Sundara Kanda

Sarga 59: Hanuman gives an account of the plight of Sita in Lanka -- incites the vanaras to be ready for the next course of action

सुन्दरकाण्डम् · सर्ग 59

29 shlokas

ShlokaShloka 1
एतदाख्याय तत्सर्वं हनुमान्मारुतात्मजः। भूयस्समुपचक्राम वचनं वक्तुमुत्तरम्।।5.59.1।।
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यह सब वृत्तान्त बताकर पवनकुमार हनुमान् जी ने पुनः उत्तम बातें कहनी आरम्भ की—
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Hanuman, son of the Windgod having narrated in detail all that had happened again started disclosing further details৷৷
ShlokaShloka 2
सफल�� राघवोद्योग स्सुग्रीवस्य च सम्भ्रमः। शीलमासाद्य सीताया मम च प्रवणं मनः।।5.59.2।।
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‘वानरशिरोमणियो! जिस नारी का शील-स्वभाव आर्या सीता के समान होगा, वह अपनी तपस्यासेसम्पूर्ण लोकों को धारण कर सकती है अथवा कुपित होने पर तीनों लोकों को जला सकती है
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"It is due to Rama's exertions, Sugriva's endeavour and Sita's conduct that I have been successful. My devotion to Sita has further deepened.
ShlokaShloka 3
तपसा निर्दहेल्लोकान्क्रुद्धो वा निर्दहेदपि। सर्वधातिप्रवृद्धोऽसौ रावणो राक्षसाधिपः ॥ 5.59.3 ॥  
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानरशिरोमणियो! जिस नारी का शील-स्वभाव आर्या सीता के समान होगा, वह अपनी तपस्यासेसम्पूर्ण लोकों को धारण कर सकती है अथवा कुपित होने पर तीनों लोकों को जला सकती है
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"The demon king is rich in asceticism. He can burn the whole world with the power of his penance. In spite of Sita's anger he was not burnt(Hanuman gives the reason for Ravana's survival).
ShlokaShloka 4
तस्य तां स्पृशतो गात्रं तपसा न विनाशितम्। न तदग्निशिखा कुर्यात्संस्पृष्टा पाणिना सती।।5.59.4।। जनकस्यात्मजा कुर्याद्यत्क्रोधकलुषीकृता।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राक्षसराज रावण सर्वथा महान् तपोबल से सम्पन्न जान पड़ता है। जिसका अङ्ग सीता का स्पर्श करते समय उनकी तपस्या से नष्ट नहीं हो गया
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"Sita can burn Ravana with the mere touch of her body but because of the power of his penance, he was not burnt even though he touched her hand. If enraged, Janaki can burn the whole world (by virtue of her chastity) in a way that even the flame of fire can not do. (But she desired that her husband should kill him.)
ShlokaShloka 5
जाम्बवत्प्रमुखान् सर्वाननुज्ञाप्य महाहरीन्।।5.59.5।। अस्मिन्नेवं गते कार्ये भवतां च निवेदिते। न्याय्यं स्म सह वैदेह्या द्रष्टुं तौ पार्थिवात्मजौ।।5.59.6।।
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ShlokaShloka 6
अहमेकोऽपि पर्याप्तस्सराक्षसगणां पुरीम्। तां लङ्कां तरसा हन्तुं रावणं च महाबलम्।।5.59.7।।
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ShlokaShloka 7
किं पुन स्सहितो वीरैर्बलवद्भिः कृतात्मभिः। कृतास्त्रै: प्लवगैश्शूरैर्भवद्भिविजयैषिभिः।।5.59.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं अकेला भी राक्षसगणोंसहित समस्त लङ्कापुरी का वेगपूर्वक विध्वंस करने तथा महाबली रावण को मार डालने के लिये पर्याप्त हूँ। फिर यदि सम्पूर्ण अस्त्रों को जानने वाले आप-जैसे वीर, बलवान्, शुद्धात्मा, शक्तिशाली और विजयाभिलाषी वानरों की सहायता मिल जाय, तब तो कहना ही क्या है
Show English Translation
"When strong, wise and accomplished persons are there with me desiring victory why speak again?
