Sundara Kanda

Sarga 52: Vibhishana advises Ravana against slaying of an emissary -- elaborates on the code of conduct of a king

सुन्दरकाण्डम् · सर्ग 52

27 shlokas

ShlokaShloka 1
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा वानरस्य महात्मनः। आज्ञापयद्वधं तस्य रावणः क्रोधमूर्छितः।।5.52.1।।
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वानरशिरोमणि महात्मा हनुमान जी का वचन सुनकर क्रोध से तमतमाये हुए रावण ने अपने सेवकों को आज्ञा दी—’इस वानर का वध कर डालो’
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Hearing the great vanara's speech, Ravana overwhelmed with anger ordered the execution of Hanuman.
ShlokaShloka 2
वधे तस्य समाज्ञप्ते रावणेन दुरात्मना। निवेदितवतो दौत्यं नानुमेने विभीषणः।।5.52.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
दुरात्मा रावण ने जब उनके वध की आज्ञा दी, तब विभीषण भी वहीं थे। उन्होंने उस आज्ञा का अनुमोदन नहीं किया; क्योंकि हनुमान जी अपने को सुग्रीव एवं श्रीराम का दूत बता चुके थे
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Vibhishana did not approve of the killing of Hanuman, who had declared that he was an envoy (of Sri Rama) when the wicked Ravana ordered his murder.
ShlokaShloka 3
तं रक्षोधिपतिं क्रुद्धं तच्च कार्यमुपस्थितम्। विदित्वा चिन्तयामास कार्यं कार्यविधौ स्थितः।।5.52.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
निश्चय हो जाने पर वार्तालापकुशल विभीषण ने पूजनीय ज्येष्ठ भ्राता शत्रुविजयी रावण से शान्तिपूर्वक यह हितकर वचन कहा—
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Vibhishana who stood by the right course of action, having realised that the lord of demons was angry pondered over his duty.
ShlokaShloka 4
निश्चितार्थस्ततस्साम्ना पूज्यं शत्रुजिदग्रजम्। उवाच हितमत्यर्थं वाक्यं वाक्यविशारदः।।5.52.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
निश्चय हो जाने पर वार्तालापकुशल विभीषण ने पूजनीय ज्येष्ठ भ्राता शत्रुविजयी रावण से शान्तिपूर्वक यह हितकर वचन कहा—
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Then Vibhishana, who was skilled in speech having decided about his duty addressed his reverential elder brother, a conqueror of enemies in soothing, words in a meaningful, wholesome manner.
ShlokaShloka 5
क्षमस्व रोषं त्यज राक्षसेन्द्र प्रसीद मद्वाक्यमिदं शृणुष्व। वधं न कुर्वन्ति परावरज्ञा दूतस्य सन्तो वसुधाधिपेन्द्राः।।5.52.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीर महाराज! इस वानर को मारना धर्म के विरुद्ध और लोकाचार की दृष्टि से भी निन्दित है आप-जैसे वीर के लिये तो यह कदापि उचित नहीं है
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"O king of ogres give up your wrath, forgive and calm down. Please listen to my appeal. You know the basic values of life. Virtuous rulers of the earth do not order killing of an envoy.
ShlokaShloka 6
राजधर्मविरुद्धं च लोकवृत्तेश्च गर्हितम्। तव चासदृशं वीर कपेरस्य प्रमापणम्।।5.52.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीर महाराज! इस वानर को मारना धर्म के विरुद्ध और लोकाचार की दृष्टि से भी निन्दित है आप-जैसे वीर के लिये तो यह कदापि उचित नहीं है
Show English Translation
"Mighty king killing this Hanuman is contrary to righteousness of kings. This is deplorable diplomacy and also unbecoming of you.
ShlokaShloka 7
धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च राजधर्मविशारदः। परावरज्ञो भूतानां त्वमेव परमार्थवित्।।5.52.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप धर्म के ज्ञाता, उपकार को मानने वाले और राजधर्म के विशेषज्ञ हैं, भले-बुरे का ज्ञान रखने वाले और परमार्थ के ज्ञाता हैं। यदि आप-जैसे विद्वान् भी रोष के वशीभूत हो जायँ तब तो समस्त शास्त्रों का पाण्डित्य प्राप्त करना केवल श्रम ही होगा
Show English Translation
"You are conversant with dharma of a king. You have a sense of gratitude. You are a knower of right and wrong of all beings. the supeme truth.
