Uttar Kand Paath (उत्तरकाण्ड)

Complete text — 130 dohas, 855 verses, one page. About 5.5 hours to recite. Tap any verse for its Hindi meaning and English translation.

Uttar Kand describes the coronation of Shri Ram and the establishment of Ram Rajya, followed by the discourses of Kakbhushundi and Garud on bhakti, gyan and the nature of devotion.

Read doha by doha instead →

Doha 0 of 130

Mangalacharan

केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं शोभाढ्यं पीतवस्त्रं सरसिजनयनं सर्वदा सुप्रसन्नम्। पाणौ नाराचचापं कपिनिकरयुतं बन्धुना सेव्यमानं नौमीड्यं जानकीशं रघुवरमनिशं पुष्पकारूढरामम्॥1॥
Shloka
अर्थ / Meaning
कोसलेन्द्रपदकञ्जमञ्जुलौ कोमलावजमहेशवन्दितौ। जानकीकरसरोजलालितौ चिन्तकस्य मनभृंगसंगिनौ॥2॥
Shloka
अर्थ / Meaning
कुन्दइन्दुदरगौरसुन्दरं अम्बिकापतिमभीष्टसिद्धिदम्। कारुणीककलकञ्जलोचनं नौमि शंकरमनंगमोचनम्॥3॥
Shloka
अर्थ / Meaning

Doha 1

रहेउ एक दिन अवधि अधारा। समुझत मन दुख भयउ अपारा।। कारन कवन नाथ नहिं आयउ। जानि कुटिल किधौं मोहि बिसरायउ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अहह धन्य लछिमन बड़भागी। राम पदारबिंदु अनुरागी।। कपटी कुटिल मोहि प्रभु चीन्हा। ताते नाथ संग नहिं लीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं करनी समुझै प्रभु मोरी। नहिं निस्तार कलप सत कोरी।। जन अवगुन प्रभु मान न काऊ। दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोरि जियँ भरोस दृढ़ सोई। मिलिहहिं राम सगुन सुभ होई।। बीतें अवधि रहहि जौं प्राना। अधम कवन जग मोहि समाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम बिरह सागर महँ भरत मगन मन होत। बिप्र रूप धरि पवन सुत आइ गयउ जनु पोत।।1(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बैठि देखि कुसासन जटा मुकुट कृस गात। राम राम रघुपति जपत स्त्रवत नयन जलजात।।1(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 2

देखत हनूमान अति हरषेउ। पुलक गात लोचन जल बरषेउ।। मन महँ बहुत भाँति सुख मानी। बोलेउ श्रवन सुधा सम बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।। रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता। आयउ कुसल देव मुनि त्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रिपु रन जीति सुजस सुर गावत। सीता सहित अनुज प्रभु आवत।। सुनत बचन बिसरे सब दूखा। तृषावंत जिमि पाइ पियूषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
को तुम्ह तात कहाँ ते आए। मोहि परम प्रिय बचन सुनाए।। मारुत सुत मैं कपि हनुमाना। नामु मोर सुनु कृपानिधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दीनबंधु रघुपति कर किंकर। सुनत भरत भेंटेउ उठि सादर।। मिलत प्रेम नहिं हृदयँ समाता। नयन स्त्रवत जल पुलकित गाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कपि तव दरस सकल दुख बीते। मिले आजु मोहि राम पिरीते।। बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुनु भ्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि संदेस सरिस जग माहीं। करि बिचार देखेउँ कछु नाहीं।। नाहिन तात उरिन मैं तोही। अब प्रभु चरित सुनावहु मोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब हनुमंत नाइ पद माथा। कहे सकल रघुपति गुन गाथा।। कहु कपि कबहुँ कृपाल गोसाईं। सुमिरहिं मोहि दास की नाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज दास ज्यों रघुबंसभूषन कबहुँ मम सुमिरन कर् यो। सुनि भरत बचन बिनीत अति कपि पुलकित तन चरनन्हि पर् यो।। रघुबीर निज मुख जासु गुन गन कहत अग जग नाथ जो। काहे न होइ बिनीत परम पुनीत सदगुन सिंधु सो।।
Chhand
अर्थ / Meaning
राम प्रान प्रिय नाथ तुम्ह सत्य बचन मम तात। पुनि पुनि मिलत भरत सुनि हरष न हृदयँ समात।।2(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
भरत चरन सिरु नाइ तुरित गयउ कपि राम पहिं। कही कुसल सब जाइ हरषि चलेउ प्रभु जान चढ़ि।।2(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 3

हरषि भरत कोसलपुर आए। समाचार सब गुरहि सुनाए।। पुनि मंदिर महँ बात जनाई। आवत नगर कुसल रघुराई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।। समाचार पुरबासिन्ह पाए। नर अरु नारि हरषि सब धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दधि दुर्बा रोचन फल फूला। नव तुलसी दल मंगल मूला।। भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधु सिंधुरगामिनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जे जैसेहिं तैसेहिं उटि धावहिं। बाल बृद्ध कहँ संग न लावहिं।। एक एकन्ह कहँ बूझहिं भाई। तुम्ह देखे दयाल रघुराई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी।। बहइ सुहावन त्रिबिध समीरा। भइ सरजू अति निर्मल नीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरषित गुर परिजन अनुज भूसुर बृंद समेत। चले भरत मन प्रेम अति सन्मुख कृपानिकेत।।3(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बहुतक चढ़ी अटारिन्ह निरखहिं गगन बिमान। देखि मधुर सुर हरषित करहिं सुमंगल गान।।3(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
राका ससि रघुपति पुर सिंधु देखि हरषान। बढ़यो कोलाहल करत जनु नारि तरंग समान।।3(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 4

इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर। कपिन्ह देखावत नगर मनोहर।। सुनु कपीस अंगद लंकेसा। पावन पुरी रुचिर यह देसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जद्यपि सब बैकुंठ बखाना। बेद पुरान बिदित जगु जाना।। अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ। यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।। जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।। हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी। धन्य अवध जो राम बखानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान। नगर निकट प्रभु प्रेरेउ उतरेउ भूमि बिमान।।4(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
उतरि कहेउ प्रभु पुष्पकहि तुम्ह कुबेर पहिं जाहु। प्रेरित राम चलेउ सो हरषु बिरहु अति ताहु।।4(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 5

आए भरत संग सब लोगा। कृस तन श्रीरघुबीर बियोगा।। बामदेव बसिष्ठ मुनिनायक। देखे प्रभु महि धरि धनु सायक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धाइ धरे गुर चरन सरोरुह। अनुज सहित अति पुलक तनोरुह।। भेंटि कुसल बूझी मुनिराया। हमरें कुसल तुम्हारिहिं दाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सकल द्विजन्ह मिलि नायउ माथा। धर्म धुरंधर रघुकुलनाथा।। गहे भरत पुनि प्रभु पद पंकज। नमत जिन्हहि सुर मुनि संकर अज।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए।। स्यामल गात रोम भए ठाढ़े। नव राजीव नयन जल बाढ़े।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राजीव लोचन स्त्रवत जल तन ललित पुलकावलि बनी। अति प्रेम हृदयँ लगाइ अनुजहि मिले प्रभु त्रिभुअन धनी।। प्रभु मिलत अनुजहि सोह मो पहिं जाति नहिं उपमा कही। जनु प्रेम अरु सिंगार तनु धरि मिले बर सुषमा लही।।1।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बूझत कृपानिधि कुसल भरतहि बचन बेगि न आवई। सुनु सिवा सो सुख बचन मन ते भिन्न जान जो पावई।। अब कुसल कौसलनाथ आरत जानि जन दरसन दियो। बूड़त बिरह बारीस कृपानिधान मोहि कर गहि लियो।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
पुनि प्रभु हरषि सत्रुहन भेंटे हृदयँ लगाइ। लछिमन भरत मिले तब परम प्रेम दोउ भाइ।।5।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 6

भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।। सीता चरन भरत सिरु नावा। अनुज समेत परम सुख पावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी। जनित बियोग बिपति सब नासी।। प्रेमातुर सब लोग निहारी। कौतुक कीन्ह कृपाल खरारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अमित रूप प्रगटे तेहि काला। जथाजोग मिले सबहि कृपाला।। कृपादृष्टि रघुबीर बिलोकी। किए सकल नर नारि बिसोकी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छन महिं सबहि मिले भगवाना। उमा मरम यह काहुँ न जाना।। एहि बिधि सबहि सुखी करि रामा। आगें चले सील गुन धामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कौसल्यादि मातु सब धाई। निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जनु धेनु बालक बच्छ तजि गृहँ चरन बन परबस गईं। दिन अंत पुर रुख स्त्रवत थन हुंकार करि धावत भई।। अति प्रेम सब मातु भेटीं बचन मृदु बहुबिधि कहे। गइ बिषम बियोग भव तिन्ह हरष सुख अगनित लहे।।
Chhand
अर्थ / Meaning
भेटेउ तनय सुमित्राँ राम चरन रति जानि। रामहि मिलत कैकेई हृदयँ बहुत सकुचानि।।6(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
लछिमन सब मातन्ह मिलि हरषे आसिष पाइ। कैकेइ कहँ पुनि पुनि मिले मन कर छोभु न जाइ।।6।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 7

सासुन्ह सबनि मिली बैदेही। चरनन्हि लागि हरषु अति तेही।। देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब रघुपति मुख कमल बिलोकहिं। मंगल जानि नयन जल रोकहिं।। कनक थार आरति उतारहिं। बार बार प्रभु गात निहारहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाना भाँति निछावरि करहीं। परमानंद हरष उर भरहीं।। कौसल्या पुनि पुनि रघुबीरहि। चितवति कृपासिंधु रनधीरहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हृदयँ बिचारति बारहिं बारा। कवन भाँति लंकापति मारा।। अति सुकुमार जुगल मेरे बारे। निसिचर सुभट महाबल भारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमन अरु सीता सहित प्रभुहि बिलोकति मातु। परमानंद मगन मन पुनि पुनि पुलकित गातु।।7।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 8

लंकापति कपीस नल नीला। जामवंत अंगद सुभसीला।। हनुमदादि सब बानर बीरा। धरे मनोहर मनुज सरीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा।। देखि नगरबासिन्ह कै रीती। सकल सराहहि प्रभु पद प्रीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए।। गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपाँ दनुज रन मारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ए सब सखा सुनहु मुनि मेरे। भए समर सागर कहँ बेरे।। मम हित लागि जन्म इन्ह हारे। भरतहु ते मोहि अधिक पिआरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। निमिष निमिष उपजत सुख नए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कौसल्या के चरनन्हि पुनि तिन्ह नायउ माथ।। आसिष दीन्हे हरषि तुम्ह प्रिय मम जिमि रघुनाथ।।8(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद। चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नगर नारि नर बृंद।।8(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 9

कंचन कलस बिचित्र सँवारे। सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे।। बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बीथीं सकल सुगंध सिंचाई। गजमनि रचि बहु चौक पुराई।। नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जहँ तहँ नारि निछावर करहीं। देहिं असीस हरष उर भरहीं।। कंचन थार आरती नाना। जुबती सजें करहिं सुभ गाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें।। पुर सोभा संपति कल्याना। निगम सेष सारदा बखाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेउ यह चरित देखि ठगि रहहीं। उमा तासु गुन नर किमि कहहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नारि कुमुदिनीं अवध सर रघुपति बिरह दिनेस। अस्त भएँ बिगसत भईं निरखि राम राकेस।।9(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं गगन निसान। पुर नर नारि सनाथ करि भवन चले भगवान।।9(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 10

प्रभु जानी कैकेई लजानी। प्रथम तासु गृह गए भवानी।। ताहि प्रबोधि बहुत सुख दीन्हा। पुनि निज भवन गवन हरि कीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कृपासिंधु जब मंदिर गए। पुर नर नारि सुखी सब भए।। गुर बसिष्ट द्विज लिए बुलाई। आजु सुघरी सुदिन समुदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब द्विज देहु हरषि अनुसासन। रामचंद्र बैठहिं सिंघासन।। मुनि बसिष्ट के बचन सुहाए। सुनत सकल बिप्रन्ह अति भाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहहिं बचन मृदु बिप्र अनेका। जग अभिराम राम अभिषेका।। अब मुनिबर बिलंब नहिं कीजे। महाराज कहँ तिलक करीजै।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब मुनि कहेउ सुमंत्र सन सुनत चलेउ हरषाइ। रथ अनेक बहु बाजि गज तुरत सँवारे जाइ।।10(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जहँ तहँ धावन पठइ पुनि मंगल द्रब्य मगाइ। हरष समेत बसिष्ट पद पुनि सिरु नायउ आइ।।10(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 11

अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई।। राम कहा सेवकन्ह बुलाई। प्रथम सखन्ह अन्हवावहु जाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनत बचन जहँ तहँ जन धाए। सुग्रीवादि तुरत अन्हवाए।। पुनि करुनानिधि भरतु हँकारे। निज कर राम जटा निरुआरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अन्हवाए प्रभु तीनिउ भाई। भगत बछल कृपाल रघुराई।। भरत भाग्य प्रभु कोमलताई। सेष कोटि सत सकहिं न गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि निज जटा राम बिबराए। गुर अनुसासन मागि नहाए।। करि मज्जन प्रभु भूषन साजे। अंग अनंग देखि सत लाजे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सासुन्ह सादर जानकिहि मज्जन तुरत कराइ। दिब्य बसन बर भूषन अँग अँग सजे बनाइ।।11(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
राम बाम दिसि सोभति रमा रूप गुन खानि। देखि मातु सब हरषीं जन्म सुफल निज जानि।।11(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सुनु खगेस तेहि अवसर ब्रह्मा सिव मुनि बृंद। चढ़ि बिमान आए सब सुर देखन सुखकंद।।11(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 12

प्रभु बिलोकि मुनि मन अनुरागा। तुरत दिब्य सिंघासन मागा।। रबि सम तेज सो बरनि न जाई। बैठे राम द्विजन्ह सिरु नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जनकसुता समेत रघुराई। पेखि प्रहरषे मुनि समुदाई।। बेद मंत्र तब द्विजन्ह उचारे। नभ सुर मुनि जय जयति पुकारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा।। सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार बार आरती उतारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिप्रन्ह दान बिबिध बिधि दीन्हे। जाचक सकल अजाचक कीन्हे।। सिंघासन पर त्रिभुअन साई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नभ दुंदुभीं बाजहिं बिपुल गंधर्ब किंनर गावहीं। नाचहिं अपछरा बृंद परमानंद सुर मुनि पावहीं।। भरतादि अनुज बिभीषनांगद हनुमदादि समेत ते। गहें छत्र चामर ब्यजन धनु असि चर्म सक्ति बिराजते।।1।।
Chhand
अर्थ / Meaning
श्री सहित दिनकर बंस बूषन काम बहु छबि सोहई। नव अंबुधर बर गात अंबर पीत सुर मन मोहई।। मुकुटांगदादि बिचित्र भूषन अंग अंगन्हि प्रति सजे। अंभोज नयन बिसाल उर भुज धन्य नर निरखंति जे।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
वह सोभा समाज सुख कहत न बनइ खगेस। बरनहिं सारद सेष श्रुति सो रस जान महेस।।12(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
भिन्न भिन्न अस्तुति करि गए सुर निज निज धाम। बंदी बेष बेद तब आए जहँ श्रीराम।। 12(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
प्रभु सर्बग्य कीन्ह अति आदर कृपानिधान। लखेउ न काहूँ मरम कछु लगे करन गुन गान।।12(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 13

जय सगुन निर्गुन रूप रूप अनूप भूप सिरोमने। दसकंधरादि प्रचंड निसिचर प्रबल खल भुज बल हने।। अवतार नर संसार भार बिभंजि दारुन दुख दहे। जय प्रनतपाल दयाल प्रभु संजुक्त सक्ति नमामहे।।1।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तव बिषम माया बस सुरासुर नाग नर अग जग हरे। भव पंथ भ्रमत अमित दिवस निसि काल कर्म गुननि भरे।। जे नाथ करि करुना बिलोके त्रिबिधि दुख ते निर्बहे। भव खेद छेदन दच्छ हम कहुँ रच्छ राम नमामहे।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जे ग्यान मान बिमत्त तव भव हरनि भक्ति न आदरी। ते पाइ सुर दुर्लभ पदादपि परत हम देखत हरी।। बिस्वास करि सब आस परिहरि दास तव जे होइ रहे। जपि नाम तव बिनु श्रम तरहिं भव नाथ सो समरामहे।।3।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जे चरन सिव अज पूज्य रज सुभ परसि मुनिपतिनी तरी। नख निर्गता मुनि बंदिता त्रेलोक पावनि सुरसरी।। ध्वज कुलिस अंकुस कंज जुत बन फिरत कंटक किन लहे। पद कंज द्वंद मुकुंद राम रमेस नित्य भजामहे।।4।।
Chhand
अर्थ / Meaning
अब्यक्तमूलमनादि तरु त्वच चारि निगमागम भने। षट कंध साखा पंच बीस अनेक पर्न सुमन घने।। फल जुगल बिधि कटु मधुर बेलि अकेलि जेहि आश्रित रहे। पल्लवत फूलत नवल नित संसार बिटप नमामहे।।5।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जे ब्रह्म अजमद्वैतमनुभवगम्य मनपर ध्यावहीं। ते कहहुँ जानहुँ नाथ हम तव सगुन जस नित गावहीं।। करुनायतन प्रभु सदगुनाकर देव यह बर मागहीं। मन बचन कर्म बिकार तजि तव चरन हम अनुरागहीं।।6।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सब के देखत बेदन्ह बिनती कीन्हि उदार। अंतर्धान भए पुनि गए ब्रह्म आगार।।13(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बैनतेय सुनु संभु तब आए जहँ रघुबीर। बिनय करत गदगद गिरा पूरित पुलक सरीर।।13(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 14

जय राम रमारमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनं।। अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो।।1।। दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरि महा महि भूरि रुजा।। रजनीचर बृंद पतंग रहे। सर पावक तेज प्रचंड दहे।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं।। मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी।।3।। मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए।। हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूलि परे।।4।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बहु रोग बियोगन्हि लोग हए। भवदंघ्रि निरादर के फल ए।। भव सिंधु अगाध परे नर ते। पद पंकज प्रेम न जे करते।।5।। अति दीन मलीन दुखी नितहीं। जिन्ह के पद पंकज प्रीति नहीं।। अवलंब भवंत कथा जिन्ह के।। प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह कें।।6।।
Chhand
अर्थ / Meaning
नहिं राग न लोभ न मान मदा।।तिन्ह कें सम बैभव वा बिपदा।। एहि ते तव सेवक होत मुदा। मुनि त्यागत जोग भरोस सदा।।7।। करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ।। सम मानि निरादर आदरही। सब संत सुखी बिचरंति मही।।8।।
Chhand
अर्थ / Meaning
मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रनधीर अजे।। तव नाम जपामि नमामि हरी। भव रोग महागद मान अरी।।9।। गुन सील कृपा परमायतनं। प्रनमामि निरंतर श्रीरमनं।। रघुनंद निकंदय द्वंद्वघनं। महिपाल बिलोकय दीन जनं।।10।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बार बार बर मागउँ हरषि देहु श्रीरंग। पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग।।14(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बरनि उमापति राम गुन हरषि गए कैलास। तब प्रभु कपिन्ह दिवाए सब बिधि सुखप्रद बास।।14(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 15