ShlokaShloka 8
अहं तु रावणं युद्धे ससैन्यं सपुरस्सरम्। सहपुत्त्रं वधिष्यामि सहोदरयुतं युधि।।5.59.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं अकेला भी राक्षसगणोंसहित समस्त लङ्कापुरी का वेगपूर्वक विध्वंस करने तथा महाबली रावण को मार डालने के लिये पर्याप्त हूँ। फिर यदि सम्पूर्ण अस्त्रों को जानने वाले आप-जैसे वीर, बलवान्, शुद्धात्मा, शक्तिशाली और विजयाभिलाषी वानरों की सहायता मिल जाय, तब तो कहना ही क्या है
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"I can also kill all the army, his followers, sons and brothers of Ravana in war.
ShlokaShloka 9
ब्राह्ममैन्द्रं च रौद्रं च वायव्यं वारणं तथा। यदि शक्रजितोऽस्त्राणि दुर्निरीक्षाणि संयुगे।।5.59.10।। तान्यहं वधिष्यामि हनिष्यामि च राक्षसान्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यद्यपि इन्द्रजित् के ब्राह्म अस्त्र, रौद्र, वायव्य तथा वारुण आदि अस्त्र युद्ध में दुर्लक्ष्य होते हैं किसी की दृष्टि में नहीं आते हैं, तथापि मैं ब्रह्माजी के वरदान से उनका निवारण कर दूंगा और राक्षसों का संहार कर डालूँगा
Show English Translation
"Even if the missiles used by Indrajit are Brahmastra, Indrastra, Rudrastra, Vayavastra, Varunastra which are difficult to see. I will destroy them in war and kill them.
ShlokaShloka 10
भवतामभ्यनुज्ञातो विक्रमो मे रुणद्धि तम्।।5.59.11।। मयातुला विसृष्टा हि शैलवृष्टिर्निरन्तरा। देवानपि रणे हन्यात्किं पुनस्तान्निशाचरान्।।5.59.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यद्यपि इन्द्रजित् के ब्राह्म अस्त्र, रौद्र, वायव्य तथा वारुण आदि अस्त्र युद्ध में दुर्लक्ष्य होते हैं किसी की दृष्टि में नहीं आते हैं, तथापि मैं ब्रह्माजी के वरदान से उनका निवारण कर दूंगा और राक्षसों का संहार कर डालूँगा
Show English Translation
Now if I am permitted, I shall repulse them and destroy them with my valour. A ceaseless shower of rocks sent forth by me in war is enough to destroy even gods what to say about the nightrangers?
ShlokaShloka 11
सागरोऽप्यतियाद्वेलां मन्दरः प्रचलेदपि। न जाम्बवन्तं समरे कम्पयेदरिवाहिनी।।5.59.13।।
Show English Translation
"The ocean may exceed its limits, the mountain Mandara may be shaken from its position but no hostile army can move Jambavan in war.
ShlokaShloka 12
सर्वराक्षससङ्घानां राक्षसा ये च पूर्वकाः। अलमेको विनाशाय वीरो वालिसुतः कपिः।।5.59.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आपलोगों की आज्ञा न होने के कारण ही मेरा पुरुषार्थ मुझे रोक रहा है। समुद्र अपनी मर्यादा को लाँघ जाय और मन्दराचल अपने स्थान से हट जाय, परंतु समराङ्गण में शत्रुओं की सेना जाम्बवान् को विचलित कर दे, यह कभी सम्भव नहीं है
Show English Translation
ShlokaShloka 13
पनसस्योरुवेगेन नीलस्य च महात्मनः। मन्दरोऽप्यवशीर्येत किंपुनर्युधि राक्षसाः।।5.59.15।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आपलोगों की आज्ञा न होने के कारण ही मेरा पुरुषार्थ मुझे रोक रहा है। समुद्र अपनी मर्यादा को लाँघ जाय और मन्दराचल अपने स्थान से हट जाय, परंतु समराङ्गण में शत्रुओं की सेना जाम्बवान् को विचलित कर दे, यह कभी सम्भव नहीं है
Show English Translation
"Even the mountain Mandara would be shattered by great Panasa or Nila by the speed of their thighs. What to say in a battle against ogres?
