Sundara Kanda

Sarga 54: Hanuman destroys the Ashoka garden -- sets fire to Lanka -- kills demons

सुन्दरकाण्डम् · सर्ग 54

43 shlokas

ShlokaShloka 1
वीक्षमाणस्ततो लङ्कां कपिः कृतमनोरथः।।5.54.1।। वर्धमानसमुत्साहः कार्यशेषमचिन्तयत्।
हिन्दी अर्थ देखें
हनुमान जी के सभी मनोरथ पूर्ण हो गये थे। उनका उत्साह बढ़ता जा रहा था। अतः वे लङ्का का निरीक्षण करते हुए शेष कार्य के सम्बन्ध में विचार करने लगे—
Show English Translation
With his objectives achieved, the monkey gazed at Lanka with growing zeal and pondered over the remaining work.
ShlokaShloka 2
किन्नु खल्ववशिष्टं मे कर्तव्यमिह साम्प्रतम्।।5.54.2।। यदेषां रक्षसां भूयः सन्तापजननं भवेत्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब इस समय लङ्का में मेरे लिये कौन-सा ऐसा कार्य बाकी रह गया है, जो इन राक्षसों को अधिक संताप देने वाला हो
Show English Translation
'Is there anything still left which can further torment the demons here?
ShlokaShloka 3
वनं तावत्प्रमथितं प्रकृष्टा राक्षसा हताः।।5.54.3। बलैकदेशः क्षपितश्शेषं दुर्गविनाशनम्।  
हिन्दी अर्थ देखें
‘प्रमदावन को तो मैंने पहले ही उजाड़ दिया था, बड़े-बड़े राक्षसों को भी मौत के घाट उतार दिया और रावण की सेना के भी एक अंशका संहार कर डाला। अब दुर्ग का विध्वंस करना शेष रह गया
Show English Translation
'All the trees of the garden are broken, powerful demons have been killed, and a contingent of the army is destroyed. Only the destruction of the citadel is left. 
ShlokaShloka 4
दुर्गे विनाशिते कर्म भवेत्सुखपरिश्रमम्। अल्पयत्नेन कार्येऽस्मिन् मम स्यात्सफलश्श्रमः।।5.54.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘दुर्ग का विनाश हो जाने पर मेरे द्वारा समुद्र-लङ्घन आदि कर्म के लिये किया गया प्रयास सुखद एवं सफल होगा। मैंने सीताजी की खोज के लिये जो परिश्रम किया है, वह थोड़े-से ही प्रयत्न द्वारा सिद्ध होने वाले लङ्कादहन से सफल हो जायगा
Show English Translation
'If the citadel is destroyed it would be a happy conclusion with a little effort. I can successfully complete my task.
ShlokaShloka 5
यो ह्ययं मम लाङ्गूले दीप्यते हव्यवाहनः। अस्य सन्तर्पणं न्याय्यं कर्तुमेभिर्गृहोत्तमैः।।5.54.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरी पूँछ में जो ये अग्निदेव देदीप्यमान हो रहे हैं इन्हें इन श्रेष्ठ गृहों की आहुति देकर तृप्त करना न्यायसंगत जान पड़ता है’
Show English Translation
'It would be proper to satiate this fire at the end of my tail by offering it to these excellent mansions (I shall set fire to these houses).
ShlokaShloka 6
ततः प्रदीप्तलाङ्गूलस्सविद्युदिव तोयदः। भवनाग्रेषु लङ्काया विचचार महाकपिः।।5.54.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
ऐसा सोचकर जलती हुई पूँछ के कारण बिजलीसहित मेघ की भाँति शोभा पाने वाले कपिश्रेष्ठ हनुमान् जी लङ्का के महलों पर घूमने लगे
Show English Translation
The great Hanuman, with his burning tail wandered on tops of the mansions of Lanka, which looked like clouds with lightning.
ShlokaShloka 7
गृहाद्गृहं राक्षसानामुद्यानानि च वानरः। वीक्षमाणो ह्यसन्त्रस्तः प्रासादांश्च चचार सः।।5.54.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे वानरवीर राक्षसों के एक घर से दूसरे घर पर पहुँचकर उद्यानों और राजभवनों को देखते हुए निर्भय होकर विचरने लगे
Show English Translation
The vanara moved from one house to the other, looking at the gardens and houses of the demons without fear.
