Ayodhya Kanda
Sarga 83: Bharata's journey with queens, ministers and all others.
अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 83
22 shlokas
ShlokaShloka 1
तत स्समुत्थितः काल्यमास्थाय स्यन्दनोत्तमम्।
प्रययौ भरतश्शीघ्रं रामदर्शनकाङ्क्षया।।2.83.1।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
तदनन्तर प्रातःकाल उठकर भरत ने उत्तम रथपर आरूढ़ हो श्रीरामचन्द्रजी के दर्शन की इच्छा से शीघ्रतापूर्वक प्रस्थान किया
Show English TranslationEnglish Translation
Getting up at dawn, Bharata boarded his excellent chariot and set forth swiftly, longing to see Rama.
ShlokaShloka 2
अग्रतः प्रययुस्तस्य सर्वे मन्त्रिपुरोधसः।
अधिरुह्य हयैर्युक्तान्रथान्सूर्यरथोपमान्।।2.83.2।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उनके आगे-आगे सभी मन्त्री और पुरोहित घोड़े जुते हुए रथों पर बैठकर यात्रा कर रहे थे। वे रथ सूर्यदेव के रथ के समान तेजस्वी दिखायी देते थे
Show English TranslationEnglish Translation
All the ministers and priests went ahead of Bharata mounting their chariots, harnessed with horses and resembling the chariot of the Sun god.
ShlokaShloka 3
नवनागसहस्राणि कल्पितानि यथाविधि।
अन्वयुर्भरतं यान्तमिक्ष्वाकुकुलनन्दनम्।।2.83.3।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
यात्रापरायण यशस्वी राजकुमार भरत के पीछे साठ हजार रथ और नाना प्रकार के आयुध धारण करने वाले धनुर्धर योद्धा भी जा रहे थे
Show English TranslationEnglish Translation
As per tradition, nine thousand elephants were arranged to follow Bharata, delight of the race of the Ikshvakus as he set out.
ShlokaShloka 4
षष्टी रथसहस्राणि धन्विनो विविधायुधाः।
अन्वयुर्भरतं यान्तं राजपुत्रं यशस्विनम्।।2.83.4।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
यात्रापरायण यशस्वी राजकुमार भरत के पीछे साठ हजार रथ और नाना प्रकार के आयुध धारण करने वाले धनुर्धर योद्धा भी जा रहे थे
Show English TranslationEnglish Translation
Sixty thousands chariots and many archers holding weapons of every kind followed the illustrious prince Bharata as he went.
ShlokaShloka 5
शतं सहस्राण्यश्वानां समारूढानि राघवम्।
अन्वयुर्भरतं यान्तं सत्यसन्धं जितेन्द्रियम्।।2.83.5।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उसी प्रकार एक लाख घुड़सवार भी उन यशस्वी रघुकुलनन्दन राजकुमार भरत की यात्रा के समय उनका अनुसरण कर रहे थे
Show English TranslationEnglish Translation
One hundred thousand horses each mounted by a rider followed Bharata, one who had conquered his passion and adhered to truth.
ShlokaShloka 6
कैकेयी च सुमित्रा च कौसल्या च यशस्विनी।
रामानयनसंहृष्टा ययुर्यानेन भास्वता।।2.83.6।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
ब्राह्मण आदि आर्यों (त्रैवर्णिकों) के समूह मन में अत्यन्त हर्ष लेकर लक्ष्मणसहित श्रीराम का दर्शन करने के लिये उन्हीं के सम्बन्ध में विचित्र बातें कहते सुनते हुए यात्रा कर रहे थे
Show English TranslationEnglish Translation
Kaikeyi, Sumitra as well as the illustrious Kausalya travelled by a resplendent chariot, delighted with the thought of bringing Rama back.
ShlokaShloka 7
प्रयाताश्चार्यसङ्घाता रामं द्रष्टुं सलक्ष्मणम्।
तस्यैव च कथाश्चित्राः कुर्वाणा हृष्टमानसाः।।2.83.7।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
ब्राह्मण आदि आर्यों (त्रैवर्णिकों) के समूह मन में अत्यन्त हर्ष लेकर लक्ष्मणसहित श्रीराम का दर्शन करने के लिये उन्हीं के सम्बन्ध में विचित्र बातें कहते सुनते हुए यात्रा कर रहे थे
Show English TranslationEnglish Translation
Venerable people in groups, narrating various accomplishments of Rama and eager to see him with Lakshmana, proceeded in a delightful mood.