ShlokaShloka 14
सदेवासुरयक्षेषु गन्धर्वोरगपक्षिषु। मैन्दस्य प्रतियोद्धारं शंसत द्विविदस्य वा।।5.59.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सम्पूर्ण राक्षसों और उनके पूर्वजों को भी यमलोक पहुँचाने के लिये वाली के वीर पुत्र कपिश्रेष्ठ अङ्गद अकेले ही काफी हैं
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"Who among gods, yakshas, gandharvas, nagas and birds can contend Mainda or Dvivida in battle?Tell me.
ShlokaShloka 15
अश्विपुत्रौ महाभागावेतौ प्लवगसत्तमौ। एतयोः प्रतियोद्दारं न पश्यामि रणाजिरे।।5.59.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानरवीर महात्मा नील के महान् वेग से मन्दराचल भी विदीर्ण हो सकता है; फिर युद्ध में राक्षसों का नाश करना उनके लिये कौन बड़ी बात है ?
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"The (two) sons of Aswini are outstanding and foremost fighters and proud of waging war. Who can oppose them? I do not see any one.
ShlokaShloka 16
पितामहवरोत्सेकात्परमं दर्पमास्थितौ। अमृतप्राशिनावेतौ सर्ववानरसत्तमौ।।5.59.18।।
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‘तुम सब-के-सब बताओ तो सही-देवता, असुर, यक्ष, गन्धर्व, नाग और पक्षियों में भी कौन ऐसा वीर है, जो मैन्द अथवा द्विविद के साथ लोहा ले सके?
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"By virtue of the boons received from Brahma, they are very proud. They have also consumed nectar of immortality and are foremost among vanaras.
ShlokaShloka 17
अश्विनोर्माननार्थं हि सर्वलोकपितामहः। सर्वावध्यत्वमतुलमनयोर्दत्तवान्पुरा।।5.59.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये दोनों वानरशिरोमणि महान् वेगशाली तथा अश्विनीकुमारों के पुत्र हैं। समराङ्गण में इन दोनों का सामना करने वाला मुझे कोई नहीं दिखायी देता
Show English Translation
"Earlier Brahma, the grandsire of all worlds has given the Aswini sons immeasurable invulnerability to honour them.
ShlokaShloka 18
वरोत्सेकेन मत्तौ च प्रमथ्य महतीं चमूम्। सुराणाममृतं वीरौ पीतवन्तौ प्लवङ्गमौ।।5.59.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैंने अकेले ही लङ्कावासियों को मार गिराया, नगरमें आग लगा दी और सारी पुरी को जलाकर भस्म कर दिया। इतना ही नहीं, वहाँ की सब सड़कों पर मैंने अपने नाम का डंका पीट दिया
Show English Translation
"The heroic monkeys, proud of their boons became intoxicated it and slaughtered vast army and drank the nectar of immortality.
ShlokaShloka 19
एतावेव हि सङ्कृद्धौ सवाजिरथकुञ्जराम्। लङ्कां नाशयितुं शक्तौ सर्वे तिष्ठन्तु वानराः।।5.59.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘दुरात्मा रावण की अशोकवाटिका के मध्यभाग में एक अशोक-वृक्ष के नीचे साध्वी सीता बड़ी दयनीय अवस्था में रहती हैं
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"If these two become angry they have the power to destroy Lanka, the cavalry, chariots and also the elephants even if the vanaras stay away.