सुनु खगपति यह कथा पावनी। त्रिबिध ताप भव भय दावनी।। महाराज कर सुभ अभिषेका। सुनत लहहिं नर बिरति बिबेका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं। सुख संपति नाना बिधि पावहिं।। सुर दुर्लभ सुख करि जग माहीं। अंतकाल रघुपति पुर जाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।। खगपति राम कथा मैं बरनी। स्वमति बिलास त्रास दुख हरनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिरति बिबेक भगति दृढ़ करनी। मोह नदी कहँ सुंदर तरनी।। नित नव मंगल कौसलपुरी। हरषित रहहिं लोग सब कुरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नित नइ प्रीति राम पद पंकज। सबकें जिन्हहि नमत सिव मुनि अज।। मंगन बहु प्रकार पहिराए। द्विजन्ह दान नाना बिधि पाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्रह्मानंद मगन कपि सब कें प्रभु पद प्रीति। जात न जाने दिवस तिन्ह गए मास षट बीति।।15।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 16

बिसरे गृह सपनेहुँ सुधि नाहीं। जिमि परद्रोह संत मन माही।। तब रघुपति सब सखा बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिरु नाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परम प्रीति समीप बैठारे। भगत सुखद मृदु बचन उचारे।। तुम्ह अति कीन्ह मोरि सेवकाई। मुख पर केहि बिधि करौं बड़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताते मोहि तुम्ह अति प्रिय लागे। मम हित लागि भवन सुख त्यागे।। अनुज राज संपति बैदेही। देह गेह परिवार सनेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब मम प्रिय नहिं तुम्हहि समाना। मृषा न कहउँ मोर यह बाना।। सब के प्रिय सेवक यह नीती। मोरें अधिक दास पर प्रीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब गृह जाहु सखा सब भजेहु मोहि दृढ़ नेम। सदा सर्बगत सर्बहित जानि करेहु अति प्रेम।।16।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 17

सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। को हम कहाँ बिसरि तन गए।। एकटक रहे जोरि कर आगे। सकहिं न कछु कहि अति अनुरागे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परम प्रेम तिन्ह कर प्रभु देखा। कहा बिबिध बिधि ग्यान बिसेषा।। प्रभु सन्मुख कछु कहन न पारहिं। पुनि पुनि चरन सरोज निहारहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब प्रभु भूषन बसन मगाए। नाना रंग अनूप सुहाए।। सुग्रीवहि प्रथमहिं पहिराए। बसन भरत निज हाथ बनाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु प्रेरित लछिमन पहिराए। लंकापति रघुपति मन भाए।। अंगद बैठ रहा नहिं डोला। प्रीति देखि प्रभु ताहि न बोला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जामवंत नीलादि सब पहिराए रघुनाथ। हियँ धरि राम रूप सब चले नाइ पद माथ।।17(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
तब अंगद उठि नाइ सिरु सजल नयन कर जोरि। अति बिनीत बोलेउ बचन मनहुँ प्रेम रस बोरि।।17(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 18

सुनु सर्बग्य कृपा सुख सिंधो। दीन दयाकर आरत बंधो।। मरती बेर नाथ मोहि बाली। गयउ तुम्हारेहि कोंछें घाली।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
असरन सरन बिरदु संभारी। मोहि जनि तजहु भगत हितकारी।। मोरें तुम्ह प्रभु गुर पितु माता। जाउँ कहाँ तजि पद जलजाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्हहि बिचारि कहहु नरनाहा। प्रभु तजि भवन काज मम काहा।। बालक ग्यान बुद्धि बल हीना। राखहु सरन नाथ जन दीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नीचि टहल गृह कै सब करिहउँ। पद पंकज बिलोकि भव तरिहउँ।। अस कहि चरन परेउ प्रभु पाही। अब जनि नाथ कहहु गृह जाही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंगद बचन बिनीत सुनि रघुपति करुना सींव। प्रभु उठाइ उर लायउ सजल नयन राजीव।।18(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
निज उर माल बसन मनि बालितनय पहिराइ। बिदा कीन्हि भगवान तब बहु प्रकार समुझाइ।।18(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 19

भरत अनुज सौमित्र समेता। पठवन चले भगत कृत चेता।। अंगद हृदयँ प्रेम नहिं थोरा। फिरि फिरि चितव राम कीं ओरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बार बार कर दंड प्रनामा। मन अस रहन कहहिं मोहि रामा।। राम बिलोकनि बोलनि चलनी। सुमिरि सुमिरि सोचत हँसि मिलनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी। चलेउ हृदयँ पद पंकज राखी।। अति आदर सब कपि पहुँचाए। भाइन्ह सहित भरत पुनि आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब सुग्रीव चरन गहि नाना। भाँति बिनय कीन्हे हनुमाना।। दिन दस करि रघुपति पद सेवा। पुनि तव चरन देखिहउँ देवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा। सेवहु जाइ कृपा आगारा।। अस कहि कपि सब चले तुरंता। अंगद कहइ सुनहु हनुमंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहेहु दंडवत प्रभु सैं तुम्हहि कहउँ कर जोरि। बार बार रघुनायकहि सुरति कराएहु मोरि।।19(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
अस कहि चलेउ बालिसुत फिरि आयउ हनुमंत। तासु प्रीति प्रभु सन कहि मगन भए भगवंत।।!9(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कुलिसहु चाहि कठोर अति कोमल कुसुमहु चाहि। चित्त खगेस राम कर समुझि परइ कहु काहि।।19(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 20

पुनि कृपाल लियो बोलि निषादा। दीन्हे भूषन बसन प्रसादा।। जाहु भवन मम सुमिरन करेहू। मन क्रम बचन धर्म अनुसरेहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्ह मम सखा भरत सम भ्राता। सदा रहेहु पुर आवत जाता।। बचन सुनत उपजा सुख भारी। परेउ चरन भरि लोचन बारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चरन नलिन उर धरि गृह आवा। प्रभु सुभाउ परिजनन्हि सुनावा।। रघुपति चरित देखि पुरबासी। पुनि पुनि कहहिं धन्य सुखरासी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम राज बैंठें त्रेलोका। हरषित भए गए सब सोका।। बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप बिषमता खोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बरनाश्रम निज निज धरम बनिरत बेद पथ लोग। चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग।।20।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 21

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।। सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं।। राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अल्पमृत्यु नहिं कवनिउ पीरा। सब सुंदर सब बिरुज सरीरा।। नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब निर्दंभ धर्मरत पुनी। नर अरु नारि चतुर सब गुनी।। सब गुनग्य पंडित सब ग्यानी। सब कृतग्य नहिं कपट सयानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग माहिं।। काल कर्म सुभाव गुन कृत दुख काहुहि नाहिं।।21।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 22

भूमि सप्त सागर मेखला। एक भूप रघुपति कोसला।। भुअन अनेक रोम प्रति जासू। यह प्रभुता कछु बहुत न तासू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो महिमा समुझत प्रभु केरी। यह बरनत हीनता घनेरी।। सोउ महिमा खगेस जिन्ह जानी। फिरी एहिं चरित तिन्हहुँ रति मानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोउ जाने कर फल यह लीला। कहहिं महा मुनिबर दमसीला।। राम राज कर सुख संपदा। बरनि न सकइ फनीस सारदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब उदार सब पर उपकारी। बिप्र चरन सेवक नर नारी।। एकनारि ब्रत रत सब झारी। ते मन बच क्रम पति हितकारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दंड जतिन्ह कर भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज। जीतहु मनहि सुनिअ अस रामचंद्र कें राज।।22।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 23

फूलहिं फरहिं सदा तरु कानन। रहहि एक सँग गज पंचानन।। खग मृग सहज बयरु बिसराई। सबन्हि परस्पर प्रीति बढ़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कूजहिं खग मृग नाना बृंदा। अभय चरहिं बन करहिं अनंदा।। सीतल सुरभि पवन बह मंदा। गूंजत अलि लै चलि मकरंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लता बिटप मागें मधु चवहीं। मनभावतो धेनु पय स्त्रवहीं।। ससि संपन्न सदा रह धरनी। त्रेताँ भइ कृतजुग कै करनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रगटीं गिरिन्ह बिबिध मनि खानी। जगदातमा भूप जग जानी।। सरिता सकल बहहिं बर बारी। सीतल अमल स्वाद सुखकारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सागर निज मरजादाँ रहहीं। डारहिं रत्न तटन्हि नर लहहीं।। सरसिज संकुल सकल तड़ागा। अति प्रसन्न दस दिसा बिभागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज। मागें बारिद देहिं जल रामचंद्र के राज।।23।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 24

कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे। दान अनेक द्विजन्ह कहँ दीन्हे।। श्रुति पथ पालक धर्म धुरंधर। गुनातीत अरु भोग पुरंदर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पति अनुकूल सदा रह सीता। सोभा खानि सुसील बिनीता।। जानति कृपासिंधु प्रभुताई। सेवति चरन कमल मन लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जद्यपि गृहँ सेवक सेवकिनी। बिपुल सदा सेवा बिधि गुनी।। निज कर गृह परिचरजा करई। रामचंद्र आयसु अनुसरई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहि बिधि कृपासिंधु सुख मानइ। सोइ कर श्री सेवा बिधि जानइ।। कौसल्यादि सासु गृह माहीं। सेवइ सबन्हि मान मद नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उमा रमा ब्रह्मादि बंदिता। जगदंबा संततमनिंदिता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु कृपा कटाच्छु सुर चाहत चितव न सोइ। राम पदारबिंद रति करति सुभावहि खोइ।।24।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 25

सेवहिं सानकूल सब भाई। राम चरन रति अति अधिकाई।। प्रभु मुख कमल बिलोकत रहहीं। कबहुँ कृपाल हमहि कछु कहहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती। नाना भाँति सिखावहिं नीती।। हरषित रहहिं नगर के लोगा। करहिं सकल सुर दुर्लभ भोगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अहनिसि बिधिहि मनावत रहहीं। श्रीरघुबीर चरन रति चहहीं।। दुइ सुत सुन्दर सीताँ जाए। लव कुस बेद पुरानन्ह गाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दोउ बिजई बिनई गुन मंदिर। हरि प्रतिबिंब मनहुँ अति सुंदर।। दुइ दुइ सुत सब भ्रातन्ह केरे। भए रूप गुन सील घनेरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार। सोइ सच्चिदानंद घन कर नर चरित उदार।।25।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 26

प्रातकाल सरऊ करि मज्जन। बैठहिं सभाँ संग द्विज सज्जन।। बेद पुरान बसिष्ट बखानहिं। सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अनुजन्ह संजुत भोजन करहीं। देखि सकल जननीं सुख भरहीं।। भरत सत्रुहन दोनउ भाई। सहित पवनसुत उपबन जाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बूझहिं बैठि राम गुन गाहा। कह हनुमान सुमति अवगाहा।। सुनत बिमल गुन अति सुख पावहिं। बहुरि बहुरि करि बिनय कहावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब कें गृह गृह होहिं पुराना। रामचरित पावन बिधि नाना।। नर अरु नारि राम गुन गानहिं। करहिं दिवस निसि जात न जानहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अवधपुरी बासिन्ह कर सुख संपदा समाज। सहस सेष नहिं कहि सकहिं जहँ नृप राम बिराज।।26।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 27

नारदादि सनकादि मुनीसा। दरसन लागि कोसलाधीसा।। दिन प्रति सकल अजोध्या आवहिं। देखि नगरु बिरागु बिसरावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जातरूप मनि रचित अटारीं। नाना रंग रुचिर गच ढारीं।। पुर चहुँ पास कोट अति सुंदर। रचे कँगूरा रंग रंग बर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नव ग्रह निकर अनीक बनाई। जनु घेरी अमरावति आई।। महि बहु रंग रचित गच काँचा। जो बिलोकि मुनिबर मन नाचा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धवल धाम ऊपर नभ चुंबत। कलस मनहुँ रबि ससि दुति निंदत।। बहु मनि रचित झरोखा भ्राजहिं। गृह गृह प्रति मनि दीप बिराजहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मनि दीप राजहिं भवन भ्राजहिं देहरीं बिद्रुम रची। मनि खंभ भीति बिरंचि बिरची कनक मनि मरकत खची।। सुंदर मनोहर मंदिरायत अजिर रुचिर फटिक रचे। प्रति द्वार द्वार कपाट पुरट बनाइ बहु बज्रन्हि खचे।।
Chhand
अर्थ / Meaning
चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे बनाइ। राम चरित जे निरख मुनि ते मन लेहिं चोराइ।।27।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 28

सुमन बाटिका सबहिं लगाई। बिबिध भाँति करि जतन बनाई।। लता ललित बहु जाति सुहाई। फूलहिं सदा बंसत कि नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गुंजत मधुकर मुखर मनोहर। मारुत त्रिबिध सदा बह सुंदर।। नाना खग बालकन्हि जिआए। बोलत मधुर उड़ात सुहाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोर हंस सारस पारावत। भवननि पर सोभा अति पावत।। जहँ तहँ देखहिं निज परिछाहीं। बहु बिधि कूजहिं नृत्य कराहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुक सारिका पढ़ावहिं बालक। कहहु राम रघुपति जनपालक।। राज दुआर सकल बिधि चारू। बीथीं चौहट रूचिर बजारू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बाजार रुचिर न बनइ बरनत बस्तु बिनु गथ पाइए। जहँ भूप रमानिवास तहँ की संपदा किमि गाइए।। बैठे बजाज सराफ बनिक अनेक मनहुँ कुबेर ते। सब सुखी सब सच्चरित सुंदर नारि नर सिसु जरठ जे।।
Chhand
अर्थ / Meaning
उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर। बाँधे घाट मनोहर स्वल्प पंक नहिं तीर।।28।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 29

दूरि फराक रुचिर सो घाटा। जहँ जल पिअहिं बाजि गज ठाटा।। पनिघट परम मनोहर नाना। तहाँ न पुरुष करहिं अस्नाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राजघाट सब बिधि सुंदर बर। मज्जहिं तहाँ बरन चारिउ नर।। तीर तीर देवन्ह के मंदिर। चहुँ दिसि तिन्ह के उपबन सुंदर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहुँ कहुँ सरिता तीर उदासी। बसहिं ग्यान रत मुनि संन्यासी।। तीर तीर तुलसिका सुहाई। बृंद बृंद बहु मुनिन्ह लगाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुर सोभा कछु बरनि न जाई। बाहेर नगर परम रुचिराई।। देखत पुरी अखिल अघ भागा। बन उपबन बापिका तड़ागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बापीं तड़ाग अनूप कूप मनोहरायत सोहहीं। सोपान सुंदर नीर निर्मल देखि सुर मुनि मोहहीं।। बहु रंग कंज अनेक खग कूजहिं मधुप गुंजारहीं। आराम रम्य पिकादि खग रव जनु पथिक हंकारहीं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
रमानाथ जहँ राजा सो पुर बरनि कि जाइ। अनिमादिक सुख संपदा रहीं अवध सब छाइ।।29।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 30

जहँ तहँ नर रघुपति गुन गावहिं। बैठि परसपर इहइ सिखावहिं।। भजहु प्रनत प्रतिपालक रामहि। सोभा सील रूप गुन धामहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जलज बिलोचन स्यामल गातहि। पलक नयन इव सेवक त्रातहि।। धृत सर रुचिर चाप तूनीरहि। संत कंज बन रबि रनधीरहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काल कराल ब्याल खगराजहि। नमत राम अकाम ममता जहि।। लोभ मोह मृगजूथ किरातहि। मनसिज करि हरि जन सुखदातहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संसय सोक निबिड़ तम भानुहि। दनुज गहन घन दहन कृसानुहि।। जनकसुता समेत रघुबीरहि। कस न भजहु भंजन भव भीरहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु बासना मसक हिम रासिहि। सदा एकरस अज अबिनासिहि।। मुनि रंजन भंजन महि भारहि। तुलसिदास के प्रभुहि उदारहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि बिधि नगर नारि नर करहिं राम गुन गान। सानुकूल सब पर रहहिं संतत कृपानिधान।।30।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 31

जब ते राम प्रताप खगेसा। उदित भयउ अति प्रबल दिनेसा।। पूरि प्रकास रहेउ तिहुँ लोका। बहुतेन्ह सुख बहुतन मन सोका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जिन्हहि सोक ते कहउँ बखानी। प्रथम अबिद्या निसा नसानी।। अघ उलूक जहँ तहाँ लुकाने। काम क्रोध कैरव सकुचाने।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिबिध कर्म गुन काल सुभाऊ। ए चकोर सुख लहहिं न काऊ।। मत्सर मान मोह मद चोरा। इन्ह कर हुनर न कवनिहुँ ओरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धरम तड़ाग ग्यान बिग्याना। ए पंकज बिकसे बिधि नाना।। सुख संतोष बिराग बिबेका। बिगत सोक ए कोक अनेका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह प्रताप रबि जाकें उर जब करइ प्रकास। पछिले बाढ़हिं प्रथम जे कहे ते पावहिं नास।।31।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 32

भ्रातन्ह सहित रामु एक बारा। संग परम प्रिय पवनकुमारा।। सुंदर उपबन देखन गए। सब तरु कुसुमित पल्लव नए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जानि समय सनकादिक आए। तेज पुंज गुन सील सुहाए।। ब्रह्मानंद सदा लयलीना। देखत बालक बहुकालीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रूप धरें जनु चारिउ बेदा। समदरसी मुनि बिगत बिभेदा।। आसा बसन ब्यसन यह तिन्हहीं। रघुपति चरित होइ तहँ सुनहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तहाँ रहे सनकादि भवानी। जहँ घटसंभव मुनिबर ग्यानी।। राम कथा मुनिबर बहु बरनी। ग्यान जोनि पावक जिमि अरनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत कीन्ह। स्वागत पूँछि पीत पट प्रभु बैठन कहँ दीन्ह।।32।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 33

कीन्ह दंडवत तीनिउँ भाई। सहित पवनसुत सुख अधिकाई।। मुनि रघुपति छबि अतुल बिलोकी। भए मगन मन सके न रोकी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
स्यामल गात सरोरुह लोचन। सुंदरता मंदिर भव मोचन।। एकटक रहे निमेष न लावहिं। प्रभु कर जोरें सीस नवावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तिन्ह कै दसा देखि रघुबीरा। स्त्रवत नयन जल पुलक सरीरा।। कर गहि प्रभु मुनिबर बैठारे। परम मनोहर बचन उचारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आजु धन्य मैं सुनहु मुनीसा। तुम्हरें दरस जाहिं अघ खीसा।। बड़े भाग पाइब सतसंगा। बिनहिं प्रयास होहिं भव भंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत संग अपबर्ग कर कामी भव कर पंथ। कहहि संत कबि कोबिद श्रुति पुरान सदग्रंथ।।33।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 34

