Ayodhya Kanda

Sarga 114: Gloom at Ayodhya after the exile of Rama.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 114

31 shlokas

ShlokaShloka 1
स्निग्धगम्भीरघोषेण स्यन्दनेनोपयान्प्रभुः। अयोध्यां भरतः क्षिप्रं प्रविवेश महायशाः।।2.114.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
इसके बाद प्रभावशाली महायशस्वी भरत ने स्निग्ध, गम्भीर घर्घर घोष से युक्त रथ के द्वारा यात्रा करके शीघ्र ही अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या में प्रवेश किया
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Bharata, the renowned lord (of Ayodhya) travelled on the chariot that produced a deep, soothing, sound. And entered Ayodhya soon.
ShlokaShloka 2
बिडालोलूकचरितामालीननरवारणाम्। तिमिराभ्याहतां कालीमप्रकाशां निशामिव।।2.114.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय वहाँ बिलाव और उल्लू विचर रहे थे। घरों के किवाड़ बंद थे। सारे नगर में अन्धकार छा रहा था। प्रकाश न होने के कारण वह पुरी कृष्णपक्ष की काली रात के समान जान पड़ती थी
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ShlokaShloka 3
राहुशत्रोः प्रियां पत्नीं श्रिया प्रज्वलितप्रभाम्। ग्रहेणाभ्युत्थितेनैकां रोहिणीमिव पीडिताम्।।2.114.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे चन्द्रमा की प्रिय पत्नी और अपनी शोभा से प्रकाशित कान्ति वाली रोहिणी उदित हुए राहु नामक ग्रह के द्वारा अपने पति के ग्रस लिये जाने पर अकेली -असहाय हो जाती है, उसी प्रकार दिव्य ऐश्वर्य से प्रकाशित होने वाली अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या राजा के कालकवलित हो जाने के कारण पीड़ित एवं असहाय हो रही थी
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(The city looked) like Rohini, the beloved consort of the Moon, the star which was majesticlly radiating flaming brilliance and now, tormented by the exalted Rahu which has eclipsed the Moon, shines alone.
ShlokaShloka 4
अल्पोष्णक्षुब्धसलिलां घर्मोत्तप्तविहङ्गमाम्। लीनमीनझषग्राहां कृशां गिरिनदीमिव।।2.114.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
वह पुरी उस पर्वतीय नदी की भाँति कृशकाय दिखायी देती थी, जिसका जल सूर्य की किरणों से तपकर कुछ गरम और गँदला हो रहा हो, जिसके पक्षी धूप से संतप्त होकर भाग गये हों तथा जिसके मीन, मत्स्य और ग्राह गहरे जल में छिप गये हों
Show English Translation
(It appeared) like a lean mountainstream with scant, hot and turbid waters, with scorched aquatic birds and with small and large fishes and crocodiles dead due to the heat of the Sun.
ShlokaShloka 5
विधूमामिव हेमाभामध्वराग्ने स्समुत्थिताम्। हविरभ्युक्षितां पश्चाच्छिखां विप्रलयं गताम्।।2.114.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रबल वायु के वेग से फेन और गर्जना के साथ उठी हुई समुद्र की उत्ताल तरंग सहसा वायु के शान्त हो जाने पर जैसे शिथिल और नीरव हो जाती है, उसी प्रकार कोलाहलपूर्ण अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या अब शब्दशून्य-सी जान पड़ती थी
Show English Translation
ShlokaShloka 6
विध्वस्तकवचां रुग्णगजवाजिरथध्वजाम्। हतप्रवीरामापन्नां चमूमिव महाहवे।।2.114.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रबल वायु के वेग से फेन और गर्जना के साथ उठी हुई समुद्र की उत्ताल तरंग सहसा वायु के शान्त हो जाने पर जैसे शिथिल और नीरव हो जाती है, उसी प्रकार कोलाहलपूर्ण अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या अब शब्दशून्य-सी जान पड़ती थी
Show English Translation
warriors slain in the great battle (the city appeared desolate).
