Bala Kanda

Sarga 71: King Janaka narrates the history of his dynasty--consents to give Sita and Urmila in marriage to Rama and Lakshmana.

बालकाण्डम् · सर्ग 71

23 shlokas

ShlokaShloka 1
एवं ब्रुवाणं जनक: प्रत्युवाच कृताञ्जलि:। श्रोतुमर्हसि भद्रं ते कुलं न: परिकीर्तितम्।।1.71.1।।
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Vasishta having thus described (the genealogy of Dasaratha) Janaka with folded hands rejoined, "Be blessed. Let me relate the genealogy of my race. Listen".
ShlokaShloka 2
प्रदाने हि मुनिश्रेष्ठ कुलं निरवशेषत:। वक्तव्यं कुलजातेन तन्निबोध महामुने।।1.71.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
महर्षि वसिष्ठ जब इस प्रकार इक्ष्वाकुवंश का परिचय दे चुके, तब राजा जनक ने हाथ जोड़कर उनसे कहा—’मुनिश्रेष्ठ! आपका भला हो। अब हम भी अपने कुल का परिचय दे रहे हैं, सुनिये। महामते! कुलीन पुरुष के लिये कन्यादान के समय अपने कुल का पूर्ण रूपेण परिचय देना आवश्यक है; अतः आप सुनने की कृपा करें
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"O Great sage O Best of ascetics while one offers his daughter (in marriage), one born in a noble family should describe his genealogy in full. Listen.
ShlokaShloka 3
राजाऽभूत् त्रिषु लोकेषु विश्रुत स्स्वेन कर्मणा। निमि: परमधर्मात्मा सर्वसत्त्ववतां वर:।।1.71.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘प्राचीन काल में निमि नामक एक परम धर्मात्मा राजा हुए हैं, जो सम्पूर्ण धैर्यशाली महापुरुषों में श्रेष्ठ तथा अपने पराक्रम से तीनों लोकों में विख्यात थे
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There was a great man of religion king Nimi, strongest of men and wellknown in the three worlds by his own acts.
ShlokaShloka 4
तस्य पुत्रोमिथिर्नाम मिथिला येन निर्मिता। प्रथमो जनको नाम जनकादप्युदावसु:।।1.71.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उनके मिथि नामक एक पुत्र हुआ। मिथि के पुत्र का नाम जनक हुआ। ये ही हमारे कुल में पहले जनक हुए हैं (इन्हीं के नाम पर हमारे वंश का प्रत्येक राजा ‘जनक’ कहलाता है)। जनक से उदावसु का जन्म हुआ
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Nimi begot a son named Mithi who constructed Mithila. He was the first Janaka whose son was Udavasu.
ShlokaShloka 5
उदावसोस्तु धर्मात्मा जातो वै नन्दिवर्धन:। नन्दिवर्धनपुत्रस्तु सुकेतुर्नाम नामत:।।1.71.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उदावसु से धर्मात्मा नन्दिवर्धन उत्पन्न हुए। नन्दिवर्धन के शूरवीर पुत्रका नाम सुकेतु हुआ
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Virtuous Nandivardhana was the son of Udavasu whose son was Suketu.
ShlokaShloka 6
सुकेतोरपि धर्मात्मा देवरातो महाबल:। देवरातस्य राजर्षेर्बृहद्रथ इति स्मृत:।।1.71.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुकेतु के भी देवरात नामक पुत्र हुआ। देवरात महान् बलवान् और धर्मात्मा थे। राजर्षि देवरात के बृहद्रथ नाम से प्रसिद्ध एक पुत्र हुआ
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Suketu's son was the righteous and powerful Devarata, father of Brihadradha.
ShlokaShloka 7
बृहद्रथस्य शूरोऽभून्महावीर: प्रतापवान्। महावीरस्य धृतिमान् सुधृतिस्सत्यविक्रम:।।1.71.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘बृहद्रथके पुत्र महावीर हुए, जो शूर और प्रतापी थे। महावीर के सुधृति हुए, जो धैर्यवान् और सत्यपराक्रमी थे
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Brihadradha's son was the heroic and powerful Mahavira, father of Sudhruti, who was armed with courage and the power of truth.
ShlokaShloka 8
सुधृतेरपि धर्मात्मा दृष्टकेतुस्सुधार्मिक:। दृष्टकेतोस्तु राजर्षेर्हर्यश्व इति विश्रुत:।।1.71.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुधृति के भी धर्मात्मा धृष्टकेतु हुए, जो परम धार्मिक थे।राजर्षि धृष्टकेतु का पुत्र हर्यश्व नाम से विख्यात हुआ
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To Sudhruti was born the righteous Drishtaketu, committed to dharma. Rajarshi Drishtaketu was father to the wellknown Haryasva.
