Yuddha Kanda
Sarga 7: All the Rakshasas praise their might and inspire confidence in Ravana.
युद्धकाण्डम् · सर्ग 7
23 shlokas
ShlokaShloka 1
इत्युक्ताराक्षसेन्द्रेणराक्षसास्तेमहाबलाः ।
ऊचुःप्रान्ज��यःसर्वेरावणंराक्षसेश्वरम् ।।6.7.1।।
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All the Rakshasas of mighty strength, having heard the Lord of Rakshasas, thus spoke to their leader, greeting with folded hands.
ShlokaShloka 2
द्विषत्पक्षमविज्ञायनीतिबाह्यास्त्वबुद्धयः ।
राजन्परिघशक्त्यृष्टिशूलपट्टिशकुन्तलम् ।।6.7.2।।
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"O King The ogres are not having political intelligence. They have submitted themselves, even though they are mighty and are having iron bars, javelins, sharp edged spears, and doubleedged swords."
ShlokaShloka 3
इत्युक्ताराक्षसेन्द्रेणराक्षसास्तेमहाबलाः ।
ऊचुःप्रान्जलयःसर्वेरावणंराक्षसेश्वरम् ।।6.7.3।।
द्विषत्पक्षमविज्ञायनीतिबाह्यास्त्वबुद्धयः ।
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The Lord of Rakshasas having spoken like that, to the Rakshasas, who were very strong, but ignorant about the enemy's strength and who were not endowed with political wisdom, spoke to Ravana, the king of Rakshasas, the following words with folded hands.
ShlokaShloka 4
राजन्परिघशक्त्यृष्टिशूलपट्टिशकुन्तलम् ।।6.7.4।।
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‘प्रभो! महाबली लोकपाल कुबेर महादेवजी के साथ मित्रता होने के कारण आपके साथ बड़ी स्पर्धा रखते थे; परंतु आपने समराङ्गण में रोषपूर्वक उन्हें हरा दिया
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"Oh king, (our army is equipped with) iron bars, javelins, double edged swords, spears, three pointed weapons, ploughs etc."
ShlokaShloka 5
सुमहन्नोबलंकस्माद्विषादंभजतेभवान् ।
त्वयाभोगवतींगत्वानिर्जिताःपन्नगायुधि ।।6.7.5।।
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‘प्रभो! महाबली लोकपाल कुबेर महादेवजी के साथ मित्रता होने के कारण आपके साथ बड़ी स्पर्धा रखते थे; परंतु आपने समराङ्गण में रोषपूर्वक उन्हें हरा दिया
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"Why are you despondent? You have huge and mighty army strength. When you went to Bhogavathi, the Nagas were subdued in war by your mighty army."
ShlokaShloka 6
कैलासशिखरावासीयक्षैर्बहुभिरावृतः ।
सुमहत्कदनंकृत्वावश्यस्तेधनदःकृतः ।।6.7.6।।
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‘यक्षों की सेना को विचलित करके बंदी बना लिया और कितनों को धराशायी करके कैलासशिखर से आप उनका यह विमान छीन लाये थे
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ShlokaShloka 7
समहेश्वरसख्येनश्लाघमानस्त्वयाविभो ।
निर्जितःसमरेरोषाल्लोकपालोमहाबलः ।।6.7.7।।
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इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के युद्धकाण्ड में सातवाँ सर्ग पूरा हुआ
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"O King Proud of his friendship with Lord Maheshwara (Siva), that mighty ruler of the world Kubera was subdued by you in the conflict."
ShlokaShloka 8
विनिहत्यचयक्षौघान्विक्षोभ्यचविनिगृह्यच ।
त्वयाकैलासशिखराद्विमानमिदमाहृतम् ।।6.7.8।।
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‘महाबाहो! अपने पराक्रम का घमंड रखने वाले दुर्जय दानवराज मधु को भी, जो आपकी बहिन कुम्भीनसी को सुख देने वाला उसका पति है, आपने युद्ध छेड़कर वश में कर लिया
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"Causing terrific disturbance to the hordes of Yakshas and taking them as prisoners, you have brought the great aerial chariot from mount Kailas."
