Ayodhya Kanda

Sarga 34: Rama, Sita and Lakshmana take leave of Dasaratha--Dasaratha falls unconscious.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 34

60 shlokas

ShlokaShloka 1
ततः कमलपत्राक्षः श्यामो निरुपमो महान्। उवाच राम स्तं सूतं पितुराख्याहि मामिति।।2.34.1।।
Show English Translation
Let my father be informed of my arrival, said the lotuseyed, darkcomplexioned, venerable, peerless Rama to the charioteer.
ShlokaShloka 2
स रामप्रेषितः क्षिप्रं सन्तापकलुषेन्द्रियः। प्रविश्य नृपतिं सूतो निश्वसन्तं ददर्श ह ।।2.34.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
जब कमलनयन श्यामसुन्दर उपमारहित महापुरुष श्रीराम ने सूत सुमन्त्र से कहा—’आप पिताजी को मेरे आगमन की सूचना दे दीजिये’ तब श्रीराम की प्रेरणा से शीघ्र ही भीतर जाकर सारथि सुमन्त्र ने राजा का दर्शन किया। उनकी सारी इन्द्रियाँ संताप से कलुषित हो रही थीं। वे लम्बी साँस खींच रहे थे
Show English Translation
At the command of Rama, charioteer Sumantra whose senses were overwhelmed with grief quickly entered the apartment of the king and found him heaving sighs.
ShlokaShloka 3
उपरक्तमिवादित्यं भस्मच्छन्नमिवानलम्। तटाकमिव निस्तोयमपश्यज्जगतीपतिम्।।2.34.3।।
Show English Translation
He saw the lord of the world (Dasaratha) dull like the Sun in eclipse, like the fire covered with ashes, like a tank with its water dried up.
ShlokaShloka 4
आलोक्य तु महाप्राज्ञः परमाकुलचेतसम्। राममेवानुशोचन्तं सूतः प्राञ्जलिरासदत्।।2.34.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र ने देखा, पृथ्वीपति महाराज दशरथ राहुग्रस्त सूर्य, राख से ढकी हुई आग तथा जलशून्य तालाब के समान श्रीहीन हो रहे हैं। उनका चित्त अत्यन्त व्याकुल है और वे श्रीराम का ही चिन्तन कर रहे हैं। तब महाप्राज्ञ सूत ने महाराज को सम्बोधित करके हाथ जोड़कर कहा
Show English Translation
Seeing the king brooding over Rama, in an extremely agitated state, the sagacious charioteer approached him with folded hands.
ShlokaShloka 5
तं वर्धयित्वा राजानं पूर्वं सूतो जयाशिषा। भयविक्लबया वाचा मन्दया श्लक्ष्णमब्रवीत्।।2.34.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
पहले तो सूत सुमन्त्र ने विजयसूचक आशीर्वाद देते हुए महाराज की अभ्युदय-कामना की; फिर भय से व्याकुल मन्द-मधुर वाणी द्वारा यह बात कही—
Show English Translation
At first greeting the king with the words 'victory be yours', the charioteer, trembling with fear, gently said in a feeble voice.
ShlokaShloka 6
अयं स पुरुषव्याघ्रो द्वारि तिष्ठति ते सुतः। ब्राह्मणेभ्यो धनं दत्वा सर्वञ्चैवोपजीविनाम्।।2.34.6।।
Show English Translation
Your son Rama, the best of men, having given away his entire wealth in charity to brahmins and to all the dependents is waiting at the entrance.
ShlokaShloka 7
स त्वा पश्यतु भद्रं ते रामस्सत्यपराक्रमः। सर्वान् सुहृद आपृच्छ्य त्वामिदानीं दिदृक्षते।।1.34.7।।
Show English Translation
Be blessed audience may be granted to Rama who possesses proven prowess, and now waits, after taking leave of his friends, to see you.
ShlokaShloka 8
गमिष्यति महारण्यं तं पश्य जगतीपते। वृतं राजगुणै स्सर्वैरादित्यमिव रश्मिभिः।।2.34.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पृथ्वीनाथ! आपके पुत्र ये सत्यपराक्रमी पुरुषसिंह श्रीराम ब्राह्मणों तथा आश्रित सेवकों को अपना साराधन देकर द्वार पर खड़े हैं। आपका कल्याण हो, ये अपने सब सुहृदों से मिलकर उनसे विदा लेकर इस समय आपका दर्शन करना चाहते हैं। आज्ञा हो तो यहाँ आकर आपका दर्शन करें। राजन्! अब ये विशाल वन में चले जायेंगे, अतः किरणों से युक्त सूर्य की भाँति समस्त राजोचित गुण से सम्पन्न इन श्रीराम को आप भी जी भरकर देख लीजिये’॥६– ८॥
Show English Translation
O Lord of the world behold him embellished with all princely virtues like the Sun encircled with its rays, (now) leaving for the forest.
