Ayodhya Kanda

Sarga 8: Manthara incites Kaikeyi --Kaikeyi narrates the virtues of Rama--Manthara insinuates that installation of Rama would harm Bharata--hence Rama should be banished and Bharata coronated.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 8

39 shlokas

ShlokaShloka 1
मन्थरा त्वभ्यसूयैनामुत्सृज्याभरणं च तत्। उवाचेदं ततो वाक्यं कोपदुःखसमन्विता।।2.8.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
यह सुनकर मन्थरा ने कैकेयी की निन्दा करके उसके दिये हुए आभूषण को उठाकर फेंक दिया और कोप तथा दुःख से भरकर वह इस प्रकार बोली-
Show English Translation
Annoyed with Kaikeyi and filled with rage and sorrow, Manthara discarded the ornament (gifted to her) and said these words:
ShlokaShloka 2
हर्षं किमिदमस्थाने कृतवत्यसि बालिशे। शोकसागरमध्यस्थमात्मानं नावबुध्यसे।।2.8.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रानी! तुम बड़ी नादान हो। अहो! तुमने यह बेमौके हर्ष किसलिये प्रकट किया? तुम्हें शोक के स्थान पर प्रसन्नता कैसे हो रही है? अरी! तुम शोक के समुद्रमें डूबी हुई हो, तो भी तुम्हें अपनी इस विपन्नावस्था का बोध नहीं हो रहा है
Show English Translation
O foolish woman why do you display this misplaced happiness, little realising that you are in the midst of an ocean of sorrow?
ShlokaShloka 3
मनसा प्रहसामि त्वां देवि दुःखार्दिता सती। यच्छोचितव्ये हृष्टाऽसि प्राप्येदं व्यसनं महत्।।2.8.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि! महान् संकट में पड़ने पर जहाँ तुम्हें शोक होना चाहिये, वहीं हर्ष हो रहा है। तुम्हारी यह अवस्था देखकर मुझे मन-ही-मन बड़ा क्लेश सहन करना पड़ता है, मैं दुःख से व्याकुल हुई जाती हूँ
Show English Translation
O queen at a time when this great misfortune has befallen you, you are rejoicing instead of feeling miserable. I am indeed laughing at you at heart.
ShlokaShloka 4
शोचामि दुर्मतित्वं ते का हि प्राज्ञा प्रहर्षयेत्। अरेस्सपत्नीपुत्रस्य वृद्धिं मृत्योरिवागताम्।।2.8.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मुझे तुम्हारी दुर्बुद्धि के लिये ही अधिक शोक होता है। अरी! सौत का बेटा शत्रु होता है। वह सौतेली माँ के लिये साक्षात् मृत्यु के समान है। भला, उसके अभ्युदय का अवसर आया देख कौन बुद्धिमती स्त्री अपने मन में हर्ष मानेगी
Show English Translation
I pity your false notion. Will any wise woman rejoice at the prosperity of the son of a cowife who is like an enemy? This is like (courting) death.
ShlokaShloka 5
भरतादेव रामस्य राज्यसाधारणाद्भयम्। तद्विचिन्त्य विषण्णाऽस्मि भयं भीताऽद्धि जायते।।2.8.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह राज्य भरत और राम दोनों के लिये साधारण भोग्यवस्तु है, इसपर दोनों का समान अधिकार है, इसलिये श्रीराम को भरतसे ही भय है। यही सोचकर मैं विषाद में डूबी जाती हूँ; क्योंकि भयभीत से ही भय प्राप्त होता है अर्थात् आज जिसे भय है, वही राज्य प्राप्त कर लेने पर जब सबल हो जायगा, तब अपने भय के हेतु को उखाड़ फेंकेगा
Show English Translation
Since Bharata and Rama have equal claim to the kingdom, Bharata is a source of fear for Rama. Having thought over this matter, I am dejected. Danger springs from one who is in fear.
ShlokaShloka 6
लक्ष्मणो हि महेष्वासो रामं सर्वात्मना गतः। शत्रुघ्नश्चापि भरतं काकुत्स्थं लक्ष्मणो यथा।।2.8.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाबाहु लक्ष्मण सम्पूर्ण हृदय से श्रीरामचन्द्रजी के अनुगत हैं। जैसे लक्ष्मण श्रीराम के अनुगत हैं, उसी तरह शत्रुघ्न भी भरत का अनुसरण करने वाले हैं
Show English Translation
Lakshmana who wields a great bow has taken refuge with all his heart in Rama a descendant of Kakutstha dynasty. So does Satrughna in Bharata.
