Yuddha Kanda

Sarga 9: Vibheeshana begins to advise the Rakshasas and Ravana.

युद्धकाण्डम् · सर्ग 9

19 shlokas

ShlokaShloka 1
ततोनिकुम्भोरभसस्सूर्यशत्रुर्महाबलः । सुप्तघ्नोयज्ञहारक्षोमहा���ार्श्वमहोदरौ ।।6.9.1।। अग्निकेतुश्चदुर्धर्षोरश्मिकेतुश्चराक्��स: । इन्द्रजिच्चमहातेजाबलवान्रावणात्मजः ।।6.9.2।। प्रहस्तोऽथविरूपाक्षोवज्रदंष्ट्रोमहाबलः । धूम्राक्षश्चातिकायश्चदुर्मुखश्चैवराक्षसः ।।6.9.3।। परिघान्पट्टिशान्प्रासान्शक्तिशूलपरश्वधान् । चापानिचसबाणानिखङ्गांश्चविपुलान्शितान् ।।6.9.4।। प्रगृह्यपरमक्रुद्धास्समुत्पत्यचराक्षसाः । अब्रुवन्रावणंसर्वेप्रदीप्ताइवतेजसा ।।6.9.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् निकुम्भ, रभस, महाबली सूर्यशत्र, सुप्तघ्न, यज्ञकोप, महापार्श्व, महोदर, दुर्जय अग्निकेतु, राक्षस रश्मिकेतु, महातेजस्वी बलवान् रावणकुमार इन्द्रजित् , प्रहस्त, विरूपाक्ष, महाबली वज्रदंष्ट्र, धूम्राक्ष, अतिकाय और निशाचर दुर्मुख—ये सब राक्षस अत्यन्त कुपित हो हाथों में परिघ, पट्टिश, शूल, प्रास, शक्ति, फरसे, धनुष, बाण तथा पैनी धारवाले बड़े-बड़े खड्ग लिये उछलकर रावण के सामने आये और अपने तेज से उद्दीप्त-से होकर वे सब-के-सब उससे बोले-
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Then Nikumbha, Rshabha, mighty Suryasatru, Supthagna, Yagnaha raksha, Mahaparva, Mahodaro, Durdarsha, Agnikethu, Rasmikethu Rakshasas, Further Ravana's own son powerful Indrajith, Virupaksha and Prahasta, and mighty Rakshasas Vajradamshtra, Dumraaksha and also Durmukha of huge body holding iron bars, tridents, battle axes, bows and sharp arrows, very sharp swords, got up, highly enraged and all Rakshasas glowing like fire addressed Ravana.
ShlokaShloka 2
अद्यरामंवधिष्यामस्सुग्रीवंसचलक्ष्मणम् । कृपणंचहनूमन्तंलङ्कायेनप्रधर्षिता ।।6.9.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् निकुम्भ, रभस, महाबली सूर्यशत्र, सुप्तघ्न, यज्ञकोप, महापार्श्व, महोदर, दुर्जय अग्निकेतु, राक्षस रश्मिकेतु, महातेजस्वी बलवान् रावणकुमार इन्द्रजित् , प्रहस्त, विरूपाक्ष, महाबली वज्रदंष्ट्र, धूम्राक्ष, अतिकाय और निशाचर दुर्मुख—ये सब राक्षस अत्यन्त कुपित हो हाथों में परिघ, पट्टिश, शूल, प्रास, शक्ति, फरसे, धनुष, बाण तथा पैनी धारवाले बड़े-बड़े खड्ग लिये उछलकर रावण के सामने आये और अपने तेज से उद्दीप्त-से होकर वे सब-के-सब उससे बोले-
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"Right now, we will kill Rama along with Lakshmana, Sugriva and vile Hanuman, on whose account Lanka was attacked."
