Yuddha Kanda

Sarga 58: Neela fights with Prahastha and kills him.

युद्धकाण्डम् · सर्ग 58

51 shlokas

ShlokaShloka 1
ततःप्रहस्तंनिर्यान्तंदृष्टवाभीमपराक्रमम् । उवाचसस्मितंरामोविभीषणमरिन्दमः ।।6.58.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
(इसके पूर्व) प्रहस्त को युद्ध की तैयारी करके लङ्का से बाहर निकलते देख शत्रुसूदन श्रीरामचन्द्रजी ने विभीषण से मुसकराकर कहा-
Show English Translation
Then Rama seeing Prahastha, the tamer of enemies of terrific valour coming towards him, said to Vibheeshana, having a gentle smile.
ShlokaShloka 2
कएषस्सुमहाकायोबलेनमहतावृतः । आचक्ष्वमेमहाबाहो वीर्यवन्तंनिशाचरम् ।।6.58.2।।
Show English Translation
"Oh, Broad shouldered Vibheeshana! Who is this Rakshasa of gigantic form coming surrounded by a great army He seems to be a valiant one. Tell me."
ShlokaShloka 3
राघवस्यवचश्श्रुत्वाप्रत्युवाचविभीषणः ।।6.58.3।। एषसेनापतिस्तस्यप्रहस्तोनामराक्षसः । लङ्कायांराक्षसेन्द्रस्यत्रिभागबलसम्वृतः ।।6.58.4।। वीर्यवानस्त्रविच्छूरःसुप्रख्याश्चपराक्रमे ।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीरघुनाथजी का वचन सुनकर विभीषण ने इस प्रकार उत्तर दिया—’प्रभो! इस राक्षस का नाम प्रहस्त है। यह राक्षसराज रावण का सेनापति है और लङ्का की एक तिहाई सेना से घिरा हुआ है। इसका पराक्रम भलीभाँति विख्यात है। यह नाना प्रकार के अस्त्रशस्त्रोंका ज्ञाता, बल-विक्रम से सम्पन्न और शूरवीर है’
Show English Translation
On hearing Raghava's words Vibheeshana replied." He is a Rakshasa, by name Prahastha, commander in chief of the army of Rakshasa king. He is widely known for his prowess, conversant with weapons and courageous. He is heroic and a third of the army of Ravana is under his command."
ShlokaShloka 4
ततःप्रहस्तंनिर्यान्तंभीमंभीमपराक्रमम् ।।6.58.5।। गर्जन्तंसुमहाकायंराक्षसैरभिसम्वृतम् । ददर्शमहतीसेनावानराणांबलीयसाम् ।।6.58.6।। अभिसञ्जातरोषाणांप्रहस्तमभिगर्जताम् ।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीरघुनाथजी का वचन सुनकर विभीषण ने इस प्रकार उत्तर दिया—’प्रभो! इस राक्षस का नाम प्रहस्त है। यह राक्षसराज रावण का सेनापति है और लङ्का की एक तिहाई सेना से घिरा हुआ है। इसका पराक्रम भलीभाँति विख्यात है। यह नाना प्रकार के अस्त्रशस्त्रोंका ज्ञाता, बल-विक्रम से सम्पन्न और शूरवीर है’
Show English Translation
The huge army of powerful Vanaras saw Prahastha of terrific prowess, fierce, surrounded by Rakshasas coming towards them roaring.
ShlokaShloka 5
खडगशक्त्यृष्णिबाणाश्चशूलानिमुसलानिच ।।6.58.7।। गदाश्चपरिघाःप्रासाविविधाश्चपरिश्वधाः । नूंषिचविचित्राणिराक्षसानांजयैषिणाम् ।।6.58.8।। प्रगृहीतान्यशोभन्तवानरानभिधावताम् ।
हिन्दी अर्थ देखें
तब वानरों ने भी युद्ध की इच्छा से खिले हुए वृक्ष, पर्वत तथा बड़े-बड़े पत्थर उठा लिये
Show English Translation
The Rakshasas rushing towards Vanaras seeking victory, seizing swords, javelins, double edged swords, pikes, mallets, maces, iron bars, spears and bows of different kinds shone brightly.
ShlokaShloka 6
जगृहुःपादपांश्चापिपुष्पितान्वानरर्षभाः ।।6.58.9।। शिलाश्चविपुलादीर्घायोद्धुकामाःप्लवङ्गमाः ।
हिन्दी अर्थ देखें
तब वानरों ने भी युद्ध की इच्छा से खिले हुए वृक्ष, पर्वत तथा बड़े-बड़े पत्थर उठा लिये
Show English Translation
The Vanaras burning with desire to fight, for their part went with huge trees in bloom, huge and long rocks.
