Ayodhya Kanda

Sarga 58: Sumantra conveys the message of Rama to the wailing king and Kausalya.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 58

36 shlokas

ShlokaShloka 1
प्रत्याश्वस्तो यदा राजा मोहात्प्रत्यागतं पुनः। अथाऽजुहाव तं सूतं रामवृत्तान्तकारणात्।।2.58.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
मूर्छा दूर होने पर जब राजा को चेत हुआ तब सुस्थिर चित्त होकर उन्होंने श्रीराम का वृत्तान्त सुनने के लिये सारथि सुमन्त्र को सामने बुलाया
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When the king regained his consciousness and was consoled, he summoned the charioteer to hear news about Rama.
ShlokaShloka 2
अथ सूतो महाराजं कृताञ्जलिरुपस्थितः। राममेवानुशोचन्तं दुःखशोकसमन्वितम्।।2.58.2।। वृद्धं परमसन्तप्तं नवग्रहमिव द्विपम्। विनिश्वसन्तं ध्यायन्तमस्वस्थ मिव कुङञरम्।।2.58.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय सुमन्त्र श्रीराम के ही शोक और चिन्ता में निरन्तर डूबे रहने वाले दुःख-शोक से व्याकुल महाराज दशरथ के पास हाथ जोड़कर खड़े हो गये
Show English Translation
Then the charioteer with folded palms approached the king who, deeply afflicted with grief and pain, was brooding over Rama alone. Aged Dasaratha was heaving deep sighs like a newlycaptured, indisposed elephant.
ShlokaShloka 3
राजा तु रजसा सूतं ध्वस्ताङ्गं समुपस्थितम्। अश्रुपूर्णमुखं दीनमुवाच परमार्तवत्।।2.58.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! जो दुःख भोगने के योग्य नहीं हैं, उन्हीं श्रीराम को भारी दुःख प्राप्त हुआ है। जो राजोचित शय्यापर शयन करने योग्य हैं, वे राजकुमार श्रीराम अनाथ की भाँति भूमि पर कैसे सोते होंगे?
Show English Translation
Seeing the dejected charioteer standing before him, the desolate king covered all over with dust and his face bathed in tears, said to him in extreme grief:
ShlokaShloka 4
क्वनु वत्स्यति धर्मात्मा वृक्षमूलमुपाश्रितः। सोऽत्यन्तसुखित स्सूत किमशिष्यति राघवः।।2.58.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! जो दुःख भोगने के योग्य नहीं हैं, उन्हीं श्रीराम को भारी दुःख प्राप्त हुआ है। जो राजोचित शय्यापर शयन करने योग्य हैं, वे राजकुमार श्रीराम अनाथ की भाँति भूमि पर कैसे सोते होंगे?
Show English Translation
O charioteer Rama is rightous and he is acustoomed to all sorts of comfort. Taking refuge at the foot of a tree how shall he live and what shall he eat?
ShlokaShloka 5
दुःखस्यानुचितो दुःखं सुमन्त्र शयनोचितः। भूमिपालात्मजो भूमौ शेते कथमनाथवत्।।2.58.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! जो दुःख भोगने के योग्य नहीं हैं, उन्हीं श्रीराम को भारी दुःख प्राप्त हुआ है। जो राजोचित शय्यापर शयन करने योग्य हैं, वे राजकुमार श्रीराम अनाथ की भाँति भूमि पर कैसे सोते होंगे?
Show English Translation
How can the son of the guardian of the earth who is accustomed to a comfortable bed and not to undeserved suffering lie down on the ground like an orphan, O Sumantra
ShlokaShloka 6
यं यान्तमनुयान्ति स्म पदातिरथकुञ्जराः। स वत्स्यति कथं रामो विजनं वन माश्रितः।।2.58.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! जो दुःख भोगने के योग्य नहीं हैं, उन्हीं श्रीराम को भारी दुःख प्राप्त हुआ है। जो राजोचित शय्यापर शयन करने योग्य हैं, वे राजकुमार श्रीराम अनाथ की भाँति भूमि पर कैसे सोते होंगे?
Show English Translation
Wherever Rama went, elephants, chariots and footsoldiers followed him. How can he (now) live in the desolate forest where he has taken refuge?
ShlokaShloka 7
व्यालैर्मृगैराचरितं कृष्णसर्पनिषेवितम्। कथं कुमारौ वैदेह्या सार्धं वन मुपस्थितौ।।2.58.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जहाँ अजगर और व्याघ्र-सिंह आदि हिंसक पशु विचरते हैं तथा काले सर्प जिसका सेवन करते हैं, उसी वनका आश्रय लेने वाले मेरे दोनों कुमार सीता के साथ वहाँ कैसे रहेंगे?