ShlokaShloka 9
मयेनदानवेन्द्रेणत्वद्भयात्सख्यमिच्छता ।
दुहितातवभार्यार्थेदत्ताराक्षसपुङ्गव ।।6.7.9।।
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‘विशालबाहु वीर! आपने रसातल पर चढ़ाई करके वासुकि, तक्षक, शङ्ख और जटी आदि नागों को युद्ध में जीता और अपने अधीन कर लिया
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"Maya, the ruler of Danavas has given his daughter (Mandodari) to you as a wife out of fear of you, O leader of Rakshasas"
ShlokaShloka 10
दानवेन्द्रोमधुर्नामवीर्योत्सिक्तोदुरासदः ।
विगृह्यवशमानीतःकुम्भीनस्याःसुखावहः ।।6.7.10।।
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‘प्रभो! शत्रुदमन राक्षसराज! दानवलोग बड़े ही बलवान्, किसी से नष्ट न होने वाले, शूरवीर तथा वर पाकर अद्भुत शक्ति से सम्पन्न हो गये थे; परंतु आपने समराङ्गण में एक वर्षतक युद्ध करके अपने ही बल के भरोसे उन सबको अपने अधीन कर लिया और वहाँ उनसे बहुत-सी मायाएँ भी प्राप्त कीं
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"Madhu, another ruler of Danavas who was proud of his valour and difficult to approach, the husband of Kumbhinasi was subjugated by you by your offering to fight with him."
ShlokaShloka 11
निर्जितास्तेमहाबाहोनागागत्वारसातलम् ।
वासुकिस्तक्षकःशङखोजटीचवशमाहृताः ।।6.7.11।।
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‘प्रभो! शत्रुदमन राक्षसराज! दानवलोग बड़े ही बलवान्, किसी से नष्ट न होने वाले, शूरवीर तथा वर पाकर अद्भुत शक्ति से सम्पन्न हो गये थे; परंतु आपने समराङ्गण में एक वर्षतक युद्ध करके अपने ही बल के भरोसे उन सबको अपने अधीन कर लिया और वहाँ उनसे बहुत-सी मायाएँ भी प्राप्त कीं
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"O mighty armed king Going to the subterranean world, you won over the serpent demons Vasuki, Takshaka, Shanka and Jati and made them submit to you."
ShlokaShloka 12
अक्षयाबलवन्तश्चशूरालब्धवराःपुनः ।
त्वयासंवत्सरंयुद्ध्वासमरेदानवाविभो ।।6.7.12।।
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‘महाभाग! आपने वरुण के शूरवीर और बलवान् पुत्रों को भी उनकी चतुरंगिणी सेनासहित युद्ध में परास्त कर दिया था
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"The mighty and strong Danava warriors who had obtained boon were made to fight a war by you for one year."
ShlokaShloka 13
स्वबलंसमुपाश्रित्यनीतावशमरिन्दम ।
मायाश्चाधिगतास्तत्रबह्व्योवैराक्षसाधिप ।।6.7.13।।
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‘राजन्! मृत्यु का दण्ड ही जिसमें महान् ग्राह के समान है, जो यम-यातना-सम्बन्धी शाल्मलि आदि वृक्षों से मण्डित है, कालपाशरूपी उत्ताल तरङ्गे जिसकी शोभा बढ़ाती हैं, यमदूतरूपी सर्प जिसमें निवास करते हैं तथा जो महान् ज्वर के कारण दुर्जय है, उस यमलोकरूपी महासागर में प्रवेश करके आपनेयमराज की सागर-जैसी सेना को मथ डाला, मृत्यु को रोक दिया और महान् विजय प्राप्त की। यही नहीं, युद्ध की उत्तम कला से आपने वहाँ के सब लोगों को पूर्ण संतुष्ट कर दिया था
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"O king of Rakshasas (Those Danavas) were reduced to sub mission by resorting to your own strength. Oh subduer of enemies, many deceitful tricks were learned from them."
ShlokaShloka 14
शूराश्चबलवन्तश्चवरुणस्यसुतारणे ।
निर्जितास्तेमहाभागचतुर्विधबलानुगाः ।।6.7.14।।
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‘राजन्! मृत्यु का दण्ड ही जिसमें महान् ग्राह के समान है, जो यम-यातना-सम्बन्धी शाल्मलि आदि वृक्षों से मण्डित है, कालपाशरूपी उत्ताल तरङ्गे जिसकी शोभा बढ़ाती हैं, यमदूतरूपी सर्प जिसमें निवास करते हैं तथा जो महान् ज्वर के कारण दुर्जय है, उस यमलोकरूपी महासागर में प्रवेश करके आपनेयमराज की सागर-जैसी सेना को मथ डाला, मृत्यु को रोक दिया और महान् विजय प्राप्त की। यही नहीं, युद्ध की उत्तम कला से आपने वहाँ के सब लोगों को पूर्ण संतुष्ट कर दिया था
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"O blessed king Mighty strong sons of Varuna, heroes capable of war and of all the four kinds of army have been won by you."
