Ayodhya Kanda

Sarga 78: While Bharata looks at Manthara furiously, Satrughna drags her and throws her down -- Kaikeyi pleads for mercy and pacifies Manthara.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 78

26 shlokas

ShlokaShloka 1
अथ यात्रां समीहन्तं शत्रुघ्नो लक्ष्मणानुजः। भरतं शोकसन्तप्तमिदं वचनमब्रवीत्।।2.78.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
तेरहवें दिन का कार्य पूर्ण करके श्रीरामचन्द्रजी के पास जाने का विचार करते हुए शोकसंतप्त भरत से लक्ष्मण के छोटे भाई शत्रुघ्न ने इस प्रकार कहा-
Show English Translation
As the griefstricken Bharata was intending to proceed to Rama, Lakshmana's younger brother Satrughna said to him:
ShlokaShloka 2
गतिर्य स्सर्वभूतानां दुःखे किं पुनरात्मनः। स राम स्सत्त्वसम्पन्नः स्त्रिया प्रव्राजितो वनम्।।2.78.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भैया! जो दुःख के समय अपने तथा आत्मीयजनों के लिये तो बात ही क्या है, समस्त प्राणियों को भी सहारा देनेवाले हैं, वे सत्त्वगुणसम्पन्न श्रीराम एक स्त्री के द्वारा वन में भेज दिये गये (यह कितने खेदकी बात है)
Show English Translation
Couldn't the mighty Rama who is the ultimate refuge of all beings protect himself in his own distress? That Rama has been exiled to the forest by a woman.
ShlokaShloka 3
बलवान्वीर्यसम्पन्नो लक्ष्मणो नाम योऽप्यसौ। किं न मोचयते रामं कृत्वा स्म पितृनिग्रहम्।।2.78.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तथा वे जो बल और पराक्रम से सम्पन्न लक्ष्मण नामधारी शूरवीर हैं, उन्होंने भी कुछ नहीं किया। मैं पूछता हूँ कि उन्होंने पिता को कैद करके भी श्रीराम को इस संकट से क्यों नहीं छुड़ाया?
Show English Translation
And why did not Lakshmana who is strong and powerful release Rama from exile by restraining our father?
ShlokaShloka 4
पूर्वमेव तु निग्राह्य स्समवेक्ष्य नयानयौ। उत्पथं यस्समारूढो राजा नार्या वशं गतः।।2.78.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जब राजा एक नारी के वश में होकर बुरे मार्ग पर आरूढ़ हो चुके थे, तब न्याय और अन्याय का विचार करके उन्हें पहले ही कैद कर लेना चाहिये था’
Show English Translation
In the first place, the king could have restrained himself by reflecting on whether the course of action adopted by him under the influence of a woman was just or unjust.
ShlokaShloka 5
इति सम्भाषमाणे तु शत्रुघ्ने लक्ष्मणानुजे। प्राग्द्वारेऽभूत्तदा कुब्जा सर्वाभरणभूषिता।।2.78.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
लक्ष्मण के छोटे भाई शत्रुघ्न जब इस प्रकार रोष में भरकर बोल रहे थे, उसी समय कुब्जा समस्त आभूषणों से विभूषित हो उस राजभवन के पूर्व द्वार पर आकर खड़ी हो गयी
Show English Translation
While Satrughna, brother of Lakshmana was conversing thus, the hunchback Manthara decorated with all kinds of ornaments arrived at the entrance.
ShlokaShloka 6
लिप्ता चन्दनसारेण राजवस्त्राणि बिभ्रती। विविधं विविधै स्तैस्तैर्भूषणैश्च विभूषिता।।2.78.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
उसके अङ्गों में उत्तमोत्तम चन्दन का लेप लगा हुआ था तथा वह राजरानियों के पहनने योग्य विविध वस्त्र धारण करके भाँति-भाँति के आभूषणों से सज-धजकर वहाँ आयी थी
Show English Translation
She had besmeared herself with the essence of sandal, had put on royal garments and adorned herself in many ways with every kind of ornament.