ShlokaShloka 20
मयैव निहता लङ्का दग्धा भस्मीकृता पुनः। राजमार्गेषु सर्वत्र नाम विश्रावितं मया।।5.59.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘दुरात्मा रावण की अशोकवाटिका के मध्यभाग में एक अशोक-वृक्ष के नीचे साध्वी सीता बड़ी दयनीय अवस्था में रहती हैं
Show English Translation
"I have burnt Lanka and have made my name popular even on the highways.
ShlokaShloka 21
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः। राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः।।5.59.23।। अहं कोसलराजस्य दासः पवनसम्भवः। हनुमानिति सर्वत्र नाम विश्रावितं मया।।5.59.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘दुरात्मा रावण की अशोकवाटिका के मध्यभाग में एक अशोक-वृक्ष के नीचे साध्वी सीता बड़ी दयनीय अवस्था में रहती हैं
Show English Translation
"Mighty Rama and Lakshmana and King Sugriva protected by Rama are renowned for their valour. I am Hanuman, son of the Windgod, a servant of Rama. This I announced.
ShlokaShloka 22
अशोकवनिकामध्ये रावणस्य दुरात्मनः। अध स्ताच्छिंशुपावृक्षे साध्वी करुणमास्थिता।।5.59.25।। राक्षसीभिः परिवृता शोकसंतापकर्शिता। मेघलेखापरिवृता चन्द्रलेखेव निष्प्रभा।।5.59.26।।। अचिन्तयन्ती वैदेही रावणं बलदर्पितम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राक्षसियों से घिरी हुई होने के कारण वे शोकसंताप से दुर्बल होती जा रही हैं। बादलों की पंक्ति से घिरी हुई चन्द्रलेखा की भाँति श्रीहीन हो गयी हैं
Show English Translation
"In the wicked, Ravana's Ashoka garden under the Simsupa tree the noble lady Sita surrounded by ogresses, is sitting, tormented by tears. Her brightness is like the Moon's, veiled by flakes of clouds. She does not care for Ravana's glory. She is brooding over Rama only.
ShlokaShloka 23
पतिव्रता च सुश्रोणी अवष्टब्धा च जानकी।।5.59.27।। अनुरक्ता हि वैदेही रामं सर्वात्मना शुभा। अनन्यचित्ता रामे च पौलोमीव पुरन्दरे।।5.59.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुन्दर कटिप्रदेशवाली विदेहनन्दिनी जानकी पतिव्रता हैं। वे बल के घमंड में भरे रहने वाले रावण को कुछ भी नहीं समझती हैं तो भी उसी की कैद में पड़ी हैं
Show English Translation
"Chaste Sita of beautiful hips, an auspicious lady though bound is wholly devoted to Rama alone like Sachi, the wife of Indra who was bound by Nahusha.
ShlokaShloka 24
तदेकवासस्संवीता रजोध्वस्ता तथैव च। शोकसन्तापदीनाङ्गी सीता भर्तृहिते रता।।5.59.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कल्याणी सीता श्रीराम में सम्पूर्ण हृदय से अनुरक्त हैं, जैसे शची देवराज इन्द्र में अनन्य प्रेम रखती हैं, उसी प्रकार सीता का चित्त अनन्यभाव से श्रीराम के ही चिन्तन में लगा हुआ है
Show English Translation
"Wearing the same single cloth which she had worn before, filled with dust, Sita remained sorrowful and piteous wishing her husband's welfare.
