Ayodhya Kanda

Sarga 59: Sumantra describes the shadow of sorrow over Ayodhya -- withering plants and flowers, driedup ponds, immobile animals -- Dasaratha pines for Rama.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 59

34 shlokas

ShlokaShloka 1
इति ब्रुवन्तं तं सूतं सुमन्त्रं मन्त्रिसत्तमम्। ब्रूहि शेषं पुनरिति राजा वचनमब्रवीत्।।2.59.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! आपके राज्य में वृक्ष भी इस महान् संकट से कृशकाय हो गये हैं, फूल, अंकुर और कलियों सहित मुरझा गये हैं
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Listening to the charioteer, the best of ministers (Sumantra), the king asked him to tell the rest.
ShlokaShloka 2
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा सुमन्त्रो बाष्पविक्लबः। कथयामास भूयोऽपि रामसन्देशविस्तरम्।।2.59.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! आपके राज्य में वृक्ष भी इस महान् संकट से कृशकाय हो गये हैं, फूल, अंकुर और कलियों सहित मुरझा गये हैं
Show English Translation
Having heard him, Sumantra, overcome with tears, related further details of Rama's message.
ShlokaShloka 3
जटाः कृत्वा महाराज चीरवल्कलधारिणौ। गङ्गामुत्तीर्य तौ वीरौ प्रयागाभिमुखौ गतौ।।2.59.3।।
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‘महाराज! आपके राज्य में वृक्ष भी इस महान् संकट से कृशकाय हो गये हैं, फूल, अंकुर और कलियों सहित मुरझा गये हैं
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O King the heroes in bark robes and with matted hair crossed the Ganga and proceeded towards Prayaga.
ShlokaShloka 4
अग्रतो लक्ष्मणो यातः पालयन्रघुनन्दनम्। तांस्तथा गच्छतो दृष्ट्वा निवृत्तोऽस्म्यवशस्तदा।।2.59.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! आपके राज्य में वृक्ष भी इस महान् संकट से कृशकाय हो गये हैं, फूल, अंकुर और कलियों सहित मुरझा गये हैं
Show English Translation
Lakshmana walked ahead guarding Rama, the delight of the Raghus. While I returned helplessly seeing them go.
ShlokaShloka 5
ममत्वश्वा निवृत्तस्य न प्रावर्तन्त वर्त्मनि। उष्णमश्रु प्रमुञ्चन्तो रामे सम्प्रस्थिते वनम्।।2.59.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन के जीव-जन्तु आहार के लिये भी कहीं नहीं जाते हैं। अजगर आदि सर्प भी जहाँ-के-तहाँ पड़े हैं, आगे नहीं बढ़ते हैं। श्रीराम के शोक से पीड़ित हुआ वह सारा वन नीरव-सा हो गया है
Show English Translation
When Rama set out for the forest, and I turned back, my horses shedding hot tears were reluctant to walk the path.
ShlokaShloka 6
उभाभ्यां राजपुत्राभ्यामथ कृत्वाहमञ्जलिम्। प्रस्थितो रथमास्थाय तद्दुःखमपि धारयन्।।2.59.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन के जीव-जन्तु आहार के लिये भी कहीं नहीं जाते हैं। अजगर आदि सर्प भी जहाँ-के-तहाँ पड़े हैं, आगे नहीं बढ़ते हैं। श्रीराम के शोक से पीड़ित हुआ वह सारा वन नीरव-सा हो गया है
Show English Translation
Thereafter, controlling my grief and paying obeisance to both the princes with folded palms, I ascended the chariot and returned.
ShlokaShloka 7
गुहेन सार्धं तत्रैव स्थितोऽस्मि दिवसान्बहून्। आशया यदि मां रामः पुन श्शब्दापयेदिति।।2.59.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नदियों के जल मलिन हो गये हैं। उनमें फैले हुए कमलों के पत्ते गल गये हैं। सरोवरों के कमल भी सूख गये हैं। उनमें रहने वाले मत्स्य और पक्षी भी नष्टप्राय हो गये हैं
Show English Translation
There along with Guha I waited for (three) days that Rama might call me back.