ShlokaShloka 3
तान्गृहीतायुधान् सर्वान्वारयित्वाविभीषणः । अब्रवीत्प्राञ्जलिर्वाक्यंपुनःप्रत्युपवेश्यतान् ।।6.9.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् निकुम्भ, रभस, महाबली सूर्यशत्र, सुप्तघ्न, यज्ञकोप, महापार्श्व, महोदर, दुर्जय अग्निकेतु, राक्षस रश्मिकेतु, महातेजस्वी बलवान् रावणकुमार इन्द्रजित् , प्रहस्त, विरूपाक्ष, महाबली वज्रदंष्ट्र, धूम्राक्ष, अतिकाय और निशाचर दुर्मुख—ये सब राक्षस अत्यन्त कुपित हो हाथों में परिघ, पट्टिश, शूल, प्रास, शक्ति, फरसे, धनुष, बाण तथा पैनी धारवाले बड़े-बड़े खड्ग लिये उछलकर रावण के सामने आये और अपने तेज से उद्दीप्त-से होकर वे सब-के-सब उससे बोले-
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With folded hands, Vibheeshana made all the (Rakshasas) wielding arms to stop and sit and addressed these words to Ravana.
ShlokaShloka 4
अप्युपायैस्त्रिभिस्तातयोऽर्थःप्राप्तुंनशक्यते । तस्यविक्रमकालांस्तान्युक्तानाहुर्मनीषिणः ।।6.9.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् निकुम्भ, रभस, महाबली सूर्यशत्र, सुप्तघ्न, यज्ञकोप, महापार्श्व, महोदर, दुर्जय अग्निकेतु, राक्षस रश्मिकेतु, महातेजस्वी बलवान् रावणकुमार इन्द्रजित् , प्रहस्त, विरूपाक्ष, महाबली वज्रदंष्ट्र, धूम्राक्ष, अतिकाय और निशाचर दुर्मुख—ये सब राक्षस अत्यन्त कुपित हो हाथों में परिघ, पट्टिश, शूल, प्रास, शक्ति, फरसे, धनुष, बाण तथा पैनी धारवाले बड़े-बड़े खड्ग लिये उछलकर रावण के सामने आये और अपने तेज से उद्दीप्त-से होकर वे सब-के-सब उससे बोले-
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"Dear father, intelligent people say that an act which cannot be accomplished by the three means (Sama Conciliation, Dana Gift, Bheda Sowing dissension), should only be accomplished diligently by one's heroic deed. Therefore, we should think of war only after the above three means are employed."
ShlokaShloka 5
प्रमत्तेष्यभियुक्तेषुदैवेनप्रहतेषुच । विक्रमास्तातसिध्यन्तिपरीक्ष्यविधिनाकृताः ।।6.9.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् निकुम्भ, रभस, महाबली सूर्यशत्र, सुप्तघ्न, यज्ञकोप, महापार्श्व, महोदर, दुर्जय अग्निकेतु, राक्षस रश्मिकेतु, महातेजस्वी बलवान् रावणकुमार इन्द्रजित् , प्रहस्त, विरूपाक्ष, महाबली वज्रदंष्ट्र, धूम्राक्ष, अतिकाय और निशाचर दुर्मुख—ये सब राक्षस अत्यन्त कुपित हो हाथों में परिघ, पट्टिश, शूल, प्रास, शक्ति, फरसे, धनुष, बाण तथा पैनी धारवाले बड़े-बड़े खड्ग लिये उछलकर रावण के सामने आये और अपने तेज से उद्दीप्त-से होकर वे सब-के-सब उससे बोले-
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"O Dear at those who are not alert, who are attacked by the enemy, and who are struck by fate, if you examine diligently according to prescribed method and perform deeds of heroic valour you will succeed."
ShlokaShloka 6
अप्रमत्तंकथंतंतुविजिगीषुंबलेस्थितम् । जितरोषंदुराधर्षतंप्रधर्षयितुमिच्छथ ।।6.9.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हमलोग आज ही राम, सुग्रीव, लक्ष्मण और उस कायर हनुमान् को भी मार डालेंगे, जिसने लङ्कापुरी जलायी है’
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"How do you wish to overpower, him who is very attentive, bent on victory, mighty, steadfast, has subdued anger and unassailable?"
