Sundara Kanda

Sarga 55: Hanuman perceiving the damage caused by him to the City of Lanka, thinks of Sita and begins to blame himself -- on seeing good omens he presumes that Sita would have been protected by her chastity

सुन्दरकाण्डम् · सर्ग 55

34 shlokas

ShlokaShloka 1
लङ्कां समस्तां सन्दीप्य लाङ्गूलाग्निं महाबलः। निर्वापयामास तदा समुद्रे हरिसत्तमः।। सन्दीप्यमानां विध्वस्तां त्रस्तरक्षोगणां पुरीम्। आवेक्ष्य हनुमान् लङ्कां चिन्तयामास वानरः।।5.55.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरवीर हनुमान जी ने जब देखा कि सारी लङ्कापुरी जल रही है, वहाँ के निवासियों पर त्रास छा गया है और राक्षसगण अत्यन्त भयभीत हो गये हैं, तब उनके मन में सीता के दग्ध होने की आशङ्का से बड़ी चिन्ता हुई
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Powerful Hanuman, having burnt the entire city of Lanka, put out the fire on his tail in the ocean. Beholding the burning city, the destroyed gardens and the panic stricken ogres, he began to think:
ShlokaShloka 2
तस्याभूत्सुमहांस्त्रासः कुत्सा चात्मन्यजायत। लङ्कां प्रदहता कर्म किंस्वित्कृतमिदं मया।।5.55.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
साथ ही उनपर महान् त्रास छा गया और उन्हें अपने प्रति घृणा-सी होने लगी। वे मन-ही-मन कहने लगे—’हाय! मैंने लङ्का को जलाते समय यह कैसा कुत्सित कर्म कर डाला?
Show English Translation
Overtaken by great fear, Hanuman felt a sense of selfreproach seeing Lanka reduced to ashes, and said, ' Lanka is burnt. What a heinous action has been perpetrated by me'.
ShlokaShloka 3
धन्यास्ते पुरुषश्रेष्ठा ये बुद्ध्या कोपमुत्थितम्। निरुन्धन्ति महात्मानो दीप्तमग्निमिवाम्भसा।।5.55.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो महामनस्वी महात्मा पुरुष उठे हुए कोप को अपनी बुद्धि के द्वारा उसी प्रकार रोक देते हैं, जैसे साधारण लोग जल से प्रज्वलित अग्नि को शान्त कर देते हैं, वे ही इस संसार में धन्य हैं
Show English Translation
'Blessed indeed are the highsouled men, who in their wisdom restrain their own anger as one would put off burning fire with water.
ShlokaShloka 4
क्रुद्धः पापं न कुर्यात्कः क्रुद्धो हन्याद्गुरूनपि। क्रुद्धः परुषया वाचा नरस्साधूनधिक्षिपेत्।।5.55.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘क्रोध से भर जाने पर कौन पुरुष पाप नहीं करता? क्रोध के वशीभूत हुआ मनुष्य गुरुजनों की भी हत्या कर सकता है। क्रोधी मानव साधु पुरुषों पर भी कटुवचनों द्वारा आक्षेप करने लगता है
Show English Translation
'Which sinful act an angry man will not commit? He will even kill his respectable elders or insult sages with his harsh tongue.
ShlokaShloka 5
वाच्यावाच्यं प्रकुपितो न विजानाति कर्हिचित्। नाकार्यमस्ति क्रुद्धस्य नावाच्यं विद्यते क्वचित्।।5.55.5।।  
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो हृदय में उत्पन्न हुए क्रोध को क्षमा के द्वारा उसी तरह निकाल देता है, जैसे साँप अपनी पुरानी केंचुल को छोड़ देता है, वही पुरुष कहलाता है
Show English Translation
'An angry person knows not what he should utter and what he should not. No act appears wrong for an angry man. Nothing is unutterable for him at any time, anywhere.  
ShlokaShloka 6
यस्समुत्पतितं क्रोधं क्षमयैव निरस्यति। यथोरगस्त्वचं जीर्णां स वै पुरुष उच्यते।।5.55.6।।  
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो हृदय में उत्पन्न हुए क्रोध को क्षमा के द्वारा उसी तरह निकाल देता है, जैसे साँप अपनी पुरानी केंचुल को छोड़ देता है, वही पुरुष कहलाता है
Show English Translation
'A man who drives away his rising anger with tolerance just as a snake casts off its slough is alone called a truly wise man. 