ShlokaShloka 9
स सत्यवादी धर्मात्मा गाम्भीर्यात्सागरोपमः। आकाश इव निष्पङ्को नरेन्द्रः प्रत्युवाच तम्।।2.34.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
यह सुनकर समुद्र के समान गम्भीर तथा आकाश की भाँति निर्मल, सत्यवादी धर्मात्मा महाराज दशरथ ने उन्हें उत्तर दिया-
Show English Translation
That truthful and virtuous king (Dasaratha) who was deep like the ocean and free from mud (pure) like the sky replied:
ShlokaShloka 10
सुमंन्त्रानय मे दारान् ये केचिदिह मामकाः। दारैः परिवृतस्सर्वैर्द्रष्टुमिच्छामि धार्मिकम्।।2.34.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमन्त्र! यहाँ जो कोई भी मेरी स्त्रियाँ हैं, उन सबको बुलाओ। उन सबके साथ मैं श्रीराम को देखना चाहता हूँ’
Show English Translation
O Sumantra bring all my consorts who are here. In the company of all my wives, I desire to give audience to virtuous Rama.
ShlokaShloka 11
सोऽन्तःपुरमतीत्यैव स्त्रियस्ता वाक्यमब्रवीत्। आर्याह्वयति वो राजा गम्यतां तत्र मा चिरम्।।2.34.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
तब सुमन्त्र ने बड़े वेग से अन्तःपुर में जाकर सब स्त्रियों से कहा- ’देवियो! आपलोगों को महाराज बुला रहे हैं, अतः वहाँ शीघ्र चलें
Show English Translation
O venerable ones, king Dasaratha summons you. Go there without delay, said Sumantra to the king's consorts after crossing the inner apartment.
ShlokaShloka 12
एवमुक्ताः स्त्रिय स्सर्वाः सुमन्त्रेण नृपाज्ञया। प्रचक्रमु स्तद्भवनं भर्तुराज्ञाय शासनम्।।2.34.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
राजा की आज्ञा से सुमन्त्र के ऐसा कहने पर वे सब रानियाँ स्वामी का आदेश समझकर उस भवन की ओर चलीं
Show English Translation
Thus addressed by Sumantra in accordance with the king's order, all the women went to their husband's palace.
ShlokaShloka 13
अर्धसप्तशतास्तास्तु प्रमदास्ताम्रलोचनाः। कौसल्यां परिवार्याथ शनैर्जग्मुर्धृतव्रताः।।2.34.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
कुछ-कुछ लाल नेत्रोंवाली साढ़े तीन सौ पतिव्रता युवती स्त्रियाँ महारानी कौसल्या को सब ओर से घेरकर धीरे-धीरे उस भवन में गयीं
Show English Translation
Thereafter, Kausalya surrounded by three hundred and fifty ladies who were faithful to their vows, reached there slowly with their eyes turned copperred (in grief).
ShlokaShloka 14
आगतेषु च दारेषु समवेक्ष्य महीपतिः। उवाच राजा तं सूतं सुमन्त्राऽनय मे सुतम्।।2.34.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
उन सबके आ जाने पर उन्हें देखकर पृथ्वीपति राजा दशरथ ने सूत से कहा—’सुमन्त्र! अब मेरे पुत्र को ले आओ’
Show English Translation
Usher in my son (Rama), O Sumantra, said the lord of the world (king Dasaratha) to the charioteer on seeing his wives arrive.
ShlokaShloka 15
स सूतो राममादाय लक्ष्मणं मैथिलीं तदा। जगामाभिमुखस्तूर्णं सकाशं जगतीपतेः।।2.34.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
आज्ञा पाकर सुमन्त्र गये और श्रीराम, लक्ष्मण तथा सीता को साथ लेकर शीघ्र ही महाराज के पास लौट आये
Show English Translation
Then the charioteer fetched Rama, Lakshmana and Sita and advanced towards the king without delay.
ShlokaShloka 16
स राजा पुत्रमायान्तं दृष्ट्वा दूरात्कृताञ्जलिम्। उत्पपातासनात्तूर्णमार्त स्त्रीजनसंवृतः।।2.34.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
महाराज दूर से ही अपने पुत्र को हाथ जोड़कर आते देख सहसा अपने आसन से उठ खड़े हुए। उस समय स्त्रियों से घिरे हुए वे नरेश शोक से आर्त हो रहे थे
Show English Translation
When the king saw from a distance his son coming with folded hands, he, surrounded by the ladies and tormented with grief, stood up.