ShlokaShloka 8
मेघश्यामं महाबाहुं स्थिरसत्त्वं दृढव्रतम्।
कदा द्रक्ष्यामहे रामं जगत श्शोकनाशनम्।।2.83.8।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(वे आपस में कहते थे—) ‘हमलोग दृढ़ता के साथ उत्तम व्रत का पालन करने वाले तथा संसार का दुःख दूर करने वाले, स्थितप्रज्ञ, श्यामवर्ण महाबाहु श्रीराम का कब दर्शन करेंगे?
Show English TranslationEnglish Translation
When shall we see that mightyarmed Rama of darkblue complexion like the raincloud, firm in strength and steadfast in vows and the destroyer of the sorrows of this world?
ShlokaShloka 9
दृष्ट एव हि न श्शोकमपनेष्यति राघवः।
तम स्सर्वस्य लोकस्य समुद्यन्निव भास्करः।।2.83.9।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘जैसे सूर्यदेव उदय लेते ही सारे जगत् का अन्धकार हर लेते हैं, उसी प्रकार श्रीरघुनाथ जी हमारी आँखों के सामने पड़ते ही हमलोगों का सारा शोक संताप दूर कर देंगे’
Show English TranslationEnglish Translation
At his sight alone our sorrows will be dispelled, the way the darkness of the entire world is dispelled by the rising Sun.
ShlokaShloka 10
इत्येवं कथयन्तस्ते सम्प्रहृष्टाः कथा श्शुभाः।
परिष्वजानाश्चान्योन्यं ययुर्नागरिका जनाः।।2.83.10।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
इस प्रकार की बातें कहते और अत्यन्त हर्ष से भरकर एक-दूसरे का आलिङ्गन करते हुए अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या के नागरिक उस समय यात्रा कर रहे थे
Show English TranslationEnglish Translation
The inhabitants of the town proceeded joyfully, narrating Rama's delightful achievements on their way by embracing one another.
ShlokaShloka 11
ये च तत्रापरे सर्वे सम्मता ये च नैगमाः।
रामं प्रति ययुर्हृष्टा स्सर्वाः प्रकृतयस्तथा।।2.83.11।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
उस नगर में जो दूसरे सम्मानित पुरुष थे, वे सब लोग तथा व्यापारी और शुभ विचार वाले प्रजाजन भी बड़े हर्ष के साथ श्रीराम से मिलने के लिये प्रस्थित हुए
Show English TranslationEnglish Translation
Respectable city folks, like traders and other subjects went along in great delight towards Rama.
ShlokaShloka 12
मणिकाराश्च ये केचित्कुम्भकाराश्च शोभनाः।
सूत्रकर्मकृतश्चैव ये च शस्त्रोपजीविनः।2.83.12।।
मयूरकाः क्राकचिका रोचका वेधकास्तथा।
दन्तकारा स्सुधाकारा स्तथा गन्धोपजीविनः।।2.83.13।।
सुवर्णकाराः प्रख्यातास्तथा कम्बलधावकाः।
स्नापकोष्णोदका वैद्याधूपकाश्शौण्डिकास्तथा।।2.83.14।।
रजकास्तुन्नवायाश्च ग्रामघोषमहत्तराः।
शैलूषाश्च सह स्त्रीभिर्ययुः कैवर्तकास्तथा।।2.83.15।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जो कोई मणिकार (मणियों को सान पर चढ़ाकर चमका देने वाले), अच्छे कुम्भकार, सूत का ताना बाना करके वस्त्र बनाने की कला के विशेषज्ञ, शस्त्र निर्माण करके जीविका चलाने वाले, मायूरक (मोर की पाँखों से छत्र-व्यजन आदि बनाने वाले), आरे से चन्दन आदि की लकड़ी चीरने वाले, मणि-मोती आदि में छेद करने वाले, रोचक (दीवारों और वेदी आदि में शोभा का सम्पादन करने वाले), दन्तकार (हाथी के दाँत आदि से नाना प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करने वाले), सुधाकार (चूना बनाने वाले), गन्धी, प्रसिद्ध सोनार, कम्बल और कालीन बनाने वाले, गरम जल से नहलाने का काम करने वाले, वैद्य, धूपक (धूपन-क्रिया द्वारा जीविका चलाने वाले), शौण्डिक (मद्यविक्रेता), धोबी, दर्जी, गाँवों तथा गोशालाओं के महतो, स्त्रियोंसहित नट, केवट तथा समाहितचित्त सदाचारी वेदवेत्ता सहस्रों ब्राह्मण बैलगाड़ियों पर चढ़कर वन की यात्रा करने वाले भरत के पीछे-पीछे गये