ShlokaShloka 7
धिगस्तु मां सुदुर्बुद्धिं निर्लज्जं पापकृत्तमम्। अचिन्तयित्वा तां सीतामग्निदं स्वामिघातुकम्।।5.55.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरी बुद्धि बड़ी खोटी है, मैं निर्लज्ज और महान् पापाचारी हूँ। मैंने सीता की रक्षा का कोई विचार न करके लङ्का में आग लगा दी और इस तरह अपने स्वामी की ही हत्या कर डाली। मुझे धिक्कार है
Show English Translation
'Fie upon me, a wicked, shameless person and the greatest sinner for betraying the master and setting fire to the city without thinking of Sita.
ShlokaShloka 8
यदि दग्धा त्वियं लङ्का नूनमार्याऽपि जानकी। दग्धा तेन मया भर्तुर्हितं कार्यमजानता।।5.55.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि यह सारी लङ्का जल गयी तो आर्या जानकी भी निश्चय ही उसमें दग्ध हो गयी होंगी। ऐसा करके मैंने अनजान में अपने स्वामी का सारा काम ही चौपट कर डाला
Show English Translation
'If this Lanka is burnt, even noble Janaki is burnt, my master's work is spoilt by me unknowingly.
ShlokaShloka 9
यदर्थमयमारम्भस्तत्कार्यमवसादितम्। मया हि दहता लङ्कां न सीता परिरक्षिता।।5.55.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिस कार्य की सिद्धि के लिये यह सारा उद्योग किया गया था, वह कार्य ही मैंने नष्ट कर दिया; क्योंकि लङ्का जलाते समय मैंने सीता की रक्षा नहीं की
Show English Translation
'My very mission is foiled. Sita has not been protected by me for no part of Lanka has escaped unburnt.
ShlokaShloka 10
ईषत्कार्यमिदं कार्यं कृतमासीन्न संशयः। तस्य क्रोधाभिभूतेन मया मूलक्षयः कृतः।।5.55.10।।  
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसमें संदेह नहीं कि यह लङ्का-दहन एक छोटा सा कार्य शेष रह गया था, जिसे मैंने पूर्ण किया; परंतु क्रोध से पागल होने के कारण मैंने श्रीरामचन्द्रजी के कार्य की तो जड़ ही काट डाली
Show English Translation
'A small work is done, no doubt. But the very root of my achievement has been destroyed in my anger.
ShlokaShloka 11
विनष्टा जानकी नूनं न ह्यदग्धः प्रदृश्यते। लङ्कायां कश्चिदुद्धेशस्सर्वा भस्मीकृता पुरी।।5.55.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लङ्का का कोई भी भाग ऐसा नहीं दिखायी देता, जहाँ आग न लगी हो। सारी पुरी ही मैंने भस्म कर डाली है, अतः जानकी नष्ट हो गयी, यह बात स्वतः स्पष्ट हो जाती है
Show English Translation
'Surely Janaki has perished in Lanka, for not even a little place is left unburnt. The entire city is reduced to ashes.
ShlokaShloka 12
यदि तद्विहतं कार्यं मम प्रज्ञाविपर्ययात्। इहैव प्राणसंन्यासो ममापि ह्यद्य रोचते।।5.55.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि अपनी विपरीत बुद्धि के कारण मैंने सारा काम चौपट कर दिया तो यहीं आज मेरे प्राणों का भी विसर्जन हो जाना चाहिये। यही मुझे अच्छा जान पड़ता है
Show English Translation
'If my work has been destroyed by my perversity of judgement, I will give up my life now and here itself'.
ShlokaShloka 13
किमग्नौ निपताम्यद्य आहोस्विद्बडबामुखे। शरीरमाहो सत्त्वानां दद्मि सागरवासिनाम्।।5.55.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘क्या मैं अब जलती आग में कूद पड़ें या वडवानल के मुख में? अथवा समुद्र में निवास करने वाले जल-जन्तुओं को ही यहाँ अपना शरीर समर्पित कर दूँ
Show English Translation
'Shall I end my life by jumping into fire just now, or else into the mouth of submarine fire? Should I offer my body to the living creatures of the ocean as their food?