ShlokaShloka 17
सोऽभिदुद्राव वेगेन रामं दृष्ट्वा विशाम्पतिः। तमसंप्राप्य दुःखार्तः पपात भुवि मूर्छितः।।2.34.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम को देखते ही वे प्रजापालक महाराज बड़े वेग से उनकी ओर दौड़े, किंतु उनके पास पहँचने के पहले ही दुःख से व्याकुल हो पृथ्वी पर गिर पड़े और मूर्छित हो गये
Show English Translation
At the sight of Rama, the lord of men (king Dasaratha), tortured with grief, immediately ran towards him but before he could reach him, fell unconscious on the floor.
ShlokaShloka 18
तं रामोऽभ्यपतत् क्षिप्रं लक्ष्मणश्च महारथः। विसंज्ञमिव दुःखेन सशोकं नृपतिं तदा।।2.34.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय श्रीराम और महारथी लक्ष्मण बड़ी तेजी से चलकर दुःख के कारण अचेत-से हुए शोकमग्न महाराज के पास जा पहुँचे
Show English Translation
Rama and the mighty warrior Lakshmana, quickly reached the king who lay as though he had lost his senses due to grief.
ShlokaShloka 19
स्त्रीसहस्रनिनादश्च संजज्ञे राजवेश्मनि। हा हा रामेति सहसा भूषणध्वनिमूर्छितः।।2.34.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
इतने ही में उस राजभवन के भीतर सहसा आभूषणों की ध्वनि के साथ सहस्रों स्त्रियों का ‘हा राम! हा राम!’ यह आर्तनाद गूंज उठा
Show English Translation
All on a sudden there arose from (the mouths of) a thousand women of the palace cries of 'alas, alas, Rama' mingled with the tinkling sounds of their ornaments.
ShlokaShloka 20
तं परिष्वज्य बाहुभ्यां तावुभौ रामलक्ष्मणौ। पर्यंङ्के सीतया सार्धं रुदन्तः समवेशयन्।।2.34.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम और लक्ष्मण दोनों भाई भी सीता के साथ रो पड़े और उन तीनों ने महाराज को दोनों भुजाओं से उठाकर पलंग पर बिठा दिया
Show English Translation
Thereafter Rama and Lakshmana assisted by Sita, lifted him wailing in their arms and laid him on a couch.
ShlokaShloka 21
अथ रामो मुहूर्तेन लब्धसंज्ञं महीपतिम्। उवाच प्राञ्जलिर्भूत्वा शोकार्णवपरिप्लुतम्।।2.34.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
शोकाश्रु के सागर में डूबे हुए महाराज दशरथ को दो घड़ी में जब फिर चेत हुआ, तब श्रीराम ने हाथ जोड़कर उनसे कहा-
Show English Translation
After the king regained his consciousness in a moment, Rama with folded hands said to him, who was immersed in a sea of sorrow:
ShlokaShloka 22
आपृच्छे त्वां महाराज सर्वेषामीश्वरोऽसि नः। प्रस्थितं दण्डकारण्यं पश्य त्वं कुशलेन माम्।।2.34.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! आप हमलोगों के स्वामी हैं। मैं दण्डकारण्य को जा रहा हूँ और आपसे आज्ञा लेने आया हूँ। आप अपनी कल्याणमयी दृष्टि से मेरी ओर देखिये
Show English Translation
O great king, I am asking leave of you, for you are lord of all of us. I am set to depart for the Dandaka forest. See me (off) in a cheerful mood.
ShlokaShloka 23
लक्ष्मणं चानुजानीहि सीता चान्वेति मां वनम्। कारणैर्बहुभि स्तथ्यैर्वार्यमाणौ न चेच्छतः।।2.34.23।।
Show English Translation
Allow Lakshmana and Sita to follow me into the forest. I tried to dissuade them with a number of reasons but they did not agree.