Show English TranslationEnglish Translation
Gempolishers, potters, weaponsmiths, weavers, makers of adornments with peacock feathers, sawyers, makers of artificial ornaments, perforators of shells and ornaments, ivoryworkers, whitewashers, purveyors of fragrant essences, renowned goldsmiths, blanketcleaners, hotbath attendants, physicians, vintners, incense merchants, washermen, tailors, headmen of villages and hamlets, actors along with their wives, fishermen -- all followed Bharata.
ShlokaShloka 13
समाहिता वेदविदो ब्राह्मणा वृत्तसम्मताः।
गोरथैर्भरतं यान्तमनुजग्मु स्सहस्रशः।।2.83.16।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जो कोई मणिकार (मणियों को सान पर चढ़ाकर चमका देने वाले), अच्छे कुम्भकार, सूत का ताना बाना करके वस्त्र बनाने की कला के विशेषज्ञ, शस्त्र निर्माण करके जीविका चलाने वाले, मायूरक (मोर की पाँखों से छत्र-व्यजन आदि बनाने वाले), आरे से चन्दन आदि की लकड़ी चीरने वाले, मणि-मोती आदि में छेद करने वाले, रोचक (दीवारों और वेदी आदि में शोभा का सम्पादन करने वाले), दन्तकार (हाथी के दाँत आदि से नाना प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करने वाले), सुधाकार (चूना बनाने वाले), गन्धी, प्रसिद्ध सोनार, कम्बल और कालीन बनाने वाले, गरम जल से नहलाने का काम करने वाले, वैद्य, धूपक (धूपन-क्रिया द्वारा जीविका चलाने वाले), शौण्डिक (मद्यविक्रेता), धोबी, दर्जी, गाँवों तथा गोशालाओं के महतो, स्त्रियोंसहित नट, केवट तथा समाहितचित्त सदाचारी वेदवेत्ता सहस्रों ब्राह्मण बैलगाड़ियों पर चढ़कर वन की यात्रा करने वाले भरत के पीछे-पीछे गये
Show English TranslationEnglish Translation
Brahmins learned in the Vedas and renowned for their virtuous conduct followed Bharta in their thousands on bullock carts with composed minds.
ShlokaShloka 14
सुवेषा श्शुद्धवसनास्ताम्रमृष्टानुलेपनाः।
सर्वे ते विविधैर्यानै श्शनैर्भरतमन्वयुः।।2.83.17।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जो कोई मणिकार (मणियों को सान पर चढ़ाकर चमका देने वाले), अच्छे कुम्भकार, सूत का ताना बाना करके वस्त्र बनाने की कला के विशेषज्ञ, शस्त्र निर्माण करके जीविका चलाने वाले, मायूरक (मोर की पाँखों से छत्र-व्यजन आदि बनाने वाले), आरे से चन्दन आदि की लकड़ी चीरने वाले, मणि-मोती आदि में छेद करने वाले, रोचक (दीवारों और वेदी आदि में शोभा का सम्पादन करने वाले), दन्तकार (हाथी के दाँत आदि से नाना प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करने वाले), सुधाकार (चूना बनाने वाले), गन्धी, प्रसिद्ध सोनार, कम्बल और कालीन बनाने वाले, गरम जल से नहलाने का काम करने वाले, वैद्य, धूपक (धूपन-क्रिया द्वारा जीविका चलाने वाले), शौण्डिक (मद्यविक्रेता), धोबी, दर्जी, गाँवों तथा गोशालाओं के महतो, स्त्रियोंसहित नट, केवट तथा समाहितचित्त सदाचारी वेदवेत्ता सहस्रों ब्राह्मण बैलगाड़ियों पर चढ़कर वन की यात्रा करने वाले भरत के पीछे-पीछे गये
Show English TranslationEnglish Translation
Dressed well in clean clothes and anointed with pure red sandalpaste, they all slowly followed Bharata, mounting on various vehicles.
