Ayodhya Kanda

Sarga 60: Sumantra consoles Kausalya.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 60

22 shlokas

ShlokaShloka 1
ततो भूतोपसृष्टेव वेपमाना पुनः पुनः। धरण्यां गतसत्त्वेव कौसल्या सूतमब्रवीत्।।2.60.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर जैसे उनमें भूत का आवेश हो गया हो, इस प्रकार कौसल्या देवी बारंबार काँपने लगीं और अचेत-सी होकर पृथ्वी पर गिर पड़ीं। उसी अवस्था में उन्होंने सारथि से कहा-
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Thereafter Kausalya, trembling as if possessed by an evil spirit and rolling on the floor like one who her senses now and again, said to the charioteer (Sumantra):
ShlokaShloka 2
नय मां यत्र काकुत्स्थस्सीता यत्र च लक्ष्मणः। तान्विना क्षणमप्यत्र जीवितुं नोत्सहेह्यहम्।।2.60.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! जहाँ श्रीराम हैं, जहाँ सीता और लक्ष्मण हैं, वहीं मुझे भी पहुँचा दो। मैं उनके बिना अब एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकती
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Take me where Rama, Sita and Lakshmana are. I do not wish to live even for a moment without them.
ShlokaShloka 3
निवर्तय रथं शीघ्रं दण्डकान्नय मामपि। अथ तान्नानुगच्छामि गमिष्यामि यमक्षयम्।।2.60.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जल्दी रथ लौटाओ और मुझे भी दण्डकारण्य में ले चलो। यदि मैं उनके पास न जा सकी तो यमलोक की यात्रा करूँगी’
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'Turn back your chariot immediately and take me to the Dandaka forest. If I do not follow them, I shall enter the world of Yama'.
ShlokaShloka 4
बाष्पवेगोपहतया स वाचा सज्जमानया। इदमाश्वासयन्देवीं सूतः प्राञ्जलिरब्रवीत्।।2.60.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
देवी कौसल्या की बात सुनकर सारथि सुमन्त्र ने हाथ जोड़कर उन्हें समझाते हुए आँसुओं के वेग से अवरुद्ध हुई गद्गदवाणी में कहा-
Show English Translation
With folded hands and faltering words choked by his fastflowing tears the charioteer tried to console Kausalya:
ShlokaShloka 5
त्यज शोकं च मोहं च सम्भ्रमं दुःखजं तथा। व्यवधूय च सन्तापं वने वत्स्यति राघवः।।2.60.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महारानी! यह शोक, मोह और दुःखजनित व्याकुलता छोड़िये। श्रीरामचन्द्रजी इस समय सारा संताप भूलकर वन में निवास करते हैं
Show English Translation
Abandon your tears, delusion and despair arising out of sorrow. Rama is going to live in the forest, brushing aside all agony.
ShlokaShloka 6
लक्ष्मणश्चापि रामस्य पादौ परिचरन्वने। आराधयति धर्मज्ञः परलोकं जितेन्द्रियः।।2.60.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धर्मज्ञ एवं जितेन्द्रिय लक्ष्मण भी उस वन में श्रीरामचन्द्रजी के चरणों की सेवा करते हुए अपना परलोक बना रहे हैं
Show English Translation
Selfcontrolled Lakshmana, aware of his duty, serves Rama in the forest. By this he is securing his next world.
ShlokaShloka 7
विजनेऽपि वने सीता वासं प्राप्य गृहेष्विव। विस्रम्भं लभतेऽभीता रामे सन्न्यस्तमानसा।।2.60.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सीता का मन भगवान् श्रीराम में ही लगा हुआ है। इसलिये निर्जन वन में रहकर भी घर की ही भाँति प्रेम एवं प्रसन्नता पाती तथा निर्भय रहती हैं
Show English Translation
Sita with her mind fixed on Rama is living confidently in that desolate forest without any fear as if it were her home.
ShlokaShloka 8
नास्या दैन्यं कृतं किञ्चित्सुसूक्ष्ममपि लक्ष्यते। उचितेव प्रवासानां वैदेही प्रतिभाति मा।।2.60.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन में रहने के कारण उनके मन में कुछ थोड़ा-सा भी दुःख नहीं दिखायी देता। मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है, मानो विदेहराजकुमारी सीता को परदेश में रहने का पहले से ही अभ्यास हो
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I could not see even the slightest depression in Sita as if she was accustomed to staying away from home.