ShlokaShloka 8
अवप्लुत्य महावेगः प्रहस्तस्य निवेशनम्। अग्निं तत्र स निक्षिप्य श्वसनेन समो बली।।5.54.8।। ततोऽन्यत्पुप्लुवे वेश्म महापार्श्वस्य वीर्यवान्। मुमोच हनुमानग्निं कालानलशिखोपमम्।।5.54.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
घूमते-घूमते वायु के समान बलवान् और महान् वेगशाली हनुमान् उछलकर प्रहस्त के महल पर जा पहुँचे और उसमें आग लगाकर दूसरे घर पर कूद पड़े। वह महापार्श्व का निवासस्थान था पराक्रमी हनुमान् ने उसमें भी कालाग्नि की लपटों के समान प्रज्वलित होने वाली आग फैला दी
Show English Translation
Powerful and brave Hanuman who was equal to the Windgod in speed jumped down on the house of Prahasta and set fire to it. From there he jumped on to Mahaparsva's house and set it ablaze. Hanuman appeared like the fireflame at the time of dissolution.
ShlokaShloka 9
वज्रदंष्ट्रस्य च तदा पुप्लुवे स महाकपिः। शुकस्य च महातेजास्सारणस्य च धीमतः।।5.54.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
घूमते-घूमते वायु के समान बलवान् और महान् वेगशाली हनुमान् उछलकर प्रहस्त के महल पर जा पहुँचे और उसमें आग लगाकर दूसरे घर पर कूद पड़े। वह महापार्श्व का निवासस्थान था पराक्रमी हनुमान् ने उसमें भी कालाग्नि की लपटों के समान प्रज्वलित होने वाली आग फैला दी
Show English Translation
The great, brilliant vanara bounded on to Vajradamstra's, of Suka's and wise Sarana's.
ShlokaShloka 10
तथा चेन्द्रजितो वेश्म ददाह हरियूथपः। जम्बुमाले स्सुमालेश्च ददाह भवनं ततः।।5.54.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् वे महातेजस्वी महाकपि क्रमशः वज्रदंष्ट्र, शुक और बुद्धिमान् सारण के घरों पर कूदे और उनमें आग लगाकर आगे बढ़ गये
Show English Translation
Thus Hanuman, the chief of the vanaras set fire to Indrajit's residence and then to Jambumali's and Sumali's building.
ShlokaShloka 11
रश्मिकेतोश्च भवनं सूर्यशत्रोस्तथैव च। ह्रस्वकर्णस्य दंष्ट्रस्य रोमशस्य च रक्षसः।।5.54.12।। युद्धोन्मत्तस्य मत्तस्य ध्वजग्रीवस्य रक्षसः। विद्युज्जिह्वस्य घोरस्य तथा हस्तिमुखस्य च।।5.54.13।। करालस्य पिशाचस्य शोणिताक्षस्य चैव हि। कुम्भकर्णस्य भवनं मकराक्षस्य चैव हि।।5.54.14।। यज्ञशत्रोश्च भवनं ब्रह्मशत्रोस्तथैव च। नरान्तकस्य कुम्भस्य निकुम्भस्य दुरात्मनः।।5.54.15।। वर्जयित्वा महातेजा विभीषणगृहं प्रति। क्रममाणः क्रमेणैव ददाह हरिपुङ्गवः।।5.54.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
इसके बाद वानरयूथपति हनुमान् ने इन्द्रविजयी मेघनाद का घर जलाया। फिर जम्बुमाली और सुमाली के घरों को फूंक दिया
Show English Translation
The brilliant monkey leader bypassed Vibhishanas's house and avoiding it that way set fire to the mansions of other ogres, Rasmiketu, Suryasatru, Hrasvakarna, Vajradamshtra, Romasa, Yuddhonmatta, Matta, Dhwajagriva, Vidyujjihva, Hastimukha, Karala, Pisacha, Sonitaksha, Kumbhakarna, Makaraksha, Yagnasatru, Brahmasatru, Naranthaka, Kumbha, and wicked Nikumbha.