ShlokaShloka 14
कथं हि जीवता शक्यो मया द्रष्टुं हरीश्वरः। तौ वा पुरुषशार्दूलौ कार्यसर्वस्वघातिना।।5.55.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जब मैंने सारा कार्य ही नष्ट कर दिया, तब अब जीते-जी कैसे वानरराज सुग्रीव अथवा उन दोनों पुरुषसिंह श्रीराम और लक्ष्मण का दर्शन कर सकता हूँ या उन्हें अपना मुँह दिखा सकता हूँ?
Show English Translation
'Having spoilt the entire work how can I show my face to the king of monkeys? How is it possible to see both the tigers among men?
ShlokaShloka 15
मया खलु तदेवेदं रोषदोषात्प्रदर्शितम्। प्रथितं त्रिषु लोकेषु कपित्वमनवस्थितम्।।5.55.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह राजस भाव कार्य-साधन में असमर्थ और अव्यवस्थित है, इसे धिक्कार है; क्योंकि इस रजोगुणमूलक क्रोध के ही कारण समर्थ होते हुए भी मैंने सीता की रक्षा नहीं की
Show English Translation
'On account of my mistake of yielding to anger, I have exhibited the unstable monkeynature and made it well established in the three worlds.
ShlokaShloka 16
धिगस्तु राजसं भावमनीशमनवस्थितम्। ईश्वरेणापि यद्रागान्मया सीता न रक्षिता।।5.55.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह राजस भाव कार्य-साधन में असमर्थ और अव्यवस्थित है, इसे धिक्कार है; क्योंकि इस रजोगुणमूलक क्रोध के ही कारण समर्थ होते हुए भी मैंने सीता की रक्षा नहीं की
Show English Translation
'Fie upon my hasty action commited due to lack of selfcontrol. I did not save Sita eventhough the entire situation was under my control. (I had the capacity to save her. But I failed due to anger.)
ShlokaShloka 17
विनष्टायां तु सीतायां तावुभौ विनशिष्यतः। तयोर्विनाशे सुग्रीवः सबन्धुर्विनशिष्यति।।5.55.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘फिर इसी समाचार को सुन लेने पर भ्रातृवत्सल धर्मात्मा भरत और शत्रुघ्न भी कैसे जीवन धारण कर सकेंगे?
Show English Translation
'If the two princes know about Sita's loss they will die and when they are dead Sugriva would perish along with all his relatives.
ShlokaShloka 18
एतदेव वचश्श्रुत्वा भरतो भ्रातृवत्सलः। धर्मात्मा सहशत्रुघ्नः कथं शक्ष्यति जीवितुम्।।5.55.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘फिर इसी समाचार को सुन लेने पर भ्रातृवत्सल धर्मात्मा भरत और शत्रुघ्न भी कैसे जीवन धारण कर सकेंगे?
Show English Translation
'How will the loving righteous brother, Bharata along with Satrughna survive after hearing this?
ShlokaShloka 19
इक्ष्वाकुवंशे धर्मिष्ठे गते नाशमसंशयम्। भविष्यन्ति प्रजास्सर्वाश्शोकसन्तापपीडिताः।।5.55.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस प्रकार धर्मनिष्ठ इक्ष्वाकुवंश के नष्ट हो जाने पर सारी प्रजा भी शोक-संताप से पीड़ित हो जायगी, इसमें संशय नहीं है
Show English Translation
'When the righteous Ikshvaku race perishes the people would be tormented by grief and remorse. There is no doubt.
