैं इन्हें सान्त्वना दिये बिना ही लौट जाऊँ और श्रीरामचन्द्रजी के कार्य की सिद्धि के लिये अपने स्वामी वानरराज सुग्रीव को उत्तेजित करूँ तो वानरसेना के साथ उनका यहाँ तक आना व्यर्थ हो जायगा (क्योंकि सीता इसके पहले ही अपने प्राण त्याग देंगी)
Show English Translation
"If I get the lord of vanaras and his army for the cause of Rama (without talking to Sita), their arrival will be useless (if Sita would have given up her life by then).
ShlokaShloka 16
अन्तरं त्वहमासाद्य राक्षसीनामिह स्थितः। शनैराश्वासयिष्यामि सन्तापबहुळामिमाम्।।5.30.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अच्छा तो राक्षसियों के रहते हुए ही अवसर पाकर आज मैं यहीं बैठे-बैठे इन्हें धीरे-धीरे सान्त्वना दूंगा; क्योंकि इनके मन में बड़ा संताप है
Show English Translation
"I shall wait and speak to her slowly and console this deeply distressed lady when I get a chance to speak to her (when these ogresses are asleep).
ShlokaShloka 17
अहं त्वतितनुश्चैव वानरश्च विशेषतः। वाचं चोदाहरिष्यामि मानुषीमिह संस्कृताम्।।5.30.17।।  
हिन्दी अर्थ देखें
‘एक तो मेरा शरीर अत्यन्त सूक्ष्म है, दूसरे मैं वानर हूँ। विशेषतः वानर होकर भी मैं यहाँ मानवोचित संस्कृत-भाषा में बोलूंगा
Show English Translation
I am indeed of small size and that too a monkey. Nevertheless I shall speak in Sanskrit, a language of the common people. (as the she-demons cannot understand that language).
ShlokaShloka 18
यदि वाचं प्रदास्यामि द्विजातिरिव संस्कृताम्। रावणं मन्यमाना मां सीता भीता भविष्यति।।5.30.18।। वानरस्य विशेषेण कथं स्यादभिभाषणम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘परंतु ऐसा करने में एक बाधा है, यदि मैं द्विज की भाँति संस्कृत-वाणी का प्रयोग करूँगा तो सीता मुझे रावण समझकर भयभीत हो जायँगी
Show English Translation
"If I speak like a brahmin in sanskrit language she would be frightened thinking that I am Ravana and how would a vanara speak?
ShlokaShloka 19
अवश्यमेव वक्तव्यं मानुषं वाक्यमर्थवत्।।5.30.19।। मया सान्त्वयितुं शक्या नान्यथेयमनिन्दिता।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ऐसी दशा में अवश्य ही मुझे उस सार्थक भाषा का प्रयोग करना चाहिये, जिसे अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या के आस-पास की साधारण जनता बोलती है, अन्यथा इन सती-साध्वी सीता को मैं उचित आश्वासन नहीं दे सकता
Show English Translation
"I will certainly speak to her meaningfully in the language of the people. Otherwise it is not possible to pacify the sinless Sita.
ShlokaShloka 20
सेयमालोक्य मे रूपं जानकी भाषितं तथा।।5.30.20।। रक्षोभिस्त्रासिता पूर्वं भूयस्त्रासं गमिष्य��ि।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि मैं सामने जाऊँ तो मेरे इस वानररूप को देखकर और मेरे मुख से मानवोचित भाषा सुनकर ये जनकनन्दिनी सीता, जिन्हें पहले से ही राक्षसों ने भयभीत कर रखा है और भी डर जायँगी
Show English Translation
"Since Janaki has already been frightened by the demons, she will be even more terrified seeing me in this form and hearing me speaking this way.
ShlokaShloka 21
ततो जातपरित्रासा शब्दं कुर्यान्मनस्विनी।।5.30.21।। जानमाना विशालाक्षी रावणं कामरूपिणम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तदनन्तर ये विकट मुखवाली महाबलवती राक्षसियाँ मुझे सब ओर से घेरकर मारने या पकड़ लेने का प्रयत्न करेंगी
Show English Translation
By seeing me in this form, sensitive largeeyed Sita will scream loudly thinking that I am Ravana who can assume any form at his free will.
ShlokaShloka 22
सीतया च कृते शब्दे सहसा राक्षसीगणा:। नानाप्रहरणो घोर: समेयादन्तकोपम:।।5.30.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तदनन्तर ये विकट मुखवाली महाबलवती राक्षसियाँ मुझे सब ओर से घेरकर मारने या पकड़ लेने का प्रयत्न करेंगी
Show English Translation
"If Sita screams, the horde of terrific ogresses will at once gather, armed with dreadful weapons like Yama, the god of death.