सुनि प्रभु बचन हरषि मुनि चारी। पुलकित तन अस्तुति अनुसारी।। जय भगवंत अनंत अनामय। अनघ अनेक एक करुनामय।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जय निर्गुन जय जय गुन सागर। सुख मंदिर सुंदर अति नागर।। जय इंदिरा रमन जय भूधर। अनुपम अज अनादि सोभाकर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यान निधान अमान मानप्रद। पावन सुजस पुरान बेद बद।। तग्य कृतग्य अग्यता भंजन। नाम अनेक अनाम निरंजन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सर्ब सर्बगत सर्ब उरालय। बससि सदा हम कहुँ परिपालय।। द्वंद बिपति भव फंद बिभंजय। ह्रदि बसि राम काम मद गंजय।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परमानंद कृपायतन मन परिपूरन काम। प्रेम भगति अनपायनी देहु हमहि श्रीराम।।34।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 35

देहु भगति रघुपति अति पावनि। त्रिबिध ताप भव दाप नसावनि।। प्रनत काम सुरधेनु कलपतरु। होइ प्रसन्न दीजै प्रभु यह बरु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भव बारिधि कुंभज रघुनायक। सेवत सुलभ सकल सुख दायक।। मन संभव दारुन दुख दारय। दीनबंधु समता बिस्तारय।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आस त्रास इरिषादि निवारक। बिनय बिबेक बिरति बिस्तारक।। भूप मौलि मन मंडन धरनी। देहि भगति संसृति सरि तरनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि मन मानस हंस निरंतर। चरन कमल बंदित अज संकर।। रघुकुल केतु सेतु श्रुति रच्छक। काल करम सुभाउ गुन भच्छक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तारन तरन हरन सब दूषन। तुलसिदास प्रभु त्रिभुवन भूषन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बार बार अस्तुति करि प्रेम सहित सिरु नाइ। ब्रह्म भवन सनकादि गे अति अभीष्ट बर पाइ।।35।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 36

सनकादिक बिधि लोक सिधाए। भ्रातन्ह राम चरन सिरु नाए।। पूछत प्रभुहि सकल सकुचाहीं। चितवहिं सब मारुतसुत पाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि चहहिं प्रभु मुख कै बानी। जो सुनि होइ सकल भ्रम हानी।। अंतरजामी प्रभु सभ जाना। बूझत कहहु काह हनुमाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जोरि पानि कह तब हनुमंता। सुनहु दीनदयाल भगवंता।। नाथ भरत कछु पूँछन चहहीं। प्रस्न करत मन सकुचत अहहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्ह जानहु कपि मोर सुभाऊ। भरतहि मोहि कछु अंतर काऊ।। सुनि प्रभु बचन भरत गहे चरना। सुनहु नाथ प्रनतारति हरना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ न मोहि संदेह कछु सपनेहुँ सोक न मोह। केवल कृपा तुम्हारिहि कृपानंद संदोह।।36।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 37

करउँ कृपानिधि एक ढिठाई। मैं सेवक तुम्ह जन सुखदाई।। संतन्ह कै महिमा रघुराई। बहु बिधि बेद पुरानन्ह गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
श्रीमुख तुम्ह पुनि कीन्हि बड़ाई। तिन्ह पर प्रभुहि प्रीति अधिकाई।। सुना चहउँ प्रभु तिन्ह कर लच्छन। कृपासिंधु गुन ग्यान बिचच्छन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत असंत भेद बिलगाई। प्रनतपाल मोहि कहहु बुझाई।। संतन्ह के लच्छन सुनु भ्राता। अगनित श्रुति पुरान बिख्याता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत असंतन्हि कै असि करनी। जिमि कुठार चंदन आचरनी।। काटइ परसु मलय सुनु भाई। निज गुन देइ सुगंध बसाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड। अनल दाहि पीटत घनहिं परसु बदन यह दंड।।37।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 38

बिषय अलंपट सील गुनाकर। पर दुख दुख सुख सुख देखे पर।। सम अभूतरिपु बिमद बिरागी। लोभामरष हरष भय त्यागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोमलचित दीनन्ह पर दाया। मन बच क्रम मम भगति अमाया।। सबहि मानप्रद आपु अमानी। भरत प्रान सम मम ते प्रानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिगत काम मम नाम परायन। सांति बिरति बिनती मुदितायन।। सीतलता सरलता मयत्री। द्विज पद प्रीति धर्म जनयत्री।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ए सब लच्छन बसहिं जासु उर। जानेहु तात संत संतत फुर।। सम दम नियम नीति नहिं डोलहिं। परुष बचन कबहूँ नहिं बोलहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निंदा अस्तुति उभय सम ममता मम पद कंज। ते सज्जन मम प्रानप्रिय गुन मंदिर सुख पुंज।।38।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 39

सनहु असंतन्ह केर सुभाऊ। भूलेहुँ संगति करिअ न काऊ।। तिन्ह कर संग सदा दुखदाई। जिमि कलपहि घालइ हरहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खलन्ह हृदयँ अति ताप बिसेषी। जरहिं सदा पर संपति देखी।। जहँ कहुँ निंदा सुनहिं पराई। हरषहिं मनहुँ परी निधि पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काम क्रोध मद लोभ परायन। निर्दय कपटी कुटिल मलायन।। बयरु अकारन सब काहू सों। जो कर हित अनहित ताहू सों।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
झूठइ लेना झूठइ देना। झूठइ भोजन झूठ चबेना।। बोलहिं मधुर बचन जिमि मोरा। खाइ महा अति हृदय कठोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पर द्रोही पर दार रत पर धन पर अपबाद। ते नर पाँवर पापमय देह धरें मनुजाद।।39।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 40

लोभइ ओढ़न लोभइ डासन। सिस्त्रोदर पर जमपुर त्रास न।। काहू की जौं सुनहिं बड़ाई। स्वास लेहिं जनु जूड़ी आई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जब काहू कै देखहिं बिपती। सुखी भए मानहुँ जग नृपती।। स्वारथ रत परिवार बिरोधी। लंपट काम लोभ अति क्रोधी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मातु पिता गुर बिप्र न मानहिं। आपु गए अरु घालहिं आनहिं।। करहिं मोह बस द्रोह परावा। संत संग हरि कथा न भावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अवगुन सिंधु मंदमति कामी। बेद बिदूषक परधन स्वामी।। बिप्र द्रोह पर द्रोह बिसेषा। दंभ कपट जियँ धरें सुबेषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेता नाहिं। द्वापर कछुक बृंद बहु होइहहिं कलिजुग माहिं।।40।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 41

पर हित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।। निर्नय सकल पुरान बेद कर। कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नर सरीर धरि जे पर पीरा। करहिं ते सहहिं महा भव भीरा।। करहिं मोह बस नर अघ नाना। स्वारथ रत परलोक नसाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कालरूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता। सुभ अरु असुभ कर्म फल दाता।। अस बिचारि जे परम सयाने। भजहिं मोहि संसृत दुख जाने।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
त्यागहिं कर्म सुभासुभ दायक। भजहिं मोहि सुर नर मुनि नायक।। संत असंतन्ह के गुन भाषे। ते न परहिं भव जिन्ह लखि राखे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनहु तात माया कृत गुन अरु दोष अनेक। गुन यह उभय न देखिअहिं देखिअ सो अबिबेक।।41।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 42

श्रीमुख बचन सुनत सब भाई। हरषे प्रेम न हृदयँ समाई।। करहिं बिनय अति बारहिं बारा। हनूमान हियँ हरष अपारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि रघुपति निज मंदिर गए। एहि बिधि चरित करत नित नए।। बार बार नारद मुनि आवहिं। चरित पुनीत राम के गावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नित नव चरन देखि मुनि जाहीं। ब्रह्मलोक सब कथा कहाहीं।। सुनि बिरंचि अतिसय सुख मानहिं। पुनि पुनि तात करहु गुन गानहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सनकादिक नारदहि सराहहिं। जद्यपि ब्रह्म निरत मुनि आहहिं।। सुनि गुन गान समाधि बिसारी।। सादर सुनहिं परम अधिकारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जीवनमुक्त ब्रह्मपर चरित सुनहिं तजि ध्यान। जे हरि कथाँ न करहिं रति तिन्ह के हिय पाषान।।42।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 43

एक बार रघुनाथ बोलाए। गुर द्विज पुरबासी सब आए।। बैठे गुर मुनि अरु द्विज सज्जन। बोले बचन भगत भव भंजन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सनहु सकल पुरजन मम बानी। कहउँ न कछु ममता उर आनी।। नहिं अनीति नहिं कछु प्रभुताई। सुनहु करहु जो तुम्हहि सोहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ सेवक प्रियतम मम सोई। मम अनुसासन मानै जोई।। जौं अनीति कछु भाषौं भाई। तौं मोहि बरजहु भय बिसराई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा।। साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न जेहिं परलोक सँवारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो परत्र दुख पावइ सिर धुनि धुनि पछिताइ। कालहि कर्महि ईस्वरहि मिथ्या दोष लगाइ।।43।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 44

एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई।। नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं। पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताहि कबहुँ भल कहइ न कोई। गुंजा ग्रहइ परस मनि खोई।। आकर चारि लच्छ चौरासी। जोनि भ्रमत यह जिव अबिनासी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
फिरत सदा माया कर प्रेरा। काल कर्म सुभाव गुन घेरा।। कबहुँक करि करुना नर देही। देत ईस बिनु हेतु सनेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नर तनु भव बारिधि कहुँ बेरो। सन्मुख मरुत अनुग्रह मेरो।। करनधार सदगुर दृढ़ नावा। दुर्लभ साज सुलभ करि पावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जो न तरै भव सागर नर समाज अस पाइ। सो कृत निंदक मंदमति आत्माहन गति जाइ।।44।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 45

जौं परलोक इहाँ सुख चहहू। सुनि मम बचन ह्रृदयँ दृढ़ गहहू।। सुलभ सुखद मारग यह भाई। भगति मोरि पुरान श्रुति गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यान अगम प्रत्यूह अनेका। साधन कठिन न मन कहुँ टेका।। करत कष्ट बहु पावइ कोऊ। भक्ति हीन मोहि प्रिय नहिं सोऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी। बिनु सतसंग न पावहिं प्रानी।। पुन्य पुंज बिनु मिलहिं न संता। सतसंगति संसृति कर अंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुन्य एक जग महुँ नहिं दूजा। मन क्रम बचन बिप्र पद पूजा।। सानुकूल तेहि पर मुनि देवा। जो तजि कपटु करइ द्विज सेवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
औरउ एक गुपुत मत सबहि कहउँ कर जोरि। संकर भजन बिना नर भगति न पावइ मोरि।।45।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 46

कहहु भगति पथ कवन प्रयासा। जोग न मख जप तप उपवासा।। सरल सुभाव न मन कुटिलाई। जथा लाभ संतोष सदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोर दास कहाइ नर आसा। करइ तौ कहहु कहा बिस्वासा।। बहुत कहउँ का कथा बढ़ाई। एहि आचरन बस्य मैं भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बैर न बिग्रह आस न त्रासा। सुखमय ताहि सदा सब आसा।। अनारंभ अनिकेत अमानी। अनघ अरोष दच्छ बिग्यानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रीति सदा सज्जन संसर्गा। तृन सम बिषय स्वर्ग अपबर्गा।। भगति पच्छ हठ नहिं सठताई। दुष्ट तर्क सब दूरि बहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मम गुन ग्राम नाम रत गत ममता मद मोह। ता कर सुख सोइ जानइ परानंद संदोह।।46।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 47

सुनत सुधासम बचन राम के। गहे सबनि पद कृपाधाम के।। जननि जनक गुर बंधु हमारे। कृपा निधान प्रान ते प्यारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तनु धनु धाम राम हितकारी। सब बिधि तुम्ह प्रनतारति हारी।। असि सिख तुम्ह बिनु देइ न कोऊ। मातु पिता स्वारथ रत ओऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हेतु रहित जग जुग उपकारी। तुम्ह तुम्हार सेवक असुरारी।। स्वारथ मीत सकल जग माहीं। सपनेहुँ प्रभु परमारथ नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सबके बचन प्रेम रस साने। सुनि रघुनाथ हृदयँ हरषाने।। निज निज गृह गए आयसु पाई। बरनत प्रभु बतकही सुहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
-उमा अवधबासी नर नारि कृतारथ रूप। ब्रह्म सच्चिदानंद घन रघुनायक जहँ भूप।।47।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 48

एक बार बसिष्ट मुनि आए। जहाँ राम सुखधाम सुहाए।। अति आदर रघुनायक कीन्हा। पद पखारि पादोदक लीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम सुनहु मुनि कह कर जोरी। कृपासिंधु बिनती कछु मोरी।। देखि देखि आचरन तुम्हारा। होत मोह मम हृदयँ अपारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
महिमा अमित बेद नहिं जाना। मैं केहि भाँति कहउँ भगवाना।। उपरोहित्य कर्म अति मंदा। बेद पुरान सुमृति कर निंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जब न लेउँ मैं तब बिधि मोही। कहा लाभ आगें सुत तोही।। परमातमा ब्रह्म नर रूपा। होइहि रघुकुल भूषन भूपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
-तब मैं हृदयँ बिचारा जोग जग्य ब्रत दान। जा कहुँ करिअ सो पैहउँ धर्म न एहि सम आन।।48।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 49

जप तप नियम जोग निज धर्मा। श्रुति संभव नाना सुभ कर्मा।। ग्यान दया दम तीरथ मज्जन। जहँ लगि धर्म कहत श्रुति सज्जन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आगम निगम पुरान अनेका। पढ़े सुने कर फल प्रभु एका।। तब पद पंकज प्रीति निरंतर। सब साधन कर यह फल सुंदर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छूटइ मल कि मलहि के धोएँ। घृत कि पाव कोइ बारि बिलोएँ।। प्रेम भगति जल बिनु रघुराई। अभिअंतर मल कबहुँ न जाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ सर्बग्य तग्य सोइ पंडित। सोइ गुन गृह बिग्यान अखंडित।। दच्छ सकल लच्छन जुत सोई। जाकें पद सरोज रति होई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ एक बर मागउँ राम कृपा करि देहु। जन्म जन्म प्रभु पद कमल कबहुँ घटै जनि नेहु।।49।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 50

अस कहि मुनि बसिष्ट गृह आए। कृपासिंधु के मन अति भाए।। हनूमान भरतादिक भ्राता। संग लिए सेवक सुखदाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि कृपाल पुर बाहेर गए। गज रथ तुरग मगावत भए।। देखि कृपा करि सकल सराहे। दिए उचित जिन्ह जिन्ह तेइ चाहे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरन सकल श्रम प्रभु श्रम पाई। गए जहाँ सीतल अवँराई।। भरत दीन्ह निज बसन डसाई। बैठे प्रभु सेवहिं सब भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मारुतसुत तब मारूत करई। पुलक बपुष लोचन जल भरई।। हनूमान सम नहिं बड़भागी। नहिं कोउ राम चरन अनुरागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गिरिजा जासु प्रीति सेवकाई। बार बार प्रभु निज मुख गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहिं अवसर मुनि नारद आए करतल बीन। गावन लगे राम कल कीरति सदा नबीन।।50।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 51

मामवलोकय पंकज लोचन। कृपा बिलोकनि सोच बिमोचन।। नील तामरस स्याम काम अरि। हृदय कंज मकरंद मधुप हरि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जातुधान बरूथ बल भंजन। मुनि सज्जन रंजन अघ गंजन।। भूसुर ससि नव बृंद बलाहक। असरन सरन दीन जन गाहक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भुज बल बिपुल भार महि खंडित। खर दूषन बिराध बध पंडित।। रावनारि सुखरूप भूपबर। जय दसरथ कुल कुमुद सुधाकर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुजस पुरान बिदित निगमागम। गावत सुर मुनि संत समागम।। कारुनीक ब्यलीक मद खंडन। सब बिधि कुसल कोसला मंडन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कलि मल मथन नाम ममताहन। तुलसीदास प्रभु पाहि प्रनत जन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रेम सहित मुनि नारद बरनि राम गुन ग्राम। सोभासिंधु हृदयँ धरि गए जहाँ बिधि धाम।।51।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 52

गिरिजा सुनहु बिसद यह कथा। मैं सब कही मोरि मति जथा।। राम चरित सत कोटि अपारा। श्रुति सारदा न बरनै पारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम अनंत अनंत गुनानी। जन्म कर्म अनंत नामानी।। जल सीकर महि रज गनि जाहीं। रघुपति चरित न बरनि सिराहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिमल कथा हरि पद दायनी। भगति होइ सुनि अनपायनी।। उमा कहिउँ सब कथा सुहाई। जो भुसुंडि खगपतिहि सुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कछुक राम गुन कहेउँ बखानी। अब का कहौं सो कहहु भवानी।। सुनि सुभ कथा उमा हरषानी। बोली अति बिनीत मृदु बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धन्य धन्य मैं धन्य पुरारी। सुनेउँ राम गुन भव भय हारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्हरी कृपाँ कृपायतन अब कृतकृत्य न मोह। जानेउँ राम प्रताप प्रभु चिदानंद संदोह।।52(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
नाथ तवानन ससि स्रवत कथा सुधा रघुबीर। श्रवन पुटन्हि मन पान करि नहिं अघात मतिधीर।।52(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 53

राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं।। जीवनमुक्त महामुनि जेऊ। हरि गुन सुनहीं निरंतर तेऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भव सागर चह पार जो पावा। राम कथा ता कहँ दृढ़ नावा।। बिषइन्ह कहँ पुनि हरि गुन ग्रामा। श्रवन सुखद अरु मन अभिरामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
श्रवनवंत अस को जग माहीं। जाहि न रघुपति चरित सोहाहीं।। ते जड़ जीव निजात्मक घाती। जिन्हहि न रघुपति कथा सोहाती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरिचरित्र मानस तुम्ह गावा। सुनि मैं नाथ अमिति सुख पावा।। तुम्ह जो कही यह कथा सुहाई। कागभसुंडि गरुड़ प्रति गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिरति ग्यान बिग्यान दृढ़ राम चरन अति नेह। बायस तन रघुपति भगति मोहि परम संदेह।।53।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 54

नर सहस्त्र महँ सुनहु पुरारी। कोउ एक होइ धर्म ब्रतधारी।। धर्मसील कोटिक महँ कोई। बिषय बिमुख बिराग रत होई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोटि बिरक्त मध्य श्रुति कहई। सम्यक ग्यान सकृत कोउ लहई।। ग्यानवंत कोटिक महँ कोऊ। जीवनमुक्त सकृत जग सोऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तिन्ह सहस्त्र महुँ सब सुख खानी। दुर्लभ ब्रह्मलीन बिग्यानी।। धर्मसील बिरक्त अरु ग्यानी। जीवनमुक्त ब्रह्मपर प्रानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब ते सो दुर्लभ सुरराया। राम भगति रत गत मद माया।। सो हरिभगति काग किमि पाई। बिस्वनाथ मोहि कहहु बुझाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम परायन ग्यान रत गुनागार मति धीर। नाथ कहहु केहि कारन पायउ काक सरीर।।54।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 55