ShlokaShloka 7
मेखलादामभिश्चित्रैरन्यैश्च शुभभूषणैः। बभासे बहुभिर्बद्धा रज्जुबद्धेव वानरी।।2.78.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
करधनी की विचित्र लड़ियों तथा अन्य बहुसंख्यक सुन्दर अलंकारों से अलंकृत हो वह बहुत-सी रस्सियों में बँधी हुई वानरी के समान जान पड़ती थी
Show English Translation
Tied with colourful girdle strings and wearing many other auspicious ornaments, she looked like a female monkey tied with a rope.
ShlokaShloka 8
तां समीक्ष्य तदा द्वास्स्थास्सुभृशं पापकारिणीम्। गृहीत्वाऽकरुणां कुब्जां शत्रुघ्नाय न्यवेदयन्।।2.78.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
वही सारी बुराइयों की जड़ थी। वही श्रीराम के वनवासरूपी पाप का मूल कारण थी। उस पर दृष्टि पड़ते ही द्वारपाल ने उसे पकड़ लिया और बड़ी निर्दयता के साथ घसीट लाकर शत्रुघ्न के हाथ में देते हुए कहा-
Show English Translation
Seeing the hunchback, doer of many sinful deeds, the gatekeepers caught hold of her and informed Satrughna.
ShlokaShloka 9
यस्याः कृते वने रामो न्यस्तदेहश्च वः पिता। सेयं पापा नृशंसा च तस्याः कुरु यथामति।।2.78.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
द्वारपाल की बात पर विचार करके शत्रुघ्न का दुःख और बढ़ गया। उन्होंने अपने कर्तव्य का निश्चय किया और अन्तःपुर में रहने वाले सब लोगों को सुनाकर इस प्रकार कहा-
Show English Translation
Here is that sinful, cruel woman on whose account Rama is in the forest and your father has forsaken his body. Do with her as it pleases you.
ShlokaShloka 10
शत्रुघ्नश्च तदाज्ञाय वचनं भृशदुःखितः। अन्तःपुरचरान्सर्वानित्युवाच धृत व्रतः।।2.78.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
द्वारपाल की बात पर विचार करके शत्रुघ्न का दुःख और बढ़ गया। उन्होंने अपने कर्तव्य का निश्चय किया और अन्तःपुर में रहने वाले सब लोगों को सुनाकर इस प्रकार कहा-
Show English Translation
Intensely grieved to hear those words, Satrughna who was steadfast in his vows said to the inmates of the inner apartment:
ShlokaShloka 11
तीव्रमुत्पादितं दुःखं भ्रात्रूणां मे तथा पितुः। यया सेयं नृशंसस्य कर्मणः फलमश्नुताम्।।2.78.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस पापिनी ने मेरे भाइयों तथा पिता को जैसा दुःसह दुःख पहुँचाया है, अपने उस क्रूर कर्म का वैसा ही फल यह भी भोगे’
Show English Translation
Let this woman, who caused deep sorrow to our brothers and father, reap the fruit of her malicious actions.
ShlokaShloka 12
एवमुक्त्वा तु तेनाशु सखीजनसमावृता। गृहीता बलवत्कुब्जा सा तद्गृहमनादयत्।।2.78.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
ऐसा कहकर शत्रुघ्न ने सखियों से घिरी हुई कुब्जा को तुरंत ही बलपूर्वक पकड़ लिया। वह डर के मारे ऐसा चीखने-चिल्लाने लगी कि वह सारा महल गूंज उठा
Show English Translation
Saying thus, he forcibly caught hold of the hunchback amidst her companions when she filled the house with her cries.
ShlokaShloka 13
तत स्सुभृशसन्तप्तस्तस्या स्सर्व स्सखीजनः। क्रुद्धमाज्ञाय शत्रुघ्नं विपलायत सर्वशः।।2.78.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
फिर तो उसकी सारी सखियाँ अत्यन्त संतप्त हो उठीं और शत्रुघ्न को कुपित जानकर सब ओर भाग चलीं
Show English Translation
Perceiving the enraged Satrughna all her companions shook in terror and fled in different directions.