ShlokaShloka 15
प्रहृष्टमुदिता सेना साऽन्वयात्कैकयीसुतम्।
भ्रातुरानयने यान्तं भरतं भ्रातृवत्सलम्।।2.83.18।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जो कोई मणिकार (मणियों को सान पर चढ़ाकर चमका देने वाले), अच्छे कुम्भकार, सूत का ताना बाना करके वस्त्र बनाने की कला के विशेषज्ञ, शस्त्र निर्माण करके जीविका चलाने वाले, मायूरक (मोर की पाँखों से छत्र-व्यजन आदि बनाने वाले), आरे से चन्दन आदि की लकड़ी चीरने वाले, मणि-मोती आदि में छेद करने वाले, रोचक (दीवारों और वेदी आदि में शोभा का सम्पादन करने वाले), दन्तकार (हाथी के दाँत आदि से नाना प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करने वाले), सुधाकार (चूना बनाने वाले), गन्धी, प्रसिद्ध सोनार, कम्बल और कालीन बनाने वाले, गरम जल से नहलाने का काम करने वाले, वैद्य, धूपक (धूपन-क्रिया द्वारा जीविका चलाने वाले), शौण्डिक (मद्यविक्रेता), धोबी, दर्जी, गाँवों तथा गोशालाओं के महतो, स्त्रियोंसहित नट, केवट तथा समाहितचित्त सदाचारी वेदवेत्ता सहस्रों ब्राह्मण बैलगाड़ियों पर चढ़कर वन की यात्रा करने वाले भरत के पीछे-पीछे गये
Show English TranslationEnglish Translation
The army, overwhelmed with joy and cheer followed the devoted brother Bharata who had set out to bring back Rama.
ShlokaShloka 16
ते गत्वा दूरमध्वानं रथयानाश्वकुञ्जरैः।
समासेदुस्ततो गङ्गां शृङ्गीबेरपुरं प्रति।।2.83.19।।
यत्र रामसखो वीरो गुहो ज्ञातिगणैर्वृतः।
निवसत्यप्रमादेन देशं तं परिपालयन्।।2.83.20।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जो कोई मणिकार (मणियों को सान पर चढ़ाकर चमका देने वाले), अच्छे कुम्भकार, सूत का ताना बाना करके वस्त्र बनाने की कला के विशेषज्ञ, शस्त्र निर्माण करके जीविका चलाने वाले, मायूरक (मोर की पाँखों से छत्र-व्यजन आदि बनाने वाले), आरे से चन्दन आदि की लकड़ी चीरने वाले, मणि-मोती आदि में छेद करने वाले, रोचक (दीवारों और वेदी आदि में शोभा का सम्पादन करने वाले), दन्तकार (हाथी के दाँत आदि से नाना प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करने वाले), सुधाकार (चूना बनाने वाले), गन्धी, प्रसिद्ध सोनार, कम्बल और कालीन बनाने वाले, गरम जल से नहलाने का काम करने वाले, वैद्य, धूपक (धूपन-क्रिया द्वारा जीविका चलाने वाले), शौण्डिक (मद्यविक्रेता), धोबी, दर्जी, गाँवों तथा गोशालाओं के महतो, स्त्रियोंसहित नट, केवट तथा समाहितचित्त सदाचारी वेदवेत्ता सहस्रों ब्राह्मण बैलगाड़ियों पर चढ़कर वन की यात्रा करने वाले भरत के पीछे-पीछे गये
Show English TranslationEnglish Translation
After travelling a long distance on chariots, carriages, horses and elephants, they reached the river Ganga close to Srngiberapura, a country ruled vigilantly by Rama's friend, the valiant Guha who lived there along with his relatives.