ShlokaShloka 7
प्रत्यासन्नक्रमेणापि भरतस्यैव भामिनि। राज्यक्रमो विप्रकृष्टस्तयोस्तावत्कनीयसोः।।2.8.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भामिनि! उत्पत्ति के क्रम से श्रीराम के बाद भरत का ही पहले राज्य पर अधिकार हो सकता है (अतः भरत से भय होना स्वाभाविक है)। लक्ष्मण और शत्रुघ्न तो छोटे हैं; अतः उनके लिये राज्यप्राप्ति की सम्भावना दूर है
Show English Translation
O beautiful lady in order of birth, too, Bharata's right to the throne is just next (to Rama's). While being younger, the chances of the other two (Lakshmana and Satrughna) are remote.
ShlokaShloka 8
विदुषः क्षत्रचारित्रे प्राज्ञस्य प्राप्तकारिणः। भयात्प्रवेपे रामस्य चिन्तयन्ती तवात्मजम्।।2.8.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम समस्त शास्त्रों के ज्ञाता हैं, विशेषतः क्षत्रियचरित्र (राजनीति) के पण्डित हैं तथा समयोचित कर्तव्य का पालन करनेवाले हैं; अतः उनका तुम्हारे पुत्र के प्रति जो क्रूरतापूर्ण बर्ताव होगा, उसे सोचकर मैं भय से काँप उठती हूँ
Show English Translation
Rama is learned in the duties of a kshatriya. He is wise enough to do what he should at the appropriate time. While reflecting the fate of your son, I am trembling with fear.
ShlokaShloka 9
सुभगा खलु कौशल्या यस्याः पुत्रोऽभिषेक्ष्यते। यौवराज्येन महता श्वः पुष्येण द्विजोत्तमैः।।2.8.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वास्तव में कौसल्या ही सौभाग्यवती हैं, जिनके पुत्र का कल पुष्यनक्षत्र के योग में श्रेष्ठ ब्राह्मणों द्वारा युवराज के महान् पदपर अभिषेक होने जा रहा है
Show English Translation
Kausalya whose son is going to be coronated as heirapparent by eminent brahmins under Pushya star tomorrow is fortunate, indeed.
ShlokaShloka 10
प्राप्तां सुमहतीं प्रीतिं प्रतीतां तां हतद्विषम्। उपस्थास्यसि कौसल्यां दासीव त्त्वं कृताञ्जलिः।।2.8.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे भूमण्डल का निष्कण्टक राज्य पाकर प्रसन्न होंगी; क्योंकि वे राजा की विश्वासपात्र हैं और तुम दासी की भाँति हाथ जोड़कर उनकी सेवा में उपस्थित होओगी॥१०॥
Show English Translation
With folded palms like an attendant, you will have to serve that renowned Kausalya who is greatlly delighted by getting rid of her enemies.
ShlokaShloka 11
एवं चेत्त्वं सहास्माभिस्तस्याः प्रेष्या भविष्यसि। पुत्रश्च तव रामस्य प्रेष्यभावं गमिष्यति।।2.8.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस प्रकार हमलोगों के साथ तुम भी कौसल्या की दासी बनोगी और तुम्हारे पुत्र भरत को भी श्रीरामचन्द्रजी की गुलामी करनी पड़ेगी
Show English Translation
If you thus become her attendant along with us, your son will also develop slavishness towards Rama.
ShlokaShloka 12
हृष्टाः खलु भविष्यन्ति रामस्य परमास्स्त्रियः। अप्रहृष्टा भविष्यन्ति स्नुषास्ते भरतक्षये।।2.8.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरामचन्द्रजी के अन्तःपुर की परम सुन्दरी स्त्रियाँ – सीतादेवी और उनकी सखियाँ निश्चय ही बहुत प्रसन्न होंगी और भरत के प्रभुत्व का नाश होने से तुम्हारी बहुएँ शोकमग्न हो जायँगी’
Show English Translation
All the women of Rama's (palace) will be delighted indeed. With the decline of Bharata, your daughtersinlaw will be deprived of all happiness.