Show English Translation
How can the two young men along with Vaidehi live in the forest infested with black cobras and wicked, wild animals?
ShlokaShloka 8
सुकुमार्या तपस्विन्या सुमन्त्र सह सीतया। राजपुत्रौ कथं पादै��वरुह्य रथाद्गतौ।।2.58.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जहाँ अजगर और व्याघ्र-सिंह आदि हिंसक पशु विचरते हैं तथा काले सर्प जिसका सेवन करते हैं, उसी वनका आश्रय लेने वाले मेरे दोनों कुमार सीता के साथ वहाँ कैसे रहेंगे?
Show English Translation
O Sumantra how did those two princes along with pitiable, delicate Sita, alight from the chariot, and enter the forest on foot?
ShlokaShloka 9
सिद्धार्थः खलु सूत त्वं येन दृष्टौ ममाऽत्मजौ। वनान्तं प्रविशन्तौ तावश्विनाविवमन्दरम्।।2.58.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! परम सुकुमारी तपस्विनी सीता के साथ वे दोनों राजकुमार श्रीराम और लक्ष्मण रथ से उतरकर पैदल कैसे गये होंगे?
Show English Translation
You are blessed indeed, O charioteer to have seen my sons entering the outskirts of the forest like Aswinis stepping into the region of the Mandara mountain.
ShlokaShloka 10
किमुवाच वचो रामः किमुवाच च लक्ष्मणः। सुमन्त्र वनमासाद्य किमुवाच च मैथिली।।2.58.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सारथे! तुम कृतकृत्य हो गये; क्योंकि जैसे दोनों अश्विनीकुमार मन्दराचल के वन में जाते हैं, उसी प्रकार वन के भीतर प्रवेश करते हुए मेरे दोनों पुत्रों को तुमने अपनी आँखों से देखा है
Show English Translation
Upon reaching the forest, O Sumantra what did Rama, Lakshmana and Sita say?
ShlokaShloka 11
आसितं शयितं भुक्तं सूत रामस्य कीर्तय। जीविष्यामहमेतेन ययातिरिव साधुषु।।2.58.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! वन में पहुँचकर श्रीराम ने तुमसे क्या कहा? लक्ष्मण ने भी क्या कहा? तथा मिथिलेशकुमारी सीता ने क्या संदेश दिया?
Show English Translation
Tell me, O charioteer where Rama sat, where he slept, what (food) he ate. Only your words will enable me to live like Yayati among saints.
ShlokaShloka 12
इति सूतो नरेन्द्रेण बोधित स्सज्जमानया। उवाच वाचा राजानं स बाष्पपरिबद्धया।।2.58.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सूत! तुम श्रीराम के बैठने, सोने और खाने-पीने से सम्बन्ध रखने वाली बातें बताओ। जैसे स्वर्ग से गिरे हुए राजा ययाति सत्पुरुषों के बीच में उपस्थित होने पर सत्संग के प्रभाव से पुनः सुखी हो गये थे, उसी प्रकार तुम-जैसे साधुपुरुष के मुख से पुत्र का वृत्तान्त सुनने से मैं सुखपूर्वक जीवन धारण कर सकूँगा’
Show English Translation
Thus questioned by the king the charioteer, his voice choked with tears and words faltering in grief, addressed the king:
ShlokaShloka 13
अब्रवीन्मां महाराज धर्ममेवानुपालयन्। अञ्जलिं राघवः कृत्वा शिरसाऽभिप्रणम्य च।।2.58.14।।
Show English Translation
With palms folded and head bowed, O great king Rama offered his salutations to you in confirmity with righteousness and said to me:
ShlokaShloka 14
सूत मद्वचनात्तस्य तातस्य विदितात्मनः। शिरसा वन्दनीयस्य वन्द्यौ पादौ महात्मनः।।2.58.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! श्रीरामचन्द्रजी ने धर्म का ही निरन्तर पालन करते हुए दोनों हाथ जोड़कर और मस्तक झुकाकर कहा है—’सूत! तुम मेरी ओर से आत्मज्ञानी तथा वन्दनीय मेरे महात्मा पिता के दोनों चरणों में प्रणाम कहना तथा अन्तःपुर में सभी माताओं को मेरे आरोग्य का समाचार देते हुए उनसे विशेष रूप से मेरा यथोचित प्रणाम निवेदन करना
Show English Translation
'Convey on my behalf, O charioteer to my illustrious father who is known for his selfknowledge, and is worthy of homage, that I am saluting his feet with my head bowed.