ShlokaShloka 17
उपेत्य तीरं ग��्गायाश्चक्रवाकैरलङ्कृतम्।
व्यवातिष्ठत सा सेना भरतस्यानुयायिनी।।2.83.21।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सबके वेश सुन्दर थे। सबने शुद्ध वस्त्र धारण कर रखे थे तथा सबके अङ्गों में ताँबे के समान लाल रंग का अङ्गराग लगा था। वे सब-के-सब नाना प्रकार के वाहनों द्वारा धीरे-धीरे भरत का अनुसरण कर रहे थे
Show English TranslationEnglish Translation
The army following Bharata reached the bank of the river Ganga, graced by chakravakas (ruddy geese) and halted there.
ShlokaShloka 18
निरीक्ष्यानुगतां सेनां तां च गङ्गां शिवोदकाम्।
भरतस्सचिवान्सर्वानब्रवीद्वाक्यकोविदः।।2.83.22।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
हर्ष और आनन्द में भरी हुई वह सेना भाई को बुलाने के लिये प्रस्थित हुए कैकेयी कुमार भ्रातृवत्सल भरत के पीछे-पीछे चलने लगी
Show English TranslationEnglish Translation
As he beheld the army following him and the river Ganga of sacred waters in front of him, Bharata who was proficient in speech said to his ministers:
ShlokaShloka 19
निवेशयत मे सैन्यमभिप्रायेण सर्वतः।
विश्रान्ताः प्रतरिष्यामश्श्व इदानीमिमां नदीम्।।2.83.23।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
इस प्रकार रथ, पालकी, घोड़े और हाथियों के द्वारा बहुत दूर तक का मार्ग तय कर लेने के बाद वे सब लोग शृङ्गवेरपुर में गङ्गाजी के तट पर जा पहुँचे
Show English TranslationEnglish Translation
You may, according to your convenience, halt the army anywhere here and, after taking rest (for the night), we shall cross the river Ganga tomorrow.
ShlokaShloka 20
दातुं च तावदिच्छामि स्वर्गतस्य महीपतेः।
और्ध्वदेहनिमित्तार्थमवतीर्योदकं नदीम्।।2.83.24।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जहाँ श्रीरामचन्द्रजी का सखा वीर निषादराज गुह सावधानी के साथ उस देश की रक्षा करता हुआ अपने भाई-बन्धुओं के साथ निवास करता था
Show English TranslationEnglish Translation
Meanwhile, I shall get into this river and offer libations with water to the departed king for the good of his life in the other world.
ShlokaShloka 21
तस्यैवं ब्रुवतोऽमात्यास्तथेत्युक्त्वा समाहिताः।
न्यवेशयंस्तां छन्देन स्वेन स्वेन पृथक्पृथक्।।2.83.25।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
चक्रवाकों से अलंकृत गङ्गा तट पर पहुँचकर भरत का अनुसरण करने वाली वह सेना ठहर गयी
Show English TranslationEnglish Translation
While he (Bharata's) was speaking this way, all the ministers assented by saying 'Be it so' and made arrangement for their troops to rest separately according to their pleasure.
ShlokaShloka 22
निवेश्य गङ्गामनु तां महानदीं चमूं विधानैः परिबर्हशोभिनीम्।
उवास रामस्य तदा महात्मनो विचिन्तयानो भरतो निवर्तनम्।।2.83.26।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
पुण्यसलिला भागीरथी का दर्शन करके अपनी उस सेना को शिथिल हुई देख बातचीत करने की कला में कुशल भरत ने समस्त सचिवों से कहा—
Show English TranslationEnglish Translation
The army encamped by Bharata looked splendid with royal insigaia. After making necessary arrangements for the army on the bank of the mighty river Ganga and pondering over the means of bringing back the magnanimous Rama, Bharata stayed. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे त्र्यशीतितमस्सर्गः।। Thus ends the eightythird sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.