ShlokaShloka 9
हर्यश्वस्य मरु: पुत्रो मरो: पुत्र: प्रतिन्धक:। प्रतिंधकस्य धर्मात्मा राजा कीर्तिरथस्सुत:।।1.71.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हर्यश्व के पुत्र मरु, मरु के पुत्र प्रतीन्धक तथा प्रतीन्धक के पुत्र धर्मात्मा राजा कीर्तिरथ हुए
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Haryasva's son was Maru, father of Pratindhaka. Pratindhaka's son was the righteous king Kirtiratha.
ShlokaShloka 10
पुत्र: कीर्तिरथस्यापि देवमीढ इति स्मृत:। देवमीढस्य विबुधो विबुधस्य महीध्रक:।।1.71.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कीर्तिरथ के पुत्र देवमीढ नाम से विख्यात हुए। देवमीढ के विबुध और विबुध के पुत्र महीध्रक हुए
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The son of Kirtiratha was known as Devamidha. His son was Vibudha, father of Mahidhraka.
ShlokaShloka 11
महीध्रकसुतो राजा कीर्तिरातो महाबल:। कीर्तिरातस्य राजर्षेर्महारोमा व्यजायत।।1.71.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महीध्रक के पुत्र महाबली राजा कीर्तिरात हुए। राजर्षि कीर्तिरात के महारोमा नामक पुत्र उत्पन्न हुआ
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Mighty king Kirtirata was the son of Mahidhraka. He was a Rajarshi, father of Maharoma.
ShlokaShloka 12
महारोम्णस्तु धर्मात्मा स्वर्णरोमा व्यजायत। स्वर्णरोम्णस्तु राजर्षेर्ह्रस्वरोमा व्यजायत।।1.71.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महारोमा से धर्मात्मा स्वर्ण रोमा का जन्म हुआ। राजर्षि स्वर्ण रोमा से ह्रस्व रोमा उत्पन्न हुए॥१२॥
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To Maharoma's was born the virtuous Swarnaroma. Swarnaroma's son was Hrasvaroma.
ShlokaShloka 13
तस्य पुत्रद्वयं जज्ञे धर्मज्ञस्य महात्मन:। ज्येष्ठोऽहमनुजो भ्राता मम वीर: कुशध्वज:।।1.71.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धर्मज्ञ महात्मा राजा ह्रस्वरोमा के दो पुत्र उत्पन्न हए, जिनमें ज्येष्ठ तो मैं ही हूँ और कनिष्ठ मेरा छोटा भाई वीर कुशध्वज है
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Hrasvaroma, was a religious king. He was a great soul. Of his two sons. I am the eldest and valiant Kusadhwaja is my younger brother.
ShlokaShloka 14
मां तु ज्येष्ठं पिता राज्ये सोऽभिषिच्य नराधिप:। कुशध्वजं समावेश्य भारं मयि वनं गत:।।1.71.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे पिता मुझ ज्येष्ठ पुत्र को राज्य पर अभिषिक्त करके कुशध्वज का सारा भार मुझे सौंपकर वन में चले गये
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My father king Hrasvaroma crowned me king, entrusted Kusadhwaja to my care and retired to the forest.
ShlokaShloka 15
वृद्धे पितरि स्वर्याते धर्मेण धुरमावहम्। भ्रातरं देवसङ्काशं स्नेहात्पश्यन् कुशध्वजम्।।1.71.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वृद्ध पिता के स्वर्गगामी हो जानेपर अपने देवतुल्य भाई कुशध्वज को स्नेह-दृष्टि से देखता हुआ मैं इस राज्यका भार धर्म के अनुसार वहन करने लगा
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After my aged father attained heaven, I looked after my brother Kusadhwaja, who resembles the celestials, affectionately and ruled the kingdom with righteousness.
ShlokaShloka 16
कस्य चित्त्वथकालस्य साङ्काश्यादगमत्पुरात्। सुधन्वा वीर्यवान्राजा मिथिलामवरोधक:।।1.71.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुछ काल के अनन्तर पराक्रमी राजा सुधन्वा ने सांकाश्य नगर से आकर मिथिला को चारों ओर से घेर लिया
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A little later a powerful king named Sudhanva from the city of Sankasya beseiged Mithila.
ShlokaShloka 17
स च मे प्रेषयामास शैवं धनुरनुत्तमम्। सीता कन्या च पद्माक्षी मह्यं वै दीयतामिति।।1.71.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उसने मेरे पास दूत भेजकर कहलाया कि ‘तुम शिवजी के परम उत्तम धनुष तथा अपनी कमलनयनी कन्या सीता को मेरे हवाले कर दो’
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He (Sudhanva) sent me a message: 'give me the great bow of Siva and the lotuseyed maiden Sita'.