ShlokaShloka 7
सफेनां सस्वनां भूत्वा सागरस्य समुत्थिताम्। प्रशान्तमारुतोद्धूतां जलोर्मिमिव निस्स्वनाम्।।2.114.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रबल वायु के वेग से फेन और गर्जना के साथ उठी हुई समुद्र की उत्ताल तरंग सहसा वायु के शान्त हो जाने पर जैसे शिथिल और नीरव हो जाती है, उसी प्रकार कोलाहलपूर्ण अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या अब शब्दशून्य-सी जान पड़ती थी
Show English Translation
ShlokaShloka 8
त्यक्तां यज्ञायुधैः सर्वैरभिरूपैश्च याजकैः। सुत्याकाले सुनिर्वृत्ते वेदिं गतरवामिव।।2.114.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
यज्ञकाल समाप्त होने पर ‘स्फ्य’ आदि यज्ञसम्बन्धी आयुधों तथा श्रेष्ठ याजकों से सूनी हुई वेदी जैसे मन्त्रोच्चारण की ध्वनि से रहित हो जाती है, उसी प्रकार अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या सुनसान दिखायी देती थी
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ShlokaShloka 9
गोष्ठमध्ये स्थितामार्तामचरन्��ीं तृणं नवम्। गोवृषेण परित्यक्तां गवां पक्तिमिवोत्सुकाम्।।2.114.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे कोई गाय साँड़ के साथ समागम के लिये उत्सुक हो, उसी अवस्था में उसे साँड़ से अलग कर दिया गया हो और वह नूतन घास चरना छोड़कर आर्त भाव से गोष्ठ में बँधी हुई खड़ी हो, उसी तरह अयोध्यापुरी भी आन्तरिक वेदना से पीड़ित थी
Show English Translation
the midst of the herd despairs and no longer grazes the new grass.
ShlokaShloka 10
प्रभाकराद्यै स्सुस्निग्धैः प्रज्वलद्भिरिवोत्तमैः। वियुक्तां मणिभिर्जात्यैर्नवां मुक्तावलीमिव।।2.114.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
जो पुण्य-क्षय होने के कारण सहसा अपने स्थान से भ्रष्ट हो पृथ्वी पर आ पहुँची हो, अतएव जिसकी विस्तृत प्रभा क्षीण हो गयी हो, आकाश से गिरी हुई उस तारिका की भाँति अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या शोभाहीन हो गयी थी
Show English Translation
ShlokaShloka 11
सहसा चलितां स्थानान्महीं पुण्यक्षयाद्गताम्। संवृतद्युतिविस्तारां तारामिव दिवश्च्युताम्।।2.114.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
जो पुण्य-क्षय होने के कारण सहसा अपने स्थान से भ्रष्ट हो पृथ्वी पर आ पहुँची हो, अतएव जिसकी विस्तृत प्रभा क्षीण हो गयी हो, आकाश से गिरी हुई उस तारिका की भाँति अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या शोभाहीन हो गयी थी
Show English Translation
ShlokaShloka 12
पुष्पनद्धां वसन्तान्ते मत्तभ्रमरनादिताम्। द्रुतदावाग्नि विप्लुष्टां क्लान्तां वनलतामिव।।2.114.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
जो ग्रीष्म ऋतु में पहले फूलों से लदी हुई होने के कारण मतवाले भ्रमरों से सुशोभित होती रही हो और फिर सहसा दावानल के लपेट में आकर मुरझा गयी हो, वन की उस लता के समान पहले की उल्लासपूर्ण अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या अब उदास हो गयी थी
Show English Translation
with the melodious humming of intoxicated bees and suddenly shrivelling, ravaged by the fastspreading forest fire.
ShlokaShloka 13
सम्मूढनिगमांस्तब्धां संक्षिप्तविपणापणाम्। प्रच्छन्नशशिनक्षत्रां द्यामिवाम्बुधरैर्वृताम्।।2.114.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
वहाँके व्यापारी वणिक् शोक से व्याकुल होने के कारण किंकर्तव्यविमूढ़ हो गये थे, बाजार-हाट और दूकानें बहुत कम खुली थीं। उस समय सारी पुरी उस आकाश की भाँति शोभाहीन हो गयी थी, जहाँ बादलों की घटाएँ घिर आयी हों और तारे तथा चन्द्रमा ढक गये हों
Show English Translation
Ayodhya with its markets and shops closed, and its merchants in a daze looked like the sky covered with clouds obscuring the Moon and stars.