ShlokaShloka 20
तदहं भाग्यरहितो लुप्तधर्मार्थसङ्ग्रहः।।5.55.20।। रोषदोषपरीतात्मा व्यक्तं लोकविनाशनः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः सीता की रक्षा न करने के कारण मैंने धर्म और अर्थ के संग्रह को नष्ट कर दिया, अतएव मैं बड़ा भाग्यहीन हूँ। मेरा हृदय रोषदोष के वशीभूत हो गया है, इसलिये मैं अवश्य ही समस्त लोक का विनाशक हो गया हूँ—मुझे सम्पूर्ण जगत् के विनाश के पाप का भागी होना पड़ेगा’
Show English Translation
'I have failed in seeking dharma and artha. It is evident is that I am a destroyer of the world because I was overtaken by anger. How unfortunate I am'
ShlokaShloka 21
इति चिन्तयतस्तस्य निमित्तान्युपपेदिरे। पूर्वमप्युपलब्धानि साक्षात्पुनरचिन्तयत्।।5.55.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार चिन्ता में पड़े हुए हनुमान जी को कई शुभ शकुन दिखायी पड़े, जिनके अच्छे फलों का वे पहले भी प्रत्यक्ष अनुभव कर चुके थे; अतः वे फिर इस प्रकार सोचने लगे—
Show English Translation
When Hanuman was thus bemoaning, good omens as in the past appeared before him. He started reflecting once again:
ShlokaShloka 22
अथवा चारुसर्वाङ्गी रक्षिता स्वेन तेजसा। न नशिष्यति कल्याणी नाग्निरग्नौ प्रवर्तते।।5.55.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अथवा सम्भव है सर्वाङ्गसुन्दरी सीता अपने ही तेज से सुरक्षित हों। कल्याणी जनकनन्दिनी का नाश कदापि नहीं होगा; क्योंकि आग आग को नहीं जलाती है
Show English Translation
'On the other hand a beautiful and auspicious lady like Sita will be protected by her own splendour and will not perish as fire cannot extinguish fire. (Sita is pure like fire. Here the great sage Valmiki is suggesting the future incident in which Sita emerged safe from 'Agnipariksha' or fireordeal.)
ShlokaShloka 23
न हि धर्मात्मनस्तस्य भार्याममिततेजसः। स्वचारित्राभिगुप्तां तां स्प्रष्टुमर्हति पावकः।।5.55.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अवश्य श्रीराम के प्रभाव तथा विदेहनन्दिनी सीता के पुण्यबल से ही यह दाहक अग्नि मुझे नहीं जला सकी है
Show English Translation
'Fire cannot touch that lady who is protected by her own chastity and who is wedded to the righteous man of immasureable glory.
ShlokaShloka 24
नूनं रामप्रभावेण वैदेह्यास्सुकृतेन च। यन्मां दहनकर्मायं नादहद्धव्यवाहनः।।5.55.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अवश्य श्रीराम के प्रभाव तथा विदेहनन्दिनी सीता के पुण्यबल से ही यह दाहक अग्नि मुझे नहीं जला सकी है
Show English Translation
'Fire, the consumer of oblations who has the property of burning has not burnt me and this is surely on account of Rama's power and Vaidehi's merits.
ShlokaShloka 25
त्रयाणां भरतादीनां भ्रात्रूणां देवता च या। रामस्य च मन: कान्ता सा कथं विनशिष्यति।।5.55.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘फिर जो भरत आदि तीनों भाइयों की आराध्य देवी और श्रीरामचन्द्रजी की हृदयवल्लभा हैं, वे आग से कैसे नष्ट हो सकेंगी
Show English Translation
'To Bharata, Lakshmana and Satrughna she is a goddess and she is dear to Rama's heart, how would she perish?
ShlokaShloka 26
यद्वा दहनकर्मायं सर्वत्र प्रभुरव्ययः। न मे दहति लाङ्गूलं कथमार्यां प्रधक्ष्यति।।5.55.26।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह दाहक एवं अविनाशी अग्नि सर्वत्र अपना प्रभाव रखती है, सबको जला सकती है, तो भी यह जिनके प्रभाव से मेरी पूँछ को नहीं जला पाती है, उन्हीं साक्षात् माता जानकी को कैसे जला सकेगी?’
Show English Translation
'If not so, the firegod who never fails in burning has not burnt my tail. How will he burn noble Sita?'