ShlokaShloka 7
तेषामन्योन्यमासाद��यसङ्ग्रामःसुमहानभूत् ।।6.58.10।। बहूनामश्मवृष्टिंचशरवर्षंचवर्षताम् ।
हिन्दी अर्थ देखें
तब वानरों ने भी युद्ध की इच्छा से खिले हुए वृक्ष, पर्वत तथा बड़े-बड़े पत्थर उठा लिये
Show English Translation
Each of them approached one another with showers of rocks and many arrows and by that a great war happened.
ShlokaShloka 8
बहवोराक्षसायुद्धेबहून्वानरयूधपान् ।।6.58.11।। वानराराक्षसांश्चापिनिजघ्नुर्बहवोबहून् ।
हिन्दी अर्थ देखें
तब वानरों ने भी युद्ध की इच्छा से खिले हुए वृक्ष, पर्वत तथा बड़े-बड़े पत्थर उठा लिये
Show English Translation
In the course of war many Rakshasas killed many Vanara leaders and many Vanaras killed many Rakshasas also.
ShlokaShloka 9
शूलैःप्रमथिताःकेचित्केचिच्चपरमायुधैः ।।6.58.12।। परिघैराहताःकेचित्केचिच्छिन्नाःपरश्वधैः ।
हिन्दी अर्थ देखें
तब वानरों ने भी युद्ध की इच्छा से खिले हुए वृक्ष, पर्वत तथा बड़े-बड़े पत्थर उठा लिये
Show English Translation
Indeed, some were killed by Rakshasas with pikes, some by javelins, a few with iron bars, and a few were hacked with axes.
ShlokaShloka 10
निरुच्छवासाःकृता: केचित्पतिताधरणीतले ।।6.58.13।। विभिन्नहृदयाःकेचिदिषुसन्धानसन्दिताः ।
हिन्दी अर्थ देखें
फिर दोनों पक्षों के बहुसंख्यक वीरों में पत्थरों और बाणों की वर्षा के साथ-साथ आपस में बड़ा भारी संग्राम छिड़ गया
Show English Translation
Few got cut and deprived of life and fell on the ground. Some struck by arrows had their hearts broken into pieces.
ShlokaShloka 11
केचिव्दिधाकृताःखडगैःस्फुरन्तःपतिताभुवि ।।6.58.14।। वानराराक्षसैश्शूलैपार्श्वतश्चावदारिताः ।
हिन्दी अर्थ देखें
उस युद्धस्थल में बहुत-से राक्षसों ने बहुतेरे वानरों का और बहुसंख्यक वानरों ने बहुत-से राक्षसों का संहार कर डाला
Show English Translation
Few Vanaras cut into two by Rakshasas fell down and few Vanaras fell on the ground sides of the body cleft ceased life.
ShlokaShloka 12
वानरैश्चापिसङ्क्रुद्धैराक्षसौघाःसमन्ततः ।।6.58.15।। पादपैर्गिरिशृङ्गैश्चसम्पिष्टावसुधातले ।
हिन्दी अर्थ देखें
कितने ही योद्धा साँसरहित हो पृथ्वी पर गिर पड़े और कितने ही बाणों के लक्ष्य बन गये, जिससे उनके हृदय विदीर्ण हो गये
Show English Translation
Then the highly enraged Vanaras completely crushed Rakshasas in groups by crushing them on the earth's surface with trees and mountain peaks.
ShlokaShloka 13
वज्रस्पर्शतलैर्हस्स्सैर्मुष्टिभिश्चहताभृशम् ।।6.58.16।। वेमुश्शोणितमास्येभ्योविशीर्णदशनेक्षणाः ।
हिन्दी अर्थ देखें
कितने ही योद्धा साँसरहित हो पृथ्वी पर गिर पड़े और कितने ही बाणों के लक्ष्य बन गये, जिससे उनके हृदय विदीर्ण हो गये
Show English Translation
Hit by fists and hands that had the impact of thunderbolt, teeth and eyes smashed and fallen out, the Rakshasas vomited blood from their mouth excessively.
ShlokaShloka 14
आर्तस्वनंचस्वनतांसिंहनादंचनर्दताम् ।।6.58.17।। बभूवतुमुलश्शब्दोहरीणांरक्षस���ंयुधि ।
हिन्दी अर्थ देखें
इसी तरह वानरों ने भी अत्यन्त कुपित हो वृक्षों और पर्वत-शिखरों द्वारा सब ओर भूतल पर झुंड-के-झुंड राक्षसों को पीस डाला
Show English Translation
Tumultuous noise like the roar of lions arose in the battlefield with Vanaras and Rakshasas cries of pain.
ShlokaShloka 15
वानराराक्षसाःक्रुद्धावीरमार्गमनुव्रताः ।।6.58.18।। विवृत्तनयनाःक्रूराश्चक्रुःकर्माण्यभीतवत् ।
हिन्दी अर्थ देखें
इसी तरह वानरों ने भी अत्यन्त कुपित हो वृक्षों और पर्वत-शिखरों द्वारा सब ओर भूतल पर झुंड-के-झुंड राक्षसों को पीस डाला
Show English Translation
Following the path of heroes and infuriated, their eyes reeling, the vanaras and rakshasas carried out their deeds without fear.