ShlokaShloka 24
अनुजानीहि सर्वान्नः शोकमुत्सृज्य मानद। लक्ष्मणं मां च सीतां च प्रजापतिरिव प्रजाः।।2.34.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे साथ लक्ष्मण को भी वन में जाने की आज्ञा दीजिये। साथ ही यह भी स्वीकार कीजिये कि सीता भी मेरे साथ वन को जाय। मैंने बहुत-से सच्चे कारण बताकर इन दोनों को रोकने की चेष्टा की है. परंतु ये यहाँ रहना नहीं चाहते हैं; अतः दूसरों को मान देने वाले नरेश! आप शोक छोड़कर हम सबको मुझको, लक्ष्मण को और सीता को भी उसी तरह वन में जाने की आज्ञा दीजिये, जैसे ब्रह्माजी ने अपने पुत्र सनकादिकों को तप के लिये वन में जाने की अनुमति दी थी’
Show English Translation
Discard your grief and, like Brahma, the creator, allow Lakshmana, Sita and me all of us, your subjects, O respector of men
ShlokaShloka 25
प्रतीक्षमाणमव्यग्रमनुज्ञां जगतीपतेः। उवाच राजा सम्प्रेक्ष्य वनवासाय राघवम्।।2.34.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार शान्तभाव से वनवास के लिये राजा की आज्ञा की प्रतीक्षा करते हुए श्रीरामचन्द्रजी की ओर देखकर महाराज ने उनसे कहा-
Show English Translation
On seeing Rama, unruffled, waiting for his permission to proceed to the forest, the lord of the earth, king Dasaratha said:
ShlokaShloka 26
अहं राघव कैकेय्या वरदानेन मोहितः। अयोध्यायास्त्वमेवाद्य भव राजा निगृह्य माम्।।2.34.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! मैं कैकेयी को दिये हुए वर के कारण मोह में पड़ गया हूँ। तुम मुझे कैद करके स्वयं ही अब अयोध्या के राजा बन जाओ’
Show English Translation
I have been deluded by Kaikeyi into bestowing boons. Imprison me and be now king of Ayodhya, O scion of the Raghu dynasty
ShlokaShloka 27
एवमुक्तो नृपतिना रामो धर्मभृतां वरः। प्रत्युवाचाञ्जलिं कृत्वा पितरं वाक्यकोविदः।।2.34.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
महाराज के ऐसा कहने पर बातचीत करने में कुशल धर्मात्माओं में श्रेष्ठ श्रीराम ने दोनों हाथ जोड़कर पिता को इस प्रकार उत्तर दिया-
Show English Translation
Thus spoken to by the king, Rama, skilled in speech and upholder of righteousness, replied to his father with folded palms:
ShlokaShloka 28
भवान्वर्ष सहस्राय पृथिव्या नृपते पतिः। अहं त्वरण्येवत्स्यामि न मे कार्यं त्वयाऽनृतम्।।2.34.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! आप सहस्रों वर्षों तक इस पृथ्वी केअधिपति बने रहें। मैं तो अब वन में ही निवास करूँगा। मुझे राज्य लेने की इच्छा नहीं है
Show English Translation
You will remain the lord of this earth for a thousand years to come, O king As for me, I will dwell in the forest. Do not deviate from truth on my account.
ShlokaShloka 29
नव पञ्च च वर्षाणि वनवासे विहृत्य ते। पुनःपादौ ग्रहीष्यामि प्रतिज्ञान्ते नराधिप।।2.34.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नरेश्वर! चौदह वर्षों तक वन में घूम-फिरकर आपकी प्रतिज्ञा पूरी कर लेने के पश्चात् मैं पुनः आपके युगल चरणों में मस्तक झुकाऊँगा’
Show English Translation
Having fulfilled the vow on the completion of fourteen years of wandering in the forest I shall come back to touch your feet, O lord of men
ShlokaShloka 30
रुदन्नार्तः प्रियं पुत्रं सत्यपाशेन संयतः। कैकेय्या चोद्यमानस्तु मिथो राजा तमब्रवीत्।।2.34.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
राजा दशरथ एक तो सत्य के बन्धन में बँधे हुए थे, दूसरे एकान्त में कैकेयी उन्हें श्रीराम को वन में तुरंत भेजने के लिये बाध्य कर रही थी- इस अवस्था में वे आर्तभाव से रोते हुए वहाँ अपने प्रिय पुत्र श्रीराम से बोले-
Show English Translation
The king who was bound by the cord of truth and instigated by Kaikeyi said, wailing in distress:
ShlokaShloka 31
श्रेयसे वृद्धये तात पुनरागमनाय च। गच्छस्वारिष्टमव्यग्रः पन्थानमकुतोभयम्।।2.34.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तात! तुम कल्याण के लिये, वृद्धि के लिये और फिर लौट आने के लिये शान्तभाव से जाओ। तुम्हारा मार्ग विघ्न-बाधाओं से रहित और निर्भय हो
Show English Translation
Go, my dear child, wish you wellMay your path be auspicious, free from obstacles and fear (from any quarters). Come back (after fulfilment of the pledge)
ShlokaShloka 32
न हि सत्यात्मनस्तात धर्माभिमनस स्तव। विनिवर्तयितुं बुद्धिः शक्यते रघुनन्दन।।2.34.32।।
Show English Translation
O my beloved son O delight of the Raghus you are devoted to truth and duty. It is difficult to dissuade you from your resolve .