ShlokaShloka 12
तेषु तेषु महार्हेषु भवनेषु महायशाः। गृहेष्वृद्धिमतामृद्धिं ददाह स महाकपिः।।5.54.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर रश्मिकेतु, सूर्यशत्रु, ह्रस्वकर्ण, दंष्ट्र, राक्षसरोमश, रणोन्मत्त मत्त, ध्वजग्रीव, भयानक विद्युज्जिह्व, हस्तिमुख, कराल, विशाल, शोणिताक्ष, कुम्भकर्ण, मकराक्ष, नरान्तक, कुम्भ, दुरात्मा निकुम्भ, यज्ञशत्रु और ब्रह्मशत्रु आदि राक्षसों के घरों में जा-जाकर उन्होंने आग लगायी
Show English Translation
Moving among those highly luxurious mansions the glorious Vanara burnt away the wealth of all the rich demons.
ShlokaShloka 13
सर्वेषां समतिक्रम्य राक्षसेन्द्रस्य वीर्यवान्। आससादाथ लक्ष्मीवान् रावणस्य निवेशनम्।।5.54.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर रश्मिकेतु, सूर्यशत्रु, ह्रस्वकर्ण, दंष्ट्र, राक्षसरोमश, रणोन्मत्त मत्त, ध्वजग्रीव, भयानक विद्युज्जिह्व, हस्तिमुख, कराल, विशाल, शोणिताक्ष, कुम्भकर्ण, मकराक्ष, नरान्तक, कुम्भ, दुरात्मा निकुम्भ, यज्ञशत्रु और ब्रह्मशत्रु आदि राक्षसों के घरों में जा-जाकर उन्होंने आग लगायी
Show English Translation
Heroic and illustrious Hanuman, having crossed all the residences of the ogres finally reached the palace of Ravana, the king.
ShlokaShloka 14
ततस्तस्मिन्गृहे मुख्ये ���ानारत्नविभूषिते। मेरुमन्दरसङ्काशे सर्वमङ्गळशोभिते।।5.54.19।। प्रद���प्तमग्निमुत्सृज्य लाङ्गूलाग्रे प्रतिष्ठितम्। ननाद हनुमान्वीरो युगान्तजलदो यथा।।5.54.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर रश्मिकेतु, सूर्यशत्रु, ह्रस्वकर्ण, दंष्ट्र, राक्षसरोमश, रणोन्मत्त मत्त, ध्वजग्रीव, भयानक विद्युज्जिह्व, हस्तिमुख, कराल, विशाल, शोणिताक्ष, कुम्भकर्ण, मकराक्ष, नरान्तक, कुम्भ, दुरात्मा निकुम्भ, यज्ञशत्रु और ब्रह्मशत्रु आदि राक्षसों के घरों में जा-जाकर उन्होंने आग लगायी
Show English Translation
Then Hanuman, the hero with the burning tail set fire to the chief palace of Ravana that resembled mountains Meru and Mandara, decorated with different kinds of gems and exquisite with several auspicious articles. While the flames were rising up, he roared like the thundering cloud at the time of dissolution.
ShlokaShloka 15
श्वसनेन च संयोगादतिवेगो महाबलः। कालाग्निरिव जज्वाल प्रावर्धत हुताशनः।।5.54.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर रश्मिकेतु, सूर्यशत्रु, ह्रस्वकर्ण, दंष्ट्र, राक्षसरोमश, रणोन्मत्त मत्त, ध्वजग्रीव, भयानक विद्युज्जिह्व, हस्तिमुख, कराल, विशाल, शोणिताक्ष, कुम्भकर्ण, मकराक्ष, नरान्तक, कुम्भ, दुरात्मा निकुम्भ, यज्ञशत्रु और ब्रह्मशत्रु आदि राक्षसों के घरों में जा-जाकर उन्होंने आग लगायी
Show English Translation
The windgod's association made the fire spread at great speed. It appeared like fire at the time of dissolution.
ShlokaShloka 16
प्रदीप्तमग्निं पवनस्तेषु वेश्मस्वचारयत्। अभूच्छ्वसनसंयोगादतिवेगो हुताशनः।।5.54.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय महातेजस्वी कपिश्रेष्ठ हनुमान् ने केवल विभीषण का घर छोड़कर अन्य सब घरों में क्रमशः पहुँचकर उन सबमें आग लगा दी
Show English Translation
Combined with the wind the fire began to spread, burning the houses with great speed.
ShlokaShloka 17
तानि काञ्चनजालानि मुक्तामणिमयानि च। भवनान्यवशीर्यन्त रत्नवन्ति महान्ति च।।5.54.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
सबके घरों को लाँघते हुए शोभाशाली पराक्रमी हनुमान् राक्षसराज रावण के महल पर जा पहुँचे
Show English Translation
The palatial structures with windows of golden meshwork, embedded with pearls and gems and other precious stones tumbled.