ShlokaShloka 16
नरान्तकःकुम्भहनुर्महानादस्समुन्नतः ।।6.58.19।। एतेप्रहस्तसचिवास्सर्वेजघ्नुर्वनौकसः ।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरों के वज्रतुल्य कठोर थप्पड़ों और मुक्कों से भलीभाँति पीटे गये राक्षस मुँह से रक्त वमन करने लगे। उनके दाँत और नेत्र छिन्न-भिन्न होकर बिखर गये
Show English Translation
Naranthaka, Kumbhahanu, Mahanada, Samunnata, all these associates of Prahastha made short work of the monkeys.
ShlokaShloka 17
तेषामापततांशीघ्रंनिघ्नतांचापिवानरान् ।।6.58.20।। द्विविदोगिरिशृङ्गेणजघानैकंनरान्तकम् ।
हिन्दी अर्थ देखें
कोई आर्तनाद करते तो कोई सिंहों के समान दहाड़ते थे। इस प्रकार वानरों और राक्षसों का भयंकर कोलाहल वहाँ सब ओर गूंज उठा
Show English Translation
Rushing at great speed, the Rakshasas and also killing the Vanaras in that way, Dwivida alone struck down Naranthaka with a mountain peak.
ShlokaShloka 18
दुर्मुखःपुनरुत्थायकपिस्सविपुलद्रुमम् ।।6.58.21।। राक्षसंक्षिप्रहस्तस्तुसमुन्नतमपोथयत् ।
हिन्दी अर्थ देखें
नरान्तक, कुम्भहनु, महानाद और समुन्नत—ये प्रहस्त के सारे सचिव वानरों का वध करने लगे
Show English Translation
Dhurmukha monkey uprooting a huge tree holding it in hand killed the Rakshasa Samunnata.
ShlokaShloka 19
जाम्बवांस्तुसुसङ्क्रुद्धःप्रगृह्यमहतींशिलाम् ।।6.58.22।। पातयामासतेजस्वीमहानादस्यवक्षसि ।
हिन्दी अर्थ देखें
नरान्तक, कुम्भहनु, महानाद और समुन्नत—ये प्रहस्त के सारे सचिव वानरों का वध करने लगे
Show English Translation
Energetic Jambavantha, enraged, took a huge rock, and hurled at the chest of Mahanada who fell down.
ShlokaShloka 20
अथकुम्भहनुस्तत्रतारेणासाद्यवीर्यवान् ।।6.58.23।। वृक्षेणाभिहतोमूर्ध्निप्राणान्सन्त्याजयद्रणे ।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् अत्यन्त कुपित हुए तेजस्वी जाम्बवान् ने एक बड़ी भारी शिला उठा ली और उसे महानाद की छाती पर दे मारा
Show English Translation
And thereafter, valiant Tara closed with Kumbhahanu and attacked him with a tree on the head and he lost his life.
ShlokaShloka 21
अमृष्यमाणस्तत्कर्मप्रहस्तोरथमाश्रितः ।।6.58.24।। चकारकदनंघोरंधनुष्पाणिर्वनौकसाम् ।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् अत्यन्त कुपित हुए तेजस्वी जाम्बवान् ने एक बड़ी भारी शिला उठा ली और उसे महानाद की छाती पर दे मारा
Show English Translation
Then intolerant of the exploit, Prahastha got on to the chariot with bow in hand and caused dreadful havoc among the monkeys.
ShlokaShloka 22
आवर्तइवसञ्जज्ञेसेनयोरुभयोस्तदा ।।6.58.25।। क्षुभितस्याप्रमेयस्यसागरस्येवनिस्स्वनः ।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् अत्यन्त कुपित हुए तेजस्वी जाम्बवान् ने एक बड़ी भारी शिला उठा ली और उसे महानाद की छाती पर दे मारा
Show English Translation
Then the sound of both armies was like an agitated, boundless ocean, whirling round and frightening.
ShlokaShloka 23
महताहिशरौघेणप्रहस्तोयुद्धकोविदः ।।6.58.26।। अर्दयामाससङ्क्रुद्धोवानरान् परमाहवे ।
हिन्दी अर्थ देखें
रथ पर बैठे हुए प्रहस्त से वानरों का यह अद्भुत पराक्रम नहीं सहा गया। उसने हाथ में धनुष लेकर वानरों का घोर संहार आरम्भ किया
Show English Translation
In that major conflict, highly furious Prahastha, an expert in war tormented the Vanaras with a stream of arrows.
ShlokaShloka 24
वानराणांशरीरैश्चराक्षसानांचमेदिनी ।।6.58.27।। बभून्विचिताघोराःपतितैरिवपर्वतै ।
हिन्दी अर्थ देखें
रथ पर बैठे हुए प्रहस्त से वानरों का यह अद्भुत पराक्रम नहीं सहा गया। उसने हाथ में धनुष लेकर वानरों का घोर संहार आरम्भ किया
Show English Translation
The bodies of Vanaras and Rakshasas strewn on the ground, seemed like mountains had fallen.