ShlokaShloka 25
सा मया राक्षसीमध्ये तर्ज्यमाना मुहुर्मुहुः। राक्षसीभिर्विरूपाभिर्दृष्टा हि प्रमदावने।।5.59.30।। एकवेणीधरा दीना भर्तृचिन्तापरायणा। अधश्शय्या विवर्णाङ्गी पद्मिनीव हिमागमे।।5.59.31।। रावणाद्विनिवृत्तार्था मर्तव्यकृतनिश्चया।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे एक ही साड़ी पहने धूलि-धूसरित हो रही हैं। राक्षसियों के बीच में रहती हैं और उन्हें बारंबार उनकी डाँट-फटकार सुननी पड़ती है। इस अवस्था में कुरूप राक्षसियों से घिरी हुई सीता को मैंने प्रमदावन में देखा है। वे एक ही वेणी धारण किये दीनभाव से केवल अपने पतिदेव के चिन्तन में लगी रहती हैं
Show English Translation
"I saw Sita often threatened by uglylooking ogresses. Wearing a single braid, she looked pathetic, thinking always about her husband, lying on the bare ground. She was like a lustreless lotus in winter. Spurning the advances by Ravana, she is rather determined to commit suicide.
ShlokaShloka 26
कथञ्चिन्मृगशाबाक्षी विश्वासमुपपादिता।।5.59.32।। ततः संभाषिता चैव सर्वमर्थं च दर्शिता। रामसुग्रीवसख्यं च श्रुत्वा प्रीतिमुपागता।।5.59.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे एक ही साड़ी पहने धूलि-धूसरित हो रही हैं। राक्षसियों के बीच में रहती हैं और उन्हें बारंबार उनकी डाँट-फटकार सुननी पड़ती है। इस अवस्था में कुरूप राक्षसियों से घिरी हुई सीता को मैंने प्रमदावन में देखा है। वे एक ही वेणी धारण किये दीनभाव से केवल अपने पतिदेव के चिन्तन में लगी रहती हैं
Show English Translation
"I created a little confidence in the fawneyed lady by pacifying her and explaining her with great difficulty the alliance of Rama and Sugriva on hearing which she became happy.
ShlokaShloka 27
नियतस्समुदाचारो भक्तिर्भर्तरि चोत्तमा। यन्न हन्ति दशग्रीवं सा महात्मा कृतागसम्।।5.59.34।।  
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे नीचे भूमि पर सोती हैं। हेमन्त ऋतु में कमलिनी की भाँति उनके अङ्गों की कान्ति फीकी पड़ गयी है। रावण से उनका कोई प्रयोजन नहीं है। वे मरने का निश्चय किये बैठी हैं।
Show English Translation
"Ravana is a great soul because, even though he has done harm to her, he is not killed. This is because Sita being a chaste woman of good conduct and deep devotion towards her husband (she refrained from killing Ravana as she wanted her husband to do that.)
ShlokaShloka 28
निमित्तमात्रं रामस्तु वधे तस्य भविष्यति। सा प्रकृत्यैव तन्वङ्गी तद्वियोगाच्च कर्शिता।।5.59.35।। प्रतिपत्पाठशीलस्य विद्येव तनुमतां गता।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता की बात सुनकर उन्हें बड़ी प्रसन्नता हुई। सीताजी में सुदृढ़ सदाचार (पातिव्रत्य) विद्यमान है। अपने पति के प्रति उनके हृदय में उत्तम भक्ति है
Show English Translation
"To Rama, killing Ravana is easy (since Ravana's power of penance has already declined by his abduction of Sita). Separated from her husband she is naturally emaciated. She has become slender just like a student on the new Moon day (on the first day of study).
ShlokaShloka 29
एवमास्ते महाभागा सीता शोकपरायणा।।5.59.36।। यदत्र प्रतिकर्तव्यं तत्सर्वमुपपाद्यताम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता की बात सुनकर उन्हें बड़ी प्रसन्नता हुई। सीताजी में सुदृढ़ सदाचार (पातिव्रत्य) विद्यमान है। अपने पति के प्रति उनके हृदय में उत्तम भक्ति है
Show English Translation
"Noble Sita is absorbed in grief. Let us do all that has to be done now." इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे एकोनषष्टितमस्सर्गः।। Thus ends the fiftyninth sarga of Sundarakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.