ShlokaShloka 14
क्षीणपानोत्तमैर्भग्नैः शरावैरभिसंवृताम्। हतशौण्डामिव ध्वस्तांं पानभूमिमसंस्कृताम्।।2.114.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
(उन दिनों अयोध्यापुरी की सड़कें झाड़ी-बुहारी नहीं गयी थीं, इसलिये यत्र-तत्र कूड़े-करकट के ढेर पड़े थे। उस अवस्थामें) वह नगरी उस उजड़ी हुई पानभूमि (मधुशाला) के समान श्रीहीन दिखायी देती थी, जिसकी सफाई न की गयी हो, जहाँ मधु से खाली टूटी-फूटी प्यालियाँ पड़ी हों और जहाँ के पीने वाले भी नष्ट हो गये हों
Show English Translation
(Ayodhya looked) like an uncleansed drinking place with broken pitchers emptied of excellent wine scattered around and with drunkards lying dead in the open.
ShlokaShloka 15
वृक्णभूमितलां निम्नां वृक्णपात्रैस्समावृताम्। उपयुक्तोदकां भग्नां प्रपां निपतितामिव।।2.114.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस पुरी की दशा उस पौंसले की-सी हो रही थी, जो खम्भों के टूट जाने से ढह गया हो, जिसका चबूतरा छिन्न-भिन्न हो गया हो, भूमि नीची हो गयी हो, पानी चुक गया हो और जलपात्र टूट-फूटकर इधर-उधर सब ओर बिखरे पड़े हों
Show English Translation
(Ayodhya appeared) like a ruined well, its foundations broken and sunken into the earth, its water used up, with broken pots scattered around, its riven surface forming a dale.
ShlokaShloka 16
विपुलां विततां चैव युक्तपाशां तरस���विनाम्। भूमौ बाणैर्विनिष्कृत्तां पतितां ज्यामिवायुधात्।।2.114.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
जो विशाल और सम्पूर्ण धनुष में फैली हुई हो, उसकी दोनों कोटियों (किनारों) में बाँधने के लिये जिसमें रस्सी जुड़ी हुई हो, किंतु वेगशाली वीरों के बाणों से कटकर धनुष से पृथ्वी पर गिर पड़ी हो, उस प्रत्यञ्चा के समान ही अयोध्यापुरी भी स्थानभ्रष्ट हुई सी दिखायी देती थी
Show English Translation
ShlokaShloka 17
सहसा युद्धशौण्डेन हयारोहेण वाहिताम्। निहतां प्रतिसैन्येन वडवामिव पातिताम्।।2.114.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
जिसपर युद्धकुशल घुड़सवार ने सवारी की हो और जिसे शत्रुपक्ष की सेना ने सहसा मार गिराया हो, युद्धभूमि में पड़ी हुई उस घोड़ी की जो दशा होती है, वही उस समय अयोध्यापुरी की भी थी (कैकेयी के कुचक्र से उसके संचालक नरेश का स्वर्गवास और युवराज का वनवास हो गया था)
Show English Translation
ShlokaShloka 18
शुष्कतोयां महामत्स्यैः कूर्मैश्च बहुभिर्वृताम्। प्रभिन्नतटविस्तीर्णां वापीमिव हृतोत्पलाम्।।2.114.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
रथ पर बैठे हुए श्रीमान् दशरथनन्दन भरत ने उस समय श्रेष्ठ रथ का संचालन करने वाले सारथि सुमन्त्र से इस प्रकार कहा-
Show English Translation
ShlokaShloka 19
पुरुषस्याप्रहृष्टस्य प्रतिषिद्धानुलेपनाम्। सन्तप्तामिव शोकेन गात्रयष्टिमभूषणाम्।।2.114.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या में पहले की भाँति सब ओर फैला हुआ गाने-बजाने का गम्भीर नाद नहीं सुनायी पड़ता; यह कितने कष्ट की बात है!