ShlokaShloka 25
सामहीरुधिरौघेणप्रच्छन्नासम्प्रकाशते ।।6.58.28।। सञ्छन्नामाधवेमासिपलाशैरिवपुष्पितैः ।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय दोनों सेनाएँ जल के भँवर की भाँति चक्कर काट रही थीं। विक्षुब्ध अपार महासागर की गर्जना के समान उनकी गर्जना सुनायी दे रही थी
Show English Translation
That battlefield drenched with blood shone bright as though veiled with blossoms of Palasa in the month of Magha.
ShlokaShloka 26
हतवीरौघवस्रांतुभग्नायुधमहाद्रुमाम् ।।6.58.29।। शोणितौघमहातोयांयमसागरगामिनीम् । यकृत् प्लीहमहापङ्कान्वििकीर्णान्त्रशैवलाम् ।।6.58.30।। भिन्नकायशिरोमीनामङ्गावयवशाद्वलाम् । गृध्रहंसगणाकीर्णांकङ्कसारससेविताम् ।।6.58.31।। मेदःफेनसमाकीर्णामार्तस्न्तितस्वनाम् । तांकापुरषुदुस्तारांयुद्धभूमिमयींनदीम् ।।6.58.32।। नदीमिवघनापायेहंससारससेविताम् । राक्षसाःकपिमुख्याश्चतेरुस्तांदुस्तरांनदीम् ।।6.58.33।। यथापद्मरजोध्वस्तांनळिनींगजयूथपाः ।
हिन्दी अर्थ देखें
अत्यन्त क्रोध से भरे हुए रणदुर्मद राक्षस प्रहस्त ने अपने बाण-समूहों द्वारा उस महासमर में वानरों को पीड़ित करना आरम्भ किया
Show English Translation
Heaps of slain leaders as banks, broken weapons like large trees, torrents of blood as vast stretch of water, liver and spleens as its mire, scattered entrails as duckweeds, severed trunks and heads as fish, fingers and parts of limbs as grass, crowded with swans in the form of vultures, frequented with cranes in the shape of buzzards, overspread with f at in the form of foam, groans of the wounded for its murmur, difficult to cross for cowards, frequented by swans and cranes, that battlefield of river flowed. The Rakshasas and Vanaras swam across the river even though it were difficult to cross as leaders of elephant herds would cross a lotus pond covered with pollen of lotuses.
ShlokaShloka 27
ततःसृजन्तंबाणौघान्प्रहस्तंस्यन्दनेस्थितम् ।।6.58.34।। ददर्शतरसानीलोनिघ्नन्तंप्लवङ्गमान् ।
हिन्दी अर्थ देखें
पृथ्वी पर वानरों और राक्षसों की लाशों के ढेर लग गये। उनसे आच्छादित हुई रणभूमि भयानक पर्वतों से ढकी हुई-सी जान पड़ती थी
Show English Translation
Further Nila saw Prahastha seated and trembling and discharging a volley of arrows with vehemence exterminating monkeys.
ShlokaShloka 28
उद्धूतइववायुःखेमहदभ्रबलंबलात् ।।6.58.35।। समीक्ष्याभिद्रुतंयुद्धेप्रहस्तोवाहिनीपतिः । रथेनादित्यवर्णेननीलमेवाभिदुद्रुवे ।।6.58.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
रक्त के प्रवाह से आच्छादित हुई वह युद्धभूमि वैशाख-मास में खिले हुए पलाश-वृक्षों से ढकी हुई वन्य भूमि-सी सुशोभित होती थी
Show English Translation
Prahastha, the commander of the army darted, just as the violent wind blows away mass of clouds, observing Nila coming towards him, in his chariot which was bright as the sun.
ShlokaShloka 29
सधनुर्धन्विनांश्रेष्ठोविकृष्यपरमाहवे ।।6.58.37।। नीलायव्यसृजद्बाणान्प्रहस्तोवाहिनीपतिः ।
हिन्दी अर्थ देखें
मारे गये वीरों की लाशें ही जिसके दोनों तट थे। रक्त का प्रवाह ही जिसकी महान् जलराशि थी। टूटे-फूटे अस्त्र-शस्त्र ही जिसके तटवर्ती विशाल वृक्षों के समान जान पड़ते थे। जो यमलोकरूपी समुद्र से मिली हुई थी। सैनिकों के यकृत् और प्लीहा (हृदय के दाहिने और बायें भाग) जिसके महान् पंक थे। निकली हुई आँतें जहाँ सेवार का काम देती थीं। कटे हुए सिर और धड़ जहाँ मत्स्य-से प्रतीत होते थे। शरीर के छोटे-छोटे अवयव एवं केश जिसमें घास का भ्रम उत्पन्न करते थे। जहाँ गीध ही हंस बनकर बैठे थे। कङ्करूपी सारस जिसका सेवन करते थे। मेदे ही फेन बनकर जहाँ सब ओर फैले थे। पीड़ितों की कराह जिसकी कलकल ध्वनि थी और कायरों के लिये जिसे पार करना अत्यन्त कठिन था,उस युद्ध भूमिरूपिणी नदी को प्रवाहित करके राक्षस और श्रेष्ठ वानर वर्षा के अन्त में हंसों और सारसों से सेवित सरिता की भाँति उस दुस्तर नदी को उसी तरह पार कर रहे थे, जैसे गजयूथपति कमलों के पराग से आच्छादित किसी पुष्करिणी को पार करते हैं
Show English Translation
Prahastha, the CommanderinChief of the army, supreme among wielders of bow, stretched his best bow and drew it and began to discharge arrows at Neela.