ShlokaShloka 8
विषये ते महाराज रामव्यसनकर्शिताः। अपि वृक्षाः परिम्लानास्सपुष्पाङ्कुरकोरकाः।।2.59.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जल में उत्पन्न होने वाले पुष्प तथा स्थल से पैदा होने वाले फूल भी बहुत थोड़ी सुगन्ध से युक्त होने के कारण अधिक शोभा नहीं पाते हैं तथा फल भी पूर्ववत् नहीं दृष्टिगोचर होते हैं
Show English Translation
O great king even trees with their flowers, buds and shoots throughout your empire have withered because of the calamity on Rama.
ShlokaShloka 9
उपतप्तोदका नद्यः पल्वलानि सरांसि च। परिशुष्कपलाशानि वनान्युपवनानि च।।2.59.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नरश्रेष्ठ! अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या के उद्यान भी सूने हो गये हैं, उनमें रहने वाले पक्षी भी कहीं छिप गये हैं। यहाँ के बगीचे भी मुझे पहले की भाँति मनोहर नहीं दिखायी देते हैं
Show English Translation
Water in rivers, ponds and lakes has heated up while all the foliage in the forests and gardens have shrivelled.
ShlokaShloka 10
न च सर्पन्ति सत्त्वानि व्यासा न प्रचरन्ति च। रामशोकाभिभूतं तन्निष्कूजमभवद्वनम्।।2.59.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या में प्रवेश करते समय मुझसे किसी ने प्रसन्न होकर बात नहीं की। श्रीराम को न देखकर लोग बारंबार लंबी साँसें खींचने लगे
Show English Translation
No living being move about and even wild animals roam no more. Overwhelmed with grief on account of Rama a great silence pervades the forest.
ShlokaShloka 11
लीनपुष्करपत्राश्च नरेन्द्र कलुषोदकाः। सन्तप्तपद्माः पद्मिन्यो लीनमीनविहङ्गमाः।।2.59.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देव! सड़क पर आये हुए सब लोग राजा का रथ श्रीराम के बिना ही यहाँ लौट आया है, यह देखकर दूर से ही आँसू बहाने लगे थे
Show English Translation
The water in the lotus lakes, O king, has become turbid. The blue lotuses have withered and their shrivelled petals are submerged in water. The fishes and aquatic birds are hidden under waters.
ShlokaShloka 12
जलजानि च पुष्पाणि माल्यानि स्थलजानि च। नाद्य भान्त्यल्पगन्धीनि फलानि च यथापुरम्।।2.59.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अट्टालिकाओं, विमानों और प्रासादों पर बैठी हुई स्त्रियाँ वहाँ से रथ को सूना ही लौटा देखकर श्रीराम को न देखने के कारण व्यथित हो उठीं और हाहाकार करने लगीं
Show English Translation
Bunches of flowers grown in water and on land, as well as fruits with their scant fragrance do not shine as before.
ShlokaShloka 13
अत्रोद्यानानि शून्यानि प्रलीनविहगनि च। न चाभिरामा नारामान्पश्यामि मनुजर्षभ।।2.59.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रुओं, मित्रों तथा उदासीन (मध्यस्थ) मनुष्यों को भी मैंने समान रूप से दुःखी देखा है। किसी के शोक में मुझे कुछ अन्तर नहीं दिखायी दिया है
Show English Translation
Pleasuregardens are all deserted as the birds have vanished. O best of men, as such they do not look beautiful.
ShlokaShloka 14
प्रविशन्तमयोध्यां मां न कश्चिदभिनन्दति। नरा राममपश्यन्तो निश्श्वसन्ति मुहुर्मुहुः।।2.59.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रुओं, मित्रों तथा उदासीन (मध्यस्थ) मनुष्यों को भी मैंने समान रूप से दुःखी देखा है। किसी के शोक में मुझे कुछ अन्तर नहीं दिखायी दिया है
Show English Translation
None greeted me when I entered Ayodhya, People heaved sighs repeatedly when they did not see Rama.
ShlokaShloka 15
देव राजरथं दृष्ट्वा विना राममिहागतम्। दुःखादश्रुमुखस्सर्वो राजमार्गगतो जनः।।2.59.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र के वचन सुनकर राजा ने उनसे अश्रु-गद्गद परम दीन वाणी में कहा-
Show English Translation
Beholding the royal chariot arrive without Rama, all were on the highway shedding tears of anguish.