ShlokaShloka 13
तां दृष्ट्वा परमप्रीतां ब्रुवन्तीं मन्थरां ततः। रामस्यैव गुणान्देवी कैकेयी प्रशशंस ह।।2.8.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
मन्थरा को अत्यन्त अप्रसन्नता के कारण इस प्रकार बहकी-बहकी बातें करती देख देवी कैकेयी ने श्रीराम के गुणों की ही प्रशंसा करते हुए कहा-
Show English Translation
Having seen that morose Manthara speaking thus, Kaikeyi commended the virtues of Rama.
ShlokaShloka 14
धर्मज्ञो गुरुभिर्दान्तः कृतज्ञस्सत्यवाक्छुचिः। रामो राज्ञ स्सुतो ज्येष्ठो यौवराज्यमतोऽर्हति।।2.8.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुब्जे! श्रीराम धर्म के ज्ञाता, गुणवान्, जितेन्द्रिय, कृतज्ञ, सत्यवादी और पवित्र होने के साथ ही महाराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं; अतः युवराज होने के योग्य वे ही हैं
Show English Translation
Rama knows righteouness. He has been taught selfrestraint by elders. He is grateful and truthful. He is undefiled. He is the eldest son of the king. Therefore, he deserves to be the heirapparent (of the kingdom).
ShlokaShloka 15
भ्रातृ़न्भृत्यांश्च दीर्घायुः पितृवत्पालयिष्यति। सन्तप्स्यसे कथं कुब्जे श्रुत्वा राम���भिषेचनम्।।2.8.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे दीर्घजीवी होकर अपने भाइयों और भृत्यों का पिता की भाँति पालन करेंगे। कुब्जे! उनके अभिषेक की बात सुनकर तू इतनी जल क्यों रही है?
Show English Translation
Blessed with a long life, Rama will protect his brothers and the servants like a father. O hunchback, hearing Rama's coronation why are you aggrieved?
ShlokaShloka 16
भरतश्चापि रामस्य ध्रुवं वर्षशतात्परम्। पितृपैतामहं राज्यमवाप्ता पुरुषर्षभः।।2.8.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम की राज्यप्राप्ति के सौ वर्ष बाद नरश्रेष्ठ भरत को भी निश्चय ही अपने पिता-पितामहों का राज्य मिलेगा
Show English Translation
After a hundred years of Rama's rule, Bharata, the best of men, will get the kingdom of his ancestors.
ShlokaShloka 17
सा त्वमभ्युदये प्राप्ते वर्तमाने च मन्थरे। भविष्यति च कल्याणे किमर्थं परितप्यसे।।2.8.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मन्थरे ! ऐसे अभ्युदय की प्राप्ति के समय, जब कि भविष्य में कल्याण-ही-कल्याण दिखायी दे रहा है, तू इस प्रकार जलती हुई-सी संतप्त क्यों हो रही है?
Show English Translation
Manthara, we have enjoyed prosperity in the past, we are enjoying it now and we will enjoy it in future. Then why are you aggrieved?
ShlokaShloka 18
यथा मे भरतो मान्यस्तथा भूयोऽपि राघवः। कौशल्यातोऽतिरिक्तं च सोऽनुशुश्रूषते हि माम्।।2.8.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे लिये जैसे भरत आदर के पात्र हैं, वैसे ही बल्कि उनसे भी बढ़कर श्रीराम हैं; क्योंकि वे कौसल्या से भी बढ़कर मेरी बहुत सेवा किया करते हैं
Show English Translation
For me, if Bharata is worthy of consideration Rama is worthier. He serves me even more (scrupulously) than he does Kausalya.
ShlokaShloka 19
राज्यं यदि हि रामस्य भरतस्यापि तत्तदा। मन्यते हि यथात्मानं तथा भ्रातृ़ंश्च राघवः।।2.8.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि श्रीराम को राज्य मिल रहा है तो उसे भरत को मिला हुआ समझ; क्योंकि श्रीरामचन्द्र अपने भाइयों को भी अपने ही समान समझते हैं’
Show English Translation
If the kingdom is Rama's, it is also Bharata's, since Rama regards his brothers as his own self
ShlokaShloka 20
कैकेयीवचनं श्रुत्वा मन्थरा भृशदुःखिता। दीर्घमुष्णं च विनिश्वस्य कैकेयीमिदमब्रवीत्।।2.8.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
कैकेयी की यह बात सुनकर मन्थरा को बड़ा दुःख हुआ। वह लंबी और गरम साँस खींचकर कैकेयी से बोली-॥२०॥
Show English Translation
Having heard Kaikeyi's words Manthara was extremely unhappy. Heaving deep, hot sighs she said to Kaikeyi.