ShlokaShloka 14
आमन्त्रयत कृत्स्न श्च तस्या स्सर्व स्सखीजनः। यथाऽयं समुपक्रान्तो निश्शेषां नः करिष्यति।।2.78.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
उसकी सम्पूर्ण सखियों ने एक जगह एकत्र होकर आपस में सलाह की कि ‘जिस प्रकार इन्होंने बलपूर्वक कुब्जा को पकड़ा है, उससे जान पड़ता है, ये हम लोगों में से किसी को जीवित नहीं छोड़ेंगे
Show English Translation
All her companions conversed among themselves. The way he began, it looks he will finish all of us.
ShlokaShloka 15
सानुक्रोशां वदान्यां च धर्मज्ञां च यशस्विनीम्। कौसल्यां शरणं याम सा हि नोऽस्तु ध्रुवा गतिः।।2.78.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः हमलोग परम दयालु, उदार, धर्मज्ञ और यशस्विनी महारानी कौसल्या की शरण में चलें। इस समय वे ही हमारी निश्चल गति हैं’
Show English Translation
Let us seek refuge under the illustrious Kausalya, who is compassionate, generous, and knower of righteousness. She is our sure saviour.
ShlokaShloka 16
स च रोषेण ताम्राक्ष श्शत्रुघ्न श्शत्रुतापनः। विचकर्ष तदा कुब्जां क्रोशन्तीं धरणीतले।।2.78.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
शत्रुओं का दमन करने वाले शत्रुघ्न रोष में भरकर कुब्जा को जमीन पर घसीटने लगे। उस समय वह जोर-जोर से चीत्कार कर रही थी
Show English Translation
With bloodshot eyes Satrughna, the scorcher of enemies, dragged the shrieking hunchback down the ground in fury.
ShlokaShloka 17
तस्या ह्याकृष्यमाणाया मन्थराया स्ततस्ततः। चित्रं बहुविधं भाण्डं पृथिव्यां तद्व्यशीर्यत।।2.78.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
जब मन्थरा घसीटी जा रही थी, उस समय उसके नाना प्रकार के विचित्र आभूषण टूट-टूटकर पृथ्वी पर इधर-उधर विखरे जाते थे
Show English Translation
While Manthara was being dragged by Satrughna, the collection of ornaments of many colours and of various kinds worn by her were broken and scattered here and there all over the ground.
ShlokaShloka 18
तेन भाण्डेन संस्तीर्णं श्रीमद्राजनिवेशनम्। अशोभत तदा भूयः शारदं गगनं यथा।।2.78.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
आभूषणों के उन टुकड़ों से वह शोभाशाली विशाल राजभवन नक्षत्रमालाओं से अलंकृत शरत्काल के आकाश की भाँति अधिक सुशोभित हो रहा था
Show English Translation
The resplendent royal palace, strewn all over with several ornaments on the ground shone like the autumnal sky (studded with innumerable stars).
ShlokaShloka 19
स बली बलवत्क्रोधाद्गृहीत्वा पुरुषर्षभः। कैकेयीमभिनिर्भर्त्स्य बभाषे परुषं वचः।।2.78.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
बलवान् नरश्रेष्ठ शत्रुघ्न जिस समय रोषपूर्वक मन्थरा को जोर से पकड़कर घसीट रहे थे, उस समय उसे छुड़ाने के लिये कैकेयी उनके पास आयी। तब उन्होंने उसे धिक्कारते हुए उसके प्रति बड़ी कठोर बातें कहीं-उसे रोषपूर्वक फटकारा
Show English Translation
The mighty and the best of men Satrughna seized with fury, forcibly caught hold of that hunchback and censured Kaikeyi with harsh words.
ShlokaShloka 20
तैर्वाक्यैः परुषैर्दुःखैः कैकेयी भृशदुःखिता। शत्रुघ्नभयसन्त्रस्ता पुत्रं शरणमागता।।2.78.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
शत्रुघ्न के वे कठोर वचन बड़े ही दुःखदायी थे। उन्हें सुनकर कैकेयी को बहुत दुःख हुआ। वह शत्रुघ्न के भय से थर्रा उठी और अपने पुत्र की शरण में आयी
Show English Translation
Kaikeyi, deeply distressed at those harsh and grievous words was afraid of Satrughna and sought the protection of her son Bharata.