ShlokaShloka 15
सर्वमन्तःपुरं वाच्यं सूत मद्वचनात्त्वया। आरोग्यमविशेषेण यथार्हं चाभिवादनम्।।2.58.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! श्रीरामचन्द्रजी ने धर्म का ही निरन्तर पालन करते हुए दोनों हाथ जोड़कर और मस्तक झुकाकर कहा है—’सूत! तुम मेरी ओर से आत्मज्ञानी तथा वन्दनीय मेरे महात्मा पिता के दोनों चरणों में प्रणाम कहना तथा अन्तःपुर में सभी माताओं को मेरे आरोग्य का समाचार देते हुए उनसे विशेष रूप से मेरा यथोचित प्रणाम निवेदन करना
Show English Translation
'On my behalf convey, O charioteer, without any distinction, my salutations to all the women befitting their status and tell them I was enquiring about their wellbeing.
ShlokaShloka 16
माता च मम कौसल्या कुशलं चाभिवादनम्। अप्रमादं च वक्तव्या ब्रूयाश्चैनामिदं वचः।।2.58.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! श्रीरामचन्द्रजी ने धर्म का ही निरन्तर पालन करते हुए दोनों हाथ जोड़कर और मस्तक झुकाकर कहा है—’सूत! तुम मेरी ओर से आत्मज्ञानी तथा वन्दनीय मेरे महात्मा पिता के दोनों चरणों में प्रणाम कहना तथा अन्तःपुर में सभी माताओं को मेरे आरोग्य का समाचार देते हुए उनसे विशेष रूप से मेरा यथोचित प्रणाम निवेदन करना
Show English Translation
'Convey my mother carefully my saluations and my wellbeing and tell her:
ShlokaShloka 17
धर्मनित्या यथाकालमग्न्यगारपरा भव। देवि देवस्य पादौ च देववत्परिपालय।।2.58.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमार भरत के प्रति राजोचित बर्ताव करना। राजा छोटी उम्र के हों तो भी वे आदरणीय ही होते हैं इस राजधर्म को याद रखना’
Show English Translation
'O mother, adhering to the righteous path and performing in time the rituals in the chamber of sacrificial fire, offer your services at the feet of king Dasaratha as if he were a god.
ShlokaShloka 18
अभिमानं च मानं च त्यक्त्वा वर्तस्व मातृषु। अनु राजानमार्यां च कैकेयीमम्ब कारय।।2.58.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमार भरत के प्रति राजोचित बर्ताव करना। राजा छोटी उम्र के हों तो भी वे आदरणीय ही होते हैं इस राजधर्म को याद रखना’
Show English Translation
'O mother, conduct yourself with other mothers without pride and egoism. Ensure that venerable Kaikeyi remains welldisposed towards the king.
ShlokaShloka 19
कुमारे भरते वृत्तिर्वर्तितव्या च राजवत्। अर्थज्येष्ठा हि राजानो राजधर्ममनु��्मर।।2.58.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमार भरत के प्रति राजोचित बर्ताव करना। राजा छोटी उम्र के हों तो भी वे आदरणीय ही होते हैं इस राजधर्म को याद रखना’
Show English Translation
'Behave towards young Bharata as to a king. Irrespective of age, a king is a king. (Hence should be honoured). You should keep this rajadharma (royal prerogative) in mind.
ShlokaShloka 20
भरतः कुशलं वाच्यो वाच्यो मद्वचनेन च। सर्वास्वेव यथान्यायं वृत्तिं वर्तस्व मातृषु।।2.58.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमार भरत के प्रति राजोचित बर्ताव करना। राजा छोटी उम्र के हों तो भी वे आदरणीय ही होते हैं इस राजधर्म को याद रखना’
Show English Translation
'Tell Bharata of my welfare and tell him on my behalf that he should honour all our mothers equally.
ShlokaShloka 21
वक्तव्यश्च महाबाहुरिक्ष्वाकुकुलनन्दनः। पितरं यौवराज्यस्थो राज्यस्थमनुपालय।।2.58.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमार भरत से भी मेरा कुशल-समाचार बताकर उनसे मेरी ओर से कहना—’भैया! तुम सभी माताओं के प्रति न्यायोचित बर्ताव करते रहना
Show English Translation
ShlokaShloka 22
अतिक्रान्तवया राजा मास्मैनं व्यवरोरुधः। कुमार राज्ये जीव त्वं तस्यैवाज्ञाप्रवर्तनात्।।2.58.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजा बहुत बूढ़े हो गये हैं—ऐसा मानकर तुम उनका विरोध न करना-उन्हें राजसिंहासन से न उतारना। युवराज-पद पर ही प्रतिष्ठित रहकर उनकी आज्ञा का पालन करते हुए ही जीवन-निर्वाह करना
Show English Translation
'The king is advanced in age. Do not restrict him in any manner. Carry out his orders as prince regent, and live happily'.