ShlokaShloka 18
संजज्ञे तुमुलश्शब्दो राक्षसानां प्रधावताम्। स्वगृहस्य परित्राणे भग्नोत्साहोर्जितश्रियाम्।।5.54.24।। नूनमेषोऽग्निरायातः कपिरूपेण हा इति।
हिन्दी अर्थ देखें
सबके घरों को लाँघते हुए शोभाशाली पराक्रमी हनुमान् राक्षसराज रावण के महल पर जा पहुँचे
Show English Translation
Unable to protect their rich houses, and thoroughly disappointed the demons said, 'Alas, the Firegod came in the form of a vanara' A tumultuous sound arose.
ShlokaShloka 19
क्रन्दन्त्यस्सहसा पेतुः स्तनन्धयधराः स्त्रियः।।5.54.25।। काश्चिदग्निपरीतेभ्यो हर्मेभ्यो मुक्तमूर्धजाः। पतन्त्यो रेजिरेऽभ्रेभ्यस्सौदामन्य इवाम्बरात्।।5.54.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
वही लङ्का के सब महलों में श्रेष्ठ, भाँति-भाँति के रत्नों से विभूषित, मेरुपर्वत के समान ऊँचा और नाना प्रकार के माङ्गलिक उत्सवों से सुशोभित था। अपनी पूँछ के अग्रभाग में प्रतिष्ठित हुई प्रज्वलित अग्नि को उस महल में छोड़कर वीरवर हनुमान् प्रलयकाल के मेघ की भाँति भयानक गर्जना करने लगे
Show English Translation
A few shedemons at once jumped out of their burning mansions surrounded by fire. They held their breastfeeding babies in their arms, their hair let loose shouting as they jumped. As they were alighting, they glowed like lightnings dropping from the clouds.
ShlokaShloka 20
वज्रविद्रुमवैदूर्यमुक्तारजतसंहितान्। विचित्रान्भवनाद्धातून् स्यन्दमानान्ददर्श सः।।5.54.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
वही लङ्का के सब महलों में श्रेष्ठ, भाँति-भाँति के रत्नों से विभूषित, मेरुपर्वत के समान ऊँचा और नाना प्रकार के माङ्गलिक उत्सवों से सुशोभित था। अपनी पूँछ के अग्रभाग में प्रतिष्ठित हुई प्रज्वलित अग्नि को उस महल में छोड़कर वीरवर हनुमान् प्रलयकाल के मेघ की भाँति भयानक गर्जना करने लगे
Show English Translation
Hanuman saw many colourful molten minerals mixed with diamonds, corals vaiduryas, pearls and silver flowing (dropping) from every mansion.
ShlokaShloka 21
नाग्निस्तृप्यति काष्ठानां तृणानां च यथा तथा। हनूमान् राक्षसेन्दाणां विशस्तानां न तृप्यति।।5.54.28।।
Show English Translation
Just as fire is not satisfied with dry sticks and grass Hanuman was not satisfied with the dead demons.
ShlokaShloka 22
क्वचित्किंशुकसङ्काशाः क्वचिच्छाल्मलिसन्निभाः।।5.54.29।। क्वचित्कुङ्कुमसङ्काशाश्शिखा वह्नेश्चकाशिरे।
हिन्दी अर्थ देखें
वायु उस प्रज्वलित अग्नि को सभी घरों में फैलाने लगी। सोने की खिड़कियों से सुशोभित, मोती और मणियों द्वारा निर्मित तथा रत्नों से विभूषित ऊँचे-ऊँचे प्रासाद एवं सतमह ले भवन फट-फटकर पृथ्वी पर गिरने लगे
Show English Translation
The flames of fire were shining like kimsuka flowers here, like salmali wood there, and like saffron flowers elsewhere.
ShlokaShloka 23
हनूमता वेगवता वानरेण महात्मना। लङ्कापुरं प्रदग्धं तद्रुद्रेण त्रिपुरं यथा।।5.54.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
वायु उस प्रज्वलित अग्नि को सभी घरों में फैलाने लगी। सोने की खिड़कियों से सुशोभित, मोती और मणियों द्वारा निर्मित तथा रत्नों से विभूषित ऊँचे-ऊँचे प्रासाद एवं सतमह ले भवन फट-फटकर पृथ्वी पर गिरने लगे
Show English Translation
Hanuman, endowed with great speed, burnt Lanka just as Tripurari, or Rudra burnt theTripuras (three cities of gold, silver and iron).