ShlokaShloka 16
हर्म्यैर्विमानैः प्रासादैरवेक्ष्यरथमागतम्। हाहाकारकृतानार्यो रामादर्शनकर्शिताः।���2.59.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र के वचन सुनकर राजा ने उनसे अश्रु-गद्गद परम दीन वाणी में कहा-
Show English Translation
When the women from mansions, sevenstoried buildings and from royal palaces saw the chariot without Rama, they, overwhelmed with sorrow, cried, 'Alas, Alas'.
ShlokaShloka 17
आयतैर्विमलैर्नेत्रैरश्रुवेगपरिप्लुतैः। अन्योन्यमभिवीक्षन्तेऽव्यक्तमार्ततराः स्त्रियः।।2.59.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र के वचन सुनकर राजा ने उनसे अश्रु-गद्गद परम दीन वाणी में कहा-
Show English Translation
The women, with their large, bright eyes flooded with gushing tears looked in silence at one another in deep anguish.
ShlokaShloka 18
नामित्राणां न मित्राणामुदासीनजनस्य च। अहमार्ततया किञ्चिद्विशेषमुपलक्षये।।2.59.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सूत! जो पापी कुल और पापपूर्ण देश में उत्पन्न हुई है तथा जिसके विचार भी पाप से भरे हैं, उस कैकेयी के कहने में आकर मैंने सलाह देने में कुशल वृद्ध पुरुषों के साथ बैठकर इस विषय में कोई परामर्श भी नहीं किया
Show English Translation
I did not see any difference in the degree of anguish among friends, those who are not friends and and those who are indifferent. (The degree of agony was same in all).
ShlokaShloka 19
अप्रहृष्टमनुष्या च दीननागतुरङ्गमा। आर्तस्वरपरिम्लाना विनिश्श्वसितनिस्स्वना।।2.59.19।। निरानन्दा महाराज रामप्रव्राजनातुरा। कौसल्या पुत्रहीनेव अयोध्या प्रतिभाति मा।।2.59.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुहृदों, मन्त्रियों और वेदवेत्ताओं से सलाह लिये बिना ही मैंने मोहवश केवल एक स्त्री की इच्छा पूर्ण करने के लिये सहसा यह अनर्थमय कार्य कर डाला
Show English Translation
O maharaja, Ayodhya is filled with cheerless people with deep sighs, agonised voices and pale faces depressed and distressed due to Rama's exile. (Even) elephants and horses look spiritless. For me it (the city) resembles (dejected) Kausalya deprived of her son.
ShlokaShloka 20
सूतस्य वचनं श्रुत्वा वाचा परमदीनया। बाष्पोपहतया राजा तं सूतमिदमब्रवीत्।।2.59.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! होनहारवश यह भारी विपत्ति निश्चय ही इस कुलका विनाश करने के लिये अकस्मात् आ पहुँची है
Show English Translation
At these words of the charioteer, the king in deep distress replied with a voice choked with tears:
ShlokaShloka 21
कैकेय्या विनियुक्तेन पापाभिजनभावया। मया न मन्त्रकुशलैर्वृद्धैस्सह समर्थितम्।।2.59.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सारथे! यदि मैंने तुम्हारा कभी कुछ थोड़ा-सा भी उपकार किया हो तो तुम मुझे शीघ्र ही श्रीराम के पास पहँचा दो। मेरे प्राण मुझे श्रीराम के दर्शन के लिये शीघ्रता करने की प्रेरणा दे रहे हैं
Show English Translation
Incited by Kaikeyi of sinful relations and sinful motive, I did not consult expert, elderly counsellers.
ShlokaShloka 22
न सुहृद्भिर्नचामात्यैर्मन्त्रयित्वा न नैगमैः। मयायमर्थस्सम्मोहात् स्त्रीहेतो स्सहसा कृतः।।2.59.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि आज भी इस राज्य में मेरी ही आज्ञा चलती हो तो तुम मेरे ही आदेश से जाकर श्रीराम को वन से लौटा ले आओ; क्योंकि अब मैं उनके बिना दो घड़ी भी जीवित नहीं रह सकूँगा
Show English Translation
For the sake of a woman, this act was committed in great haste, without consulting friends or ministers or men of prudence.