ShlokaShloka 33
अद्य त्विदानीं रजनीं पुत्र मा गच्छ सर्वथा। एकाहदर्शनेनापि साधु तावच्चराम्यहम्।।2.34.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘बेटा रघुनन्दन! तुम सत्यस्वरूप और धर्मात्मा हो। तुम्हारे विचार को पलटना तो असम्भव है; परंतु रात भर और रह जाओ। सिर्फ एक रात के लिये सर्वथा अपनी यात्रा रोक दो। केवल एक दिन भी तो तुम्हें देखने का सुख उठा लूँ
Show English Translation
O son, by all means, do not go now, today, tonight Give me, at least, one day more to see (by with) you to my satisfaction.
ShlokaShloka 34
मातरं मां च सम्पश्यन् वसेमामद्य शर्वरीम्। तर्पित स्सर्वकामैस्त्वं श्वः काले साधयिष्यसि।।।2.34.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अपनी माता को और मुझको इस अवस्था में देखकर आज की इस रात में यहीं रह जाओ। मेरे द्वारा सम्पूर्ण अभिलषित वस्तुओं से तृप्त होकर कल प्रातःकाल यहाँ से जाना
Show English Translation
Stay tonight in the company of your mother and me. With all our desire satisfied, you can set out tomorrow at the appropriate time.
ShlokaShloka 35
दुष्करं क्रियते पुत्र सर्वथा राघव त्वया। मत्प्रियार्थं प्रियांस्त्यक्त्वा यद्यासि विजनं वनम्।।2.34.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे प्रिय पुत्र श्रीराम! तुम सर्वथा दुष्कर कार्य कर रहे हो। मेरा प्रिय करने के लिये ही तुमने इस प्रकार वन का आश्रय लिया है
Show English Translation
O my son, O descendant of the Raghus, you are called upon to accomplish, by all means, a very difficult task. For the sake of my pleasure you are forsaking your dear ones and going to the desolate forest.
ShlokaShloka 36
न चैतन्मे प्रियं पुत्र शपे सत्येन राघव। छन्नया चलितस्त्वस्मि स्त्रिया छन्नाग्निकल्पया।।2.34.36।।
Show English Translation
I swear by truth, O my beloved son, that your departure to the forest is in no way a pleasure to me. With a hidden motive, this woman who is like fire concealed by ashes has duped me.
ShlokaShloka 37
वञ्चना या तु लब्धा मे तां त्वं निस्तर्तुमिच्छसि। अनया वृत्तसादिन्या कैकेय्याऽभिप्रचोदितः।।.2.34.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘परंतु बेटा रघुनन्दन! मैं सत्य की शपथ खाकर कहता हूँ कि यह मुझे प्रिय नहीं है। मुझे तुम्हारा वन में जाना अच्छा नहीं लगता। यह मेरी स्त्री कैकेयी राख में छिपी हुई आग के समान भयंकर है। इसने अपने क्रूर अभिप्राय को छिपा रखा था। इसी ने आज मुझे मेरे अभीष्ट संकल्प से विचलित कर दिया है। कुलोचित सदाचार का विनाश करने वाली इस कैकेयी ने मुझे वरदान के लिये प्रेरित करके मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। इसके द्वारा जो वञ्चना मुझे प्राप्त हुई है, उसी को तुम पार करना चाहते हो
Show English Translation
Instigated by this Kaikeyi, the destroyer of traditions (of the race) I have been deceived for which you wish to pay.
ShlokaShloka 38
न चैतदाश्चर्यतमं यत्तज्येष्ठस्सुतो मम। अपानृतकथं पुत्र पितरं कर्तुमिच्छसि।।2.34.38।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुत्र! तुम अपने पिता को सत्यवादी बनाना चाहते हो। तुम्हारे लिये यह कोई अधिक आश्चर्य की बात नहीं है; क्योंकि तुम गुण और अवस्था दोनों ही दृष्टियों से मेरे ज्येष्ठ पुत्र हो’
Show English Translation
It is not a great surprise that you, O my son, being the eldest, want to make your father free from a false promise.
