Uttar Kand
Doha 14
7 verses
Chhand1 of 7
जय राम रमारमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनं।।
अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो।।1।।
दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरि महा महि भूरि रुजा।।
रजनीचर बृंद पतंग रहे। सर पावक तेज प्रचंड दहे।।2।।
Show TransliterationTransliteration
jaya rāma ramāramanaṃ samanaṃ. bhava tāpa bhayākula pāhi janaṃ.
avadhesu suresu ramesu bibho. saranāgata māgata
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जय राम! रमा (लक्ष्मी) के रमण (पति)! शमन (शान्ति देने वाले)! भव-ताप और भय से व्याकुल जनों की रक्षा करो। हे अवधेश! सुरेश! रमेश! विभो! शरणागत माँगते —
Show English TranslationEnglish Translation
Glory to Rama, the beloved of Rama (Lakshmi), the destroyer of worldly sorrows! Protect the people afflicted with fear and the fever of existence. O Lord of Ayodhya, king of gods, consort of Lakshmi, all-pervading one!
Chhand2 of 7
महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं।।
मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी।।3।।
मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए।।
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूलि परे।।4।।
Show English TranslationEnglish Translation
Chhand3 of 7
बहु रोग बियोगन्हि लोग हए। भवदंघ्रि निरादर के फल ए।।
भव सिंधु अगाध परे नर ते। पद पंकज प्रेम न जे करते।।5।।
अति दीन मलीन दुखी नितहीं। जिन्ह के पद पंकज प्रीति नहीं।।
अवलंब भवंत कथा जिन्ह के।। प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह कें।।6।।
Show English TranslationEnglish Translation
Chhand4 of 7
नहिं राग न लोभ न मान मदा।।तिन्ह कें सम बैभव वा बिपदा।।
एहि ते तव सेवक होत मुदा। मुनि त्यागत जोग भरोस सदा।।7।।
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ।।
सम मानि निरादर आदरही। सब संत सुखी बिचरंति मही।।8।।
Show English TranslationEnglish Translation
Chhand5 of 7
मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रनधीर अजे।।
तव नाम जपामि नमामि हरी। भव रोग महागद मान अरी।।9।।
गुन सील कृपा परमायतनं। प्रनमामि निरंतर श्रीरमनं।।
रघुनंद निकंदय द्वंद्वघनं। महिपाल बिलोकय दीन जनं।।10।।
Show English TranslationEnglish Translation
Doha6 of 7
बार बार बर मागउँ हरषि देहु श्रीरंग।
पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग।।14(क)।।
Show TransliterationTransliteration
bāra bāra bara māgauṃ haraṣi dehu śrīraṅga.
pada saroja anapāyanī bhagati sadā satasaṅga.
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(वेदों ने कहा) बार-बार वर माँगता हूँ — हर्षित होकर दो, हे श्रीरंग! चरण-सरोज में अनपायनी (कभी न मिटने वाली) भक्ति और सदा सत्संग।
Show English TranslationEnglish Translation
Again and again I ask this boon — grant it joyfully, O Shri Ranga: unfailing devotion to Your lotus feet and always the company of the virtuous.
Doha7 of 7
बरनि उमापति राम गुन हरषि गए कैलास।
तब प्रभु कपिन्ह दिवाए सब बिधि सुखप्रद बास।।14(ख)।।