ShlokaShloka 23
ततो मां सम्परिक्षिप्य सर्वतो विकृताननाः।।5.30.23।। वधे च ग्रहणे चैव कुर्युर्यत्नं यथाबलम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तदनन्तर ये विकट मुखवाली महाबलवती राक्षसियाँ मुझे सब ओर से घेरकर मारने या पकड़ लेने का प्रयत्न करेंगी
Show English Translation
"Then all these hideous ogresses will swarm round me and make efforts to capture me with all their strength and kill me.
ShlokaShloka 24
गृह्य शाखाः प्रशाखाश्च स्कन्धांश्चोत्तमशाखिनाम्।।5.30.24।। दृष्ट्वा विपरिधावन्तं भवेयुर्भयशङ्किताः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘फिर मुझे बड़े-बड़े वृक्षों की शाखा-प्रशाखा और मोटी-मोटी डालियों पर दौड़ता देख ये सब-की-सब सशङ्क हो उठेगी
Show English Translation
"Seeing me holding big and small branches of large trees and leaping from one place to the other, the ogresses will get scared.
ShlokaShloka 25
मम रूपं च सम्प्रेक्ष्य वने विचरतो महत्।।5.30.25।। राक्षस्यो भयवित्रस्ता भवेयुर्विकृताननाः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसके बाद वे निशाचरियाँ राक्षसराज रावण के महल में उसके द्वारा नियुक्त किये गये राक्षसों को बुला लेंगी
Show English Translation
"These ogresses with their hideous faces will be frightened on looking at my huge form moving in this grove.
ShlokaShloka 26
ततः कुर्युस्समाह्वानं राक्षस्यो रक्षसामपि।।5.30.26।। राक्षसेन्द्रनियुक्तानां राक्षसेन्द्रनिवेशने।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसके बाद वे निशाचरियाँ राक्षसराज रावण के महल में उसके द्वारा नियुक्त किये गये राक्षसों को बुला लेंगी
Show English Translation
"Thereafter the ogresses will draw the attention of demon guards engaged by the king of demons at his residence towards me.
ShlokaShloka 27
ते शूलशक्तिनिस्त्रिंशविविधायुधपाणयः।।5.30.27।। आपतेयुर्विमर्देऽस्मिन्वेगेनोद्वेगकारणात्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस हलचल में वे राक्षस भी उद्विग्न होकर शूल, बाण, तलवार और तरह-तरह के शस्त्रास्त्र लेकर बड़े वेग से आ धमकेंगे
Show English Translation
"Those ogresses due to fear will come speedily, armed with spears, tridents, swords and different kinds of weapons for a combat.
ShlokaShloka 28
समृद्धस्तैस्तु परितो विधमन् रक्षसां बलम्।।5.30.28।। शक्नुयां न तु संप्राप्तुं परं पारं महोदधेः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उनके द्वारा सब ओर से घिर जाने पर मैं राक्षसों की सेना का संहार तो कर सकता हूँ; परंतु समुद्र के उस पार नहीं पहुँच सकता
Show English Translation
"With them around me, I may not be able to reach the other end of the ocean (my strength spent in the combat.)
ShlokaShloka 29
मां वा गृह्णीयुराप्लुत्य बहवश्शीघ्रकारिणः।।5.30.29।। स्यादियं चागृहीतार्था मम च ग्रहणं भवेत्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि बहुत-से फुर्तीले राक्षस मुझे घेरकर पकड़ लें तो सीताजी का मनोरथ भी पूरा नहीं होगा और मैं भी बंदी बना लिया जाऊँगा
Show English Translation
"The ogres who are in large numbers, here are very prompt to act. They will jump into the sky and bind me. Sita will not receive the message and I will be taken into custody by the demons.
ShlokaShloka 30
हिंसाभिरुचयो हिंस्युरिमां वा जनकात्मजाम्।।5.30.30।। विपन्नं स्यात्ततः कार्यं रामसुग्रीवयोरिदम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसके सिवा हिंसा में रुचि रखने वाले राक्षस यदि इन जनकदुलारी को मार डालें तो श्रीरघुनाथजी और सुग्रीव का यह सीता की प्राप्तिरूप अभीष्ट कार्य ही नष्ट हो जायगा
Show English Translation
"These demons who are keen on indulging in violence will harm Janaka's daughter. Then the mission of Rama and Sugriva will also fail.