ShlokaShloka 9
नगरोपवनं गत्वा यथा स्मरमते पुरा। तथैव रमते सीता निर्जनेषु वनेष्वपि।।2.60.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जैसे यहाँ नगर के उपवन में जाकर वे पहले घूमा करती थीं, उसी प्रकार निर्जन वन में भी सीता सानन्द विचरती हैं
Show English Translation
Earlier, just as Sita used to revel in the gardens of the city, so does she now in those desolate forests.
ShlokaShloka 10
बालेव रमते सीताऽबालचन्द्रनिभानना। रामा रामे ह्यधीनात्मा विजनेऽपि वने सती।।2.60.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर मुखवाली रमणीशिरोमणि उदारहृदया सती-साध्वी सीता उस निर्जन वन में भी श्रीराम के समीप बालिका के समान खेलती और प्रसन्न रहती हैं
Show English Translation
Charming Sita whose face resembles the full Moon, with her mind fixed on Rama, is enjoying even the desolate forest like a child.
ShlokaShloka 11
तद्गतं हृदयं ह्यस्यास्तदधीनं च जीवितम्। अयोध्यापि भवेऽत्तस्या रामहीना तदा वनम्।।2.60.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उनका हृदय श्रीराम में ही लगा हुआ है। उनका जीवन भी श्रीराम के ही अधीन है, अतः राम के बिना अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या भी उनके लिये वन के समान ही होगी (और श्रीराम के साथ रहने पर वे वन में भी अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या के समान ही सुख का अनुभव करेंगी)
Show English Translation
Her heart is ever united with Rama, and her life is under his control. Without Rama, even Ayodhya would become a forest for her.
ShlokaShloka 12
परिपृच्छति वैदेही ग्रामांश्च नगराणि च। गतिं दृष्ट्वा नदीनां च पादपान्विविधानपि।।2.60.12।। रामं हि लक्ष्मणं वापि पृष्ट्वा जानाति जानकी। अयोध्या क्रोशमात्रे तु विहारमिव संश्रिता।।2.60.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘विदेहनन्दिनी सीता मार्ग में मिलने वाले गाँवों, नगरों, नदियों के प्रवाहों और नाना प्रकार के वृक्षों को देखकर उनका परिचय पूछा करती हैं।
Show English Translation
Seeing villages, cities, trees of different kinds and courses of rivers, Sita is enquiring from Rama or Lakshmana about them. She feels as though she is sporting in the pleasuregarden just a krosa from Ayodhya.
ShlokaShloka 13
इदमेव स्मराम्यस्यास्सहसैवोपजल्पितम्। कैकेयी संश्रितं वाक्यं नेदानीं प्रतिभाति मा।।2.60.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम और लक्ष्मण को अपने पास देखकर जानकी को यही जान पड़ता है कि मैं अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या से एक कोस की दूरी पर मानो घूमने-फिरने के लिये ही आयी हैं
Show English Translation
Sita did say something about Kaikeyi, but now I do not remember what.
ShlokaShloka 14
ध्वंसयित्वा तु तद्वाक्यं प्रमादात्पर्युपत्स्थितम्। ह्लादनं वचनं सूतो देव्या मधुरमब्रवीत्।।2.60.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार भूल से निकली हुई कैकेयी विषयक उस बात को पलटकर सारथि सुमन्त्र ने देवी कौसल्या के हृदय को आह्लाद प्रदान करने वाला मधुर वचन कहा –
Show English Translation
Diverting the context of what he uttered inadvertently relating to Kaikeyi, the charioteer said pleasing words of consolation to Kausalya.
ShlokaShloka 15
अध्वना वातवेगेन सम्भ्रमेणाऽऽतपेन च। न विगच्छति वैदेह्याश्चन्द्रांशु सदृशी प्रभा।।2.60.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार भूल से निकली हुई कैकेयी विषयक उस बात को पलटकर सारथि सुमन्त्र ने देवी कौसल्या के हृदय को आह्लाद प्रदान करने वाला मधुर वचन कहा –
Show English Translation
Just like the beams of the Moon, Sita's glow is not affected by the fatigue of the journey or by the speed of the wind or by the scorching heat.