ShlokaShloka 39
अथ रामस्तथा श्रुत्वा पितुरार्तस्य भाषितम्। लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा दीनो वचनमब्रवीत्।।2.34.39।।
हिन्दी अर्थ देखें
अपने शोकाकुल पिता का यह कथन सुनकर उस समय छोटे भाई लक्ष्मणसहित श्रीराम ने दुःखी होकर कहा-
Show English Translation
Rama and Lakshmana were sad to hear the words of their anguished father. Rama replies:
ShlokaShloka 40
प्राप्स्यामि यानद्य गुणान्को मे श्वस्तान् प्रदास्यति। अपक्रमणमेवातः सर्वकामैरहं वृणे।।2.34.40।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज! आज यात्रा करके मैं जिन गुणों (लाभों) को पाऊँगा, उन्हें कल कौन मुझे देगा?* अतः मैं सम्पूर्ण कामनाओं के बदले आज यहाँ से निकल जाना ही अच्छा समझता हूँ और इसी का वरण करता हूँ॥४०॥ * ‘प्राप्स्यामि.. इस आधे श्लोक का अर्थ यह भी हो सकता है कि आज यहाँ रहकर जिन उत्तमोत्तम अभीष्ट पदार्थों को मैं पाऊँगा, उन्हें कल से कौन देगा?
Show English Translation
Who will give me the merit (of propriety) I earn today? Therefore, I want to depart (today), discarding all my desires.
ShlokaShloka 41
इयं सराष्ट्रा सजना धनधान्यसमाकुला। मया विसृष्टा वसुधा भरताय प्रदीयताम्।।2.34.41।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राष्ट्र और यहाँ के निवासी मनुष्यों सहित धनधान्य से सम्पन्न यह सारी पृथ्वी मैंने छोड़ दी। आप इसे भरत को दे दें
Show English Translation
The kingdom abdicated by me with all its people, its wealth and foodgrains may be bestowed on Bharata.
ShlokaShloka 42
वनवासकृता बुद्धिर्न च मेऽद्य चलिष्यति। यस्तुष्टेन वरो दत्तः कैकेय्यै वरद त्वया।।2.34.42।। दीयतां निखिलेनैव सत्यस्त्वं भव पार्थिव।
हिन्दी अर्थ देखें
मेरा वनवास विषयक निश्चय अब बदल नहीं सकेगा। वरदायक नरेश! आपने देवासुर-संग्राम में कैकेयी को जो वर देने की प्रतिज्ञा की थी, उसे पूर्णरूप से दीजिये और सत्यवादी बनिये॥४२ १/२॥
Show English Translation
My decision to go to the forest remains unchanged. O bestower of boons, O king honour to the last word the boons you had granted Kaikeyi. And adhere to truth.
ShlokaShloka 43
अहं निदेशं भवतो यथोक्तमनुपालयन्।।2.34.43।। चतुर्दश समा वत्स्ये वने वनचरैस्सह।
Show English Translation
As already said, I shall dwell in the forest for fourteen years with forest rangers, in obedience to your commands.
ShlokaShloka 44
मा विमर्शो वसुमती भरताय प्रदीयताम्।।2.34.44।। न हि मे काङ्क्षि��ं राज्यं सुखमात्मनि वा प्रियम्। यथानिदेशं कर्तुं वै तवैव रघुनन्दन।।2.34.45।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं आपकी उक्त आज्ञा का पालन करता हुआ चौदह वर्षों तक वन में वनचारी प्राणियों के साथ निवास करूँगा। आपके मन में कोई अन्यथा विचार नहीं होना चाहिये। आप यह सारी पृथ्वी भरत को दे दीजिये
Show English Translation
Do not brood. Bestow the kingdom on Bharata. I do not have any desire for the kingdom or pleasure. Nothing is dearer to me than compliance with your order, O Delight of the Raghu race
ShlokaShloka 45
अपगच्छतु ते दु:खं माभूर्बाष्पपरिप्लुतः। न हि क्षुभ्यति दुर्धर्षः समुद्रः सरितां पतिः।।2.34.46।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! मैंने अपने मन को सुख देने अथवा। स्वजनों का प्रिय करने के उद्देश्य से राज्य लेने की इच्छा नहीं की थी। आपकी आज्ञा का यथावत् रूप से पालन करने के लिये ही मैंने उसे ग्रहण करने की अभिलाषा की थी
Show English Translation
Let your grief go. Do not shed tears. The indomitable ocean, Lord of rivers, is never perturbed.