ShlokaShloka 8
गृह्यन्ते यदि रोषेण त्वादृशोऽपि विचक्षणः। तत श्शास्त्रविपश्चित्त्वं श्रम एव हि केवलम्।।5.52.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप धर्म के ज्ञाता, उपकार को मानने वाले और राजधर्म के विशेषज्ञ हैं, भले-बुरे का ज्ञान रखने वाले और परमार्थ के ज्ञाता हैं। यदि आप-जैसे विद्वान् भी रोष के वशीभूत हो जायँ तब तो समस्त शास्त्रों का पाण्डित्य प्राप्त करना केवल श्रम ही होगा
Show English Translation
"If wise persons like you are also overpowered by unjust anger, then the mastery of the scriptures will become a mere fruitless exercise.
ShlokaShloka 9
तस्मात्प्रसीद शत्रुघ्न राक्षसेन्द्र दुरासद। युक्तायुक्तं विनिश्चित्य दूतदण्डो विधीयताम्।।5.52.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः शत्रुओं का संहार करने वाले दुर्जय राक्षसराज! आप प्रसन्न होइये और उचित अनुचित का विचार करके दूत के योग्य किसी दण्ड का विधान कीजिये’
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"O destroyer of foes, O unassailable king of demon calm down. Only after carefully considering what is proper and improper decide on the punishment to be imposed".
ShlokaShloka 10
विभीषणवचः श्रुत्वा रावणो राक्षसेश्वरः। रोषेण महताविष्टो वाक्यमुत्तरमब्रवीत्।।5.52.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रुसूदन! पापियों का वध करने में पाप नहीं है। इस वानर ने वाटिका का विध्वंस तथा राक्षसों का वध करके पाप किया है। इसलिये अवश्य ही इसका वध करूँगा’
Show English Translation
Ravana, the lord of demons heard Vibhishana's words and overcome with anger replied:
ShlokaShloka 11
न पापानां वधे पापं विद्यते शत्रुसूदन। तस्मादेनं वधिष्यामि वानरं पापचारिणम्।।5.52.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रुसूदन! पापियों का वध करने में पाप नहीं है। इस वानर ने वाटिका का विध्वंस तथा राक्षसों का वध करके पाप किया है। इसलिये अवश्य ही इसका वध करूँगा’
Show English Translation
"O slayer of foes it is not wrong to kill a sinner. I shall, therefore, kill the sinful vanara."
ShlokaShloka 12
अधर्ममूलं बहुदोषयुक्तमनार्यजुष्टं वचनं निशम्य। उवाच वाक्यं परमार्थतत्त्वं विभीषणो बुद्धिमतां वरिष्ठः।।5.52.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
रावण का वचन अनेक दोषों से युक्त और पाप का मूल था। वह श्रेष्ठ पुरुषों के योग्य नहीं था। उसे सुनकर बुद्धिमानों में श्रेष्ठ विभीषण ने उत्तम कर्तव्य का निश्चय कराने वाली बात कही-
Show English Translation
On hearing his brother's harsh words spoken in tremendous anger, which were not acceptable to noble souls, wise Vibhishana again spoke these words of supreme truth:
ShlokaShloka 13
प्रसीद लङ्केश्वर राक्षसेन्द्र धर्मार्थयुक्तं वचनं शृणुष्व। दूतानवध्यान् समयेषु राजन् सर्वेषु सर्वत्र वदन्ति सन्तः।।5.52.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लङ्केश्वर ! प्रसन्न होइये। राक्षसराज! मेरे धर्म और अर्थतत्त्व से युक्त वचन को ध्यान देकर सुनिये। राजन्! सत्पुरुषों का कथन है कि दूत कहीं किसी समय भी वध करने योग्य नहीं होते
Show English Translation
"O lord of Lanka O king of demons be pleased to listen to my words which are the essence of dharma and artha. The elders have declared that the emissaries should not be killed by any means.
ShlokaShloka 14
असंशयं शत्रुरयं प्रवृद्धः कृतं ह्यनेनाप्रियमप्रमेयम्। न दूतवध्यां प्रवदन्ति सन्तो दूतस्य दृष्टा बहवो हि दण्डाः।।5.52.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसमें संदेह नहीं कि यह बहुत बड़ा शत्रु है; क्योंकि इसने वह अपराध किया है जिसकी कहीं तुलना नहीं है, तथापि सत्पुरुष दूत का वध करना उचित नहीं बताते हैं। दूत के लिये अन्य प्रकार के बहुत-से दण्ड देखे गये हैं
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This enemy has done a lot of harm, no doubt. Indeed he has done terrible and unpleasant deeds. (Yet) the wise have recommended many alternate punishments, while prohibiting their killing.