ShlokaShloka 24
ततस्तु लङ्कापुरपर्वताग्रे समुत्थितो भीमपराक्रमोऽग्निः। प्रसार्य चूडावलयं प्रदीप्तो हनूमता वेगवता विसृष्टः।।5.54.31।।
Show English Translation
The fierce fire lit by Hanuman, the hero endowed with great speed, spread around in circles and shot up flying high to the top of the Trikuta mountain on which Lanka was located.
ShlokaShloka 25
युगान्तकालानलतुल्यवेग स्समारुतोऽग्निर्ववृधे दिविस्पृक्। विधूमरश्मिर्भवनेषु सक्तो रक्षश्शरीराज्यसमर्पतार्चिः।।5.54.32।।
Show English Translation
Fanned by the wind, inflamed by the fat from the corpses of the demons, the fire spread in the mansions burning without smoke. It spread with great speed like the fire at the end of the universe.
ShlokaShloka 26
आदित्यकोटीसदृशस्सुतेजा लङ्कां समस्तां परिवार्य तिष्ठन्। शब्दैरनेकैरशनिप्ररूढैर्भिन्दन्निवाण्डं प्रबभौ महाग्निः।।5.54.33।।
Show English Translation
The highly radiant fire stood like a crore of Suns surrounding the entire Lanka. It was glowing, cracking like Indra's thunderbolt as though the whole universe was collapsing.
ShlokaShloka 27
तत्राम्बरादग्निरतिप्रवृद्धो रूक्षप्रभः किंशुकपुष्पचूडः। निर्वाणधूमाकुलराजयश्च नीलोत्पलाभाः प्रचकाशिरेऽभ्राः।।5.54.34।।
Show English Translation
The dazzling flames of fire red like kimsuka flowers shot up violently into the sky. The clouds engulfed by the smoke rising from the subsiding fire was shining like the lustre of blue lotuses .
ShlokaShloka 28
वज्री महेन्द्रस्त्रिदशेश्वरो वा साक्षाद्यमो वा वरुणोऽनिलो वा। रुद्रोऽग्निरर्को धनदश्च सोमो न वानरोऽयं स्वयमेव कालः।।5.54.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे आग सूखे काठ और तिनकों को जलाने से कभी तृप्त नहीं होती, उसी प्रकार हनुमान् बड़े-बड़े राक्षसों के वध करने से तनिक भी तृप्त नहीं होते थे और हनुमान जी के मारे हुए राक्षसों को अपनी गोद में धारण करने से इस वसुन्धरा का भी जी नहीं भरता था
Show English Translation
'Is this the wielder of thunderbolt Indra, who is the king of gods? Is it Yama himself? Is It the Windgod, or Firegod, or Varuna or Rudra? Is it Kubera or Sun or Moon or is it the god of death himself? He cannot be a mere monkey, indeed.
ShlokaShloka 29
किं ब्रह्मणस्सर्वपितामहस्य सर्वस्य धातुश्चतुराननस्य। इहाऽऽगतो वानररूपधारी रक्षोपसंहारकरः प्रकोपः।।5.54.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे आग सूखे काठ और तिनकों को जलाने से कभी तृप्त नहीं होती, उसी प्रकार हनुमान् बड़े-बड़े राक्षसों के वध करने से तनिक भी तृप्त नहीं होते थे और हनुमान जी के मारे हुए राक्षसों को अपनी गोद में धारण करने से इस वसुन्धरा का भी जी नहीं भरता था
Show English Translation
'Or is it Grandfather Brahma, the supreme fourfaced god enraged and arrived in the form of vanara to kill the clan of demons?
ShlokaShloka 30
किं वैष्णवं वा कपिरूपमेत्य रक्षोविनाशाय परं सुतेजः। अनन्तमव्यक्तमचिन्त्यमेकं स्वमायया साम्प्रतमागतं वा।।5.54.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे भगवान् रुद्र ने पूर्वकाल में त्रिपुर को दग्ध किया था, उसी प्रकार वेगशाली वानरवीर महात्मा हनुमान् जी ने लङ्कापुरी को जला दिया
Show English Translation
'Can he be the vast boundless energy, the unthinkable and infinite lord Visnu assuming the monkeyform? Is he the peerless, unmanifest form beyond all imagination who has arrived here by virtue of his Maya (illusory power) in order to destroy the demons'?