ShlokaShloka 16
सदृशं शतपत्रस्य पूर्णचन्द्रोपमप्रभम्। वदनं तद्वदान्याया वैदेह्या न विकम्पते।।2.60.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मार्ग में चलने की थकावट, वायु के वेग, भयदायक वस्तुओं को देखने के कारण होने वाली घबराहट तथा धूप से भी विदेहराजकुमारीकी चन्द्रकिरणों के समान कमनीय कान्ति उनसे दूर नहीं होती है
Show English Translation
The countenance of Sita with her gentle eloquence resembles a hundredpetalled lotus. She has the luminance of the full Moon that has not wilted.
ShlokaShloka 17
अलक्तरसरक्ताभावलक्तरसवर्जितौ। अद्यापि चरणौ तस्याः पद्मकोशसमप्रभौ।।2.60.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उदारहृदया सीता का विकसित कमल के समान सुन्दर तथा पूर्ण चन्द्रमा के समान आनन्ददायक कान्ति से युक्त मुख कभी मलिन नहीं होता है
Show English Translation
Her feet, now devoid of lacdye, still look red like lac and shine like the lotus bud.
ShlokaShloka 18
नूपुरोद्घुष्टहेलेव खेलं गच्छति भामिनी। इदानीमपि वैदेही तद्रागान्नयस्त भूषणा।।2.60.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनमें महावर के रंग नहीं लग रहे हैं, सीता के वे दोनों चरण आज भी महावर के समान ही लाल तथा कमलकोश के समान कान्तिमान् हैं।
Show English Translation
Casting off her ornaments, the damsel (Sita) is gracefully walking as if dalliant with her tinkling anklets for her love for him (Rama).
ShlokaShloka 19
गजं वा वीक्ष्य सिंहं वा व्याघ्रं वा वनमाश्रिता। नाऽहारयति सन्त्रासं बाहू रामस्य संश्रिता।।2.60.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरामचन्द्रजी के प्रति अनुराग के कारण उन्हीं की प्रसन्नता के लिये जिन्होंने आभूषणों का परित्याग नहीं किया है, वे विदेहराजकुमारी भामिनी सीता इस समय भी अपने नूपुरों की झनकार से हंसों के कलनाद का तिरस्कार-सा करती हुई लीलाविलासयुक्त गति से चलती हैं
Show English Translation
Though in the forest, Sita, under the protection of Rama's arms, is afraid of neither elephants nor lions nor tigers.
ShlokaShloka 20
न शोच्यास्ते न चात्मनश्शोच्यो नापि जनाधिपः। इदं हि चरितं लोके प्रतिष्ठास्यति शाश्वतम्।।2.60.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे श्रीरामचन्द्रजी के बाहुबल का भरोसा करके वन में रहती हैं और हाथी, बाघ अथवा सिंह को भी देखकर कभी भय नहीं मानती हैं।
Show English Translation
You need not lament for them or for yourself or for the king. This story of Rama will endure permanently in the world.
ShlokaShloka 21
विधूय शोकं परिहृष्टमानसा महर्षियाते पथि सुव्यवत्स्थिताः। वनेरता वन्यफलाशनाः पितुश्शुभां प्रतिज्ञां परिपालयन्ति ते।।2.60.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः आप श्रीराम, लक्ष्मण अथवा सीता के लिये शोक न करें, अपने और महाराज के लिये भी चिन्ता छोड़ें। श्रीरामचन्द्रजी का यह पावन चरित्र संसार में सदा ही स्थिर रहेगा
Show English Translation
They are upholding the sacred promise of their father with cheerful hearts, grief given the goby, steadfastly pursuing the path established by maharsis, subsisting on forest fruits and enjoying the forest life.
ShlokaShloka 22
तथापि सूतेन सुयुक्तवादिना निवार्यमाणा सुतशोककर्शिता। न चैव देवी विरराम कूजितात्प्रियेति पुत्रेति च राघवेति च।।2.60.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे तीनों ही शोक छोड़कर प्रसन्नचित्त हो महर्षियों के मार्ग पर दृढ़तापूर्वक स्थित हैं और वन में रहकर फल-मूल का भोजन करते हुए पिता की उत्तम प्रतिज्ञा का पालन कर रहे हैं’
Show English Translation
Though Sumantra was speaking with befitting words to prevent Kausalya from weeping over her son which had enfeebled her, she did not stop crying, 'O my beloved', 'O my son', 'O Rama'. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे षष्टितमस्सर्गः।। Thus ends the sixtieth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.