ShlokaShloka 21
अनर्थदर्शिनी मौर्ख्यान्नात्मानमवबुध्यसे। शोकव्यसनविस्तीर्णे मज्जन्ती दुःखसागरे।।2.8.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रानी! तुम मूर्खतावश अनर्थ को ही अर्थ समझ रही हो। तुम्हें अपनी स्थिति का पता नहीं है। तुम दुःख के उस महासागर में डूब रही हो, जो शोक (इष्ट से वियोग की चिन्ता) और व्यसन (अनिष्ट की प्राप्ति के दुःख) से महान् विस्तार को प्राप्त हो रहा है
Show English Translation
You are sinking in the sea of sorrow widened with tears and troubles. But you are stupid enough not to perceive your own wellbeing.
ShlokaShloka 22
भविता राघवो राजा राघवस्यानु यस्सुतः। राजवंशात्तु कैकेयि भरतःपरिहास्यते।।2.8.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘केकयराजकुमारी! जब श्रीरामचन्द्र राजा हो जायँगे, तब उनके बाद उनका जो पुत्र होगा, उसी को राज्य मिलेगा। भरत तो राजपरम्परा से अलग हो जायँगे
Show English Translation
Rama, the scion of the Raghus, will become king. After Rama, his son will suceed him. O Kaikeyi, as for Bharata, he will be debarred from royal succession (altogether).
ShlokaShloka 23
न हि राज्ञस्सुता स्सर्वे राज्ये तिष्ठन्ति भामिनि। स्थाप्यमानेषु सर्वेषु सुमहाननयो भवेत्।।2.8.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भामिनि! राजा के सभी पुत्र राज्यसिंहासन पर नहीं बैठते हैं; यदि सबको बिठा दिया जाय तो बड़ा भारी अनर्थ हो जाय
Show English Translation
O lovely lady, not all the sons of the king will inherit the kingdom. If all of them are installed as kings, there will be great disorder.
ShlokaShloka 24
तस्माज्ज्येष्ठे हि कैकेयि राज्यतन्त्राणि पार्थिवाः। स्थापयन्त्यनवद्याङ्गि गुणवत्स्वितरेष्वपि।।2.8.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘परमसुन्दरी केकयनन्दिनि! इसीलिये राजा लोग राजकाज का भार ज्येष्ठ पुत्र पर ही रखते हैं। यदि ज्येष्ठ पुत्र गुणवान् न हो तो दूसरे गुणवान् पुत्रों को भी राज्य सौंप देते हैं
Show English Translation
O Kaikeyi of beautiful limbs, for that reason kings bestow the governance of the kingdom either on the eldest or on other virtuous sons.
ShlokaShloka 25
असावत्यन्तनिर्भग्नस्तव पुत्रो भविष्यति। अनाथवत्सुखेभ्यश्च राजवंशाच्च वत्सले।।2.8.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुत्रवत्सले! तुम्हारा पुत्र राज्य के अधिकार से तो बहुत दूर हटा ही दिया जायगा, वह अनाथ की भाँति समस्त सुखों से भी वञ्चित हो जायगा
Show English Translation
O (Kaikeyi) dear cut off from royal succession as well as from its comforts, your son will become totally forlorn and brokenhearted.
ShlokaShloka 26
साऽहं त्वदर्थे सम्प्राप्ता त्वं तु मां नावबुद्ध्यसे। सपत्नि वृद्धौ या मे त्वं प्रदेयं दातुमिच्छसि।।2.8.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसलिये मैं तुम्हारे ही हित की बात सुझाने के लिये यहाँ आयी हूँ; परंतु तुम मेरा अभिप्राय तो समझती नहीं. उलटे सौत का अभ्युदय सुनकर मुझे पारितोषिक देने चली हो
Show English Translation
I am here to serve your interest. Nevertheless you do not understand me and you wish to confer gifts on me on the occasion of the prosperity of your cowife.
ShlokaShloka 27
ध्रुवं तु भरतं रामः प्राप्य राज्यमकण्टकम्। देशान्तरं वा नयिता लोकान्तरमथाऽपि वा।।2.8.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘याद रखो, यदि श्रीराम को निष्कण्टक राज्य मिल गया तो वे भरत को अवश्य ही इस देश से बाहर निकाल देंगे अथवा उन्हें परलोक में भी पहँचा सकते हैं
Show English Translation
Rama, having secured the thornless kingdom, will banish Bharata from the country or else send him to the other world. This is certain.