ShlokaShloka 31
उद्देशे नष्टमार्गेऽस्मिन् राक्षसैः परिवारिते।।5.30.31।। सागरेण परिक्षिप्ते गुप्ते वसति जानकी।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह स्थान राक्षसों से घिरा हुआ है। यहाँ आने का मार्ग दूसरों का देखा या जाना हुआ नहीं है तथा इस प्रदेश को समुद्र ने चारों ओर से घेर रखा है। ऐसे गुप्त स्थान में जानकी जी निवास करती हैं
Show English Translation
"Janaki is staying in this untraceable location surrounded by demons. And this location is a secret place surrounded by the ocean .
ShlokaShloka 32
विशस्ते वा गृहीते वा रक्षोभिर्मयि संयुगे।।5.30.32।। नान्यं पश्यामि रामस्य सहायं कार्यसाधने।
हिन्दी अर्थ देखें
‘बहुत विचार करनेपर भी मुझे ऐसा कोई वानर नहीं दिखायी देता है, जो मेरे मारे जानेपर सौ योजन विस्तृत महासागरको लाँघ सके
Show English Translation
"If I am killed in the combat or captured by the demons, I do not see another person who can help in accomplishing this task.
ShlokaShloka 33
विमृशंश्च न पश्यामि यो हते मयि वानरः।।5.30.33।। शतयोजनविस्तीर्णं लङ्घयेत महोदधिम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘बहुत विचार करनेपर भी मुझे ऐसा कोई वानर नहीं दिखायी देता है, जो मेरे मारे जानेपर सौ योजन विस्तृत महासागरको लाँघ सके
Show English Translation
"When I am killed here, I cannot see any other vanara who can leap over a hundred yojanas of the ocean (to reach this place).
ShlokaShloka 34
कामं हन्तुं समर्थोऽस्मि सहस्राण्यपि रक्षसाम्।।5.30.34।। न तु शक्ष्यामि सम्प्राप्तुं परं पारं महोदधेः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं इच्छानुसार सहस्रों राक्षसों को मार डालने में समर्थ हूँ; परंतु युद्ध में फँस जाने पर महासागर के उस पार नहीं जा सकूँगा
Show English Translation
"I may be capable of killing even thousands of demons but thereafter (thoroughly exhausted) reach the other side of the ocean.
ShlokaShloka 35
असत्यानि च युद्धानि संशयो मे न रोचते।।5.30.35।। कश्च निस्संशयं कार्यं कुर्यात्प्राज्ञः ससंशयम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘युद्ध अनिश्चयात्मक होता है (उसमें किस पक्ष की विजय होगी, यह निश्चित नहीं रहता) और मुझे संशययुक्त कार्य प्रिय नहीं है। कौन ऐसा बुद्धिमान् होगा, जो संशयरहित कार्य को संशययुक्त बनाना चाहेगा
Show English Translation
"Battles, no doubt, are unpredictable. Which wise man with a sound intellect will take up a doubtful work unhesitatingly?
ShlokaShloka 36
प्राणत्यागश्च वैदेह्या भवेदनभिभाषणे।।5.30.36।। एष दोषो महान्हि स्यान्मम सीताभिभाषणे।
हिन्दी अर्थ देखें
अविवेकी या असावधान दूत के हाथ में पड़ने पर बने-बनाये काम भी देश-काल के विरोधी होकर उसी प्रकार असफल हो जाते हैं, जैसे सूर्य के उदय होने पर सब ओर फैले हुए अन्धकार का कोई वश नहीं चलता, वह निष्फल हो जाता है
Show English Translation
"If I talk to Vaidehi it will be a great mistake on my part.If I do not speak to Vaidehi she may give up her life.
ShlokaShloka 37
भूताश्चार्था विनश्यन्ति देशकालविरोधिताः।।5.30.37।। विक्लबं दूतमासाद्य तमः सूर्योदये यथा।
हिन्दी अर्थ देखें
अविवेकी या असावधान दूत के हाथ में पड़ने पर बने-बनाये काम भी देश-काल के विरोधी होकर उसी प्रकार असफल हो जाते हैं, जैसे सूर्य के उदय होने पर सब ओर फैले हुए अन्धकार का कोई वश नहीं चलता, वह निष्फल हो जाता है
Show English Translation
"Even well planned diplomatic missions fail like darkness dispelled at Sunrise if the messenger is confused and if the place and time are not propitious for them.