ShlokaShloka 46
नैवाहं राज्यमिच्छामि न सुखं न च मेदिनीम्। नैव सर्वानिमान् कामा न्नस्वर्गं नैव जीवितम्।।2.34.47।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आपका दुःख दूर हो जाय, आप इस प्रकार आँसू न बहावें। सरिताओं का स्वामी दुर्धर्ष समुद्र क्षुब्ध नहीं होता है—अपनी मर्यादा का त्याग नहीं करता है (इसी तरह आपको भी क्षुब्ध नहीं होना चाहिये)॥४६॥ नैवाहं राज्यमिच्छामि न सुखं न च मेदिनीम्। नैव सर्वानिमान् कामान् न स्वर्गं न च जीवितुम्॥४७॥ भावार्थ :- ‘मुझे न तो इस राज्य की, न सुख की, न पृथ्वी की, न इन सम्पूर्ण भोगों की, न स्वर्ग की और न जीवन की ही इच्छा है
Show English Translation
I desire no kingdom, no comfort, not this earth nor any pleasure nor heaven nor even life.
ShlokaShloka 47
त्वामहं सत्यमिच्छामि नानृतं पुरुषर्षभ। प्रत्यक्षं तव सत्येन सुकृतेन च ते शपे।।2.34.48।।
Show English Translation
I wish you, O best of men, to uphold truth and not falsehood. I swear this in your presence in the name of truth and on my merits acquired.
ShlokaShloka 48
न च शक्यं मया तात स्थातुं क्षणमपि प्रभो। स शोकं धारयस्वेमं न हि मेऽस्ति विपर्ययः।।2.34.49।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुरुषशिरोमणे! मेरे मन में यदि कोई इच्छा है तो यही कि आप सत्यवादी बनें। आपका वचन मिथ्या न होने पावे। यह बात मैं आपके सामने सत्य और शुभ कर्मों की शपथ खाकर कहता हूँ
Show English Translation
It is not possible for me, O father to stay here for a moment any longer. Restrain your grief. There can be no change in my resolve, O king
ShlokaShloka 49
अर्थितो ह्यस्मि कैकेय्या वनं गच्छेति राघव। मया चोक्तं व्रजामीति तत्सत्यमनुपालये।।2.34.50।।
हिन्दी अर्थ देखें
तात! प्रभो! अब मैं यहाँ एक क्षण भी नहीं ठहर सकता। अतः आप इस शोक को अपने भीतर ही दबा लें। मैं अपने निश्चय के विपरीत कुछ नहीं कर सकता
Show English Translation
'O Rama, go to the forest', Kaikeyi had said, and I have given her word I would go. I must fulfil my promise.
ShlokaShloka 50
मा चोत्कण्ठां कृथा देव वने रंस्यामहे वयम्। प्रशान्तहरिणाकीर्णे नानाशकुनिनादिते।।2.34.51।।
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‘रघुनन्दन! कैकेयी ने मुझसे यह याचना की कि ‘राम! तुम वन को चले जाओ’ मैंने वचन दिया था कि ‘अवश्य जाऊँगा’ उस सत्य का मुझे पालन करना
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Do not worry, O Lord We will enjoy (our stay in) the peaceful forest full of deer and resounding with the chirpings of various birds.
ShlokaShloka 51
पिता हि दैवतं तात देवतानामपि ��्मृतम्। तस्माद्दैवतमित्येव करिष्यामि पितुर्वचः।।2.34.52।।
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‘देव! बीच में हमें देखने या हमसे मिलने के लिये आप उत्कण्ठित न होंगे। शान्तस्वभाव वाले मृगों से भरे हुए और भाँति-भाँति के पक्षियों के कलरवों से गूंजते हुए उस वन में हमलोग बड़े आनन्द से रहेंगे
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Father is divine even for the gods as cited in scriptures, therefore, looking upon father as my god, I will carry out his words, O father
ShlokaShloka 52
चतुर्दशसु वर्षेषु गतेषु नरसत्तम। पुनर्द्रक्ष्यसि मां प्राप्तं सन्तापोऽयं विमुच्यताम्।।2.34.53।।
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‘तात! पिता देवताओं के भी देवता माने गये हैं। अतः मैं देवता समझकर ही पिता (आप) की आज्ञा का पालन करूँगा
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I shall return after fourteen years have passed, O best among men you will see me back, Give up this grief.