ShlokaShloka 23
अब्रवीच्चापि मां भूयो भृशमश्रूणि वर्तयन्। मातेव मम माता ते द्रष्टव्या पुत्रगर्धिनी।।2.58.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजा बहुत बूढ़े हो गये हैं—ऐसा मानकर तुम उनका विरोध न करना-उन्हें राजसिंहासन से न उतारना। युवराज-पद पर ही प्रतिष्ठित रहकर उनकी आज्ञा का पालन करते हुए ही जीवन-निर्वाह करना
Show English Translation
Shedding profuse tears, Rama continued, 'Look after my mother who is covetous of her son as your own mother'.
ShlokaShloka 24
इत्येवं मां महराज ब्रुवन्नेव महायशाः। रामो राजीवताम्राक्षो भृशमश्रूण्यवर्तयत्।।2.58.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘परंतु लक्ष्मण उस समय अत्यन्त कुपित हो लंबी साँस खींचते हुए बोले—’सुमन्त्रजी! किस अपराध के करण महाराज ने इन राजकुमार श्रीराम को देश निकाला दे दिया है ?
Show English Translation
While saying this the red lotuslike eyes of illustrious Rama streamed with tears, O maharaja
ShlokaShloka 25
लक्ष्मणस्तु सुसङ्कृद्धो निश्श्वसन्वाक्यमब्रवीत्। केनायमपराधेन राजपुत्रो विवासितः।।2.58.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘परंतु लक्ष्मण उस समय अत्यन्त कुपित हो लंबी साँस खींचते हुए बोले—’सुमन्त्रजी! किस अपराध के करण महाराज ने इन राजकुमार श्रीराम को देश निकाला दे दिया है ?
Show English Translation
But Lakshmana, seething with anger and sighing said, 'For what offence has this king's son been banished'?
ShlokaShloka 26
राज्ञा तु खलु कैकेय्या लघुत्वाश्रित्य शासनम्। कृतं कार्यमकार्यं वा वयं येनाभिपीडिताः।।2.58.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘परंतु लक्ष्मण उस समय अत्यन्त कुपित हो लंबी साँस खींचते हुए बोले—’सुमन्त्रजी! किस अपराध के करण महाराज ने इन राजकुमार श्रीराम को देश निकाला दे दिया है ?
Show English Translation
'The king, too, submitting to the trash command of Kaikeyi has perpetrated an act, just or unjust (he knows better), for which we are made to suffer so much.
ShlokaShloka 27
यदि प्रव्राजितो रामो लोभकारणकारितम्। वरदाननिमित्तं वा सर्वथा दुष्कृतं कृतम्।।2.58.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजा ने कैकेयी का आदेश सुनकर झट से उसे पूर्ण करने की प्रतिज्ञा कर ली। उनका यह कार्य उचित हो या अनुचित, परंतु हमलोगों को उसके कारण कष्ट भोगना ही पड़ता है
Show English Translation
'Whether it was out of greed (for the kingdom) or for (the execution of) the boon bestowed, this act of banishment is by all means wicked'.
ShlokaShloka 28
इदं तावद्यथाकाममीश्वरस्य कृते कृतम्। रामस्य तु परित्यागे न हेतु मुपलक्षये।।2.58.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम को वनवास देना कैकेयी के लोभ के कारण हुआ हो अथवा राजा के दिये हुए वरदान के कारण, मेरी दृष्टि में यह सर्वथा पाप ही किया गया है
Show English Translation
'Or he might have thought he is the overlord and can do as he likes. (Or, he might have done this for fear of God) Otherwise, I do not see any reason for the abandonment of Rama'.
ShlokaShloka 29
असमीक्षय समारब्धं विरुद्धं बुध्दिलाघवात्। जनयिष्यति सङ्क्रोशं राघवस्य विवासनम्।।2.58.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह श्रीराम को वनवास देने का कार्य राजा की स्वेच्छाचारिता के कारण किया गया हो अथवा ईश्वर की प्रेरणा से, परंतु मुझे श्रीराम के परित्याग का कोई समुचित कारण नहीं दिखायी देता है
Show English Translation
'Unjustly, foolishly and without (proper) consideration Rama has been banished. This will (definitely) cause sorrow'.