ShlokaShloka 30
तेप्राप्यविशिखानील��विनिर्भिद्यसमाहिताः ।।6.58.38।। महींजग्मुर्महावेगारुषिताइवपन्नगाः ।
हिन्दी अर्थ देखें
मारे गये वीरों की लाशें ही जिसके दोनों तट थे। रक्त का प्रवाह ही जिसकी महान् जलराशि थी। टूटे-फूटे अस्त्र-शस्त्र ही जिसके तटवर्ती विशाल वृक्षों के समान जान पड़ते थे। जो यमलोकरूपी समुद्र से मिली हुई थी। सैनिकों के यकृत् और प्लीहा (हृदय के दाहिने और बायें भाग) जिसके महान् पंक थे। निकली हुई आँतें जहाँ सेवार का काम देती थीं। कटे हुए सिर और धड़ जहाँ मत्स्य-से प्रतीत होते थे। शरीर के छोटे-छोटे अवयव एवं केश जिसमें घास का भ्रम उत्पन्न करते थे। जहाँ गीध ही हंस बनकर बैठे थे। कङ्करूपी सारस जिसका सेवन करते थे। मेदे ही फेन बनकर जहाँ सब ओर फैले थे। पीड़ितों की कराह जिसकी कलकल ध्वनि थी और कायरों के लिये जिसे पार करना अत्यन्त कठिन था,उस युद्ध भूमिरूपिणी नदी को प्रवाहित करके राक्षस और श्रेष्ठ वानर वर्षा के अन्त में हंसों और सारसों से सेवित सरिता की भाँति उस दुस्तर नदी को उसी तरह पार कर रहे थे, जैसे गजयूथपति कमलों के पराग से आच्छादित किसी पुष्करिणी को पार करते हैं
Show English Translation
The arrows discharged by Prahastha, penetrated piercing into Nila's body at great speed like infuriated serpents and went straight into the earth.
ShlokaShloka 31
नीलःशरैरभिहतोनिशितैर्ज्वलनोपमैः ।।6.58.39।। सतंपरमदुर्धर्षमापतन्तंमहाकपिः । प्रहस्तंताडयामासवृक्षमुत्पाट्यवीर्यवान् ।।6.58.40।।
हिन्दी अर्थ देखें
मारे गये वीरों की लाशें ही जिसके दोनों तट थे। रक्त का प्रवाह ही जिसकी महान् जलराशि थी। टूटे-फूटे अस्त्र-शस्त्र ही जिसके तटवर्ती विशाल वृक्षों के समान जान पड़ते थे। जो यमलोकरूपी समुद्र से मिली हुई थी। सैनिकों के यकृत् और प्लीहा (हृदय के दाहिने और बायें भाग) जिसके महान् पंक थे। निकली हुई आँतें जहाँ सेवार का काम देती थीं। कटे हुए सिर और धड़ जहाँ मत्स्य-से प्रतीत होते थे। शरीर के छोटे-छोटे अवयव एवं केश जिसमें घास का भ्रम उत्पन्न करते थे। जहाँ गीध ही हंस बनकर बैठे थे। कङ्करूपी सारस जिसका सेवन करते थे। मेदे ही फेन बनकर जहाँ सब ओर फैले थे। पीड़ितों की कराह जिसकी कलकल ध्वनि थी और कायरों के लिये जिसे पार करना अत्यन्त कठिन था,उस युद्ध भूमिरूपिणी नदी को प्रवाहित करके राक्षस और श्रेष्ठ वानर वर्षा के अन्त में हंसों और सारसों से सेवित सरिता की भाँति उस दुस्तर नदी को उसी तरह पार कर रहे थे, जैसे गजयूथपति कमलों के पराग से आच्छादित किसी पुष्करिणी को पार करते हैं
Show English Translation
Great Vanara, a valiant one, Nila having been hit with arrows sharp as tongues of fire, struck Prahastha, who is most difficult to encounter and rushing towards him by uprooting a tree.