ShlokaShloka 15
मृत्युदण्डमहाग्राहंशाल्मलिद्रुममण्डितम् ।
कालपाशमहावीचिंयमक���ंकरपन्नगम् ।।6.7.15।।
महाज्वरेणदुर्धर्षंयमलोकमहार्णवम् ।
अवगाह्यत���वयाराजन्यमस्यबलसागरम् ।।6.7.16।।
जयश्चविपुलःप्राप्तोमृत्युश्चप्रतिषेधितः ।
सुयुद्धेनचतेसर्वेलोकास्तत्रसुतोषिताः ।।6.7.17।।
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‘राजन्! मृत्यु का दण्ड ही जिसमें महान् ग्राह के समान है, जो यम-यातना-सम्बन्धी शाल्मलि आदि वृक्षों से मण्डित है, कालपाशरूपी उत्ताल तरङ्गे जिसकी शोभा बढ़ाती हैं, यमदूतरूपी सर्प जिसमें निवास करते हैं तथा जो महान् ज्वर के कारण दुर्जय है, उस यमलोकरूपी महासागर में प्रवेश करके आपनेयमराज की सागर-जैसी सेना को मथ डाला, मृत्यु को रोक दिया और महान् विजय प्राप्त की। यही नहीं, युद्ध की उत्तम कला से आपने वहाँ के सब लोगों को पूर्ण संतुष्ट कर दिया था
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"Oh King Plunging into the ocean, which was in the shape of Yama's realm, with an enormous alligator in the form of rod of death, adorned with Salmali trees, turbulent with a huge wave in the form of Death 's noose, infested with Lord of Death's attendants as serpents, unassailable on account of the mighty Jwara (spirit of fever), you have obtained a great victory over the Lord of Death 's great army and the army was warded off. By your good battle all the people (of the world) were delighted.
ShlokaShloka 16
क्षत्रियैर्बहुभिर्वीरैःशक्रतुल्यपराक्रमैः ।
आसीद्वसुमतीपूर्णामहद्भिरिवपादपैः ।।6.7.18।।
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‘उन वीरों में जो पराक्रम, गुण और उत्साह थे, उनकी दृष्टि से राम रणभूमि में उनके समान कदापि नहीं है; राजन्! जब आपने उन समरदुर्जय वीरों को भी बलपूर्वक मार डाला, तब रामपर विजय पाना आपके लिये कौन बड़ी बात है ?
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"The earth was fully filled with Kshatriya heroes of great prowess, equal to Indra in war who stood like trees on earth."
ShlokaShloka 17
तेषांवीर्यगुणोत्साहैर्नसमोराघवोरणे ।
प्रसह्यतेत्वयाराजन्हताःसमरदुर्जयाः ।।6.7.19।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘उन वीरों में जो पराक्रम, गुण और उत्साह थे, उनकी दृष्टि से राम रणभूमि में उनके समान कदापि नहीं है; राजन्! जब आपने उन समरदुर्जय वीरों को भी बलपूर्वक मार डाला, तब रामपर विजय पाना आपके लिये कौन बड़ी बात है ?
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"Raghava is not equal to them in valour, excellence and energy. Those warriors who were difficult to overcome by battle were overpowered and killed by you."
ShlokaShloka 18
तिष्ठवाकिंमहाराजश्रमे णतववानरान् ।
अयमेकोमहाबाहुरिन्द्रजित्क्षपयिष्यति ।।6.7.20।।
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‘अथवा महाराज! आप चुपचाप यहीं बैठे रहें। आपको परिश्रम करने की क्या आवश्यकता है। अकेले ये महाबाहु इन्द्रजित् ही सब वानरों का संहार कर डालेंगे
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"Oh great king, you stay here calmly. Why exert yourself? This strong armed Indrajith alone can destroy those Vanaras."
ShlokaShloka 19
अनेनहिमहाराजमहेश्वरमनुत्तमम् ।
इष्ट्वायज्ञंवरोलब्धोलोकेपरमदुर्लभः ।।6.7.21।।
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‘महाराज! इन्होंने परम उत्तम माहेश्वर यज्ञ का अनुष्ठान करके वह वर प्राप्त किया है, जो संसार में दूसरे के लिये अत्यन्त दुर्लभ है
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"Oh Great King By performing supreme sacrifices, Indrajith obtained boons from Lord Maheswara, which are very difficult to get."