ShlokaShloka 28
बाल एव हि मातुल्यं भरतो नायितस्त्वया। सन्निकर्षाच्च सौहार्दं जायते स्थावरेष्वपि।।2.8.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘छोटी अवस्था में ही तुमने भरत को मामा के घर भेज दिया। निकट रहने से सौहार्द उत्पन्न होता है। यह बात स्थावर योनियों में भी देखी जाती है (लता और वृक्ष आदि एक-दूसरे के निकट होने पर परस्पर आलिङ्गन-पाश में बद्ध हो जाते हैं। यदि भरत यहाँ होते तो राजा का उनमें भी समान रूप से स्नेह बढ़ता; अतः वे उन्हें भी आधा राज्य दे देते)
Show English Translation
Bharata has been sent by you right from his childhood to his maternal uncle's house. Proximity creates friendship even amongst the inanimate objects.
ShlokaShloka 29
भरतस्याप्यनुवशश्शत्रुघ्नोऽपि समं गतः। लक्ष्मणो हि यथा रामं तथाऽसौ भरतं गतः।।2.8.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भरत के अनुरोध से शत्रुघ्न भी उनके साथ ही चले गये (यदि वे यहाँ होते तो भरत का काम बिगड़ने नहीं पाता। क्योंकि-) जैसे लक्ष्मण राम के अनुगामी हैं, उसी प्रकार शत्रुघ्न भरत का अनुसरण करनेवाले हैं
Show English Translation
Satrughna who is obedient to Bharata has followed him. Like Lakshmana who has taken refuge in Rama, he has also resorted to Bharata.
ShlokaShloka 30
श्रूयते हि द्रुमः कश्चिच्छेत्तव्यो वनजीविभिः। सन्निकर्षादिषीकाभिर्मोचितः परमाद्भयात्।।2.8.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुना जाता है, जंगल की लकड़ी बेचकर जीविका चलाने वाले कुछ लोगों ने किसी वृक्ष को काटने का निश्चय किया, परंतु वह वृक्ष कँटीली झाड़ियों से घिरा हुआ था; इसलिये वे उसे काट नहीं सके। इस प्रकार उन कँटीली झाड़ियों ने निकट रहने के कारण उस वृक्ष को महान् भय से बचा लिया॥३०॥
Show English Translation
It is said that a tree intended to be cut down by those living on the forest is let off due to entanglement of a kind of grass known as Ishika (thorny bushes) growing in its vicinity. (If Bharata had been at Ayodhya now, Dasaratha himself would have helped him.
ShlokaShloka 31
गोप्ता हि रामं सौमित्रिर्लक्ष्मणं चापि राघवः। अश्विनोरिव सौभ्रात्रं तयोर्लोकेषु विश्रुतम्।।2.8.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमित्राकुमार लक्ष्मण श्रीराम की रक्षा करते हैं और श्रीराम उनकी उन दोनों का उत्तम भ्रातृ-प्रेम दोनों अश्विनीकुमारों की भाँति तीनों लोकों में प्रसिद्ध है
Show English Translation
Just as Lakshmana protects Rama, Rama protects Lakshmana. Their brotherhood is renowned in the world like that of the Ashwins.
ShlokaShloka 32
तस्मान्न लक्ष्मणे रामः पापं किञ्चित्करिष्यति। रामस्तु भरते पापं कुर्यादिति न संशयः।।2.8.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसलिये श्रीराम लक्ष्मण का तो किञ्चित् भी अनिष्ट नहीं करेंगे, परंतु भरत का अनिष्ट किये बिना वे रह नहीं सकते; इसमें संशय नहीं है
Show English Translation
Rama will do no harm to Lakshmana. As for Bharata, Rama will doubtless do him harm.
ShlokaShloka 33
तस्माद्राजगृहादेव वनं गच्छतु ते सुतः। एतद्धि रोचते मह्यं भृशं चापि हितं तव।।2.8.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः श्रीरामचन्द्र महाराज के महल से ही सीधे वन को चले जायँ—मुझे तो यही अच्छा जान पड़ता है और इसी में तुम्हारा परम हित है
Show English Translation
Therefore let your son go to the forest straight from his uncle's palace only. That alone will please me. For you also this is highly beneficial.