ShlokaShloka 30
अहं तावन्महाराजे पितृत्वं नोपलक्ष्ये। भ्राता भर्ता च बन्धुश्च पिता च मम राघवः।।2.58.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मुझे इस समय महाराज में पिता का भाव नहीं दिखायी देता। अब तो रघुकुलनन्दन श्रीराम ही मेरे भाई, स्वामी, बन्धु-बान्धव तथा पिता हैं
Show English Translation
'I do not regard the great king as my father. Rama alone is my brother, protector, friend and father.
ShlokaShloka 31
सर्वर्लोकप्रियं त्यक्त्वा सर्वलोकहिते रतम्। सर्वलोकोऽनुरज्येत कथं त्वाऽनेनकर्मणा।।2.58.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मुझे इस समय महाराज में पिता का भाव नहीं दिखायी देता। अब तो रघुकुलनन्दन श्रीराम ही मेरे भाई, स्वामी, बन्धु-बान्धव तथा पिता हैं
Show English Translation
'How can anyone in this world be pleased with you for deserting Rama, the beloved of all, and ever devoted to their welfare?
ShlokaShloka 32
सर्वप्रजाभिरामं हि रामं प्रव्राज्य धार्मिकम्। सर्वलोकं विरुध्येमं कथं राजा भविष्यसि।।2.58.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो सम्पूर्ण लोकों के हित में तत्पर होने के कारण सब लोगों के प्रिय हैं, उन श्रीराम का परित्याग करके राजा ने जो यह क्रूरतापूर्ण पापकृत्य किया है, इसके कारण अब सारा संसार उनमें कैसे अनुरक्त रह सकता है? (अब उनमें राजोचित गुण कहाँ रह गया है?)
Show English Translation
'Having banished the righteous Rama, the delight of all subjects and, thereby, antagonizing the entire world, how can you claim to be their king?'
ShlokaShloka 33
जानकी तु महाराज निश्श्वसन्ती मनस्विनी। भूतोपहतचित्तेव विष्ठिता विस्मृता स्मिता।।2.58.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनमें समस्त प्रजाका मन रमता है, उन धर्मात्मा श्रीराम को देशनिकाला देकर समस्त लोकों का विरोध करने के कारण अब वे कैसे राजा हो सकेंगे?
Show English Translation
O great king as for that sensitive Janaki, she stood sighing, stupefied and oblivious (of the past), yet smiling as though her mind was possessed by an evil spirit.
ShlokaShloka 34
अदृष्टपूर्वव्यसना राज्यपुत्री यशस्विनी। तेन दुःखेन रुदती नैव मां किञ्चिदब्रवीत्।।2.58.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! तपस्विनी जनकनन्दिनी सीता तो लंबी साँस खींचती हुई इस प्रकार निश्चेष्ट खड़ी थीं, मानो उनमें किसी भूत का आवेश हो गया हो। वे भूली-सी जान पड़ती थीं
Show English Translation
That glorious princess Sita who had never experienced any adversity earlier, weeping with sorrow, could not even speak to me anything.
ShlokaShloka 35
उद्वीक्षमाणा भर्तारं मुखेन परिशुष्यता। मुमोच सहसा बाष्पं मां प्रयान्तमुदीक्ष्य सा।।2.58.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
“उन यशस्विनी राजकुमारी ने पहले कभी ऐसा संकट नहीं देखा था। वे पति के ही दुःख से दुःखी होकर रो रही थीं। उन्होंने मुझसे कुछ भी नहीं कहा
Show English Translation
When she saw me leaving, she looked at her husband with a dry (pale) face and suddenly burst into tears.
ShlokaShloka 36
तथैव रामोऽश्रुमुखः कृताञ्जलिः स्थितोऽभवल्लक्ष्मणबाहुपालितः। तथैव सीता रुदती तपस्विनी निरीक्षते राजरथं तथैव माम्।।2.58.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसी प्रकार लक्ष्मण की भुजाओं से सुरक्षित श्रीराम उस समय हाथ जोड़े खड़े थे। उनके मुखपर आँसुओं की धारा बह रही थी। मनस्विनी सीता भी रोती हुई कभी आपके इस रथ की ओर देखती थीं और कभी मेरी ओर’
Show English Translation
Supported by Lakshmana's arms, Rama stood, his face streaming with tears and palms folded, while the wretched Sita, glaring at me and the royal chariot, weeping. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे अष्टपञ्चाशस्सर्गः।। Thus ends the fiftyeighth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.