यह प्रभु चरित पवित्र सुहावा। कहहु कृपाल काग कहँ पावा।। तुम्ह केहि भाँति सुना मदनारी। कहहु मोहि अति कौतुक भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गरुड़ महाग्यानी गुन रासी। हरि सेवक अति निकट निवासी।। तेहिं केहि हेतु काग सन जाई। सुनी कथा मुनि निकर बिहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहहु कवन बिधि भा संबादा। दोउ हरिभगत काग उरगादा।। गौरि गिरा सुनि सरल सुहाई। बोले सिव सादर सुख पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धन्य सती पावन मति तोरी। रघुपति चरन प्रीति नहिं थोरी।। सुनहु परम पुनीत इतिहासा। जो सुनि सकल लोक भ्रम नासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उपजइ राम चरन बिस्वासा। भव निधि तर नर बिनहिं प्रयासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ऐसिअ प्रस्न बिहंगपति कीन्ह काग सन जाइ। सो सब सादर कहिहउँ सुनहु उमा मन लाइ।।55।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 56

मैं जिमि कथा सुनी भव मोचनि। सो प्रसंग सुनु सुमुखि सुलोचनि।। प्रथम दच्छ गृह तव अवतारा। सती नाम तब रहा तुम्हारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दच्छ जग्य तब भा अपमाना। तुम्ह अति क्रोध तजे तब प्राना।। मम अनुचरन्ह कीन्ह मख भंगा। जानहु तुम्ह सो सकल प्रसंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब अति सोच भयउ मन मोरें। दुखी भयउँ बियोग प्रिय तोरें।। सुंदर बन गिरि सरित तड़ागा। कौतुक देखत फिरउँ बेरागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गिरि सुमेर उत्तर दिसि दूरी। नील सैल एक सुन्दर भूरी।। तासु कनकमय सिखर सुहाए। चारि चारु मोरे मन भाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तिन्ह पर एक एक बिटप बिसाला। बट पीपर पाकरी रसाला।। सैलोपरि सर सुंदर सोहा। मनि सोपान देखि मन मोहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
-सीतल अमल मधुर जल जलज बिपुल बहुरंग। कूजत कल रव हंस गन गुंजत मजुंल भृंग।।56।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 57

तेहिं गिरि रुचिर बसइ खग सोई। तासु नास कल्पांत न होई।। माया कृत गुन दोष अनेका। मोह मनोज आदि अबिबेका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रहे ब्यापि समस्त जग माहीं। तेहि गिरि निकट कबहुँ नहिं जाहीं।। तहँ बसि हरिहि भजइ जिमि कागा। सो सुनु उमा सहित अनुरागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पीपर तरु तर ध्यान सो धरई। जाप जग्य पाकरि तर करई।। आँब छाहँ कर मानस पूजा। तजि हरि भजनु काजु नहिं दूजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बर तर कह हरि कथा प्रसंगा। आवहिं सुनहिं अनेक बिहंगा।। राम चरित बिचीत्र बिधि नाना। प्रेम सहित कर सादर गाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनहिं सकल मति बिमल मराला। बसहिं निरंतर जे तेहिं ताला।। जब मैं जाइ सो कौतुक देखा। उर उपजा आनंद बिसेषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब कछु काल मराल तनु धरि तहँ कीन्ह निवास। सादर सुनि रघुपति गुन पुनि आयउँ कैलास।।57।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 58

गिरिजा कहेउँ सो सब इतिहासा। मैं जेहि समय गयउँ खग पासा।। अब सो कथा सुनहु जेही हेतू। गयउ काग पहिं खग कुल केतू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा। समुझत चरित होति मोहि ब्रीड़ा।। इंद्रजीत कर आपु बँधायो। तब नारद मुनि गरुड़ पठायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बंधन काटि गयो उरगादा। उपजा हृदयँ प्रचंड बिषादा।। प्रभु बंधन समुझत बहु भाँती। करत बिचार उरग आराती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्यापक ब्रह्म बिरज बागीसा। माया मोह पार परमीसा।। सो अवतार सुनेउँ जग माहीं। देखेउँ सो प्रभाव कछु नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
-भव बंधन ते छूटहिं नर जपि जा कर नाम। खर्च निसाचर बाँधेउ नागपास सोइ राम।।58।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 59

नाना भाँति मनहि समुझावा। प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा।। खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई। भयउ मोहबस तुम्हरिहिं नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं।। सुनि नारदहि लागि अति दाया। सुनु खग प्रबल राम कै माया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई। बरिआई बिमोह मन करई।। जेहिं बहु बार नचावा मोही। सोइ ब्यापी बिहंगपति तोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
महामोह उपजा उर तोरें। मिटिहि न बेगि कहें खग मोरें।। चतुरानन पहिं जाहु खगेसा। सोइ करेहु जेहि होइ निदेसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस कहि चले देवरिषि करत राम गुन गान। हरि माया बल बरनत पुनि पुनि परम सुजान।।59।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 60

तब खगपति बिरंचि पहिं गयऊ। निज संदेह सुनावत भयऊ।। सुनि बिरंचि रामहि सिरु नावा। समुझि प्रताप प्रेम अति छावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मन महुँ करइ बिचार बिधाता। माया बस कबि कोबिद ग्याता।। हरि माया कर अमिति प्रभावा। बिपुल बार जेहिं मोहि नचावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अग जगमय जग मम उपराजा। नहिं आचरज मोह खगराजा।। तब बोले बिधि गिरा सुहाई। जान महेस राम प्रभुताई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बैनतेय संकर पहिं जाहू। तात अनत पूछहु जनि काहू।। तहँ होइहि तव संसय हानी। चलेउ बिहंग सुनत बिधि बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परमातुर बिहंगपति आयउ तब मो पास। जात रहेउँ कुबेर गृह रहिहु उमा कैलास।।60।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 61

तेहिं मम पद सादर सिरु नावा। पुनि आपन संदेह सुनावा।। सुनि ता करि बिनती मृदु बानी। परेम सहित मैं कहेउँ भवानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मिलेहु गरुड़ मारग महँ मोही। कवन भाँति समुझावौं तोही।। तबहि होइ सब संसय भंगा। जब बहु काल करिअ सतसंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनिअ तहाँ हरि कथा सुहाई। नाना भाँति मुनिन्ह जो गाई।। जेहि महुँ आदि मध्य अवसाना। प्रभु प्रतिपाद्य राम भगवाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नित हरि कथा होत जहँ भाई। पठवउँ तहाँ सुनहि तुम्ह जाई।। जाइहि सुनत सकल संदेहा। राम चरन होइहि अति नेहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिनु सतसंग न हरि कथा तेहि बिनु मोह न भाग। मोह गएँ बिनु राम पद होइ न दृढ़ अनुराग।।61।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 62

मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा। किएँ जोग तप ग्यान बिरागा।। उत्तर दिसि सुंदर गिरि नीला। तहँ रह काकभुसुंडि सुसीला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम भगति पथ परम प्रबीना। ग्यानी गुन गृह बहु कालीना।। राम कथा सो कहइ निरंतर। सादर सुनहिं बिबिध बिहंगबर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जाइ सुनहु तहँ हरि गुन भूरी। होइहि मोह जनित दुख दूरी।। मैं जब तेहि सब कहा बुझाई। चलेउ हरषि मम पद सिरु नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताते उमा न मैं समुझावा। रघुपति कृपाँ मरमु मैं पावा।। होइहि कीन्ह कबहुँ अभिमाना। सो खौवै चह कृपानिधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कछु तेहि ते पुनि मैं नहिं राखा। समुझइ खग खगही कै भाषा।। प्रभु माया बलवंत भवानी। जाहि न मोह कवन अस ग्यानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यानि भगत सिरोमनि त्रिभुवनपति कर जान। ताहि मोह माया नर पावँर करहिं गुमान।।62(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सिव बिरंचि कहुँ मोहइ को है बपुरा आन। अस जियँ जानि भजहिं मुनि माया पति भगवान।।62(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 63

गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा। मति अकुंठ हरि भगति अखंडा।। देखि सैल प्रसन्न मन भयऊ। माया मोह सोच सब गयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करि तड़ाग मज्जन जलपाना। बट तर गयउ हृदयँ हरषाना।। बृद्ध बृद्ध बिहंग तहँ आए। सुनै राम के चरित सुहाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कथा अरंभ करै सोइ चाहा। तेही समय गयउ खगनाहा।। आवत देखि सकल खगराजा। हरषेउ बायस सहित समाजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति आदर खगपति कर कीन्हा। स्वागत पूछि सुआसन दीन्हा।। करि पूजा समेत अनुरागा। मधुर बचन तब बोलेउ कागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ कृतारथ भयउँ मैं तव दरसन खगराज। आयसु देहु सो करौं अब प्रभु आयहु केहि काज।।63(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सदा कृतारथ रूप तुम्ह कह मृदु बचन खगेस। जेहि कै अस्तुति सादर निज मुख कीन्हि महेस।।63(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 64

सुनहु तात जेहि कारन आयउँ। सो सब भयउ दरस तव पायउँ।। देखि परम पावन तव आश्रम। गयउ मोह संसय नाना भ्रम।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब श्रीराम कथा अति पावनि। सदा सुखद दुख पुंज नसावनि।। सादर तात सुनावहु मोही। बार बार बिनवउँ प्रभु तोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता। सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता।। भयउ तासु मन परम उछाहा। लाग कहै रघुपति गुन गाहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रथमहिं अति अनुराग भवानी। रामचरित सर कहेसि बखानी।। पुनि नारद कर मोह अपारा। कहेसि बहुरि रावन अवतारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु अवतार कथा पुनि गाई। तब सिसु चरित कहेसि मन लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बालचरित कहिं बिबिध बिधि मन महँ परम उछाह। रिषि आगवन कहेसि पुनि श्री रघुबीर बिबाह।।64।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 65

बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा। पुनि नृप बचन राज रस भंगा।। पुरबासिन्ह कर बिरह बिषादा। कहेसि राम लछिमन संबादा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिपिन गवन केवट अनुरागा। सुरसरि उतरि निवास प्रयागा।। बालमीक प्रभु मिलन बखाना। चित्रकूट जिमि बसे भगवाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना।। करि नृप क्रिया संग पुरबासी। भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए। लै पादुका अवधपुर आए।। भरत रहनि सुरपति सुत करनी। प्रभु अरु अत्रि भेंट पुनि बरनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहि बिराध बध जेहि बिधि देह तजी सरभंग।। बरनि सुतीछन प्रीति पुनि प्रभु अगस्ति सतसंग।।65।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 66

कहि दंडक बन पावनताई। गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई।। पुनि प्रभु पंचवटीं कृत बासा। भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि लछिमन उपदेस अनूपा। सूपनखा जिमि कीन्हि कुरूपा।। खर दूषन बध बहुरि बखाना। जिमि सब मरमु दसानन जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दसकंधर मारीच बतकहीं। जेहि बिधि भई सो सब तेहिं कही।। पुनि माया सीता कर हरना। श्रीरघुबीर बिरह कछु बरना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही। बधि कबंध सबरिहि गति दीन्ही।। बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा। जेहि बिधि गए सरोबर तीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु नारद संबाद कहि मारुति मिलन प्रसंग। पुनि सुग्रीव मिताई बालि प्रान कर भंग।।66((क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कपिहि तिलक करि प्रभु कृत सैल प्रबरषन बास। बरनन बर्षा सरद अरु राम रोष कपि त्रास।।66(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 67

जेहि बिधि कपिपति कीस पठाए। सीता खोज सकल दिसि धाए।। बिबर प्रबेस कीन्ह जेहि भाँती। कपिन्ह बहोरि मिला संपाती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि सब कथा समीरकुमारा। नाघत भयउ पयोधि अपारा।। लंकाँ कपि प्रबेस जिमि कीन्हा। पुनि सीतहि धीरजु जिमि दीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बन उजारि रावनहि प्रबोधी। पुर दहि नाघेउ बहुरि पयोधी।। आए कपि सब जहँ रघुराई। बैदेही कि कुसल सुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सेन समेति जथा रघुबीरा। उतरे जाइ बारिनिधि तीरा।। मिला बिभीषन जेहि बिधि आई। सागर निग्रह कथा सुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सेतु बाँधि कपि सेन जिमि उतरी सागर पार। गयउ बसीठी बीरबर जेहि बिधि बालिकुमार।।67(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
निसिचर कीस लराई बरनिसि बिबिध प्रकार। कुंभकरन घननाद कर बल पौरुष संघार।।67(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 68

निसिचर निकर मरन बिधि नाना। रघुपति रावन समर बखाना।। रावन बध मंदोदरि सोका। राज बिभीषण देव असोका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता रघुपति मिलन बहोरी। सुरन्ह कीन्ह अस्तुति कर जोरी।। पुनि पुष्पक चढ़ि कपिन्ह समेता। अवध चले प्रभु कृपा निकेता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहि बिधि राम नगर निज आए। बायस बिसद चरित सब गाए।। कहेसि बहोरि राम अभिषैका। पुर बरनत नृपनीति अनेका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कथा समस्त भुसुंड बखानी। जो मैं तुम्ह सन कही भवानी।। सुनि सब राम कथा खगनाहा। कहत बचन मन परम उछाहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गयउ मोर संदेह सुनेउँ सकल रघुपति चरित। भयउ राम पद नेह तव प्रसाद बायस तिलक।।68(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
मोहि भयउ अति मोह प्रभु बंधन रन महुँ निरखि। चिदानंद संदोह राम बिकल कारन कवन। 68(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 69

देखि चरित अति नर अनुसारी। भयउ हृदयँ मम संसय भारी।। सोइ भ्रम अब हित करि मैं माना। कीन्ह अनुग्रह कृपानिधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जो अति आतप ब्याकुल होई। तरु छाया सुख जानइ सोई।। जौं नहिं होत मोह अति मोही। मिलतेउँ तात कवन बिधि तोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनतेउँ किमि हरि कथा सुहाई। अति बिचित्र बहु बिधि तुम्ह गाई।। निगमागम पुरान मत एहा। कहहिं सिद्ध मुनि नहिं संदेहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही। चितवहिं राम कृपा करि जेही।। राम कृपाँ तव दरसन भयऊ। तव प्रसाद सब संसय गयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि बिहंगपति बानी सहित बिनय अनुराग। पुलक गात लोचन सजल मन हरषेउ अति काग।।69(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
श्रोता सुमति सुसील सुचि कथा रसिक हरि दास। पाइ उमा अति गोप्यमपि सज्जन करहिं प्रकास।।69(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 70

बोलेउ काकभसुंड बहोरी। नभग नाथ पर प्रीति न थोरी।। सब बिधि नाथ पूज्य तुम्ह मेरे। कृपापात्र रघुनायक केरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्हहि न संसय मोह न माया। मो पर नाथ कीन्ह तुम्ह दाया।। पठइ मोह मिस खगपति तोही। रघुपति दीन्हि बड़ाई मोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्ह निज मोह कही खग साईं। सो नहिं कछु आचरज गोसाईं।। नारद भव बिरंचि सनकादी। जे मुनिनायक आतमबादी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोह न अंध कीन्ह केहि केही। को जग काम नचाव न जेही।। तृस्नाँ केहि न कीन्ह बौराहा। केहि कर हृदय क्रोध नहिं दाहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यानी तापस सूर कबि कोबिद गुन आगार। केहि कै लौभ बिडंबना कीन्हि न एहिं संसार।।70(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
श्री मद बक्र न कीन्ह केहि प्रभुता बधिर न काहि। मृगलोचनि के नैन सर को अस लाग न जाहि।।70(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 71

गुन कृत सन्यपात नहिं केही। कोउ न मान मद तजेउ निबेही।। जोबन ज्वर केहि नहिं बलकावा। ममता केहि कर जस न नसावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मच्छर काहि कलंक न लावा। काहि न सोक समीर डोलावा।। चिंता साँपिनि को नहिं खाया। को जग जाहि न ब्यापी माया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कीट मनोरथ दारु सरीरा। जेहि न लाग घुन को अस धीरा।। सुत बित लोक ईषना तीनी। केहि के मति इन्ह कृत न मलीनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह सब माया कर परिवारा। प्रबल अमिति को बरनै पारा।। सिव चतुरानन जाहि डेराहीं। अपर जीव केहि लेखे माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक प्रचंड।। सेनापति कामादि भट दंभ कपट पाषंड।।71(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सो दासी रघुबीर कै समुझें मिथ्या सोपि। छूट न राम कृपा बिनु नाथ कहउँ पद रोपि।।71(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 72

जो माया सब जगहि नचावा। जासु चरित लखि काहुँ न पावा।। सोइ प्रभु भ्रू बिलास खगराजा। नाच नटी इव सहित समाजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ सच्चिदानंद घन रामा। अज बिग्यान रूपो बल धामा।। ब्यापक ब्याप्य अखंड अनंता। अखिल अमोघसक्ति भगवंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अगुन अदभ्र गिरा गोतीता। सबदरसी अनवद्य अजीता।। निर्मम निराकार निरमोहा। नित्य निरंजन सुख संदोहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रकृति पार प्रभु सब उर बासी। ब्रह्म निरीह बिरज अबिनासी।। इहाँ मोह कर कारन नाहीं। रबि सन्मुख तम कबहुँ कि जाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप। किए चरित पावन परम प्राकृत नर अनुरूप।।72(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जथा अनेक बेष धरि नृत्य करइ नट कोइ। सोइ सोइ भाव देखावइ आपुन होइ न सोइ।।72(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 73

असि रघुपति लीला उरगारी। दनुज बिमोहनि जन सुखकारी।। जे मति मलिन बिषयबस कामी। प्रभु मोह धरहिं इमि स्वामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नयन दोष जा कहँ जब होई। पीत बरन ससि कहुँ कह सोई।। जब जेहि दिसि भ्रम होइ खगेसा। सो कह पच्छिम उयउ दिनेसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नौकारूढ़ चलत जग देखा। अचल मोह बस आपुहि लेखा।। बालक भ्रमहिं न भ्रमहिं गृहादीं। कहहिं परस्पर मिथ्याबादी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरि बिषइक अस मोह बिहंगा। सपनेहुँ नहिं अग्यान प्रसंगा।। मायाबस मतिमंद अभागी। हृदयँ जमनिका बहुबिधि लागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ते सठ हठ बस संसय करहीं। निज अग्यान राम पर धरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काम क्रोध मद लोभ रत गृहासक्त दुखरूप। ते किमि जानहिं रघुपतिहि मूढ़ परे तम कूप।।73(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
निर्गुन रूप सुलभ अति सगुन जान नहिं कोइ। सुगम अगम नाना चरित सुनि मुनि मन भ्रम होइ।।73(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 74