ShlokaShloka 27
पुनश्चाचिन्तयत्तत्र हनुमान्विस्मितस्तदा। हिरण्यनाभस्य गिरेर्जलमध्ये प्रदर्शनम्।।5.55.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय हनुमान जी ने वहाँ विस्मित होकर पुनः उस घटना को स्मरण किया, जब कि समुद्र के जल में उन्हें मैनाक पर्वत का दर्शन हुआ था
Show English Translation
Then Hanuman thought of the appearance of mountain Hiranyanabha in the midst of water, a wonderful phenomenon.
ShlokaShloka 28
तपसा सत्यवाक्येन अनन्यत्वाच्च भर्तरि। अपि सा निर्दहेदग्निं न तामग्निः प्रधक्ष्यति।।5.55.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे सोचने लगे—’तपस्या, सत्यभाषण तथा पति में अनन्य भक्ति के कारण आर्या सीता ही अग्नि को जला सकती हैं, आग उन्हें नहीं जला सकती’
Show English Translation
'By virtue of her power of asceticism, power of truthfulness and exclusive devotion towards her husband, she may consume the fire. Fire will not burn her'.
ShlokaShloka 29
स तथा चिन्तयंस्तत्र देव्या धर्मपरिग्रहम्। शुश्राव हनुमान्वाक्यं चारणानां महात्मनाम्।।5.55.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार भगवती सीता की धर्मपरायणता का विचार करते हुए हनुमान जी ने वहाँ महात्मा चारणों के मुख से निकली हुई ये बातें सुनीं—
Show English Translation
As Hanuman was thinking so, he heard the words of the great charanas who were praising the queen's power of righteousness.
ShlokaShloka 30
अहो खलु कृतं कर्म दुष्करं हि हनूमता। अग्निं विसृजताऽभीक्ष्णं भीमं राक्षसवेश्मनि।।5.55.30।।
Show English Translation
'Oh Hanuman has indeed accomplished the marvellous task of spreading the terrific fire on the demons buildings.
ShlokaShloka 31
प्रपलायितरक्षः स्त्रीबालवृद्धसमाकुला। जनकोलाहलाध्माता क्रन्दन्तीवाद्रिकन्दरै: ।।5.55.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
हनुमान जी ने जब चारणों के कहे हुए ये अमृत के समान मधुर वचन सुने, तब उनके हृदय में तत्काल हर्षोल्लास छा गया
Show English Translation
The city is crowded with women, children and old demons running (in a bid to save themselves). The loud wails of demons resounded in the mountaincaves. It was as if the city was shrieking loudly.
ShlokaShloka 32
दग्धेयं नगरी सर्वा साट्टप्राकारतोरणा। जानकी न च दग्धेति विस्मयोऽद्भुत एव नः।।5.55.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
हनुमान जी ने जब चारणों के कहे हुए ये अमृत के समान मधुर वचन सुने, तब उनके हृदय में तत्काल हर्षोल्लास छा गया
Show English Translation
'The city with its towering markets, ramparts and portals is burnt, but Janaki is not. It is really wonderful, strange
ShlokaShloka 33
स निमित्तैश्च दृष्टार्थैः कारणैश्च महागुणैः। ऋषिवाक्यैश्च हनुमानभवत्प्रीतमानसः।।5.55.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
हनुमान जी ने जब चारणों के कहे हुए ये अमृत के समान मधुर वचन सुने, तब उनके हृदय में तत्काल हर्षोल्लास छा गया
Show English Translation
With omens that proved to be right and for good reasons and from the words of the sages (charanas), Hanuman felt happy.
ShlokaShloka 34
ततः कपिः प्राप्तमनोरथार्थस्तामक्षतां राजसुतां विदित्वा। प्रत्यक्षतस्तां पुनरेव दृष्टवा प्रतिप्रयाणाय मतिं चकार।।5.55.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
अनेक बार के प्रत्यक्ष अनुभव किये हुए शुभ शकुनों, महान् गुणदायक कारणों तथा चारणों के कहे हुए पूर्वोक्त वचनों द्वारा सीताजी के जीवित होने का निश्चय करके हनुमान् जी के मन में बड़ी प्रसन्नता हुई
Show English Translation
Hanuman, having fulfilled his desires and knowing that Sita is not hurt, thought of departing after meeting Sita once again (to testify that she is really safe). इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे पञ्चपञ्चाशस्सर्गः।। Thus ends the fiftyfifth sarga of Sundarakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.