ShlokaShloka 15
वैरूप्यमङ्गेषु कशाभिघातो मौण्ड्यं तथा लक्षणसन्निपातः। एतान् हि दूते प्रवदन्ति दण्डान् वधस्तु दूतस्य न नः श्रुतोऽस्ति।।5.52.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीर! धर्म की व्याख्या करने, लोकाचार का पालन करने अथवा शास्त्रीय सिद्धान्त को समझने में आपके समान दूसरा कोई नहीं है। आप सम्पूर्ण देवताओं और असुरों में श्रेष्ठ हैं
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"Mutilation of limbs, flogging, shaving of the head, and deforming limbs etc. these punishments have been prescribed for an emissary. Never has killing of an emissary been heard.
ShlokaShloka 16
कथं च धर्मार्थविनीतबुद्धिः परावरप्रत्ययनिश्चितार्थः। भवद्विधः कोपवशे हि तिष्ठेत् कोपं नियच्छन्ति हि सत्त्ववन्तः।।5.52.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीर! धर्म की व्याख्या करने, लोकाचार का पालन करने अथवा शास्त्रीय सिद्धान्त को समझने में आपके समान दूसरा कोई नहीं है। आप सम्पूर्ण देवताओं और असुरों में श्रेष्ठ हैं
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"You are wellversed in dharma and artha. Learned men first decide what is right or wrong (before imposing punishment). How are you swayed by unjust anger? Indeed courageous persons (like you) should control anger.
ShlokaShloka 17
न धर्मवादे न च लोकवृत्ते न शास्त्रबुद्धिग्रहणेषु चापि। विद्येत कश्चित्तव वीर तुल्य स्त्वंह्युत्तमस्सर्वसुरासुराणाम्।।5.52.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीर! धर्म की व्याख्या करने, लोकाचार का पालन करने अथवा शास्त्रीय सिद्धान्त को समझने में आपके समान दूसरा कोई नहीं है। आप सम्पूर्ण देवताओं और असुरों में श्रेष्ठ हैं
Show English Translation
"Heroic Ravana there is hardly any one who is equal to you in the knowledge of dharma, in the practice of worldly affairs and in grasping subtle truths of sastras. Indeed you are supreme among suras and asuras.
ShlokaShloka 18
शूरेण वीरेण निशाचरेन्द्र सुरासुराणामपि दुर्जयेन। त्वया प्रगल्भाः सुरदैत्यसङ्घा जिताश्च युद्धेष्वसकृन्नरेन्द्राः।।5.52.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पराक्रम और उत्साह से सम्पन्न जो मनस्वी देवता और असुर हैं, उनके लिये भी आपपर विजय पाना अत्यन्त कठिन है। आप अप्रमेय शक्तिशाली हैं। आपने अनेक युद्धों में बारंबार देवेश्वरों तथा नरेशों को पराजित किया है
Show English Translation
"You are the king of demons. Hosts of gods and daityas efficient in wars are conquered by you again and again since you are a brave warrior invincible to gods and demons.
ShlokaShloka 19
न चाप्यस्य कपेर्घाते कञ्चित्पश्याम्यहं गुणम्। तेष्वयं पात्यतां दण्डो यैरयं प्रेषितः कपिः।।5.52.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवताओं और दैत्यों से भी शत्रुता रखने वाले ऐसे आप अपराजित शूरवीर का पहले कभी शत्रुपक्षी वीर मन से भी पराभव नहीं कर सके हैं। जिन्होंने सिर उठाया, वे तत्काल प्राणों से हाथ धो बैठे
Show English Translation
"I do not see any use in killing this monkey. Pronounce punishment on those who have sent this vanara.
ShlokaShloka 20
साधुर्वा यदि वाऽसाधुः परैरेष समर्पितः। ब्रुवन् परार्थं परवान्न दूतो वधमर्हति।।5.52.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस वानर को मारने में मुझे कोई लाभ नहीं दिखायी देता। जिन्होंने इसे भेजा है, उन्हीं को यह प्राणदण्ड दिया जाय
Show English Translation
"Whether he is soft or harsh, he has been sent by others. He is speaking on other's behalf and is dependent on them. An emissary does not deserve to be killed.
ShlokaShloka 21
अपि चास्मिन् हते राजन्नान्यं पश्यामि खेचरम्। इह यः पुनरागच्छेत्परं पारं महोदधेः।।5.52.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह भला हो या बुरा, शत्रुओं ने इसे भेजा है; अतः यह उन्हीं के स्वार्थ की बात करता है। दूत सदा पराधीन होता है, अतः वह वध के योग्य नहीं होता है
Show English Translation
"O king If he is killed, I do not see any one who can cross this great ocean and come by air to reach this place.
ShlokaShloka 22
तस्मान्नास्य वधे यत्नः कार्य: परपुरञ्जय। भवान् सेन्द्रेषु देवेषु यत्नमास्थातुमर्हति।।5.52.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजन्! इसके मारे जाने पर मैं दूसरे किसी ऐसे आकाशचारी प्राणी को नहीं देखता, जो शत्रु के समीप से महासागर के इस पार फिर आ सके (ऐसी दशा में शत्रु की गति-विधि का आपको पता नहीं लग सकेगा)
Show English Translation
"You who can conquer citadels of enemies should not direct your efforts to kill an envoy.You are fit to make efforts against enemies like gods including Indra.