सुनु खगेस रघुपति प्रभुताई। कहउँ जथामति कथा सुहाई।। जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। सोउ सब कथा सुनावउँ तोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम कृपा भाजन तुम्ह ताता। हरि गुन प्रीति मोहि सुखदाता।। ताते नहिं कछु तुम्हहिं दुरावउँ। परम रहस्य मनोहर गावउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनहु राम कर सहज सुभाऊ। जन अभिमान न राखहिं काऊ।। संसृत मूल सूलप्रद नाना। सकल सोक दायक अभिमाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताते करहिं कृपानिधि दूरी। सेवक पर ममता अति भूरी।। जिमि सिसु तन ब्रन होइ गोसाई। मातु चिराव कठिन की नाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जदपि प्रथम दुख पावइ रोवइ बाल अधीर। ब्याधि नास हित जननी गनति न सो सिसु पीर।।74(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
तिमि रघुपति निज दासकर हरहिं मान हित लागि। तुलसिदास ऐसे प्रभुहि कस न भजहु भ्रम त्यागि।।74(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 75

राम कृपा आपनि जड़ताई। कहउँ खगेस सुनहु मन लाई।। जब जब राम मनुज तनु धरहीं। भक्त हेतु लीला बहु करहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब तब अवधपुरी मैं ज़ाऊँ। बालचरित बिलोकि हरषाऊँ।। जन्म महोत्सव देखउँ जाई। बरष पाँच तहँ रहउँ लोभाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इष्टदेव मम बालक रामा। सोभा बपुष कोटि सत कामा।। निज प्रभु बदन निहारि निहारी। लोचन सुफल करउँ उरगारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लघु बायस बपु धरि हरि संगा। देखउँ बालचरित बहुरंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लरिकाईं जहँ जहँ फिरहिं तहँ तहँ संग उड़ाउँ। जूठनि परइ अजिर महँ सो उठाइ करि खाउँ।।75(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
एक बार अतिसय सब चरित किए रघुबीर। सुमिरत प्रभु लीला सोइ पुलकित भयउ सरीर।।75(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 76

कहइ भसुंड सुनहु खगनायक। रामचरित सेवक सुखदायक।। नृपमंदिर सुंदर सब भाँती। खचित कनक मनि नाना जाती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बरनि न जाइ रुचिर अँगनाई। जहँ खेलहिं नित चारिउ भाई।। बालबिनोद करत रघुराई। बिचरत अजिर जननि सुखदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मरकत मृदुल कलेवर स्यामा। अंग अंग प्रति छबि बहु कामा।। नव राजीव अरुन मृदु चरना। पदज रुचिर नख ससि दुति हरना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ललित अंक कुलिसादिक चारी। नूपुर चारू मधुर रवकारी।। चारु पुरट मनि रचित बनाई। कटि किंकिन कल मुखर सुहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रेखा त्रय सुन्दर उदर नाभी रुचिर गँभीर। उर आयत भ्राजत बिबिध बाल बिभूषन चीर।।76।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 77

अरुन पानि नख करज मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर।। कंध बाल केहरि दर ग्रीवा। चारु चिबुक आनन छबि सींवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कलबल बचन अधर अरुनारे। दुइ दुइ दसन बिसद बर बारे।। ललित कपोल मनोहर नासा। सकल सुखद ससि कर सम हासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नील कंज लोचन भव मोचन। भ्राजत भाल तिलक गोरोचन।। बिकट भृकुटि सम श्रवन सुहाए। कुंचित कच मेचक छबि छाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पीत झीनि झगुली तन सोही। किलकनि चितवनि भावति मोही।। रूप रासि नृप अजिर बिहारी। नाचहिं निज प्रतिबिंब निहारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोहि सन करहीं बिबिध बिधि क्रीड़ा। बरनत मोहि होति अति ब्रीड़ा।। किलकत मोहि धरन जब धावहिं। चलउँ भागि तब पूप देखावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आवत निकट हँसहिं प्रभु भाजत रुदन कराहिं। जाउँ समीप गहन पद फिरि फिरि चितइ पराहिं।।77(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
प्राकृत सिसु इव लीला देखि भयउ मोहि मोह। कवन चरित्र करत प्रभु चिदानंद संदोह।।77(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 78

एतना मन आनत खगराया। रघुपति प्रेरित ब्यापी माया।। सो माया न दुखद मोहि काहीं। आन जीव इव संसृत नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ इहाँ कछु कारन आना। सुनहु सो सावधान हरिजाना।। ग्यान अखंड एक सीताबर। माया बस्य जीव सचराचर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं सब कें रह ग्यान एकरस। ईस्वर जीवहि भेद कहहु कस।। माया बस्य जीव अभिमानी। ईस बस्य माया गुनखानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परबस जीव स्वबस भगवंता। जीव अनेक एक श्रीकंता।। मुधा भेद जद्यपि कृत माया। बिनु हरि जाइ न कोटि उपाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रामचंद्र के भजन बिनु जो चह पद निर्बान। ग्यानवंत अपि सो नर पसु बिनु पूँछ बिषान।।78(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
राकापति षोड़स उअहिं तारागन समुदाइ।। सकल गिरिन्ह दव लाइअ बिनु रबि राति न जाइ।।78(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 79

ऐसेहिं हरि बिनु भजन खगेसा। मिटइ न जीवन्ह केर कलेसा।। हरि सेवकहि न ब्याप अबिद्या। प्रभु प्रेरित ब्यापइ तेहि बिद्या।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताते नास न होइ दास कर। भेद भगति भाढ़इ बिहंगबर।। भ्रम ते चकित राम मोहि देखा। बिहँसे सो सुनु चरित बिसेषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ। जाना अनुज न मातु पिताहूँ।। जानु पानि धाए मोहि धरना। स्यामल गात अरुन कर चरना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब मैं भागि चलेउँ उरगामी। राम गहन कहँ भुजा पसारी।। जिमि जिमि दूरि उड़ाउँ अकासा। तहँ भुज हरि देखउँ निज पासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्रह्मलोक लगि गयउँ मैं चितयउँ पाछ उड़ात। जुग अंगुल कर बीच सब राम भुजहि मोहि तात।।79(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सप्ताबरन भेद करि जहाँ लगें गति मोरि। गयउँ तहाँ प्रभु भुज निरखि ब्याकुल भयउँ बहोरि।।79(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 80

मूदेउँ नयन त्रसित जब भयउँ। पुनि चितवत कोसलपुर गयऊँ।। मोहि बिलोकि राम मुसुकाहीं। बिहँसत तुरत गयउँ मुख माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उदर माझ सुनु अंडज राया। देखेउँ बहु ब्रह्मांड निकाया।। अति बिचित्र तहँ लोक अनेका। रचना अधिक एक ते एका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोटिन्ह चतुरानन गौरीसा। अगनित उडगन रबि रजनीसा।। अगनित लोकपाल जम काला। अगनित भूधर भूमि बिसाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सागर सरि सर बिपिन अपारा। नाना भाँति सृष्टि बिस्तारा।। सुर मुनि सिद्ध नाग नर किंनर। चारि प्रकार जीव सचराचर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जो नहिं देखा नहिं सुना जो मनहूँ न समाइ। सो सब अद्भुत देखेउँ बरनि कवनि बिधि जाइ।।80(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
एक एक ब्रह्मांड महुँ रहउँ बरष सत एक। एहि बिधि देखत फिरउँ मैं अंड कटाह अनेक।।80(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 81

लोक लोक प्रति भिन्न बिधाता। भिन्न बिष्नु सिव मनु दिसित्राता।। नर गंधर्ब भूत बेताला। किंनर निसिचर पसु खग ब्याला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देव दनुज गन नाना जाती। सकल जीव तहँ आनहि भाँती।। महि सरि सागर सर गिरि नाना। सब प्रपंच तहँ आनइ आना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंडकोस प्रति प्रति निज रुपा। देखेउँ जिनस अनेक अनूपा।। अवधपुरी प्रति भुवन निनारी। सरजू भिन्न भिन्न नर नारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दसरथ कौसल्या सुनु ताता। बिबिध रूप भरतादिक भ्राता।। प्रति ब्रह्मांड राम अवतारा। देखउँ बालबिनोद अपारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भिन्न भिन्न मै दीख सबु अति बिचित्र हरिजान। अगनित भुवन फिरेउँ प्रभु राम न देखेउँ आन।।81(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सोइ सिसुपन सोइ सोभा सोइ कृपाल रघुबीर। भुवन भुवन देखत फिरउँ प्रेरित मोह समीर।।81(ख)
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 82

भ्रमत मोहि ब्रह्मांड अनेका। बीते मनहुँ कल्प सत एका।। फिरत फिरत निज आश्रम आयउँ। तहँ पुनि रहि कछु काल गवाँयउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज प्रभु जन्म अवध सुनि पायउँ। निर्भर प्रेम हरषि उठि धायउँ।। देखउँ जन्म महोत्सव जाई। जेहि बिधि प्रथम कहा मैं गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम उदर देखेउँ जग नाना। देखत बनइ न जाइ बखाना।। तहँ पुनि देखेउँ राम सुजाना। माया पति कृपाल भगवाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करउँ बिचार बहोरि बहोरी। मोह कलिल ब्यापित मति मोरी।। उभय घरी महँ मैं सब देखा। भयउँ भ्रमित मन मोह बिसेषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि कृपाल बिकल मोहि बिहँसे तब रघुबीर। बिहँसतहीं मुख बाहेर आयउँ सुनु मतिधीर।।82(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सोइ लरिकाई मो सन करन लगे पुनि राम। कोटि भाँति समुझावउँ मनु न लहइ बिश्राम।।82(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 83

देखि चरित यह सो प्रभुताई। समुझत देह दसा बिसराई।। धरनि परेउँ मुख आव न बाता। त्राहि त्राहि आरत जन त्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रेमाकुल प्रभु मोहि बिलोकी। निज माया प्रभुता तब रोकी।। कर सरोज प्रभु मम सिर धरेऊ। दीनदयाल सकल दुख हरेऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कीन्ह राम मोहि बिगत बिमोहा। सेवक सुखद कृपा संदोहा।। प्रभुता प्रथम बिचारि बिचारी। मन महँ होइ हरष अति भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगत बछलता प्रभु कै देखी। उपजी मम उर प्रीति बिसेषी।। सजल नयन पुलकित कर जोरी। कीन्हिउँ बहु बिधि बिनय बहोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन निज दास। बचन सुखद गंभीर मृदु बोले रमानिवास।।83(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
काकभसुंडि मागु बर अति प्रसन्न मोहि जानि। अनिमादिक सिधि अपर रिधि मोच्छ सकल सुख खानि।।83(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 84

ग्यान बिबेक बिरति बिग्याना। मुनि दुर्लभ गुन जे जग नाना।। आजु देउँ सब संसय नाहीं। मागु जो तोहि भाव मन माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि प्रभु बचन अधिक अनुरागेउँ। मन अनुमान करन तब लागेऊँ।। प्रभु कह देन सकल सुख सही। भगति आपनी देन न कही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगति हीन गुन सब सुख ऐसे। लवन बिना बहु बिंजन जैसे।। भजन हीन सुख कवने काजा। अस बिचारि बोलेउँ खगराजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं प्रभु होइ प्रसन्न बर देहू। मो पर करहु कृपा अरु नेहू।। मन भावत बर मागउँ स्वामी। तुम्ह उदार उर अंतरजामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अबिरल भगति बिसुध्द तव श्रुति पुरान जो गाव। जेहि खोजत जोगीस मुनि प्रभु प्रसाद कोउ पाव।।84(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपा सिंधु सुख धाम। सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम।।84(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 85

एवमस्तु कहि रघुकुलनायक। बोले बचन परम सुखदायक।। सुनु बायस तैं सहज सयाना। काहे न मागसि अस बरदाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब सुख खानि भगति तैं मागी। नहिं जग कोउ तोहि सम बड़भागी।। जो मुनि कोटि जतन नहिं लहहीं। जे जप जोग अनल तन दहहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रीझेउँ देखि तोरि चतुराई। मागेहु भगति मोहि अति भाई।। सुनु बिहंग प्रसाद अब मोरें। सब सुभ गुन बसिहहिं उर तोरें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। जोग चरित्र रहस्य बिभागा।। जानब तैं सबही कर भेदा। मम प्रसाद नहिं साधन खेदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
माया संभव भ्रम सब अब न ब्यापिहहिं तोहि। जानेसु ब्रह्म अनादि अज अगुन गुनाकर मोहि।।85(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
मोहि भगत प्रिय संतत अस बिचारि सुनु काग। कायँ बचन मन मम पद करेसु अचल अनुराग।।85(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 86

अब सुनु परम बिमल मम बानी। सत्य सुगम निगमादि बखानी।। निज सिद्धांत सुनावउँ तोही। सुनु मन धरु सब तजि भजु मोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मम माया संभव संसारा। जीव चराचर बिबिधि प्रकारा।। सब मम प्रिय सब मम उपजाए। सब ते अधिक मनुज मोहि भाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तिन्ह महँ द्विज द्विज महँ श्रुतिधारी। तिन्ह महुँ निगम धरम अनुसारी।। तिन्ह महँ प्रिय बिरक्त पुनि ग्यानी। ग्यानिहु ते अति प्रिय बिग्यानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तिन्ह ते पुनि मोहि प्रिय निज दासा। जेहि गति मोरि न दूसरि आसा।। पुनि पुनि सत्य कहउँ तोहि पाहीं। मोहि सेवक सम प्रिय कोउ नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगति हीन बिरंचि किन होई। सब जीवहु सम प्रिय मोहि सोई।। भगतिवंत अति नीचउ प्रानी। मोहि प्रानप्रिय असि मम बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुचि सुसील सेवक सुमति प्रिय कहु काहि न लाग। श्रुति पुरान कह नीति असि सावधान सुनु काग।।86।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 87

एक पिता के बिपुल कुमारा। होहिं पृथक गुन सील अचारा।। कोउ पंडिंत कोउ तापस ग्याता। कोउ धनवंत सूर कोउ दाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोउ सर्बग्य धर्मरत कोई। सब पर पितहि प्रीति सम होई।। कोउ पितु भगत बचन मन कर्मा। सपनेहुँ जान न दूसर धर्मा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना। जद्यपि सो सब भाँति अयाना।। एहि बिधि जीव चराचर जेते। त्रिजग देव नर असुर समेते।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अखिल बिस्व यह मोर उपाया। सब पर मोहि बराबरि दाया।। तिन्ह महँ जो परिहरि मद माया। भजै मोहि मन बच अरू काया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुरूष नपुंसक नारि वा जीव चराचर कोइ। सर्ब भाव भज कपट तजि मोहि परम प्रिय सोइ।।87(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
सत्य कहउँ खग तोहि सुचि सेवक मम प्रानप्रिय। अस बिचारि भजु मोहि परिहरि आस भरोस सब।।87(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 88

कबहूँ काल न ब्यापिहि तोही। सुमिरेसु भजेसु निरंतर मोही।। प्रभु बचनामृत सुनि न अघाऊँ। तनु पुलकित मन अति हरषाऊँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो सुख जानइ मन अरु काना। नहिं रसना पहिं जाइ बखाना।। प्रभु सोभा सुख जानहिं नयना। कहि किमि सकहिं तिन्हहि नहिं बयना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु बिधि मोहि प्रबोधि सुख देई। लगे करन सिसु कौतुक तेई।। सजल नयन कछु मुख करि रूखा। चितइ मातु लागी अति भूखा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि मातु आतुर उठि धाई। कहि मृदु बचन लिए उर लाई।। गोद राखि कराव पय पाना। रघुपति चरित ललित कर गाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहि सुख लागि पुरारि असुभ बेष कृत सिव सुखद। अवधपुरी नर नारि तेहि सुख महुँ संतत मगन।।88(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
सोइ सुख लवलेस जिन्ह बारक सपनेहुँ लहेउ। ते नहिं गनहिं खगेस ब्रह्मसुखहि सज्जन सुमति।।88(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 89

मैं पुनि अवध रहेउँ कछु काला। देखेउँ बालबिनोद रसाला।। राम प्रसाद भगति बर पायउँ। प्रभु पद बंदि निजाश्रम आयउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब ते मोहि न ब्यापी माया। जब ते रघुनायक अपनाया।। यह सब गुप्त चरित मैं गावा। हरि मायाँ जिमि मोहि नचावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज अनुभव अब कहउँ खगेसा। बिनु हरि भजन न जाहि कलेसा।। राम कृपा बिनु सुनु खगराई। जानि न जाइ राम प्रभुताई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जानें बिनु न होइ परतीती। बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती।। प्रीति बिना नहिं भगति दिढ़ाई। जिमि खगपति जल कै चिकनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान कि होइ बिराग बिनु। गावहिं बेद पुरान सुख कि लहिअ हरि भगति बिनु।।89(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
कोउ बिश्राम कि पाव तात सहज संतोष बिनु। चलै कि जल बिनु नाव कोटि जतन पचि पचि मरिअ।।89(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 90

बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं।। राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा। थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिनु बिग्यान कि समता आवइ। कोउ अवकास कि नभ बिनु पावइ।। श्रद्धा बिना धर्म नहिं होई। बिनु महि गंध कि पावइ कोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिनु तप तेज कि कर बिस्तारा। जल बिनु रस कि होइ संसारा।। सील कि मिल बिनु बुध सेवकाई। जिमि बिनु तेज न रूप गोसाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज सुख बिनु मन होइ कि थीरा। परस कि होइ बिहीन समीरा।। कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा। बिनु हरि भजन न भव भय नासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु। राम कृपा बिनु सपनेहुँ जीव न लह बिश्रामु।।90(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
अस बिचारि मतिधीर तजि कुतर्क संसय सकल। भजहु राम रघुबीर करुनाकर सुंदर सुखद।।90(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 91

निज मति सरिस नाथ मैं गाई। प्रभु प्रताप महिमा खगराई।। कहेउँ न कछु करि जुगुति बिसेषी। यह सब मैं निज नयनन्हि देखी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
महिमा नाम रूप गुन गाथा। सकल अमित अनंत रघुनाथा।। निज निज मति मुनि हरि गुन गावहिं। निगम सेष सिव पार न पावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्हहि आदि खग मसक प्रजंता। नभ उड़ाहिं नहिं पावहिं अंता।। तिमि रघुपति महिमा अवगाहा। तात कबहुँ कोउ पाव कि थाहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रामु काम सत कोटि सुभग तन। दुर्गा कोटि अमित अरि मर्दन।। सक्र कोटि सत सरिस बिलासा। नभ सत कोटि अमित अवकासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मरुत कोटि सत बिपुल बल रबि सत कोटि प्रकास। ससि सत कोटि सुसीतल समन सकल भव त्रास।।91(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
काल कोटि सत सरिस अति दुस्तर दुर्ग दुरंत। धूमकेतु सत कोटि सम दुराधरष भगवंत।।91(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 92