ShlokaShloka 21
तं प्रेक्ष्य भरतः क्रुद्धं शत्रुघ्नमिदमब्रवीत्। अवध्या स्सर्वभूतानां प्रमदाः क्षम्यतामिति।।2.78.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
शत्रुघ्न को क्रोध में भरा हुआ देख भरत ने उनसे कहा—’सुमित्राकुमार! क्षमा करो स्त्रियाँ सभी प्राणियों के लिये अवध्य होती हैं
Show English Translation
Bharata, addressing the enraged Satrughna said Of all beings a lady is not to be killed. Pardon her.
ShlokaShloka 22
हन्यामहमिमां पापां कैकेयीं दुष्टचारिणीम्। यदि मां धार्मिको रामो नासूयेन्मातृघातकम्।।2.78.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि मुझे यह भय न होता कि धर्मात्मा श्रीराम मातृघाती समझकर मुझसे घृणा करने लगेंगे तो मैं भी इस दुष्ट आचरण करने वाली पापिनी कैकेयी को मार डालता
Show English Translation
If righteous Rama were not to accuse me of slaying a mother, I would have killed the sinful Kaikeyi of wicked deeds myself.
ShlokaShloka 23
इमामपि हतां कुब्जां यदि जानाति राघवः। त्वां च मां च हि धर्मात्मा नाभिभाषिष्यते ध्रुवम्।।2.78.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धर्मात्मा श्रीरघुनाथजी तो इस कुब्जा के भी मारे जाने का समाचार यदि जान लें तो वे निश्चय ही तुमसे और मुझसे बोलना भी छोड़ देंगे’
Show English Translation
If righteous Rama comes to know that this hunchback has been slain by us, he will certainly never talk to you or me.
ShlokaShloka 24
भरतस्य वचश्श्रुत्वा शत्रुघ्नो लक्ष्मणानुजः। न्यवर्तत ततो रोषात्तां मुमोच च मन्थराम्।।2.78.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
भरतजी की यह बात सुनकर लक्ष्मण के छोटे भाई शत्रुघ्न मन्थरा के वधरूपी दोष से निवृत्त हो गये और उसे मूर्च्छित अवस्था में ही छोड़ दिया
Show English Translation
Hearing the words of Bharata, Satrughna, the younger brother of Lakshmana restrained his fury and also released Manthara.
ShlokaShloka 25
सा पादमूले कैकेय्या मन्थरा निपपात ह। निश्श्वसन्ती सुदुःखार्ता कृपणं विललाप च।।2.78.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
मन्थरा कैकेयी के चरणों में गिर पड़ी और लंबी साँस खींचती हुई अत्यन्त दुःख से आर्त हो करुण विलाप करने लगी
Show English Translation
Manthara, tormented with grief, fell at the feet of Kaikeyi and began heaving deep sighs.
ShlokaShloka 26
शत्रुघ्नविक्षेपविमूढसंज्ञां समीक्ष्य कुब्जां भरतस्य माता। शनैस्समाश्वासयदार्तरूपां क्रौञ्चीं विलग्नामिव वीक्षमाणाम्।।2.78.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
शत्रुघ्न के पटकने और घसीटने से आर्त एवं अचेत हुई कुब्जा को देखकर भरत की माता कैकेयी धीरे-धीरे उसे आश्वासन देने होश में लाने की चेष्टा करने लगी। उस समय कुब्जा पिंजड़ें में बँधी हुई क्रौञ्ची की भाँति कातर दृष्टि से उसकी ओर देख रही थी
Show English Translation
. Seeing the hunchback thrown down by Satrughna and lying senseless and anguished like a female krauncha bird caught in a net looking in different directions, Kaikeyi gently soothed her. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे अष्टसप्ततितमस्सर्गः।। Thus ends the seventyeighth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.