Show English Translation
ShlokaShloka 20
प्रावृषि प्रव��गाढायां प्रविष्टस्याभ्रमण्डलम्। प्रच्छन्नां नीलजीमूतैर्भास्करस्य प्रभामिव।।2.114.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब चारों ओर वारुणी (मधु) की मादक गन्ध, व्याप्त हुई फूलों की सुगन्ध तथा चन्दन और अगुरु की पवित्र गन्ध नहीं फैल रही है
Show English Translation
ShlokaShloka 21
भरतस्तु रथस्थ स्सन् श्रीमान्दशरथात्मजः। वाहयन्तं रथश्रेष्ठं सारथिं वाक्यमब्रवीत्।।2.114.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अच्छी-अच्छी सवारियों की आवाज, घोड़ों के हींसने का सुस्निग्ध शब्द, मतवाले हाथियों का चिग्घाड़ना तथा रथों की घर्घराहट का महान् शब्दये सब नहीं सुनायी दे रहे हैं
Show English Translation
Illustrious Bharata, son of Dasaratha, seated in his chariot, addressed the charioteer as he drove the most excellent of chariots saying:
ShlokaShloka 22
किं नु खल्वद्य गम्भीरो मूर्छितो न निशम्यते। यथापुरमयोध्यायां गीतवादित्रनिस्वनः।।2.114.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
How is it that in Ayodhya, the deep and allpervasive songs and sounds of musical instruments of the former days are not heard now?
ShlokaShloka 23
वारुणीमदगन्धश्च माल्यगन्धश्च मूर्छितः। धूपितागुरुगन्धश्च न प्रवाति समन्ततः।।2.114.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
The breeze no longer carries the intoxicating odour of spirituous liquor, the pervading fragrance of flower garlands and agaru (incense).
ShlokaShloka 24
यानप्रवरघोषश्च स्निग्धश्च हयनिस्वनः। प्रमत्तगजनादश्च महांश्च रथनिस्वनः।।2.114.24।। नेदानीं श्रूयते पुर्यामस्यां रामे विवासिते।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
After Rama's the exile the clatter of excellent carriages, the pleasing neighing of horses and trumpeting of elephants in rut and the rattle of chariots are no longer heard now.
ShlokaShloka 25
चन्दनागरुगन्धांश्च महार्हाश्च नवस्रजः। गते हि रामे तरुणा स्संतप्ता नोपभुञ्जते।।2.114.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
Since Rama has departed, the young men in distress do not enjoy expensive incense of agaru and sandalwood paste and garlands of fresh flowers.
ShlokaShloka 26
बहिर्यात्रां न गच्छन्ति चित्रमाल्यधरा नराः। नोत्सवा स्सम्प्रवर्तन्ते रामशोकार्दिते पुरे।।2.114.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
This city is stricken with grief on account of Rama's departure. Men do not go out on pleasure jaunts wearing garlands of variegated flowers. Festivities are not celebrated.
ShlokaShloka 27
सह नूनं मम भ्रात्रा पुरस्यास्य द्युतिर्गता। न हि राजत्ययोध्येयं सासारेवार्जुनी क्षपा।।2.114.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
Certainly splendour has left along with my brother. Like the night when the rain pours down during the waning of the Moon, Ayodhya shines not.
ShlokaShloka 28
कदा नु खलु मे भ्राता महोत्सव इवाऽगतः। जनयिष्यत्ययोध्यायां हर्षं ग्रीष्म इवाम्बुदः।।2.114.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
When will my brother return to Ayodhya like a carnival and cause delight to every one like summer clouds?
ShlokaShloka 29
तरुणैश्चारुवेषैश्च नरैरुन्नतगामिभिः। सम्पतद्भिरयोध्यायां नाभिभान्ति महापथाः।।2.114.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
जैसे सूर्य के छिप जाने से दिन की शोभा नष्ट हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय वह अन्तःपुर शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोकमग्न थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से हीन देख भरत धैर्यवान् होने पर भी अत्यन्त दुःखी हो आँसू बहाने लगे
Show English Translation
The highways of Ayodhya thronged with groups of elegantly attired young men or adults with their majestic gait, do not shine.
ShlokaShloka 30
एवं बहुविधं जल्पन्विवेश वसतिं पितुः। तेन हीनां नरेन्द्रेण सिंहहीनां गुहामिव।।2.114.31।।
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Thus mourning in several ways, Bharata entered his fathers' palace (now) bereft of the king like a cave without the lion.
ShlokaShloka 31
तदा तदन्तः पुरमुञ्झितप्रभं सुरैरिवोत्सृष्टमभास्करं दिनम्। निरीक्ष्य सर्वं तु विविक्तमात्मवान्मुमोच बाष्पं भरतः सुदुःखितः।।2.114.32।।
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Selfpossessed Bharata beholding the secluded inner apartment deserted by the gods shorn of splendour, like the day deprived of the Sun shed tears in distress. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे चतुर्दशोत्तरशततमस्सर्गः। Thus ends the hundredfourteenth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.