प्रभु अगाध सत कोटि पताला। समन कोटि सत सरिस कराला।। तीरथ अमित कोटि सम पावन। नाम अखिल अघ पूग नसावन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हिमगिरि कोटि अचल रघुबीरा। सिंधु कोटि सत सम गंभीरा।। कामधेनु सत कोटि समाना। सकल काम दायक भगवाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सारद कोटि अमित चतुराई। बिधि सत कोटि सृष्टि निपुनाई।। बिष्नु कोटि सम पालन कर्ता। रुद्र कोटि सत सम संहर्ता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धनद कोटि सत सम धनवाना। माया कोटि प्रपंच निधाना।। भार धरन सत कोटि अहीसा। निरवधि निरुपम प्रभु जगदीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निरुपम न उपमा आन राम समान रामु निगम कहै। जिमि कोटि सत खद्योत सम रबि कहत अति लघुता लहै।। एहि भाँति निज निज मति बिलास मुनिस हरिहि बखानहीं। प्रभु भाव गाहक अति कृपाल सप्रेम सुनि सुख मानहीं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
रामु अमित गुन सागर थाह कि पावइ कोइ। संतन्ह सन जस किछु सुनेउँ तुम्हहि सुनायउँ सोइ।।92(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
भाव बस्य भगवान सुख निधान करुना भवन। तजि ममता मद मान भजिअ सदा सीता रवन।।92(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 93

सुनि भुसुंडि के बचन सुहाए। हरषित खगपति पंख फुलाए।। नयन नीर मन अति हरषाना। श्रीरघुपति प्रताप उर आना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पाछिल मोह समुझि पछिताना। ब्रह्म अनादि मनुज करि माना।। पुनि पुनि काग चरन सिरु नावा। जानि राम सम प्रेम बढ़ावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गुर बिनु भव निधि तरइ न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई।। संसय सर्प ग्रसेउ मोहि ताता। दुखद लहरि कुतर्क बहु ब्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तव सरूप गारुड़ि रघुनायक। मोहि जिआयउ जन सुखदायक।। तव प्रसाद मम मोह नसाना। राम रहस्य अनूपम जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताहि प्रसंसि बिबिध बिधि सीस नाइ कर जोरि। बचन बिनीत सप्रेम मृदु बोलेउ गरुड़ बहोरि।।93(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
प्रभु अपने अबिबेक ते बूझउँ स्वामी तोहि। कृपासिंधु सादर कहहु जानि दास निज मोहि।।93(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 94

तुम्ह सर्बग्य तन्य तम पारा। सुमति सुसील सरल आचारा।। ग्यान बिरति बिग्यान निवासा। रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कारन कवन देह यह पाई। तात सकल मोहि कहहु बुझाई।। राम चरित सर सुंदर स्वामी। पायहु कहाँ कहहु नभगामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुँ नास तव नाहीं।। मुधा बचन नहिं ईस्वर कहई। सोउ मोरें मन संसय अहई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अग जग जीव नाग नर देवा। नाथ सकल जगु काल कलेवा।। अंड कटाह अमित लय कारी। कालु सदा दुरतिक्रम भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्हहि न ब्यापत काल अति कराल कारन कवन। मोहि सो कहहु कृपाल ग्यान प्रभाव कि जोग बल।।94(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
प्रभु तव आश्रम आएँ मोर मोह भ्रम भाग। कारन कवन सो नाथ सब कहहु सहित अनुराग।।94(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 95

गरुड़ गिरा सुनि हरषेउ कागा। बोलेउ उमा परम अनुरागा।। धन्य धन्य तव मति उरगारी। प्रस्न तुम्हारि मोहि अति प्यारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि तव प्रस्न सप्रेम सुहाई। बहुत जनम कै सुधि मोहि आई।। सब निज कथा कहउँ मैं गाई। तात सुनहु सादर मन लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जप तप मख सम दम ब्रत दाना। बिरति बिबेक जोग बिग्याना।। सब कर फल रघुपति पद प्रेमा। तेहि बिनु कोउ न पावइ छेमा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि तन राम भगति मैं पाई। ताते मोहि ममता अधिकाई।। जेहि तें कछु निज स्वारथ होई। तेहि पर ममता कर सब कोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पन्नगारि असि नीति श्रुति संमत सज्जन कहहिं। अति नीचहु सन प्रीति करिअ जानि निज परम हित।।95(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
पाट कीट तें होइ तेहि तें पाटंबर रुचिर। कृमि पालइ सबु कोइ परम अपावन प्रान सम।।95(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 96

स्वारथ साँच जीव कहुँ एहा। मन क्रम बचन राम पद नेहा।। सोइ पावन सोइ सुभग सरीरा। जो तनु पाइ भजिअ रघुबीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम बिमुख लहि बिधि सम देही। कबि कोबिद न प्रसंसहिं तेही।। राम भगति एहिं तन उर जामी। ताते मोहि परम प्रिय स्वामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तजउँ न तन निज इच्छा मरना। तन बिनु बेद भजन नहिं बरना।। प्रथम मोहँ मोहि बहुत बिगोवा। राम बिमुख सुख कबहुँ न सोवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाना जनम कर्म पुनि नाना। किए जोग जप तप मख दाना।। कवन जोनि जनमेउँ जहँ नाहीं। मैं खगेस भ्रमि भ्रमि जग माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखेउँ करि सब करम गोसाई। सुखी न भयउँ अबहिं की नाई।। सुधि मोहि नाथ जन्म बहु केरी। सिव प्रसाद मति मोहँ न घेरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रथम जन्म के चरित अब कहउँ सुनहु बिहगेस। सुनि प्रभु पद रति उपजइ जातें मिटहिं कलेस।।96(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग मल मूल।। नर अरु नारि अधर्म रत सकल निगम प्रतिकूल।।96(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 97

तेहि कलिजुग कोसलपुर जाई। जन्मत भयउँ सूद्र तनु पाई।। सिव सेवक मन क्रम अरु बानी। आन देव निंदक अभिमानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धन मद मत्त परम बाचाला। उग्रबुद्धि उर दंभ बिसाला।। जदपि रहेउँ रघुपति रजधानी। तदपि न कछु महिमा तब जानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब जाना मैं अवध प्रभावा। निगमागम पुरान अस गावा।। कवनेहुँ जन्म अवध बस जोई। राम परायन सो परि होई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अवध प्रभाव जान तब प्रानी। जब उर बसहिं रामु धनुपानी।। सो कलिकाल कठिन उरगारी। पाप परायन सब नर नारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ। दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ।।97(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे सुभ कर्म। सुनु हरिजान ग्यान निधि कहउँ कछुक कलिधर्म।।97(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 98

बरन धर्म नहिं आश्रम चारी। श्रुति बिरोध रत सब नर नारी।। द्विज श्रुति बेचक भूप प्रजासन। कोउ नहिं मान निगम अनुसासन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा। पंडित सोइ जो गाल बजावा।। मिथ्यारंभ दंभ रत जोई। ता कहुँ संत कहइ सब कोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ सयान जो परधन हारी। जो कर दंभ सो बड़ आचारी।। जौ कह झूँठ मसखरी जाना। कलिजुग सोइ गुनवंत बखाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निराचार जो श्रुति पथ त्यागी। कलिजुग सोइ ग्यानी सो बिरागी।। जाकें नख अरु जटा बिसाला। सोइ तापस प्रसिद्ध कलिकाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
असुभ बेष भूषन धरें भच्छाभच्छ जे खाहिं। तेइ जोगी तेइ सिद्ध नर पूज्य ते कलिजुग माहिं।।98(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
जे अपकारी चार तिन्ह कर गौरव मान्य तेइ। मन क्रम बचन लबार तेइ बकता कलिकाल महुँ।।98(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 99

नारि बिबस नर सकल गोसाई। नाचहिं नट मर्कट की नाई।। सूद्र द्विजन्ह उपदेसहिं ग्याना। मेलि जनेऊ लेहिं कुदाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब नर काम लोभ रत क्रोधी। देव बिप्र श्रुति संत बिरोधी।। गुन मंदिर सुंदर पति त्यागी। भजहिं नारि पर पुरुष अभागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सौभागिनीं बिभूषन हीना। बिधवन्ह के सिंगार नबीना।। गुर सिष बधिर अंध का लेखा। एक न सुनइ एक नहिं देखा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरइ सिष्य धन सोक न हरई। सो गुर घोर नरक महुँ परई।। मातु पिता बालकन्हि बोलाबहिं। उदर भरै सोइ धर्म सिखावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्रह्म ग्यान बिनु नारि नर कहहिं न दूसरि बात। कौड़ी लागि लोभ बस करहिं बिप्र गुर घात।।99(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बादहिं सूद्र द्विजन्ह सन हम तुम्ह ते कछु घाटि। जानइ ब्रह्म सो बिप्रबर आँखि देखावहिं डाटि।।99(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 100

पर त्रिय लंपट कपट सयाने। मोह द्रोह ममता लपटाने।। तेइ अभेदबादी ग्यानी नर। देखा में चरित्र कलिजुग कर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आपु गए अरु तिन्हहू घालहिं। जे कहुँ सत मारग प्रतिपालहिं।। कल्प कल्प भरि एक एक नरका। परहिं जे दूषहिं श्रुति करि तरका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।। नारि मुई गृह संपति नासी। मूड़ मुड़ाइ होहिं सन्यासी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ते बिप्रन्ह सन आपु पुजावहिं। उभय लोक निज हाथ नसावहिं।। बिप्र निरच्छर लोलुप कामी। निराचार सठ बृषली स्वामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सूद्र करहिं जप तप ब्रत नाना। बैठि बरासन कहहिं पुराना।। सब नर कल्पित करहिं अचारा। जाइ न बरनि अनीति अपारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भए बरन संकर कलि भिन्नसेतु सब लोग। करहिं पाप पावहिं दुख भय रुज सोक बियोग।।100(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
श्रुति संमत हरि भक्ति पथ संजुत बिरति बिबेक। तेहि न चलहिं नर मोह बस कल्पहिं पंथ अनेक।।100(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 101

बहु दाम सँवारहिं धाम जती। बिषया हरि लीन्हि न रहि बिरती।। तपसी धनवंत दरिद्र गृही। कलि कौतुक तात न जात कही।। कुलवंति निकारहिं नारि सती। गृह आनिहिं चेरी निबेरि गती।। सुत मानहिं मातु पिता तब लौं। अबलानन दीख नहीं जब लौं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
ससुरारि पिआरि लगी जब तें। रिपरूप कुटुंब भए तब तें।। नृप पाप परायन धर्म नहीं। करि दंड बिडंब प्रजा नितहीं।। धनवंत कुलीन मलीन अपी। द्विज चिन्ह जनेउ उघार तपी।। नहिं मान पुरान न बेदहि जो। हरि सेवक संत सही कलि सो।।
Chhand
अर्थ / Meaning
कबि बृंद उदार दुनी न सुनी। गुन दूषक ब्रात न कोपि गुनी।। कलि बारहिं बार दुकाल परै। बिनु अन्न दुखी सब लोग मरै।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ द्वेष पाषंड। मान मोह मारादि मद ब्यापि रहे ब्रह्मंड।।101(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
तामस धर्म करहिं नर जप तप ब्रत मख दान। देव न बरषहिं धरनीं बए न जामहिं धान।।101(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 102

अबला कच भूषन भूरि छुधा। धनहीन दुखी ममता बहुधा।। सुख चाहहिं मूढ़ न धर्म रता। मति थोरि कठोरि न कोमलता।।1।। नर पीड़ित रोग न भोग कहीं। अभिमान बिरोध अकारनहीं।। लघु जीवन संबतु पंच दसा। कलपांत न नास गुमानु असा।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
कलिकाल बिहाल किए मनुजा। नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा। नहिं तोष बिचार न सीतलता। सब जाति कुजाति भए मगता।।3।। इरिषा परुषाच्छर लोलुपता। भरि पूरि रही समता बिगता।। सब लोग बियोग बिसोक हुए। बरनाश्रम धर्म अचार गए।।4।।
Chhand
अर्थ / Meaning
दम दान दया नहिं जानपनी। जड़ता परबंचनताति घनी।। तनु पोषक नारि नरा सगरे। परनिंदक जे जग मो बगरे।।5।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार। गुनउँ बहुत कलिजुग कर बिनु प्रयास निस्तार।।102(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कृतजुग त्रेता द्वापर पूजा मख अरु जोग। जो गति होइ सो कलि हरि नाम ते पावहिं लोग।।102(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 103

कृतजुग सब जोगी बिग्यानी। करि हरि ध्यान तरहिं भव प्रानी।। त्रेताँ बिबिध जग्य नर करहीं। प्रभुहि समर्पि कर्म भव तरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
द्वापर करि रघुपति पद पूजा। नर भव तरहिं उपाय न दूजा।। कलिजुग केवल हरि गुन गाहा। गावत नर पावहिं भव थाहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना। एक अधार राम गुन गाना।। सब भरोस तजि जो भज रामहि। प्रेम समेत गाव गुन ग्रामहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ भव तर कछु संसय नाहीं। नाम प्रताप प्रगट कलि माहीं।। कलि कर एक पुनीत प्रतापा। मानस पुन्य होहिं नहिं पापा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कलिजुग सम जुग आन नहिं जौं नर कर बिस्वास। गाइ राम गुन गन बिमलँ भव तर बिनहिं प्रयास।।103(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
प्रगट चारि पद धर्म के कलिल महुँ एक प्रधान। जेन केन बिधि दीन्हें दान करइ कल्यान।।103(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 104

नित जुग धर्म होहिं सब केरे। हृदयँ राम माया के प्रेरे।। सुद्ध सत्व समता बिग्याना। कृत प्रभाव प्रसन्न मन जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सत्व बहुत रज कछु रति कर्मा। सब बिधि सुख त्रेता कर धर्मा।। बहु रज स्वल्प सत्व कछु तामस। द्वापर धर्म हरष भय मानस।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तामस बहुत रजोगुन थोरा। कलि प्रभाव बिरोध चहुँ ओरा।। बुध जुग धर्म जानि मन माहीं। तजि अधर्म रति धर्म कराहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काल धर्म नहिं ब्यापहिं ताही। रघुपति चरन प्रीति अति जाही।। नट कृत बिकट कपट खगराया। नट सेवकहि न ब्यापइ माया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरि माया कृत दोष गुन बिनु हरि भजन न जाहिं। भजिअ राम तजि काम सब अस बिचारि मन माहिं।।104(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
तेहि कलिकाल बरष बहु बसेउँ अवध बिहगेस। परेउ दुकाल बिपति बस तब मैं गयउँ बिदेस।।104(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 105

गयउँ उजेनी सुनु उरगारी। दीन मलीन दरिद्र दुखारी।। गएँ काल कछु संपति पाई। तहँ पुनि करउँ संभु सेवकाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिप्र एक बैदिक सिव पूजा। करइ सदा तेहि काजु न दूजा।। परम साधु परमारथ बिंदक। संभु उपासक नहिं हरि निंदक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि सेवउँ मैं कपट समेता। द्विज दयाल अति नीति निकेता।। बाहिज नम्र देखि मोहि साईं। बिप्र पढ़ाव पुत्र की नाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संभु मंत्र मोहि द्विजबर दीन्हा। सुभ उपदेस बिबिध बिधि कीन्हा।। जपउँ मंत्र सिव मंदिर जाई। हृदयँ दंभ अहमिति अधिकाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मैं खल मल संकुल मति नीच जाति बस मोह। हरि जन द्विज देखें जरउँ करउँ बिष्नु कर द्रोह।।105(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
गुर नित मोहि प्रबोध दुखित देखि आचरन मम। मोहि उपजइ अति क्रोध दंभिहि नीति कि भावई।।105(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 106

एक बार गुर लीन्ह बोलाई। मोहि नीति बहु भाँति सिखाई।। सिव सेवा कर फल सुत सोई। अबिरल भगति राम पद होई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रामहि भजहिं तात सिव धाता। नर पावँर कै केतिक बाता।। जासु चरन अज सिव अनुरागी। तातु द्रोहँ सुख चहसि अभागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हर कहुँ हरि सेवक गुर कहेऊ। सुनि खगनाथ हृदय मम दहेऊ।। अधम जाति मैं बिद्या पाएँ। भयउँ जथा अहि दूध पिआएँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मानी कुटिल कुभाग्य कुजाती। गुर कर द्रोह करउँ दिनु राती।। अति दयाल गुर स्वल्प न क्रोधा। पुनि पुनि मोहि सिखाव सुबोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहि ते नीच बड़ाई पावा। सो प्रथमहिं हति ताहि नसावा।। धूम अनल संभव सुनु भाई। तेहि बुझाव घन पदवी पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रज मग परी निरादर रहई। सब कर पद प्रहार नित सहई।। मरुत उड़ाव प्रथम तेहि भरई। पुनि नृप नयन किरीटन्हि परई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु खगपति अस समुझि प्रसंगा। बुध नहिं करहिं अधम कर संगा।। कबि कोबिद गावहिं असि नीती। खल सन कलह न भल नहिं प्रीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उदासीन नित रहिअ गोसाईं। खल परिहरिअ स्वान की नाईं।। मैं खल हृदयँ कपट कुटिलाई। गुर हित कहइ न मोहि सोहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक बार हर मंदिर जपत रहेउँ सिव नाम। गुर आयउ अभिमान तें उठि नहिं कीन्ह प्रनाम।।106(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सो दयाल नहिं कहेउ कछु उर न रोष लवलेस। अति अघ गुर अपमानता सहि नहिं सके महेस।।106(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 107

मंदिर माझ भई नभ बानी। रे हतभाग्य अग्य अभिमानी।। जद्यपि तव गुर कें नहिं क्रोधा। अति कृपाल चित सम्यक बोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तदपि साप सठ दैहउँ तोही। नीति बिरोध सोहाइ न मोही।। जौं नहिं दंड करौं खल तोरा। भ्रष्ट होइ श्रुतिमारग मोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जे सठ गुर सन इरिषा करहीं। रौरव नरक कोटि जुग परहीं।। त्रिजग जोनि पुनि धरहिं सरीरा। अयुत जन्म भरि पावहिं पीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बैठ रहेसि अजगर इव पापी। सर्प होहि खल मल मति ब्यापी।। महा बिटप कोटर महुँ जाई।।रहु अधमाधम अधगति पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हाहाकार कीन्ह गुर दारुन सुनि सिव साप।। कंपित मोहि बिलोकि अति उर उपजा परिताप।।107(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
करि दंडवत सप्रेम द्विज सिव सन्मुख कर जोरि। बिनय करत गदगद स्वर समुझि घोर गति मोरि।।107(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 108

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरींह। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।। निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।। करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।। स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा।। चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।। मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।
Chhand
अर्थ / Meaning
प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।। त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।। कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्जनान्ददाता पुरारी।। चिदानंदसंदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।
Chhand
अर्थ / Meaning
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके परे वा नराणां।। न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।। न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।। जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।
Chhand
अर्थ / Meaning
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये। ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।9।।
Shloka
अर्थ / Meaning
सुनि बिनती सर्बग्य सिव देखि ब्रिप्र अनुरागु। पुनि मंदिर नभबानी भइ द्विजबर बर मागु।।108(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जौं प्रसन्न प्रभु मो पर नाथ दीन पर नेहु। निज पद भगति देइ प्रभु पुनि दूसर बर देहु।।108(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
तव माया बस जीव जड़ संतत फिरइ भुलान। तेहि पर क्रोध न करिअ प्रभु कृपा सिंधु भगवान।।108(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning
संकर दीनदयाल अब एहि पर होहु कृपाल। साप अनुग्रह होइ जेहिं नाथ थोरेहीं काल।।108(घ)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 109