ShlokaShloka 32
सतेनाभिहतःक्रुद्धोनदन्राक्षसपुङ्गवः । ववर्षशरवर्षाणिप्लवङ्गानांचमूपतौ ।।6.58.41।।
हिन्दी अर्थ देखें
मारे गये वीरों की लाशें ही जिसके दोनों तट थे। रक्त का प्रवाह ही जिसकी महान् जलराशि थी। टूटे-फूटे अस्त्र-शस्त्र ही जिसके तटवर्ती विशाल वृक्षों के समान जान पड़ते थे। जो यमलोकरूपी समुद्र से मिली हुई थी। सैनिकों के यकृत् और प्लीहा (हृदय के दाहिने और बायें भाग) जिसके महान् पंक थे। निकली हुई आँतें जहाँ सेवार का काम देती थीं। कटे हुए सिर और धड़ जहाँ मत्स्य-से प्रतीत होते थे। शरीर के छोटे-छोटे अवयव एवं केश जिसमें घास का भ्रम उत्पन्न करते थे। जहाँ गीध ही हंस बनकर बैठे थे। कङ्करूपी सारस जिसका सेवन करते थे। मेदे ही फेन बनकर जहाँ सब ओर फैले थे। पीड़ितों की कराह जिसकी कलकल ध्वनि थी और कायरों के लिये जिसे पार करना अत्यन्त कठिन था,उस युद्ध भूमिरूपिणी नदी को प्रवाहित करके राक्षस और श्रेष्ठ वानर वर्षा के अन्त में हंसों और सारसों से सेवित सरिता की भाँति उस दुस्तर नदी को उसी तरह पार कर रहे थे, जैसे गजयूथपति कमलों के पराग से आच्छादित किसी पुष्करिणी को पार करते हैं
Show English Translation
Having been struck by Nila, the Rakshasa leader became furious, and began to roar and showered rain arrows on the monkeys.
ShlokaShloka 33
तस्यबाणगणान्घारान्राक्षसस्यमहाबलः । अपारयन्वारयितुंप्रत्यगृह्णान्निमीलितः ।।6.58.42।।
हिन्दी अर्थ देखें
मारे गये वीरों की लाशें ही जिसके दोनों तट थे। रक्त का प्रवाह ही जिसकी महान् जलराशि थी। टूटे-फूटे अस्त्र-शस्त्र ही जिसके तटवर्ती विशाल वृक्षों के समान जान पड़ते थे। जो यमलोकरूपी समुद्र से मिली हुई थी। सैनिकों के यकृत् और प्लीहा (हृदय के दाहिने और बायें भाग) जिसके महान् पंक थे। निकली हुई आँतें जहाँ सेवार का काम देती थीं। कटे हुए सिर और धड़ जहाँ मत्स्य-से प्रतीत होते थे। शरीर के छोटे-छोटे अवयव एवं केश जिसमें घास का भ्रम उत्पन्न करते थे। जहाँ गीध ही हंस बनकर बैठे थे। कङ्करूपी सारस जिसका सेवन करते थे। मेदे ही फेन बनकर जहाँ सब ओर फैले थे। पीड़ितों की कराह जिसकी कलकल ध्वनि थी और कायरों के लिये जिसे पार करना अत्यन्त कठिन था,उस युद्ध भूमिरूपिणी नदी को प्रवाहित करके राक्षस और श्रेष्ठ वानर वर्षा के अन्त में हंसों और सारसों से सेवित सरिता की भाँति उस दुस्तर नदी को उसी तरह पार कर रहे थे, जैसे गजयूथपति कमलों के पराग से आच्छादित किसी पुष्करिणी को पार करते हैं
Show English Translation
Not able to check the volley of arrows released by the Rakshasa, Nila received them with closed eyes.
ShlokaShloka 34
यथैवगोवृषोवर्षंशारदंशीघ्रमागतम् । एवमेवप्रहस्तस्यशरवर्षंदुरासदम् ।।6.58.43।। निमीलिताक्षस्सहसानीलस्सेहेदुरासदान् ।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर नील ने देखा, रथ पर बैठा हुआ प्रहस्त बाणसमूहों की वर्षा करके वेगपूर्वक वानरों का संहार कर रहा है
Show English Translation
Just as a mighty bull faces sudden downpour of autumnal rain, in the same way Nila precisely tolerated the rain of arrows of Prahastha, which are difficult to face, with eyes closed.
ShlokaShloka 35
रोषितश्शरवर्षेणसालेनमहतामहान् । प्रजघानहयाननीलःप्रहस्तस्यमहाबलः ।।6.58.44।।
हिन्दी अर्थ देखें
नील की चोट खाकर कुपित हुआ राक्षसशिरोमणि प्रहस्त बड़े जोर से गर्जता हुआ उन वानर-सेनापतिपर बाणों की वर्षा करने लगा
Show English Translation
Neela endowed with great prowess, became angry (by the rain of arrows showered on him) and hurled a huge Sala tree at Prahastha.