ShlokaShloka 31
इत्येवमूचुर्बहवो विशिष्टा रक्षोगणास्तत्र समेत्य सर्वे। सप्राणिसङ्घां सगृहां सवृक्षां दग्धां पुरीं तां सहसा समीक्ष्य।।5.54.38।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् लङ्कापुरी के पर्वत-शिखरपर आग लगी, वहाँ अग्निदेव का बड़ा भयानक पराक्रम प्रकट हुआ। वेगशाली हनुमान जी की लगायी हुई वह आग चारों ओर अपने ज्वाला-मण्डल को फैलाकर बड़े जोरसे प्रज्वलित हो उठी
Show English Translation
All eminent demons having collected together, quickly surveyed the situation.Seeing the burnt city, with all its living creatures, houses and trees consigned to the flames, they spoke to one another.
ShlokaShloka 32
ततस्तु लङ्का सहसा प्रदग्धा सराक्षसा साश्वरथा सनागा। सपक्षिसङ्घा समृगा सवृक्षा रुरोद दीना तुमुलं सशब्दम्।।5.54.39।।
हिन्दी अर्थ देखें
हवा का सहारा पाकर वह आग इतनी बढ़ गयी कि उसका रूप प्रलयकालीन अग्नि के समान दिखायी देने लगा। उसकी ऊँची लपटें मानो स्वर्गलोक का स्पर्श कर रही थीं। लङ्का के भवनों में लगी हुई उस आग की ज्वाला में धूम का नाम भी नहीं था। राक्षसों के शरीररूपी घी की आहुति पाकर उसकी ज्वालाएँ उत्तरोत्तर बढ़ रही थीं
Show English Translation
Lanka with its chariots horses, elephants, flocks of birds, animals and trees burnt all of a sudden, the ogres cried loudly and piteously.
ShlokaShloka 33
हा तात हा पुत्रक कान्त मित्र हा जीवितं भोगयुतं सुपुण्यम्। रक्षोभिरेवं बहुधा ब्रुवद्भि श्शब्दः कृतो घोरतरस्सुभीमः।।5.54.40।।
Show English Translation
"O father dear O son O my dear O friend alas, the life which is enjoyable, sacred and prosperous is destroyed in this way". Saying this, the demons cried out dreadfully and loudly.
ShlokaShloka 34
हुताशनज्वालसमावृता सा हतप्रवीरा परिवृत्तयोधा हनूमतः क्रोधबलाभिभूता बभूव शापोपहतेव लङ्का।।5.54.41।।
Show English Translation
With the Fire god spreading flames all over, heroes dead, retreating troops shattered by Hanuman's anger, Lanka appeared as though it was cursed.
ShlokaShloka 35
स सम्भ्रमत्रस्तविषण्णराक्षसां समुज्ज्वलज्ज्वालहुताशनाङ्किताम्। ददर्श लङ्कां हनुमान्महामनाः स्वयम्भूकोपोपहतामिवावनिम्।।5.54.42।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्राणियों के समुदाय, गृह और वृक्षोंसहित समस्त लङ्कापुरी को सहसा दग्ध हुई देख बड़े-बड़े राक्षसझुंड-के-झुंड एकत्र हो गये और वे सब-के-सब परस्पर इस प्रकार कहने लगे—’यह देवताओं का राजा वज्रधारी इन्द्र अथवा साक्षात् यमराज तो नहीं है? वरुण, वायु, रुद्र, अग्नि, सूर्य, कुबेर या चन्द्रमा में से तो कोई नहीं है? यह वानर नहीं साक्षात् काल ही है। क्या सम्पूर्ण जगत् के पितामह चतुर्मुख ब्रह्माजी का प्रचण्ड कोप ही वानर का रूप धारण करके राक्षसों का संहार करनेके लिये यहाँ उपस्थित हुआ है? अथवा भगवान् विष्णु का महान् तेज जो अचिन्त्य, अव्यक्त, अनन्त और अद्वितीय है, अपनी माया से वानर का शरीर ग्रहण करके राक्षसों के विनाश के लिये तो इस समय नहीं आया है ?’