एहि कर होइ परम कल्याना। सोइ करहु अब कृपानिधाना।। बिप्रगिरा सुनि परहित सानी। एवमस्तु इति भइ नभबानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जदपि कीन्ह एहिं दारुन पापा। मैं पुनि दीन्ह कोप करि सापा।। तदपि तुम्हार साधुता देखी। करिहउँ एहि पर कृपा बिसेषी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छमासील जे पर उपकारी। ते द्विज मोहि प्रिय जथा खरारी।। मोर श्राप द्विज ब्यर्थ न जाइहि। जन्म सहस अवस्य यह पाइहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जनमत मरत दुसह दुख होई। अहि स्वल्पउ नहिं ब्यापिहि सोई।। कवनेउँ जन्म मिटिहि नहिं ग्याना। सुनहि सूद्र मम बचन प्रवाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रघुपति पुरीं जन्म तब भयऊ। पुनि तैं मम सेवाँ मन दयऊ।। पुरी प्रभाव अनुग्रह मोरें। राम भगति उपजिहि उर तोरें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु मम बचन सत्य अब भाई। हरितोषन ब्रत द्विज सेवकाई।। अब जनि करहि बिप्र अपमाना। जानेहु संत अनंत समाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इंद्र कुलिस मम सूल बिसाला। कालदंड हरि चक्र कराला।। जो इन्ह कर मारा नहिं मरई। बिप्रद्रोह पावक सो जरई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस बिबेक राखेहु मन माहीं। तुम्ह कहँ जग दुर्लभ कछु नाहीं।। औरउ एक आसिषा मोरी। अप्रतिहत गति होइहि तोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि सिव बचन हरषि गुर एवमस्तु इति भाषि। मोहि प्रबोधि गयउ गृह संभु चरन उर राखि।।109(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
प्रेरित काल बिधि गिरि जाइ भयउँ मैं ब्याल। पुनि प्रयास बिनु सो तनु जजेउँ गएँ कछु काल।।109(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जोइ तनु धरउँ तजउँ पुनि अनायास हरिजान। जिमि नूतन पट पहिरइ नर परिहरइ पुरान।।109(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सिवँ राखी श्रुति नीति अरु मैं नहिं पावा क्लेस। एहि बिधि धरेउँ बिबिध तनु ग्यान न गयउ खगेस।।109(घ)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 110

त्रिजग देव नर जोइ तनु धरउँ। तहँ तहँ राम भजन अनुसरऊँ।। एक सूल मोहि बिसर न काऊ। गुर कर कोमल सील सुभाऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चरम देह द्विज कै मैं पाई। सुर दुर्लभ पुरान श्रुति गाई।। खेलउँ तहूँ बालकन्ह मीला। करउँ सकल रघुनायक लीला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रौढ़ भएँ मोहि पिता पढ़ावा। समझउँ सुनउँ गुनउँ नहिं भावा।। मन ते सकल बासना भागी। केवल राम चरन लय लागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहु खगेस अस कवन अभागी। खरी सेव सुरधेनुहि त्यागी।। प्रेम मगन मोहि कछु न सोहाई। हारेउ पिता पढ़ाइ पढ़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भए कालबस जब पितु माता। मैं बन गयउँ भजन जनत्राता।। जहँ जहँ बिपिन मुनीस्वर पावउँ। आश्रम जाइ जाइ सिरु नावउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बूझत तिन्हहि राम गुन गाहा। कहहिं सुनउँ हरषित खगनाहा।। सुनत फिरउँ हरि गुन अनुबादा। अब्याहत गति संभु प्रसादा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छूटी त्रिबिध ईषना गाढ़ी। एक लालसा उर अति बाढ़ी।। राम चरन बारिज जब देखौं। तब निज जन्म सफल करि लेखौं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहि पूँछउँ सोइ मुनि अस कहई। ईस्वर सर्ब भूतमय अहई।। निर्गुन मत नहिं मोहि सोहाई। सगुन ब्रह्म रति उर अधिकाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गुर के बचन सुरति करि राम चरन मनु लाग। रघुपति जस गावत फिरउँ छन छन नव अनुराग।।110(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
मेरु सिखर बट छायाँ मुनि लोमस आसीन। देखि चरन सिरु नायउँ बचन कहेउँ अति दीन।।110(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सुनि मम बचन बिनीत मृदु मुनि कृपाल खगराज। मोहि सादर पूँछत भए द्विज आयहु केहि काज।।110(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning
तब मैं कहा कृपानिधि तुम्ह सर्बग्य सुजान। सगुन ब्रह्म अवराधन मोहि कहहु भगवान।।110(घ)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 111

तब मुनिष रघुपति गुन गाथा। कहे कछुक सादर खगनाथा।। ब्रह्मग्यान रत मुनि बिग्यानि। मोहि परम अधिकारी जानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लागे करन ब्रह्म उपदेसा। अज अद्वेत अगुन हृदयेसा।। अकल अनीह अनाम अरुपा। अनुभव गम्य अखंड अनूपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मन गोतीत अमल अबिनासी। निर्बिकार निरवधि सुख रासी।। सो तैं ताहि तोहि नहिं भेदा। बारि बीचि इव गावहि बेदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिबिध भाँति मोहि मुनि समुझावा। निर्गुन मत मम हृदयँ न आवा।। पुनि मैं कहेउँ नाइ पद सीसा। सगुन उपासन कहहु मुनीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम भगति जल मम मन मीना। किमि बिलगाइ मुनीस प्रबीना।। सोइ उपदेस कहहु करि दाया। निज नयनन्हि देखौं रघुराया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भरि लोचन बिलोकि अवधेसा। तब सुनिहउँ निर्गुन उपदेसा।। मुनि पुनि कहि हरिकथा अनूपा। खंडि सगुन मत अगुन निरूपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब मैं निर्गुन मत कर दूरी। सगुन निरूपउँ करि हठ भूरी।। उत्तर प्रतिउत्तर मैं कीन्हा। मुनि तन भए क्रोध के चीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु प्रभु बहुत अवग्या किएँ। उपज क्रोध ग्यानिन्ह के हिएँ।। अति संघरषन जौं कर कोई। अनल प्रगट चंदन ते होई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
-बारंबार सकोप मुनि करइ निरुपन ग्यान। मैं अपनें मन बैठ तब करउँ बिबिध अनुमान।।111(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
क्रोध कि द्वेतबुद्धि बिनु द्वैत कि बिनु अग्यान। मायाबस परिछिन्न जड़ जीव कि ईस समान।।111(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 112

कबहुँ कि दुख सब कर हित ताकें। तेहि कि दरिद्र परस मनि जाकें।। परद्रोही की होहिं निसंका। कामी पुनि कि रहहिं अकलंका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बंस कि रह द्विज अनहित कीन्हें। कर्म कि होहिं स्वरूपहि चीन्हें।। काहू सुमति कि खल सँग जामी। सुभ गति पाव कि परत्रिय गामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भव कि परहिं परमात्मा बिंदक। सुखी कि होहिं कबहुँ हरिनिंदक।। राजु कि रहइ नीति बिनु जानें। अघ कि रहहिं हरिचरित बखानें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पावन जस कि पुन्य बिनु होई। बिनु अघ अजस कि पावइ कोई।। लाभु कि किछु हरि भगति समाना। जेहि गावहिं श्रुति संत पुराना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हानि कि जग एहि सम किछु भाई। भजिअ न रामहि नर तनु पाई।। अघ कि पिसुनता सम कछु आना। धर्म कि दया सरिस हरिजाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि बिधि अमिति जुगुति मन गुनऊँ। मुनि उपदेस न सादर सुनऊँ।। पुनि पुनि सगुन पच्छ मैं रोपा। तब मुनि बोलेउ बचन सकोपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मूढ़ परम सिख देउँ न मानसि। उत्तर प्रतिउत्तर बहु आनसि।। सत्य बचन बिस्वास न करही। बायस इव सबही ते डरही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सठ स्वपच्छ तब हृदयँ बिसाला। सपदि होहि पच्छी चंडाला।। लीन्ह श्राप मैं सीस चढ़ाई। नहिं कछु भय न दीनता आई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुरत भयउँ मैं काग तब पुनि मुनि पद सिरु नाइ। सुमिरि राम रघुबंस मनि हरषित चलेउँ उड़ाइ।।112(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
उमा जे राम चरन रत बिगत काम मद क्रोध।। निज प्रभुमय देखहिं जगत केहि सन करहिं बिरोध।।112(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 113

सुनु खगेस नहिं कछु रिषि दूषन। उर प्रेरक रघुबंस बिभूषन।। कृपासिंधु मुनि मति करि भोरी। लीन्हि प्रेम परिच्छा मोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मन बच क्रम मोहि निज जन जाना। मुनि मति पुनि फेरी भगवाना।। रिषि मम महत सीलता देखी। राम चरन बिस्वास बिसेषी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति बिसमय पुनि पुनि पछिताई। सादर मुनि मोहि लीन्ह बोलाई।। मम परितोष बिबिध बिधि कीन्हा। हरषित राममंत्र तब दीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बालकरूप राम कर ध्याना। कहेउ मोहि मुनि कृपानिधाना।। सुंदर सुखद मिहि अति भावा। सो प्रथमहिं मैं तुम्हहि सुनावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि मोहि कछुक काल तहँ राखा। रामचरितमानस तब भाषा।। सादर मोहि यह कथा सुनाई। पुनि बोले मुनि गिरा सुहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रामचरित सर गुप्त सुहावा। संभु प्रसाद तात मैं पावा।। तोहि निज भगत राम कर जानी। ताते मैं सब कहेउँ बखानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम भगति जिन्ह कें उर नाहीं। कबहुँ न तात कहिअ तिन्ह पाहीं।। मुनि मोहि बिबिध भाँति समुझावा। मैं सप्रेम मुनि पद सिरु नावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज कर कमल परसि मम सीसा। हरषित आसिष दीन्ह मुनीसा।। राम भगति अबिरल उर तोरें। बसिहि सदा प्रसाद अब मोरें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
-सदा राम प्रिय होहु तुम्ह सुभ गुन भवन अमान। कामरूप इच्धामरन ग्यान बिराग निधान।।113(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जेंहिं आश्रम तुम्ह बसब पुनि सुमिरत श्रीभगवंत। ब्यापिहि तहँ न अबिद्या जोजन एक प्रजंत।।113(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 114

काल कर्म गुन दोष सुभाऊ। कछु दुख तुम्हहि न ब्यापिहि काऊ।। राम रहस्य ललित बिधि नाना। गुप्त प्रगट इतिहास पुराना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिनु श्रम तुम्ह जानब सब सोऊ। नित नव नेह राम पद होऊ।। जो इच्छा करिहहु मन माहीं। हरि प्रसाद कछु दुर्लभ नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि मुनि आसिष सुनु मतिधीरा। ब्रह्मगिरा भइ गगन गँभीरा।। एवमस्तु तव बच मुनि ग्यानी। यह मम भगत कर्म मन बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि नभगिरा हरष मोहि भयऊ। प्रेम मगन सब संसय गयऊ।। करि बिनती मुनि आयसु पाई। पद सरोज पुनि पुनि सिरु नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरष सहित एहिं आश्रम आयउँ। प्रभु प्रसाद दुर्लभ बर पायउँ।। इहाँ बसत मोहि सुनु खग ईसा। बीते कलप सात अरु बीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करउँ सदा रघुपति गुन गाना। सादर सुनहिं बिहंग सुजाना।। जब जब अवधपुरीं रघुबीरा। धरहिं भगत हित मनुज सरीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब तब जाइ राम पुर रहऊँ। सिसुलीला बिलोकि सुख लहऊँ।। पुनि उर राखि राम सिसुरूपा। निज आश्रम आवउँ खगभूपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कथा सकल मैं तुम्हहि सुनाई। काग देह जेहिं कारन पाई।। कहिउँ तात सब प्रस्न तुम्हारी। राम भगति महिमा अति भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताते यह तन मोहि प्रिय भयउ राम पद नेह। निज प्रभु दरसन पायउँ गए सकल संदेह।।114(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
भगति पच्छ हठ करि रहेउँ दीन्हि महारिषि साप। मुनि दुर्लभ बर पायउँ देखहु भजन प्रताप।।114(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 115

जे असि भगति जानि परिहरहीं। केवल ग्यान हेतु श्रम करहीं।। ते जड़ कामधेनु गृहँ त्यागी। खोजत आकु फिरहिं पय लागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु खगेस हरि भगति बिहाई। जे सुख चाहहिं आन उपाई।। ते सठ महासिंधु बिनु तरनी। पैरि पार चाहहिं जड़ करनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि भसुंडि के बचन भवानी। बोलेउ गरुड़ हरषि मृदु बानी।। तव प्रसाद प्रभु मम उर माहीं। संसय सोक मोह भ्रम नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनेउँ पुनीत राम गुन ग्रामा। तुम्हरी कृपाँ लहेउँ बिश्रामा।। एक बात प्रभु पूँछउँ तोही। कहहु बुझाइ कृपानिधि मोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहहिं संत मुनि बेद पुराना। नहिं कछु दुर्लभ ग्यान समाना।। सोइ मुनि तुम्ह सन कहेउ गोसाईं। नहिं आदरेहु भगति की नाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यानहि भगतिहि अंतर केता। सकल कहहु प्रभु कृपा निकेता।। सुनि उरगारि बचन सुख माना। सादर बोलेउ काग सुजाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगतिहि ग्यानहि नहिं कछु भेदा। उभय हरहिं भव संभव खेदा।। नाथ मुनीस कहहिं कछु अंतर। सावधान सोउ सुनु बिहंगबर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यान बिराग जोग बिग्याना। ए सब पुरुष सुनहु हरिजाना।। पुरुष प्रताप प्रबल सब भाँती। अबला अबल सहज जड़ जाती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
-पुरुष त्यागि सक नारिहि जो बिरक्त मति धीर।। न तु कामी बिषयाबस बिमुख जो पद रघुबीर।।115(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
सोउ मुनि ग्याननिधान मृगनयनी बिधु मुख निरखि। बिबस होइ हरिजान नारि बिष्नु माया प्रगट।।115(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 116

इहाँ न पच्छपात कछु राखउँ। बेद पुरान संत मत भाषउँ।। मोह न नारि नारि कें रूपा। पन्नगारि यह रीति अनूपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
माया भगति सुनहु तुम्ह दोऊ। नारि बर्ग जानइ सब कोऊ।। पुनि रघुबीरहि भगति पिआरी। माया खलु नर्तकी बिचारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगतिहि सानुकूल रघुराया। ताते तेहि डरपति अति माया।। राम भगति निरुपम निरुपाधी। बसइ जासु उर सदा अबाधी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि बिलोकि माया सकुचाई। करि न सकइ कछु निज प्रभुताई।। अस बिचारि जे मुनि बिग्यानी। जाचहीं भगति सकल सुख खानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह रहस्य रघुनाथ कर बेगि न जानइ कोइ। जो जानइ रघुपति कृपाँ सपनेहुँ मोह न होइ।।116(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु सुप्रबीन। जो सुनि होइ राम पद प्रीति सदा अबिछीन।।116(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 117

सुनहु तात यह अकथ कहानी। समुझत बनइ न जाइ बखानी।। ईस्वर अंस जीव अबिनासी। चेतन अमल सहज सुख रासी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो मायाबस भयउ गोसाईं। बँध्यो कीर मरकट की नाई।। जड़ चेतनहि ग्रंथि परि गई। जदपि मृषा छूटत कठिनई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब ते जीव भयउ संसारी। छूट न ग्रंथि न होइ सुखारी।। श्रुति पुरान बहु कहेउ उपाई। छूट न अधिक अधिक अरुझाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जीव हृदयँ तम मोह बिसेषी। ग्रंथि छूट किमि परइ न देखी।। अस संजोग ईस जब करई। तबहुँ कदाचित सो निरुअरई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सात्त्विक श्रद्धा धेनु सुहाई। जौं हरि कृपाँ हृदयँ बस आई।। जप तप ब्रत जम नियम अपारा। जे श्रुति कह सुभ धर्म अचारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेइ तृन हरित चरै जब गाई। भाव बच्छ सिसु पाइ पेन्हाई।। नोइ निबृत्ति पात्र बिस्वासा। निर्मल मन अहीर निज दासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परम धर्ममय पय दुहि भाई। अवटै अनल अकाम बनाई।। तोष मरुत तब छमाँ जुड़ावै। धृति सम जावनु देइ जमावै।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुदिताँ मथैं बिचार मथानी। दम अधार रजु सत्य सुबानी।। तब मथि काढ़ि लेइ नवनीता। बिमल बिराग सुभग सुपुनीता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जोग अगिनि करि प्रगट तब कर्म सुभासुभ लाइ। बुद्धि सिरावैं ग्यान घृत ममता मल जरि जाइ।।117(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
तब बिग्यानरूपिनि बुद्धि बिसद घृत पाइ। चित्त दिआ भरि धरै दृढ़ समता दिअटि बनाइ।।117(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
तीनि अवस्था तीनि गुन तेहि कपास तें काढ़ि। तूल तुरीय सँवारि पुनि बाती करै सुगाढ़ि।।117(ग)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
एहि बिधि लेसै दीप तेज रासि बिग्यानमय।। जातहिं जासु समीप जरहिं मदादिक सलभ सब।।117(घ)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

Doha 118

सोहमस्मि इति बृत्ति अखंडा। दीप सिखा सोइ परम प्रचंडा।। आतम अनुभव सुख सुप्रकासा। तब भव मूल भेद भ्रम नासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रबल अबिद्या कर परिवारा। मोह आदि तम मिटइ अपारा।। तब सोइ बुद्धि पाइ उँजिआरा। उर गृहँ बैठि ग्रंथि निरुआरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छोरन ग्रंथि पाव जौं सोई। तब यह जीव कृतारथ होई।। छोरत ग्रंथि जानि खगराया। बिघ्न अनेक करइ तब माया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रिद्धि सिद्धि प्रेरइ बहु भाई। बुद्धहि लोभ दिखावहिं आई।। कल बल छल करि जाहिं समीपा। अंचल बात बुझावहिं दीपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
होइ बुद्धि जौं परम सयानी। तिन्ह तन चितव न अनहित जानी।। जौं तेहि बिघ्न बुद्धि नहिं बाधी। तौ बहोरि सुर करहिं उपाधी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इंद्रीं द्वार झरोखा नाना। तहँ तहँ सुर बैठे करि थाना।। आवत देखहिं बिषय बयारी। ते हठि देही कपाट उघारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जब सो प्रभंजन उर गृहँ जाई। तबहिं दीप बिग्यान बुझाई।। ग्रंथि न छूटि मिटा सो प्रकासा। बुद्धि बिकल भइ बिषय बतासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इंद्रिन्ह सुरन्ह न ग्यान सोहाई। बिषय भोग पर प्रीति सदाई।। बिषय समीर बुद्धि कृत भोरी। तेहि बिधि दीप को बार बहोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब फिरि जीव बिबिध बिधि पावइ संसृति क्लेस। हरि माया अति दुस्तर तरि न जाइ बिहगेस।।118(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कहत कठिन समुझत कठिन साधन कठिन बिबेक। होइ घुनाच्छर न्याय जौं पुनि प्रत्यूह अनेक।।118(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 119