ShlokaShloka 7
समुद्रंलङ्घयित्वातुघोरंनदनदीपतिम् । गतिंहनूमतोलोकेकोविद्यात्तर्कयेतवा ।।6.9.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
हाथों में अस्त्र-शस्त्र लिये खड़े हुए उन सब राक्षसों को जाने के लिये उद्यत देख विभीषण ने रोका और पुनः उन्हें बिठाकर दोनों हाथ जोड़ रावण से कहा-
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"Hanuman has crossed over the ocean, a Lord of streams and rivers and arrived. Who can ever know or think of such a task in this world?"
ShlokaShloka 8
बलान्यपरिमेयानिवीर्याणिचनिशाचराः । परेषांसहसाऽवज्ञानकर्तव्याकथञ्चन ।।6.9.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तात ! जो मनोरथ साम, दान और भेद—इन तीन उपायों से प्राप्त न हो सके, उसी की प्राप्ति के लिये नीतिशास्त्र के ज्ञाता मनीषी विद्वानों ने पराक्रम करने के योग्य अवसर बताये हैं।
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"Enemy's strength and valour is inestimable to relate. Do not disregard rashly, O Night ranger"
ShlokaShloka 9
किंचराक्षसराजस्यरामेणापकृतंपुरा । आजहारजनस्थानाद्यस्यभार्यांयशस्विनः ।।6.9.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के युद्धकाण्ड में नवाँ सर्ग पूरा हुआ
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"What offence did Rama do earlier to the Rakshasa king that he abducted the glorious wife of Rama from Janasthana?"
ShlokaShloka 10
खरोयद्यतिवृत्तस्तुरामेणनिहतोरणे । अवश्यंप्राणिनांप्राणारक्षितव्यायथाबलम् ।।6.9.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरामचन्द्रजी बेखबर नहीं हैं। वे विजय की इच्छा से आ रहे हैं और उनके साथ सेना भी है। उन्होंने क्रोध को सर्वथा जीत लिया है। अतः वे सर्वथा दुर्जय हैं। ऐसे अजेय वीर को तुमलोग परास्त करना चाहते हो
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"(It is true) Khara was killed by Rama in war as he acted beyond his limit. Certainly, living beings will have to protect their life with their own strength."
ShlokaShloka 11
एतन्निमित्तंवैदेहीभयंनस्सुमहद्भवेत् । आहृतासापरित्याज्याकलहार्थेकृतेनकिम् ।।6.9.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरामचन्द्रजी ने पहले राक्षसराज रावण का कौन सा अपराध किया था, जिससे उन यशस्वी महात्मा की पत्नी को ये जनस्थान से हर लाये?
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"On account of this, we have a great fear of Vaidehi. She, who was brought here, is to be given away. What is the use of doing anything, which may be the cause of strife?"
ShlokaShloka 12
नतुक्षमंवीर्यवतातेनधर्मानुवर्तिना । वैरंनिरर्थकंकर्तुंदीयतामस्यमैथिली ।।6.9.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरामचन्द्रजी ने पहले राक्षसराज रावण का कौन सा अपराध किया था, जिससे उन यशस्वी महात्मा की पत्नी को ये जनस्थान से हर लाये?
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"To have enmity with a valorous one, a follower of dharma, is useless and not good for us. Give away Mythili to him (Rama)."
ShlokaShloka 13
यावन्नसगजांसाश्वांबहुरत्नसमाकुलाम् । पुरींदारयतेबाणैर्दीयतामस्यमैथिली ।।6.9.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरामचन्द्रजी ने पहले राक्षसराज रावण का कौन सा अपराध किया था, जिससे उन यशस्वी महात्मा की पत्नी को ये जनस्थान से हर लाये?
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"Before Rama comes with elephants and horses and tears with his arrows, this Lanka filled with abundance of gems, give away Mythili."