ShlokaShloka 18
तस्याप्रदानाद्ब्रह्मर्षे युद्धमासीन्मया सह। स हतोऽभिमुखो राजा सुधन्वा तु मया रणे।।1.71.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महर्षे! मैंने उसकी माँग पूरी नहीं की इसलिये मेरे साथ उसका युद्ध हुआ। उस संग्राम में सम्मुखयुद्ध करता हुआ राजा सुधन्वा मेरे हाथ से मारा गया
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O Brahmarshi when I refused, a great conflict broke out between him and me. In the encounter king Sudhanva was killed by me.
ShlokaShloka 19
निहत्य तं मुनिश्रेष्ठ सुधन्वानं नराधिपम्। साङ्काश्ये भ्रातरं वीरमभ्यषिञ्चं कुशध्वजम्।।1.71.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मुनिश्रेष्ठ! राजा सुधन्वा का वध करके मैंने सांकाश्य नगर के राज्य पर अपने शूरवीर भ्राता कुशध्वज को अभिषिक्त कर दिया
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O Best of ascetics having killed king Sudhanva, I have crowned my heroic brother Kusadhwaja in Sankasya.
ShlokaShloka 20
कनीयानेष मे भ्राता अहं ज्येष्ठो महामुने। ददामि परमप्रीतो वध्वौ ते मुनिपुङ्गव।।1.71.20।। सीतां रामाय भद्रं ते ऊर्मिला लक्ष्मणाय च।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महामुने! ये मेरे छोटे भाई कुशध्वज हैं और मैं इनका बड़ा भाई हूँ। मुनिवर! मैं बड़ी प्रसन्नता के साथ आपको दो बहुएँ प्रदान करता हूँ
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O Great ascetic (Vasishta), this one is my youger brother and I am the elder one. O preeminent among ascetics with immense pleasure I am giving these maidens, Sita to Rama and Urmila to Lakshmana. Be blessed
ShlokaShloka 21
वीर्यशुल्कां मम सुतां सीतां सुरसुतोपमाम् ।।1.71.21।। द्वितीयामूर्मिलां चैव त्रिर्ददामि न संशय:।
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I offer my daughter Sita, who looks like a celestial maiden as reward for (Rama's) prowess and my second daughter Urmila (to Lakshmana). I proclaim it three times so that there is no doubt about it.
ShlokaShloka 22
ददामि परमप्रीतो वध्वौ ते रघुनन्दन।।1.71.22।। रामलक्ष्मणयो राजन् गोदानं कारयस्व ह। पितृकार्यं च भद्रं ते ततो वैवाहिकं कुरु।।1.71.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आपका भला हो! मैं सीता को श्रीराम के लिये और ऊर्मिला को लक्ष्मणके लिये समर्पित करता हूँ। पराक्रम ही जिसको पाने का शुल्क (शर्त) था, उस देवकन्या के समान सुन्दरी अपनी प्रथम पुत्री सीता को श्रीराम के लिये तथा दूसरी पुत्री ऊर्मिला को लक्ष्मण के लिये दे रहा हूँ। मैं इस बात को तीन बार दुहराता हूँ, इसमें संशय नहीं है। मुनिप्रवर! मैं परम प्रसन्न होकर आपको दो बहुएँ दे रहा हूँ’
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O Delight of the Raghus (King Dasaratha), I offer these brides with immense pleasure to Rama and Lakshmana. You may perform the rites for your forefathers by gift of cows. Prosperity to you. Thereafter you may perform the marriage.
ShlokaShloka 23
मखा ह्यद्य महाबाहो तृतीये दिवसे प्रभो। फल्गुन्यामुत्तरे राजंस्तस्मिन्वैवाहिकं कुरु।।1.71.24।। रामलक्ष्मणयो राजन् दानं कार्यं सुखोदयम् ।।
हिन्दी अर्थ देखें
(वसिष्ठजीसे ऐसा कहकर राजा जनक ने महाराज दशरथ से कहा-) ‘राजन्! अब आप श्रीराम और लक्ष्मण के मंगल के लिये इनसे गोदान करवाइये, आपका कल्याण हो। नान्दीमुख श्राद्ध का कार्य भी सम्पन्न कीजिये। इसके बाद विवाह का कार्य आरम्भ कीजियेगा
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Today the star Makha is on the ascendant. O King perform the marriage on the, third day from today under UttaraPhalguni star. Gifts may be given for the happiness of Rama and Lakshmana". इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये बालकाण्डे एकसप्ततितमस्सर्ग:।। Thus ends the seventyfirst sarga of Balakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.