ShlokaShloka 23
भवितव्यतया नूनमिदं वा व्यसनं महत्। कुलस्यास्य विनाशाय प्राप्तं सूत यदृच्छया।।2.59.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अथवा महाबाहु श्रीराम तो अब दूर चले गये होंगे, इसलिये मुझे ही रथ पर बिठाकर ले चलो और । शीघ्र ही राम का दर्शन कराओ
Show English Translation
Surely it is destiny and this calamity has befallen for the wilful destruction of the (entire) race, O charioteer
ShlokaShloka 24
सूत यद्यस्ति ते किञ्चिन्मया तु सुकृतं कृतम्। त्वं प्रापयाऽऽशु मां रामं प्राणास्सन्त्वरयन्तिमाम्।।2.59.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुन्दकली के समान श्वेत दाँतोंवाले, लक्ष्मण के बड़े भाई महाधनुर्धर श्रीराम कहाँ हैं? यदि सीता के साथ भली-भाँति उनका दर्शन कर लूँ, तभी मैं जीवित रह सकता हूँ
Show English Translation
O Charioteer, if ever I have rendered you any favour, quickly take me to Rama. My life is hastening me (fast running out).
ShlokaShloka 25
यद्यद्यापि ममैवाज्ञा निवर्तयतु राघवम्। न शक्ष्यामि विना रामं मुहूर्तमपि जीवितुम्।।2.59.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनके लाल नेत्र और बड़ी-बड़ी भुजाएँ हैं तथा जो मणियों के कुण्डल धारण करते हैं, उन श्रीराम को यदि मैं नहीं देखूगा तो अवश्य यमलोक को चला जाऊँगा
Show English Translation
If my command prevails today, Rama may be brought back. Without Rama I cannot live for a moment even.
ShlokaShloka 26
अथवाऽपि महाबाहुर्गतो दूरं भविष्यति। मामेव रथमारोप्य शीघ्रं रामाय दर्शय।।2.58.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इससे बढ़कर दुःखकी बात और क्या होगी कि मैं इस मरणासन्न अवस्था में पहुँचकर भी इक्ष्वाकुकुलनन्दन राघवेन्द्र श्रीराम को यहाँ नहीं देख रहा हूँ
Show English Translation
Otherwise if (you think) the mightyarmed (Rama) has gone too far then quickly put me in the chariot, and show me Rama (Carry me to him).
ShlokaShloka 27
वृत्तदंष्ट्रो महेष्वासः क्वासौ लक्ष्मणपूर्वजः। यदि जीवामि साध्वेनं पश्येयं सीतया सह।।2.59.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हा राम! हा लक्ष्मण! हा विदेहराजकुमारी तपस्विनी सीते! तुम्हें पता नहीं होगा कि मैं किस प्रकार दुःख से अनाथकी भाँति मर रहा हूँ’
Show English Translation
Where is that Rama, elder brother to Lakshmana who has wellshaped teeth and wields a mighty bow? If I can see him along with Sita I will survive.
ShlokaShloka 28
लोहिताक्षं महाबाहुमामुक्तमणिकुण्डलम्। रामं यदि न पश्येयं गमिष्यामि यमक्षयम्।।2.59.29।।
Show English Translation
If I cannot see Rama of redcoloured eyes, the mightyarmed one and wearing earrings bedecked with precious stones I shall surely go to the abode of Yama, the god of death.