ShlokaShloka 36
ततन्सचापमुद्गृह्यप्रहस्तस्यमहाबलः । बभञ्जतरसानीलोननादचपुनःपुनः ।।6.58.45।।
हिन्दी अर्थ देखें
नील की चोट खाकर कुपित हुआ राक्षसशिरोमणि प्रहस्त बड़े जोर से गर्जता हुआ उन वानर-सेनापतिपर बाणों की वर्षा करने लगा
Show English Translation
Thereupon, Neela firmly holding the bow of mighty Prahastha broke it again and again and roared
ShlokaShloka 37
विधनुस्तुकृतस्तेनप्रहस्तोवाहिनीपतिः । प्रगृह्यमुसलंघोरंस्यन्दनादवपुप्लुवे ।।6.58.46।।
हिन्दी अर्थ देखें
नील की चोट खाकर कुपित हुआ राक्षसशिरोमणि प्रहस्त बड़े जोर से गर्जता हुआ उन वानर-सेनापतिपर बाणों की वर्षा करने लगा
Show English Translation
Deprived of bow and chariot, Prahastha, the CommanderinChief seizing a terrific mallet jumped down from the chariot.
ShlokaShloka 38
तावुभौवाहिनीमुख्यौजातवैरौतरस्विनौ । स्थितौक्षतजगदिग्धाङ्गौप्रभिन्नाविवकुञ्जरौ ।।6.58.47।।
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नील की चोट खाकर कुपित हुआ राक्षसशिरोमणि प्रहस्त बड़े जोर से गर्जता हुआ उन वानर-सेनापतिपर बाणों की वर्षा करने लगा
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Both Nila and Prahastha, deadly enemies, CommanderinChief of the armies, their limbs disfigured, wetted with blood, stood like elephants.
ShlokaShloka 39
उल्लिखन्तौसुतीक्ष्णाभिर्दंष्ट्राभिरितरेतरम् । सिंहशार्दूलसदृशौसिंहशार्दूलचेष्टितौ ।।6.58.48।। विक्रान्तविजयौवीरौसमरेष्न्विवर्तिनौ । काङ्क्षमाणौयशःप्राप्तुंवृत्रवासवयोस्सह ।।6.58.49।।
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नील की चोट खाकर कुपित हुआ राक्षसशिरोमणि प्रहस्त बड़े जोर से गर्जता हुआ उन वानर-सेनापतिपर बाणों की वर्षा करने लगा
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Tearing up each other with exceedingly sharp teeth they were behaving like a lion and tiger. They had won many wars and never turned back in war. They were heroes like Vrta and Indra desiring to conquer and attain fame.
ShlokaShloka 40
आजघानतदानीलंललाटेमुसलेनसः । प्रहस्तःपरमायत्तस्ततस्सुस्रावशोणितम् ।।6.58.50।।
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नील की चोट खाकर कुपित हुआ राक्षसशिरोमणि प्रहस्त बड़े जोर से गर्जता हुआ उन वानर-सेनापतिपर बाणों की वर्षा करने लगा
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Then Prahastha struck speedily with a mallet and hit Neela on the forehead and blood flowed from there.
ShlokaShloka 41
ततःशोणितदिग्धाङ्गःप्रगृह्यसुमहातरुम् । प्रहस्तस्योरसिक्रुद्धोविससर्जमहाकपिः ।।6.58.51।।
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उस दुरात्मा राक्षस के बाण-समूहों का निवारण करने में समर्थ न हो सकने पर नील आँख बंद करके उन सब बाणों को अपने अंगों पर ही ग्रहण करने लगे। जैसे साँड़ सहसा आयी हुई शरद्-ऋतु की वर्षा को चुपचाप अपने शरीर पर ही सह लेता है, उसी प्रकार प्रहस्त की उस दुःसह बाणवर्षा को नील चुपचाप नेत्र बंद करके सहन करते रहे
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Then drenched with blood, Neela was enraged and took hold of a huge tree and hurled at the chest of Prahastha.
ShlokaShloka 42
तमचिन्त्यप्रहारंसप्रगृह्यमुसलंमहत् । अभिदुद्रावबलिनंबलाननीलंप्लवङ्गमम् ।।6.58.52।।
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उस दुरात्मा राक्षस के बाण-समूहों का निवारण करने में समर्थ न हो सकने पर नील आँख बंद करके उन सब बाणों को अपने अंगों पर ही ग्रहण करने लगे। जैसे साँड़ सहसा आयी हुई शरद्-ऋतु की वर्षा को चुपचाप अपने शरीर पर ही सह लेता है, उसी प्रकार प्रहस्त की उस दुःसह बाणवर्षा को नील चुपचाप नेत्र बंद करके सहन करते रहे
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He (Prahastha), not caring for the wound, taking a huge mallet went towards that courageous monkey (Neela).
ShlokaShloka 43
तमुग्रवेगंसंरब्धमापतन्तंमहाकपिः । ततस्सम्प्रेक्ष्यजग्राहमहावेगोमहाशिलाम् ।।6.58.53।।
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प्रहस्त की बाणवर्षा से कुपित हो महाबली महाकपि नील ने एक विशाल सालवृक्ष के द्वारा उसके घोड़ों को मार डाला
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Then, seeing Prahastha waging and coming towards him, the great monkey, Neela, endowed with high speed threw a huge rock.