ShlokaShloka 38
अर्थानर्थान्तरे बुद्धिनिश्चितापि न शोभते।।5.30.38।। घातयन्ति हि कार्याणि दूताः पण्डितमानिनः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में स्वामी की निश्चित बुद्धि भी अविवेकी दूत के कारण शोभा नहीं पाती है; क्योंकि अपने को बड़ा बुद्धिमान् या पण्डित समझनेवाले दूत अपनी ही नासमझी से कार्य को नष्ट कर डालते हैं
Show English Translation
"Swinging from a course of action or an action leading to calamity is not proper. Messengers who assume that they are scholars (blinded by ego) destroy their mission.
ShlokaShloka 39
न विनश्येत्कथं कार्यं वैक्लब्यं न कथं भवेत्।।5.30.39।। लङ्घनं च समुद्रस्य कथं नु न वृथा भवेत्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘फिर किस प्रकार यह काम न बिगड़े, किस तरह मुझसे कोई असावधानी न हो, किस प्रकार मेरा समुद्र लाँघना व्यर्थ न हो जाय और किस तरह सीताजी मेरी सारी बातें सुन लें, किंतु घबराहट में न पढ़ें-इन सब बातों पर विचार करके बुद्धिमान् हनुमान् जी ने यह निश्चय किया
Show English Translation
"How can the mission succeed? How can failure of mission be avoided? How can the crossing of the great ocean be not wasted?"
ShlokaShloka 40
कथं नु खलु वाक्यं मे शृणुयान्नोद्विजेत वा। इति सञ्चिन्त्य हनुमांश्चकार मतिमान्मतिम्।।5.30.40।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘फिर किस प्रकार यह काम न बिगड़े, किस तरह मुझसे कोई असावधानी न हो, किस प्रकार मेरा समुद्र लाँघना व्यर्थ न हो जाय और किस तरह सीताजी मेरी सारी बातें सुन लें, किंतु घबराहट में न पढ़ें-इन सब बातों पर विचार करके बुद्धिमान् हनुमान् जी ने यह निश्चय किया
Show English Translation
Wise Hanuman came to a decision after reflecting in his mind about how not to create fear in Sita (while communicating with her.)
ShlokaShloka 41
राममक्लिष्टकर्माणं सुबन्धुमनुकीर्तयन्।।5.30.41।। नैनामुद्वेजयिष्यामि तद्बन्धुगतमानसाम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनका चित्त अपने जीवन-बन्धु श्रीराम में ही लगा है, उन सीताजी को मैं उनके प्रियतम श्रीराम का जो अनायास ही महान् कर्म करनेवाले हैं, गुण गा-गाकर सुनाऊँगा और उन्हें उद्विग्न नहीं होने दूंगा
Show English Translation
"By praising Rama who is very dear, who is judicious in action and in whom her mind is absorbed, I will not create fear.
ShlokaShloka 42
इक्ष्वाकूणां वरिष्ठस्य रामस्य विदितात्मनः।।5.30.42।। शुभानि धर्मयुक्तानि वचनानि समर्पयन्। श्रावयिष्यामि सर्वाणि मधुरां प्रब्रुवन् गिरम्।।5.30.43।। श्रद्धास्यति यथाहीयं तथा सर्वं समादधे।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मीठी वाणी बोलकर श्रीराम के सारे संदेशों को इस प्रकार सुनाऊँगा, जिससे सीता का उन वचनों पर विश्वास हो। जिस तरह उनके मन का संदेह दूर हो, उसी तरह मैं सब बातों का समाधान करूँगा’
Show English Translation
"I shall present in auspicious words the esteemed Rama of Ikshvaku family who is a knower of self and make her listen to everything in such a sweet manner that she will trust me.
ShlokaShloka 43
इति स बहुविधं महानुभावो जगतिपतेः प्रमदामवेक्षमाणः। मधुरमवितथं जगाद वाक्यं द्रुमविटपान्तरमास्थितो हनूमान्।।5.30.44।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मीठी वाणी बोलकर श्रीराम के सारे संदेशों को इस प्रकार सुनाऊँगा, जिससे सीता का उन वचनों पर विश्वास हो। जिस तरह उनके मन का संदेह दूर हो, उसी तरह मैं सब बातों का समाधान करूँगा’
Show English Translation
Highsouled Hanuman seated on the branch of the tree without being seen began to speak faithfully in praise of the lord of the universe in many ways while looking at her. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे त्रिंशस्सर्गः।। Thus ends the thirtieth sarga of Sundarakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.