ShlokaShloka 29
अतो नु किं दुःखतरं सोऽहमिक्ष्वाकुनन्दनम्। इमामवस्थामापन्नो नेह पश्यामि राघवम्।।2.59.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि कौसल्ये! मैं श्रीराम के बिना जिस शोकसमुद्र में डूबा हुआ हूँ, उसे जीते-जी पार करना मेरे लिये अत्यन्त कठिन है। श्रीराम का शोक ही उस समुद्र का महान् वेग है। सीता का बिछोह ही उसका दूसरा छोर है। लंबी-लंबी साँसें उसकी लहरें और बड़ी-बड़ी भँवरें हैं। आँसुओं का वेगपूर्वक उमड़ा हुआ प्रवाह ही उसका मलिन जल है। मेरा हाथ पटकना ही उसमें उछलती हुई मछलियों का विलास है। करुण-क्रन्दन ही उसकी महान् गर्जना है। ये बिखरे हुए केश ही उसमें उपलब्ध होने वाले सेवार हैं। कैकेयी बड़वानल है। वह शोक-समुद्र मेरी वेगपूर्वक होनेवाली अश्रुवर्षा की उत्पत्ति का मूल कारण है। मन्थरा के कुटिलतापूर्ण वचन ही उस समुद्र के बड़े-बड़े ग्राह हैं। क्रूर कैकेयी के माँगे हुए दो वर ही उसके दो तट हैं तथा श्रीराम का वनवास ही उस शोक-सागर का महान् विस्तार है
Show English Translation
What else can be of greater sorrow to me who having reached this state, am still unable to see Rama?
ShlokaShloka 30
हा राम रामानुज ह�� हा वैदेहि तपस्विनि। न मां जानीत दुःखेन म्रियमाणतमनाथवत्।।2.59.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि कौसल्ये! मैं श्रीराम के बिना जिस शोकसमुद्र में डूबा हुआ हूँ, उसे जीते-जी पार करना मेरे लिये अत्यन्त कठिन है। श्रीराम का शोक ही उस समुद्र का महान् वेग है। सीता का बिछोह ही उसका दूसरा छोर है। लंबी-लंबी साँसें उसकी लहरें और बड़ी-बड़ी भँवरें हैं। आँसुओं का वेगपूर्वक उमड़ा हुआ प्रवाह ही उसका मलिन जल है। मेरा हाथ पटकना ही उसमें उछलती हुई मछलियों का विलास है। करुण-क्रन्दन ही उसकी महान् गर्जना है। ये बिखरे हुए केश ही उसमें उपलब्ध होने वाले सेवार हैं। कैकेयी बड़वानल है। वह शोक-समुद्र मेरी वेगपूर्वक होनेवाली अश्रुवर्षा की उत्पत्ति का मूल कारण है। मन्थरा के कुटिलतापूर्ण वचन ही उस समुद्र के बड़े-बड़े ग्राह हैं। क्रूर कैकेयी के माँगे हुए दो वर ही उसके दो तट हैं तथा श्रीराम का वनवास ही उस शोक-सागर का महान् विस्तार है
Show English Translation
Ah Rama, Ah Lakshmana, Ah unfortunate Vaidehi, you do not know that I am dying like an orphan because of my grief.
ShlokaShloka 31
स तेन राजा दुःखेन भृशमर्पितचेतनः। अवगाढस्सुदुष्पारं शोकसागरमब्रवीत्।।2.59.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि कौसल्ये! मैं श्रीराम के बिना जिस शोकसमुद्र में डूबा हुआ हूँ, उसे जीते-जी पार करना मेरे लिये अत्यन्त कठिन है। श्रीराम का शोक ही उस समुद्र का महान् वेग है। सीता का बिछोह ही उसका दूसरा छोर है। लंबी-लंबी साँसें उसकी लहरें और बड़ी-बड़ी भँवरें हैं। आँसुओं का वेगपूर्वक उमड़ा हुआ प्रवाह ही उसका मलिन जल है। मेरा हाथ पटकना ही उसमें उछलती हुई मछलियों का विलास है। करुण-क्रन्दन ही उसकी महान् गर्जना है। ये बिखरे हुए केश ही उसमें उपलब्ध होने वाले सेवार हैं। कैकेयी बड़वानल है। वह शोक-समुद्र मेरी वेगपूर्वक होनेवाली अश्रुवर्षा की उत्पत्ति का मूल कारण है। मन्थरा के कुटिलतापूर्ण वचन ही उस समुद्र के बड़े-बड़े ग्राह हैं। क्रूर कैकेयी के माँगे हुए दो वर ही उसके दो तट हैं तथा श्रीराम का वनवास ही उस शोक-सागर का महान् विस्तार है
Show English Translation
The king whose mind was extremely enfeebled due to grief and who was immersed in a sea of tears which he was unable to cross continued:
ShlokaShloka 32
रामशोकमहाभोगस्सीताविरहपारगः। श्वसितोर्मि महावर्तो बाष्पफेनजालाविलः।।2.59.33।। बाहुविक्षेपमीनौघो विक्रन्दित महास्वनः। प्रकीर्णकेशशैवालः कैकेयीबडबामुखः।।2.59.34।। ममाश्रुवेगप्रभवः कुब्जावाक्यमहाग्रहः। वरवेलो नृशंसाया रामप्रव्राजनायतः।।2.59.35।। यस्मिन्बत निमग्नोऽहं कौसल्ये राघवं विना। दुस्तरो जीवता देवि मयाऽयं शोकसागरः।।2.59.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि कौसल्ये! मैं श्रीराम के बिना जिस शोकसमुद्र में डूबा हुआ हूँ, उसे जीते-जी पार करना मेरे लिये अत्यन्त कठिन है। श्रीराम का शोक ही उस समुद्र का महान् वेग है। सीता का बिछोह ही उसका दूसरा छोर है। लंबी-लंबी साँसें उसकी लहरें और बड़ी-बड़ी भँवरें हैं। आँसुओं का वेगपूर्वक उमड़ा हुआ प्रवाह ही उसका मलिन जल है। मेरा हाथ पटकना ही उसमें उछलती हुई मछलियों का विलास है। करुण-क्रन्दन ही उसकी महान् गर्जना है। ये बिखरे हुए केश ही उसमें उपलब्ध होने वाले सेवार हैं। कैकेयी बड़वानल है। वह शोक-समुद्र मेरी वेगपूर्वक होनेवाली अश्रुवर्षा की उत्पत्ति का मूल कारण है। मन्थरा के कुटिलतापूर्ण वचन ही उस समुद्र के बड़े-बड़े ग्राह हैं। क्रूर कैकेयी के माँगे हुए दो वर ही उसके दो तट हैं तथा श्रीराम का वनवास ही उस शोक-सागर का महान् विस्तार है
Show English Translation
O queen Kausalya, I am completely immersed in this ocean of sorrow. The misfortune due to Rama's separation is its breadth. Sita's separation is the other end of the shore. Sighs are its turbulent waves and whirlpools. Tears are its foam and turbid waters. Waving of arms is its fishes. Cries of agony are its roars. My dishevelled hair is its moss. Kaikeyi is the mouth of Badaba. My copious tears are its source. Words of the hunchback (Manthara) are the monstrous crocodiles. The cruel boons to Kaikeyi are its shores. Without Rama I cannot cross this sea of sorrow alive. Ah, what a pity
ShlokaShloka 33
अशोभनं योऽहमिहाद्य राघवं दिदृक्षमाणो न लभे सलक्ष्मणम्। इतीव राजा विलपन्महायशाः पपात तूर्णं शयने समूर्छितः।।2.59.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं लक्ष्मणसहित श्रीराम को देखना चाहता हूँ, परंतु इस समय उन्हें यहाँ देख नहीं पाता हूँ—यह मेरे बहुत बड़े पाप का फल है।’ इस तरह विलाप करते हुए महायशस्वी राजा दशरथ तुरंत ही मूर्च्छित होकर शय्या पर गिर पड़े
Show English Translation
Though I wish I cannot see Rama together with Lakshmana. Indeed this is very unfortunate. Lamenting thus, king Dasaratha of great reknown fell on the bed, unconscious.
ShlokaShloka 34
इति विलपति पार्थिवे प्रणष्टे करुणतरं द्विगुणं च रामहेतोः। वचनमनुनिशम्य तस्य देवी भयमगमत्पुनरेव राममाता।।2.59.38।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीरामचन्द्रजी के लिये इस प्रकार विलाप करते हुए राजा दशरथ के मूर्च्छित हो जाने पर उनके उस अत्यन्त करुणाजनक वचन को सुनकर राममाता देवी कौसल्या को पुनः दुगुना भय हो गया
Show English Translation
Wailing, Dasaratha fell unconscious. He was doubly grieved due to his yearning for Rama. Rama's mother was seized with fear hearing those lamentations. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे एकोनषष्टितमस्सर्गः।। Thus ends the fiftyninth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.