ShlokaShloka 44
तस्ययुद्धाभिकामस्यमृथेमुसलयोधिन । प्रहस्तस्यशिलांनीलोमूर्ध्नितूर्णमपातयत् ।।6.58.54।।
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तत्पश्चात् रोष से भरे हुए नील ने उस दुरात्मा के धनुष को भी वेगपूर्वक तोड़ दिया और बारंबार वे गर्जना करने लगे
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Fighting with the mallet, Neela quickly dropped the rock on that Prahastha's forehead
ShlokaShloka 45
सातेनकपिमुख्येनविमुक्तामहतीशिला । बिभेदबहुधाघोराप्रहस्तस्यशिरस्तदा ।।6.58.55।।
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दोनों ही अपनी तीखी दाढ़ों से काट-काटकर एक-दूसरे के अंगों को घायल किये देते थे। वे दोनों सिंह और बाघ के समान शक्तिशाली और उन्हीं के समान विजय के लिये सचेष्ट थे
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Hurled by Neela, the foremost of monkeys, the huge rock broke the head of Prahastha into pieces.
ShlokaShloka 46
सगतासुर्गतश्रीकोगतसत्त्वोगतेन्द्रियः । पपातसहसाभूमौछिन्नमूलइवद्रुमः ।।6.58.56।।
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दोनों ही अपनी तीखी दाढ़ों से काट-काटकर एक-दूसरे के अंगों को घायल किये देते थे। वे दोनों सिंह और बाघ के समान शक्तिशाली और उन्हीं के समान विजय के लिये सचेष्ट थे
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Life, splendour, strength, and senses departed Prahastha fell instantly on the ground like a tree cut at the bottom.
ShlokaShloka 47
विभिन्नशिरसस्तस्यबहुसुस्रावशोणितम् । शरीरादपिसुस्रावगिरेःप्रस्रवणंयथा ।।6.58.57।।
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दोनों ही अपनी तीखी दाढ़ों से काट-काटकर एक-दूसरे के अंगों को घायल किये देते थे। वे दोनों सिंह और बाघ के समान शक्तिशाली और उन्हीं के समान विजय के लिये सचेष्ट थे
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From his shattered head much blood flowed from all over the body just as a spring from a mountain.
ShlokaShloka 48
हतेप्रहस्तेनीलेनतदकम्प्यंमहाबलम् । राक्षसानामहृष्टानांलङ्कामभिजगामह ।।6.58.58।।
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दोनों वीर पराक्रमी, विजयी और युद्ध में कभी पीठ न दिखाने वाले थे तथा वृत्रासुर और इन्द्र के समान युद्ध में यश पाने की अभिलाषा रखते थे
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Prahastha having been killed by Neela, the cheerless Rakshasas and unshakeable troops could not stay there any more.
ShlokaShloka 49
नशेकुस्समवस्थातुंनिहतेवाहिनीपतौ । सेतुबन्धंसमासाद्यविशीर्णंसलिलंयथा ।।6.58.59।।
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उस समय परम उद्योगी प्रहस्तने नील के ललाट में मूसल से आघात किया। इससे उनके ललाट से रक्त की धारा बह चली
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The CommanderinChief having been killed the troops could not remain there just as water reached a breached dam.
ShlokaShloka 50
हतेतस्मिंश्चमूमुख्येराक्षसास्तेनिरुद्यमाः । रक्षःपतिगृहंगत्वाध्यानमूकत्वमास्थिताः ।।6.58.60।। प्राप्ताश्शोकार्णवंतीव्रंनिस्सज्ञौइवतेऽभवन् ।
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उनके सारे अंग रक्त से भीग गये। तब क्रोध से भरे हुए महाकपि नील ने एक विशाल वृक्ष उठाकर प्रहस्त की छाती पर दे मारा
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CommanderinChief killed, those Rakshasas reduced to speechlessness went to the abode of their Lord and remained without consciousness.
ShlokaShloka 51
ततस्तुनीलोविजयीमहाबलःप्रशस्यमानःसुकृतेनकर्मणा । समेत्यरामेणसलक्ष्मणेनप्रहृष्टरूपस्तुबभूवयूथपः ।।6.58.61।।
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उस प्रहार की कोई परवा न करके प्रहस्त महान् मूसल हाथ में लिये बलवान् वानर नील की ओर बड़े वेग से दौड़ा
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Then Neela who was endowed with great strength met Rama and Lakshmana and was praised for his victory and the troops remained very rejoiced. ।।इत्यार्षेवाल्मीकीयेश्रीमद्रामायणेआदिकाव्येयुद्धकाण्डेअष्टपञ्चाशस्सर्गः ।। This is the end of the fifty eighth sarga of Yuddha Kanda of the first epic the holy Ramayana composed by sage Valmiki.