ShlokaShloka 20
शक्तितोमरमीनंचविनिकीर्णान्त्रशैवलम् ।
गजकछपसम्बाधमश्वमण्डूकसंकुलम् ।।6.7.22।।
रुद्रादित्यमहाग्राहंमरुद्वसुमहोरगम् ।
रथश्वगजतोयौघंपदातिपुलिनंमहत् ।।6.7.23।।
अनेनहिसमासाद्यदेवानांबलसागरम् ।
गृहीतोदैवतपतिर्लङ्कांचापिप्रवेशितः ।।6.7.24।।
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‘देवताओं की सेना समुद्र के समान थी। शक्ति और तोमर ही उसमें मत्स्य थे। निकालकर फेंकी हुई आँतें सेवार का काम देती थीं। हाथी ही उस सैन्य-सागर में कछुओं के समान भरे थे। घोड़े मेढकों के समान उसमें सब ओर व्याप्त थे। रुद्रगण और आदित्यगण उस सेनारूपी समुद्र के बड़े-बड़े ग्राह थे। मरुद्गण और वसुगण वहाँ के विशाल नाग थे। रथ, हाथी और घोड़े जलराशि के समान थे और पैदल सैनिक उसके विशाल तट थे; परंतु इस इन्द्रजित् ने देवताओं के उस सैन्य-समुद्र में घुसकर देवराज इन्द्र को कैद कर लिया और उन्हें लङ्कापुरी में लाकर बंद कर दिया
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ShlokaShloka 21
पितामहनियोगाच्चमुक्तःशम्बरवृत्रहा ।
गतस्त्रिविष्टपम्राजन्सर्वदेवनमस्कृतः ।।6.7.25।।
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‘देवताओं की सेना समुद्र के समान थी। शक्ति और तोमर ही उसमें मत्स्य थे। निकालकर फेंकी हुई आँतें सेवार का काम देती थीं। हाथी ही उस सैन्य-सागर में कछुओं के समान भरे थे। घोड़े मेढकों के समान उसमें सब ओर व्याप्त थे। रुद्रगण और आदित्यगण उस सेनारूपी समुद्र के बड़े-बड़े ग्राह थे। मरुद्गण और वसुगण वहाँ के विशाल नाग थे। रथ, हाथी और घोड़े जलराशि के समान थे और पैदल सैनिक उसके विशाल तट थे; परंतु इस इन्द्रजित् ने देवताओं के उस सैन्य-समुद्र में घुसकर देवराज इन्द्र को कैद कर लिया और उन्हें लङ्कापुरी में लाकर बंद कर दिया
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"Liberated by the command of creator Brahma, Indra the destroyer of Sambara and Vrtra entered heaven was adorned and greeted by all Devas."
ShlokaShloka 22
तमेवत्वंमहाराजविसृजेन्द्रजितंसुतम् ।
यावद्वानरसेनांतांसरामांनयतिक्षयम् ।।6.7.26।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘देवताओं की सेना समुद्र के समान थी। शक्ति और तोमर ही उसमें मत्स्य थे। निकालकर फेंकी हुई आँतें सेवार का काम देती थीं। हाथी ही उस सैन्य-सागर में कछुओं के समान भरे थे। घोड़े मेढकों के समान उसमें सब ओर व्याप्त थे। रुद्रगण और आदित्यगण उस सेनारूपी समुद्र के बड़े-बड़े ग्राह थे। मरुद्गण और वसुगण वहाँ के विशाल नाग थे। रथ, हाथी और घोड़े जलराशि के समान थे और पैदल सैनिक उसके विशाल तट थे; परंतु इस इन्द्रजित् ने देवताओं के उस सैन्य-समुद्र में घुसकर देवराज इन्द्र को कैद कर लिया और उन्हें लङ्कापुरी में लाकर बंद कर दिया
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"O great king You send your son, the mighty Indrajith to lead. He would destroy all those Vanaras and also Rama."
ShlokaShloka 23
राजन्नापदयुक्तेयमागताप्राकृताज्जनात् ।
हृदिनैवत्वयाकार्यात्वंवधिष्यसिराघवम् ।।6.7.27।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘राजन्! फिर ब्रह्माजी के कहने से इन्होंने शम्बर और वृत्रासुर को मारने वाले सर्वदेववन्दित इन्द्र को मुक्त किया। तब वे स्वर्गलोक में गये
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"O King This danger has come to you from ordinary people. You should not take it to heart. You shall kill Raghava." ।।इत्यार्षेश्रीवाल्मीकीयेश्रीमद्रामायणेआदिकाव्येयुद्धकाण्डेसप्तमःसर्गः।। This is the end of the seventh sarga of Yuddha Kanda of the first epic the holy Ramayana composed by sage Valmiki.