ShlokaShloka 34
एवं ते ज्ञातिपक्षस्य श्रेयश्चैव भविष्यति। यदि चेद्भरतो धर्मात्पित्र्यं राज्यमवाप्स्यसि।।2.8.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि भरत धर्मानुसार अपने पिता का राज्य प्राप्त कर लेंगे तो तुम्हारा और तुम्हारे पक्ष के अन्य सब लोगों का भी कल्याण होगा
Show English Translation
If Bharata secures the ancestral kingdom righteously, it will bring welfare to you and to your relations also.
ShlokaShloka 35
स ते सुखोचितो बालो रामस्य सहजो रिपुः। समृद्धार्थस्य नष्टार्थो जीविष्यति कथं वशे।।2.8.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौतेला भाई होने के कारण जो श्रीराम का सहज शत्रु है, वह सुख भोगने के योग्य तुम्हारा बालक भरत राज्य और धन से वञ्चित हो राज्य पाकर समृद्धिशाली बने हुए श्रीराम के वश में पड़कर कैसे जीवित रहेगा
Show English Translation
Your son, that young Bharata, is accustomed to comforts. He is a born enemy of Rama. How will he, deprived of all wealth, live under the control of Rama?
ShlokaShloka 36
अभिद्रुतमिवारण्ये सिंहेन गजयूथपम्। प्रच्छाद्यमानं रामेण भरतं त्रातुमर्हसि।।2.8.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जैसे वन में सिंह हाथियों के यूथपति पर आक्रमण करता है और वह भागा फिरता है, उसी प्रकार राजा राम भरत का तिरस्कार करेंगे; अतः उस तिरस्कार से तुम भरत की रक्षा करो
Show English Translation
Like the leader of an elephantherd attacked by a lion in the forest, Bharata is going to be oppressed by Rama. You should save him.
ShlokaShloka 37
दर्पान्निराकृता पूर्वं त्वया सौभाग्यवत्तया। राममाता सपत्नी ते कथं वैरं न शातयेत्।।2.8.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तुमने पहले पति का अत्यन्त प्रेम प्राप्त होने के कारण घमंड में आकर जिनका अनादर किया था, वे ही तुम्हारी सौत श्रीराम माता कौसल्या पुत्र की राज्य प्राप्ति से परम सौभाग्यशालिनी हो उठी हैं; अब वे तुमसे अपने वैर का बदला क्यों नहीं लेंगी
Show English Translation
Being fortunate (being the favourite wife of your husband) you slighted your cowife earlier with pride. How will she, Rama's mother (Kausalya) remain without retaliating?
ShlokaShloka 38
यदा हि रामः पृथिवीमवाप्स्यति प्रभूतरत्नाकरशैलपत्तनाम्। तदा गमिष्यस्यशुभं पराभवं सहैव दीना भरतेन भामिनि।।2.8.38।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भामिनि! जब श्रीराम अनेक समुद्रों और पर्वतों से युक्त समस्त भूमण्डल का राज्य प्राप्त कर लेंगे, तब तुम अपने पुत्र भरत के साथ ही दीन-हीन होकर अशुभ पराभव का पात्र बन जाओगी
Show English Translation
O lovely lady when Rama becomes the lord of this earth with its oceans, mountains and cities, then along with Bharata you will become miserable and fall into disgrace.
ShlokaShloka 39
यदा हि रामः पृथिवीमवाप्स्यति ध्रुवं प्रणष्टो भरतो भविष्यति। अतो हि सञ्चिन्तय राज्यमात्मजे परस्य चैवाद्य विवासकारणम्।।2.8.39।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘याद रखो, जब श्रीराम इस पृथ्वी पर अधिकार प्राप्त कर लेंगे, तब निश्चय ही तुम्हारे पुत्र भरत नष्टप्राय हो जायँगे। अतः ऐसा कोई उपाय सोचो, जिससे तुम्हारे पुत्र को तो राज्य मिले और शत्रुभूत श्रीराम का वनवास हो जाय’॥३९॥ इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डेऽष्टमः सर्गः॥८॥ इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के अयोध्याकाण्ड में आठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥८॥
Show English Translation
When Rama obtains this earth, Bharata will be certainly ruined. Therefore, right now think of the kingdom for your son and the means of banishment for your enemy, Rama. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे अष्टमस्सर्गः।। Thus ends the eighth sarga of Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.