Show English Translation
Highly sensitive Hanuman saw the city of Lanka filled with perplexed, scared and sorrowful demons, Lanka succumbed to the flames of firegod and looked as if it was hit by the anger of Brahma, the selfborn god.
ShlokaShloka 36
भङ्क्त्वा वनं पादपरत्नसङ्कुलं हत्वा तु रक्षांसि महान्ति संयुगे। दग्ध्वा पुरीं तां गृहरत्नमालिनीं तस्थौ हनूमान्पवनात्मजः कपिः।।5.54.43।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्राणियों के समुदाय, गृह और वृक्षोंसहित समस्त लङ्कापुरी को सहसा दग्ध हुई देख बड़े-बड़े राक्षसझुंड-के-झुंड एकत्र हो गये और वे सब-के-सब परस्पर इस प्रकार कहने लगे—’यह देवताओं का राजा वज्रधारी इन्द्र अथवा साक्षात् यमराज तो नहीं है? वरुण, वायु, रुद्र, अग्नि, सूर्य, कुबेर या चन्द्रमा में से तो कोई नहीं है? यह वानर नहीं साक्षात् काल ही है। क्या सम्पूर्ण जगत् के पितामह चतुर्मुख ब्रह्माजी का प्रचण्ड कोप ही वानर का रूप धारण करके राक्षसों का संहार करनेके लिये यहाँ उपस्थित हुआ है? अथवा भगवान् विष्णु का महान् तेज जो अचिन्त्य, अव्यक्त, अनन्त और अद्वितीय है, अपनी माया से वानर का शरीर ग्रहण करके राक्षसों के विनाश के लिये तो इस समय नहीं आया है ?’
Show English Translation
Hanuman, son of the Windgod stood at ease having shattered the garden that was full of excellent trees, and killed the demons and burnt down rows of beautiful houses in the city.
ShlokaShloka 37
त्रिकूटशृङ्गाग्रतले विचित्रे प्रतिष्ठितो वानरराजसिंहः। प्रदीप्तलाङ्गूलकृतार्चिमाली व्यराजताऽऽदित्य इवांशुमाली।।5.54.44।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्राणियों के समुदाय, गृह और वृक्षोंसहित समस्त लङ्कापुरी को सहसा दग्ध हुई देख बड़े-बड़े राक्षसझुंड-के-झुंड एकत्र हो गये और वे सब-के-सब परस्पर इस प्रकार कहने लगे—’यह देवताओं का राजा वज्रधारी इन्द्र अथवा साक्षात् यमराज तो नहीं है? वरुण, वायु, रुद्र, अग्नि, सूर्य, कुबेर या चन्द्रमा में से तो कोई नहीं है? यह वानर नहीं साक्षात् काल ही है। क्या सम्पूर्ण जगत् के पितामह चतुर्मुख ब्रह्माजी का प्रचण्ड कोप ही वानर का रूप धारण करके राक्षसों का संहार करनेके लिये यहाँ उपस्थित हुआ है? अथवा भगवान् विष्णु का महान् तेज जो अचिन्त्य, अव्यक्त, अनन्त और अद्वितीय है, अपनी माया से वानर का शरीर ग्रहण करके राक्षसों के विनाश के लिये तो इस समय नहीं आया है ?’
Show English Translation
Standing on the peak of Trikuta mountain with his tail burning like the aura of the Sun, the lion among vanaras looked resplendent like the Sun surrounded by his rays.
ShlokaShloka 38
स राक्षसांस्तान्सुबहूंश्च हत्वा वनं च भङ्क्त्वा बहुपादपं तत��। विसृज्य रक्षोभवनेषु चाग्निं जगाम रामं मनसा महात्मा।।5.54.45।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्राणियों के समुदाय, गृह और वृक्षोंसहित समस्त लङ्कापुरी को सहसा दग्ध हुई देख बड़े-बड़े राक्षसझुंड-के-झुंड एकत्र हो गये और वे सब-के-सब परस्पर इस प्रकार कहने लगे—’यह देवताओं का राजा वज्रधारी इन्द्र अथवा साक्षात् यमराज तो नहीं है? वरुण, वायु, रुद्र, अग्नि, सूर्य, कुबेर या चन्द्रमा में से तो कोई नहीं है? यह वानर नहीं साक्षात् काल ही है। क्या सम्पूर्ण जगत् के पितामह चतुर्मुख ब्रह्माजी का प्रचण्ड कोप ही वानर का रूप धारण करके राक्षसों का संहार करनेके लिये यहाँ उपस्थित हुआ है? अथवा भगवान् विष्णु का महान् तेज जो अचिन्त्य, अव्यक्त, अनन्त और अद्वितीय है, अपनी माया से वानर का शरीर ग्रहण करके राक्षसों के विनाश के लिये तो इस समय नहीं आया है ?’