ग्यान पंथ कृपान कै धारा। परत खगेस होइ नहिं बारा।। जो निर्बिघ्न पंथ निर्बहई। सो कैवल्य परम पद लहई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति दुर्लभ कैवल्य परम पद। संत पुरान निगम आगम बद।। राम भजत सोइ मुकुति गोसाई। अनइच्छित आवइ बरिआई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई। कोटि भाँति कोउ करै उपाई।। तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई। रहि न सकइ हरि भगति बिहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस बिचारि हरि भगत सयाने। मुक्ति निरादर भगति लुभाने।। भगति करत बिनु जतन प्रयासा। संसृति मूल अबिद्या नासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भोजन करिअ तृपिति हित लागी। जिमि सो असन पचवै जठरागी।। असि हरिभगति सुगम सुखदाई। को अस मूढ़ न जाहि सोहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सेवक सेब्य भाव बिनु भव न तरिअ उरगारि।। भजहु राम पद पंकज अस सिद्धांत बिचारि।।119(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जो चेतन कहँ ज़ड़ करइ ज़ड़हि करइ चैतन्य। अस समर्थ रघुनायकहिं भजहिं जीव ते धन्य।।119(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 120

कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई।। राम भगति चिंतामनि सुंदर। बसइ गरुड़ जाके उर अंतर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परम प्रकास रूप दिन राती। नहिं कछु चहिअ दिआ घृत बाती।। मोह दरिद्र निकट नहिं आवा। लोभ बात नहिं ताहि बुझावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रबल अबिद्या तम मिटि जाई। हारहिं सकल सलभ समुदाई।। खल कामादि निकट नहिं जाहीं। बसइ भगति जाके उर माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गरल सुधासम अरि हित होई। तेहि मनि बिनु सुख पाव न कोई।। ब्यापहिं मानस रोग न भारी। जिन्ह के बस सब जीव दुखारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम भगति मनि उर बस जाकें। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें।। चतुर सिरोमनि तेइ जग माहीं। जे मनि लागि सुजतन कराहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो मनि जदपि प्रगट जग अहई। राम कृपा बिनु नहिं कोउ लहई।। सुगम उपाय पाइबे केरे। नर हतभाग्य देहिं भटमेरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना।। मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी।। मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा।। सब कर फल हरि भगति सुहाई। सो बिनु संत न काहूँ पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्रह्म पयोनिधि मंदर ग्यान संत सुर आहिं। कथा सुधा मथि काढ़हिं भगति मधुरता जाहिं।।120(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बिरति चर्म असि ग्यान मद लोभ मोह रिपु मारि। जय पाइअ सो हरि भगति देखु खगेस बिचारि।।120(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 121

पुनि सप्रेम बोलेउ खगराऊ। जौं कृपाल मोहि ऊपर भाऊ।। नाथ मोहि निज सेवक जानी। सप्त प्रस्न कहहु बखानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रथमहिं कहहु नाथ मतिधीरा। सब ते दुर्लभ कवन सरीरा।। बड़ दुख कवन कवन सुख भारी। सोउ संछेपहिं कहहु बिचारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत असंत मरम तुम्ह जानहु। तिन्ह कर सहज सुभाव बखानहु।। कवन पुन्य श्रुति बिदित बिसाला। कहहु कवन अघ परम कराला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मानस रोग कहहु समुझाई। तुम्ह सर्बग्य कृपा अधिकाई।। तात सुनहु सादर अति प्रीती। मैं संछेप कहउँ यह नीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नर तन सम नहिं कवनिउ देही। जीव चराचर जाचत तेही।। नरग स्वर्ग अपबर्ग निसेनी। ग्यान बिराग भगति सुभ देनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो तनु धरि हरि भजहिं न जे नर। होहिं बिषय रत मंद मंद तर।। काँच किरिच बदलें ते लेही। कर ते डारि परस मनि देहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नहिं दरिद्र सम दुख जग माहीं। संत मिलन सम सुख जग नाहीं।। पर उपकार बचन मन काया। संत सहज सुभाउ खगराया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत सहहिं दुख परहित लागी। परदुख हेतु असंत अभागी।। भूर्ज तरू सम संत कृपाला। परहित निति सह बिपति बिसाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सन इव खल पर बंधन करई। खाल कढ़ाइ बिपति सहि मरई।। खल बिनु स्वारथ पर अपकारी। अहि मूषक इव सुनु उरगारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पर संपदा बिनासि नसाहीं। जिमि ससि हति हिम उपल बिलाहीं।। दुष्ट उदय जग आरति हेतू। जथा प्रसिद्ध अधम ग्रह केतू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत उदय संतत सुखकारी। बिस्व सुखद जिमि इंदु तमारी।। परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा। पर निंदा सम अघ न गरीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हर गुर निंदक दादुर होई। जन्म सहस्त्र पाव तन सोई।। द्विज निंदक बहु नरक भोग करि। जग जनमइ बायस सरीर धरि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुर श्रुति निंदक जे अभिमानी। रौरव नरक परहिं ते प्रानी।। होहिं उलूक संत निंदा रत। मोह निसा प्रिय ग्यान भानु गत।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब के निंदा जे जड़ करहीं। ते चमगादुर होइ अवतरहीं।। सुनहु तात अब मानस रोगा। जिन्ह ते दुख पावहिं सब लोगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला। तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला।। काम बात कफ लोभ अपारा। क्रोध पित्त नित छाती जारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रीति करहिं जौं तीनिउ भाई। उपजइ सन्यपात दुखदाई।। बिषय मनोरथ दुर्गम नाना। ते सब सूल नाम को जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ममता दादु कंडु इरषाई। हरष बिषाद गरह बहुताई।। पर सुख देखि जरनि सोइ छई। कुष्ट दुष्टता मन कुटिलई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अहंकार अति दुखद डमरुआ। दंभ कपट मद मान नेहरुआ।। तृस्ना उदरबृद्धि अति भारी। त्रिबिध ईषना तरुन तिजारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जुग बिधि ज्वर मत्सर अबिबेका। कहँ लागि कहौं कुरोग अनेका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक ब्याधि बस नर मरहिं ए असाधि बहु ब्याधि। पीड़हिं संतत जीव कहुँ सो किमि लहै समाधि।।121(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
नेम धर्म आचार तप ग्यान जग्य जप दान। भेषज पुनि कोटिन्ह नहिं रोग जाहिं हरिजान।।121(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 122

एहि बिधि सकल जीव जग रोगी। सोक हरष भय प्रीति बियोगी।। मानक रोग कछुक मैं गाए। हहिं सब कें लखि बिरलेन्ह पाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जाने ते छीजहिं कछु पापी। नास न पावहिं जन परितापी।। बिषय कुपथ्य पाइ अंकुरे। मुनिहु हृदयँ का नर बापुरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम कृपाँ नासहि सब रोगा। जौं एहि भाँति बनै संयोगा।। सदगुर बैद बचन बिस्वासा। संजम यह न बिषय कै आसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रघुपति भगति सजीवन मूरी। अनूपान श्रद्धा मति पूरी।। एहि बिधि भलेहिं सो रोग नसाहीं। नाहिं त जतन कोटि नहिं जाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जानिअ तब मन बिरुज गोसाँई। जब उर बल बिराग अधिकाई।। सुमति छुधा बाढ़इ नित नई। बिषय आस दुर्बलता गई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिमल ग्यान जल जब सो नहाई। तब रह राम भगति उर छाई।। सिव अज सुक सनकादिक नारद। जे मुनि ब्रह्म बिचार बिसारद।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब कर मत खगनायक एहा। करिअ राम पद पंकज नेहा।। श्रुति पुरान सब ग्रंथ कहाहीं। रघुपति भगति बिना सुख नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कमठ पीठ जामहिं बरु बारा। बंध्या सुत बरु काहुहि मारा।। फूलहिं नभ बरु बहुबिधि फूला। जीव न लह सुख हरि प्रतिकूला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तृषा जाइ बरु मृगजल पाना। बरु जामहिं सस सीस बिषाना।। अंधकारु बरु रबिहि नसावै। राम बिमुख न जीव सुख पावै।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हिम ते अनल प्रगट बरु होई। बिमुख राम सुख पाव न कोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उबारि मथें घृत होइ बरु सिकता ते बरु तेल। बिनु हरि भजन न भव तरिअ यह सिद्धांत अपेल।।122(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
मसकहि करइ बिंरंचि प्रभु अजहि मसक ते हीन। अस बिचारि तजि संसय रामहि भजहिं प्रबीन।।122(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
विनिच्श्रितं वदामि ते न अन्यथा वचांसि मे। हरिं नरा भजन्ति येऽतिदुस्तरं तरन्ति ते।।122(ग)।।
Shloka
अर्थ / Meaning

Doha 123

कहेउँ नाथ हरि चरित अनूपा। ब्यास समास स्वमति अनुरुपा।। श्रुति सिद्धांत इहइ उरगारी। राम भजिअ सब काज बिसारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु रघुपति तजि सेइअ काही। मोहि से सठ पर ममता जाही।। तुम्ह बिग्यानरूप नहिं मोहा। नाथ कीन्हि मो पर अति छोहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पूछिहुँ राम कथा अति पावनि। सुक सनकादि संभु मन भावनि।। सत संगति दुर्लभ संसारा। निमिष दंड भरि एकउ बारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखु गरुड़ निज हृदयँ बिचारी। मैं रघुबीर भजन अधिकारी।। सकुनाधम सब भाँति अपावन। प्रभु मोहि कीन्ह बिदित जग पावन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आजु धन्य मैं धन्य अति जद्यपि सब बिधि हीन। निज जन जानि राम मोहि संत समागम दीन।।123(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
नाथ जथामति भाषेउँ राखेउँ नहिं कछु गोइ। चरित सिंधु रघुनायक थाह कि पावइ कोइ।।123।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 124

सुमिरि राम के गुन गन नाना। पुनि पुनि हरष भुसुंडि सुजाना।। महिमा निगम नेति करि गाई। अतुलित बल प्रताप प्रभुताई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिव अज पूज्य चरन रघुराई। मो पर कृपा परम मृदुलाई।। अस सुभाउ कहुँ सुनउँ न देखउँ। केहि खगेस रघुपति सम लेखउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
साधक सिद्ध बिमुक्त उदासी। कबि कोबिद कृतग्य संन्यासी।। जोगी सूर सुतापस ग्यानी। धर्म निरत पंडित बिग्यानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तरहिं न बिनु सेएँ मम स्वामी। राम नमामि नमामि नमामी।। सरन गएँ मो से अघ रासी। होहिं सुद्ध नमामि अबिनासी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु नाम भव भेषज हरन घोर त्रय सूल। सो कृपालु मोहि तो पर सदा रहउ अनुकूल।।124(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सुनि भुसुंडि के बचन सुभ देखि राम पद नेह। बोलेउ प्रेम सहित गिरा गरुड़ बिगत संदेह।।124(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 125

मै कृत्कृत्य भयउँ तव बानी। सुनि रघुबीर भगति रस सानी।। राम चरन नूतन रति भई। माया जनित बिपति सब गई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोह जलधि बोहित तुम्ह भए। मो कहँ नाथ बिबिध सुख दए।। मो पहिं होइ न प्रति उपकारा। बंदउँ तव पद बारहिं बारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पूरन काम राम अनुरागी। तुम्ह सम तात न कोउ बड़भागी।। संत बिटप सरिता गिरि धरनी। पर हित हेतु सबन्ह कै करनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहै न जाना।। निज परिताप द्रवइ नवनीता। पर दुख द्रवहिं संत सुपुनीता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जीवन जन्म सुफल मम भयऊ। तव प्रसाद संसय सब गयऊ।। जानेहु सदा मोहि निज किंकर। पुनि पुनि उमा कहइ बिहंगबर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तासु चरन सिरु नाइ करि प्रेम सहित मतिधीर। गयउ गरुड़ बैकुंठ तब हृदयँ राखि रघुबीर।।125(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन। बिनु हरि कृपा न होइ सो गावहिं बेद पुरान।।125(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 126

कहेउँ परम पुनीत इतिहासा। सुनत श्रवन छूटहिं भव पासा।। प्रनत कल्पतरु करुना पुंजा। उपजइ प्रीति राम पद कंजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मन क्रम बचन जनित अघ जाई। सुनहिं जे कथा श्रवन मन लाई।। तीर्थाटन साधन समुदाई। जोग बिराग ग्यान निपुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाना कर्म धर्म ब्रत दाना। संजम दम जप तप मख नाना।। भूत दया द्विज गुर सेवकाई। बिद्या बिनय बिबेक बड़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जहँ लगि साधन बेद बखानी। सब कर फल हरि भगति भवानी।। सो रघुनाथ भगति श्रुति गाई। राम कृपाँ काहूँ एक पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि दुर्लभ हरि भगति नर पावहिं बिनहिं प्रयास। जे यह कथा निरंतर सुनहिं मानि बिस्वास।।126।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 127

सोइ सर्बग्य गुनी सोइ ग्याता। सोइ महि मंडित पंडित दाता।। धर्म परायन सोइ कुल त्राता। राम चरन जा कर मन राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नीति निपुन सोइ परम सयाना। श्रुति सिद्धांत नीक तेहिं जाना।। सोइ कबि कोबिद सोइ रनधीरा। जो छल छाड़ि भजइ रघुबीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धन्य देस सो जहँ सुरसरी। धन्य नारि पतिब्रत अनुसरी।। धन्य सो भूपु नीति जो करई। धन्य सो द्विज निज धर्म न टरई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो धन धन्य प्रथम गति जाकी। धन्य पुन्य रत मति सोइ पाकी।। धन्य घरी सोइ जब सतसंगा। धन्य जन्म द्विज भगति अभंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो कुल धन्य उमा सुनु जगत पूज्य सुपुनीत। श्रीरघुबीर परायन जेहिं नर उपज बिनीत।।127।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 128

मति अनुरूप कथा मैं भाषी। जद्यपि प्रथम गुप्त करि राखी।। तव मन प्रीति देखि अधिकाई। तब मैं रघुपति कथा सुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह न कहिअ सठही हठसीलहि। जो मन लाइ न सुन हरि लीलहि।। कहिअ न लोभिहि क्रोधहि कामिहि। जो न भजइ सचराचर स्वामिहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
द्विज द्रोहिहि न सुनाइअ कबहूँ। सुरपति सरिस होइ नृप जबहूँ।। राम कथा के तेइ अधिकारी। जिन्ह कें सतसंगति अति प्यारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गुर पद प्रीति नीति रत जेई। द्विज सेवक अधिकारी तेई।। ता कहँ यह बिसेष सुखदाई। जाहि प्रानप्रिय श्रीरघुराई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम चरन रति जो चह अथवा पद निर्बान। भाव सहित सो यह कथा करउ श्रवन पुट पान।।128।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 129

राम कथा गिरिजा मैं बरनी। कलि मल समनि मनोमल हरनी।। संसृति रोग सजीवन मूरी। राम कथा गावहिं श्रुति सूरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि महँ रुचिर सप्त सोपाना। रघुपति भगति केर पंथाना।। अति हरि कृपा जाहि पर होई। पाउँ देइ एहिं मारग सोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मन कामना सिद्धि नर पावा। जे यह कथा कपट तजि गावा।। कहहिं सुनहिं अनुमोदन करहीं। ते गोपद इव भवनिधि तरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि सब कथा हृदयँ अति भाई। गिरिजा बोली गिरा सुहाई।। नाथ कृपाँ मम गत संदेहा। राम चरन उपजेउ नव नेहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मैं कृतकृत्य भइउँ अब तव प्रसाद बिस्वेस। उपजी राम भगति दृढ़ बीते सकल कलेस।।129।।
Doha
अर्थ / Meaning

Doha 130

यह सुभ संभु उमा संबादा। सुख संपादन समन बिषादा।। भव भंजन गंजन संदेहा। जन रंजन सज्जन प्रिय एहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम उपासक जे जग माहीं। एहि सम प्रिय तिन्ह के कछु नाहीं।। रघुपति कृपाँ जथामति गावा। मैं यह पावन चरित सुहावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा।। रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि। संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु पतित पावन बड़ बाना। गावहिं कबि श्रुति संत पुराना।। ताहि भजहि मन तजि कुटिलाई। राम भजें गति केहिं नहिं पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पाई न केहिं गति पतित पावन राम भजि सुनु सठ मना। गनिका अजामिल ब्याध गीध गजादि खल तारे घना।। आभीर जमन किरात खस स्वपचादि अति अघरूप जे। कहि नाम बारक तेपि पावन होहिं राम नमामि ते।।1।।
Chhand
अर्थ / Meaning
रघुबंस भूषन चरित यह नर कहहिं सुनहिं जे गावहीं। कलि मल मनोमल धोइ बिनु श्रम राम धाम सिधावहीं।। सत पंच चौपाईं मनोहर जानि जो नर उर धरै। दारुन अबिद्या पंच जनित बिकार श्रीरघुबर हरै।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सुंदर सुजान कृपा निधान अनाथ पर कर प्रीति जो। सो एक राम अकाम हित निर्बानप्रद सम आन को।। जाकी कृपा लवलेस ते मतिमंद तुलसीदासहूँ। पायो परम बिश्रामु राम समान प्रभु नाहीं कहूँ।।3।।
Chhand
अर्थ / Meaning
मो सम दीन न दीन हित तुम्ह समान रघुबीर। अस बिचारि रघुबंस मनि हरहु बिषम भव भीर।।130(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कामिहि नारि पिआरि जिमि लोभहि प्रिय जिमि दाम। तिमि रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहु मोहि राम।।130(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
यत्पूर्वं प्रभुणा कृतं सुकविना श्रीशम्भुना दुर्गमं श्रॆमद्रामपदाब्जभक्तिमनिशम प्राप्त्यै तू रामायणं। मत्वा तद्रघुनाथनामनिरतम स्वान्तस्तम:शान्तये भाषाबद्ध्मिदम चकार तुलसीदासस्तथा मानसं।।1।। पुण्यं पापहरं सदा शिवकरं विज्ञानाभाक्तिप्रदम मायामोहमलापहं सुविमलं प्रेमाम्बुपूरं शुभम। श्रॆमद्रामचरितमानसमिदम भक्त्यावगाहन्ति ये ते सन्सारपतनगघोरकिरनैर्दह्यन्ति नो मानवाः।।2।।
Shloka
अर्थ / Meaning