ShlokaShloka 14
यावत्सुघोरामहतीदुर्धर्षाहरिवाहिनी । नावस्कन्दतिनोलङ्कांतावत्सीताप्रदीयताम् ।।6.9.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि कहें कि उन्होंने खर को मारा था तो यह ठीक नहीं है; क्योंकि खर अत्याचारी था। उसने स्वयं ही उन्हें मार डालने के लिये उन पर आक्रमण किया था। इसलिये श्रीराम ने रणभूमि में उसका वध किया; क्योंकि प्रत्येक प्राणी को यथाशक्ति अपने प्राणों की रक्षा अवश्य करनी चाहिये
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"Lest the highly dreadful, formidable and huge Vanara troops surround all over Lanka. Give away Sita."
ShlokaShloka 15
विनश्येद्धिपुरीलङ्काशूरास्सर्वेचराक्षसाः । रामस्यदयितापत्नीनस्वयंनयदिदीयते ।।6.9.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम बड़े धर्मात्मा और पराक्रमी हैं। उनके साथ व्यर्थ वैर करना उचित नहीं है। मिथिलेशकुमारी सीता को उनके पास लौटा देना चाहिये
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"If Rama's dear wife is not given, this Lanka will be destroyed and also all Rakshasas."
ShlokaShloka 16
प्रसादयेत्वांबन्धुत्वात्कुरुष्यवचनंमम । हितंतथ्यमहंब्रूमिदीयतामस्यमैथिली ।।6.9.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम बड़े धर्मात्मा और पराक्रमी हैं। उनके साथ व्यर्थ वैर करना उचित नहीं है। मिथिलेशकुमारी सीता को उनके पास लौटा देना चाहिये
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"I am requesting you because you are my relation (brother). Do as I said, as I am telling you for your welfare. Give away Sita."
ShlokaShloka 17
पुराशरत्सूर्यमरीच���सन्निभान्नवाग्रपुङ्खान् सुदृढान्नृपात्मजः । सृजत्यमोघान्विशिखान्वधायतेप्रदीयतांदशरधायमैथिली ।।6.9.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जबतक हाथी, घोड़े और अनेकों रत्नों से भरी हुई लङ्कापुरी का श्रीराम अपने बाणों द्वारा विध्वंस नहीं कर डालते, तब तक ही मैथिली को उन्हें लौटा दिया जाय
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"You may restore Rama's Mythili, before the emperor Dasaratha's son sends forth solid unfailing arrows shining like autumnal Sun provided with fresh heads and shafts for killing you."
ShlokaShloka 18
त्वजस्वकोपंसुखधर्मनाशनंभजस्वधर्मंरतिकीर्तिवर्धनम् । प्रसीदजीवेमसपुत्रबान्धवाःप्रदीयतांदाशरथायमैथिली ।।6.9.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जबतक अत्यन्त भयंकर, विशाल और दुर्जय वानर-वाहिनी हमारी लङ्का को पददलित नहीं कर देती, तभी तक सीता को वापस कर दिया जाय
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"Give up that happiness and anger which destroys virtues. Seek pleasures that enhance fame. Be pacified. Live happily with sons and relatives restoring Mythili to Rama, the son of Dasaratha."
ShlokaShloka 19
विभीषणवच्शुत्वारावणोराक्षसेश्वराः । विसर्जयित्वातान्सर्वान्प्रविवेशस्वकंगृहम् ।।6.9.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप मेरे बड़े भाई हैं। अतः मैं आपको विनयपूर्वक प्रसन्न करना चाहता हूँ। आप मेरी बात मान लें। मैं आपके हित के लिये सच्ची बात कहता हूँ -आप श्रीरामचन्द्रजी को उनकी सीता वापस कर दें
Show English Translation
Having heard everything that was told by Vibheeshana, the Lord of Rakshasas sent away all and entered his palace. ।। इत्यार्षेवाल्मीकीयेश्रीमद्रामायणेआदिकाव्येयुद्धकाण्डेनवमस्सर्गः ।। This is the end of the ninth sarga of Yuddha Kanda of the first epic the holy Ramayana composed by sage Valmiki.