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Great Hanuman, sought Rama's presence in his mind after killing many demons, breaking down many trees of the garden, and setting fire to the mansions of demons.
ShlokaShloka 39
ततस्तु तं वानरवीरमुख्यं महाबलं मारुततुल्यवेगम्। महामतिं वायुसुतं वरिष्ठं प्रतुष्टुवुर्देवगणाश्च सर्वे।।5.54.46।।
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इस प्रकार घोड़े, हाथी, रथ, पशु, पक्षी, वृक्ष तथा कितने ही राक्षसोंसहित लङ्कापुरी सहसा दग्ध हो गयी। वहाँ के निवासी दीनभाव से तुमुल नाद करते हुए फूट-फूटकर रोने लगे
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All the gods praised the vanara chief, son of the Windgod, who was powerful, wise and efficient and had the speed of the Wind.
ShlokaShloka 40
भङ्क्त्वा वनं महातेजा हत्वा रक्षांसि संयुगे। दग्ध्वा लङ्कापुरीं रम्यां रराज स महाकपिः।।5.54.47।।
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वे बोले—’हाय रे बप्पा! हाय बेटा! हा स्वामिन् ! हा मित्र! हा प्राणनाथ! हमारे सब पुण्य नष्ट हो गये।’ इस तरह भाँति-भाँति से विलाप करते हुए राक्षसों ने बड़ा भयंकर एवं घोर आर्तनाद किया
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Hanuman destroyed the garden, killed the demons, burnt the city of Lanka and was shining with delight
ShlokaShloka 41
तत्र देवास्सगन्धर्वास्सिद्धाश्च परमर्षयः। दृष्ट्वा लङ्कां प्रदग्धां तां विस्मयं परमं गताः।।5.54.48।।
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हनुमान जी के क्रोध-बल से अभिभूत हुई लङ्कापुरी आग की ज्वाला से घिर गयी थी। उसके प्रमुख-प्रमुख वीर मार डाले गये थे। समस्त योद्धा तितर-बितर और उद्विग्न हो गये थे। इस प्रकार वह पुरी शाप से आक्रान्त हुई-सी जान पड़ती थी
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The gandharvas, gods, siddhas and great sages were amazed at seeing the burning city of Lanka৷৷
ShlokaShloka 42
तं दृष्ट्वा वानरश्रेष्ठं हनुमन्तं महाकपिम्। कालाग्निरिति सञ्चिन्त्य सर्वभूतानि तत्रसुः।।5.54.49।।
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महामनस्वी हनुमान् ने लङ्कापुरी को स्वयम्भू ब्रह्माजी के रोष से नष्ट हुई पृथ्वी के समान देखा। वहाँ के समस्त राक्षस बड़ी घबराहट में पड़कर त्रस्त और विषादग्रस्त हो गये थे। अत्यन्त प्रज्वलित ज्वाला-मालाओं से अलंकृत अग्निदेव ने उसपर अपनी छाप लगा दी थी
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All beings were afraid of Hanuman thinking that he was the fatal fire, consuming worlds at the hour of dissolution .
ShlokaShloka 43
देवाश्च सर्वे मुनिपुङ्गवाश्च गन्धर्वविद्याधरनागयक्षाः। भूतानि सर्वाणि महान्ति तत्र जग्मुः परां प्रीतिमतुल्यरूपाम्।।5.54.50।।
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पवनकुमार वानरवीर हनुमान जी उत्तमोत्तम वृक्षों से भरे हुए वन को उजाड़कर, युद्ध में बड़े-बड़े राक्षसों को मारकर तथा सुन्दर महलों से सुशोभित लङ्कापुरी को जलाकर शान्त हो गये
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All gods, great sages, gandharvas, vidyadharas, nagas and yakshas and all great beings experienced supreme joy. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे चतुःपञ्चाशस्सर्गः।। Thus ends the fiftyfourth sarga of Sundarakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.