ShlokaShloka 23
अस्मिन्विनष्टे न हि वीरमन्यं पश्यामि यस्तौ वरराजपुत्रौ। युद्धाय युद्धप्रियदुर्विनीतावुद्योजयेद्धीर्घपथावरुद्धौ।।5.52.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः शत्रुनगरी पर विजय पाने वाले महाराज! आपको इस दूत के वध के लिये कोई प्रयत्न नहीं करना चाहिये। आप तो इस योग्य हैं कि इन्द्रसहित सम्पूर्ण देवताओं पर चढ़ाई कर सकें
Show English Translation
"O lover of war if Hanuman is slain I do not see any one who can incite those two illmannered sons of the king who are prevented from reaching this faroff land.
ShlokaShloka 24
पराक्रमोत्साहमनस्विनां च सुरासुराणामपि दुर्जयेन। त्वया मनोनन्दन नैतानां युद्धायतिर्नाशयतुं न युक्ता।।5.52.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘युद्धप्रेमी महाराज! इसके नष्ट हो जाने पर मैं दूसरे किसी प्राणी को ऐसा नहीं देखता, जो आपसे विरोध करने वाले उन दोनों स्वतन्त्र प्रकृति के राजकुमारों को युद्ध के लिये तैयार कर सके
Show English Translation
"O delighter of demons even the gods and demons who are endowed with valour and energy cannot win you. You are invincible. It is not proper for you to lose chances of a good war.
ShlokaShloka 25
हिताश्च शूराश्च समाहिताश्च कुलेषु जाताश्च महागुणेषु। मनस्विनश्शस्त्रभृतां वरिष्ठाः कोट्यग्रतस्ते सुभृताश्च योधाः।।5.52.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राक्षसों के हृदय को आनन्दित करने वाले वीर! आप देवताओं और दैत्यों के लिये भी दुर्जय हैं; अतः पराक्रम और उत्साह से भरे हुए हृदयवाले इन राक्षसों के मन में जो युद्ध करने का हौसला बढ़ा हुआ है, उसे नष्ट कर देना आपके लिये कदापि उचित नहीं है
Show English Translation
"You have with you wellwishers, courageous ones, who have good qualities born in a good race, who are noble, sensible people, wielders of weapons and wellpaid warriors in crores.
ShlokaShloka 26
तदेकदेशेन बलस्य तावत्केचित्तवाऽऽदेशकृतोऽभियान्तु तौ राजपुत्रौ विनिगृह्य मूढौ परेषु ते भावयितुं प्रभावम्।।5.52.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरी राय तो यह है कि उन विरह-दुःख से विकलचित्त राजकुमारों को कैद करके शत्रुओं पर आपका प्रभाव डालने– दबदबा जमाने के लिये आपकी आज्ञा से थोड़ी-सी सेना के साथ कुछ ऐसे योद्धा यहाँ से यात्रा करें, जो हितैषी, शूरवीर, सावधान, अधिक गुणवाले, महान् कुल में उत्पन्न, मनस्वी, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, अपने रोष और जोश के लिये प्रशंसित तथा अधिक वेतन देकर अच्छी तरह पाले-पोसे गये हों’
Show English Translation
By your order let some strong soldiers from one contingency go and capture the two sons of the king, to exhibit your power over the enemy.
ShlokaShloka 27
निशाचराणामधिपोऽनुजस्य विभीषणस्योत्तमवाक्यमिष्टम्। जग्राह बुद्ध्या सुरलोकशत्रु र्महाबलो राक्षसराजमुख्यः।।5.52.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरी राय तो यह है कि उन विरह-दुःख से विकलचित्त राजकुमारों को कैद करके शत्रुओं पर आपका प्रभाव डालने– दबदबा जमाने के लिये आपकी आज्ञा से थोड़ी-सी सेना के साथ कुछ ऐसे योद्धा यहाँ से यात्रा करें, जो हितैषी, शूरवीर, सावधान, अधिक गुणवाले, महान् कुल में उत्पन्न, मनस्वी, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, अपने रोष और जोश के लिये प्रशंसित तथा अधिक वेतन देकर अच्छी तरह पाले-पोसे गये हों’
Show English Translation
The mighty chief among the demon kings, a king of the nightroamers and the enemy of gods accepted the words of advice of his younger brother Vibhishana. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे द्विपञ्चाशस्सर्गः।। Thus ends the fiftysecond sarga of Sundarakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.