ShlokaShloka 53
येन संस्तम्भनीयोऽयं सर्वो बाष्पगलो जनः। स त्वं पुरुषशार्दूल किमर्थं विक्रियां गतः।।2.34.54।।
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‘नृपश्रेष्ठ! अब यह संताप छोड़िये। चौदह वर्ष बीत जाने पर आप फिर मुझे आया हुआ देखेंगे
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When you, O tiger among men, are required (as king) to pacify those whose throats are choked with tears, why this change in you?
ShlokaShloka 54
पुरं च राष्ट्रं च मही च केवला मया निसृष्टा भरताय दीयताम्। अहं निदेशं भवतोऽनुपालयन् वनं गमिष्यामि चिराय सेवितुम्।।2.34.55।।
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‘पुरुषसिंह! यहाँ जितने लोग आँसू बहा रहे हैं, इन सबको धैर्य बँधाना आपका कर्तव्य है; फिर आप स्वयं ही इतने विकल कैसे हो रहे हैं?
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I am renouncing this city, kingdom and this entire earth, and let all this be conferred on Bharata. In obedience to your order, I shall go and live in the forest for a long time.
ShlokaShloka 55
मया निसृष्टां भरतो महीमिमां सशैलषण्डां सपुरां सकाननाम्। शिवां सुसीमामनुशास्तु केवलं त्वया यदुक्तं नृपते तथास्तु तत्।।2.34.56।।
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‘यह नगर, यह राज्य और यह सारी पृथ्वी मैंने छोड़ दी। आप यह सब कुछ भरत को दे दीजिये।अब मैं आपके आदेश का पालन करता हुआ । दीर्घकालतक वन में निवास करने के लिये यहाँ से यात्रा कर रहा हूँ
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I am leaving behind, O king this (auspicious) land with its welllaid boundaries, mountain ranges, cities and forests, which Bharata alone should rule. Let it happen the way you have said.
ShlokaShloka 56
न मे तथा पार्थिव धीयते मनो महत्सु कामेषु न चात्मनःप्रिये। यथा निदेशे तव शिष्टसम्मते व्यपैतु दुःखं तव मत्कृतेऽनघ।।2.34.57।।
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‘मेरी छोड़ी हुई पर्वतखण्डों, नगरों और उपवनोंसहित इस सारी पृथ्वी का भरत कल्याणकारिणी मर्यादाओं में स्थित रहकर पालन करें। नरेश्वर! आपने जो वचन दिया है, वह पूर्ण हो
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O king my mind derives no happiness from great enjoyment or personal comfort as it does from carrying out your order. This is corroborated by the wise. Your grief (relating to filfilment of the vow) on mt account will be dispelled, O sinless one
ShlokaShloka 57
तदद्य नैवानघ राज्यमव्ययं न सर्वकामान्न सुखं न मैथिलीम्। न जीवितं त्वामनृतेन योजयन् वृणीय सत्यं व्रतमस्तु ते तथा।।2.34.58।।
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‘पृथ्वीनाथ! निष्पाप महाराज! सत्पुरुषोंद्वारा अनुमोदित आपकी आज्ञा का पालन करने में मेरा मन जैसा लगता है, वैसा बड़े-बड़े भोगों में तथा अपने किसी प्रिय पदार्थ में भी नहीं लगता; अतः मेरे लिये आपके मन में जो दुःख है, वह दूर हो जाना चाहिये
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O sinless one by associating you with falsehood I will neither seek this eternal kingdom nor objects of desires nor objects of happiness nor Maithili nor even my life. I only wish that your vow comes true.
ShlokaShloka 58
फलानि मूलानि च भक्षयन्वने गिरींश्च पश्यन् सरितस्सरांसि च। वनं प्रविश्यैव विचित्रपादपम् सुखी भविष्यामि तवास्तु निर्वृतिः।।2.34.59।।
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‘निष्पाप नरेश! आज आपको मिथ्यावादी बनाकर मैं अक्षय राज्य, सब प्रकार के भोग, वसुधा का आधिपत्य, मिथिलेशकुमारी सीता तथा अन्य किसी अभिलषित पदार्थ को भी स्वीकार नहीं कर सकता। मेरी एक मात्र इच्छा यही है कि ‘आपकी प्रतिज्ञा सत्य हो’
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Entering the forest full of various kinds of trees I shall be happy to view the mountains, rivers and the lakes and to eat fruits and roots. (Hence) do not grieve.
ShlokaShloka 59
एवं स राजा व्यसनाभिपन्नः शोकेन दुःखेन च ताम्यमानः। आलिङ्ग्य पुत्रं सुविनष्टसंज्ञो मोहं गतो नैव चिचेष्ट किंञ्चित्।।2.34.60।।
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‘मैं विचित्र वृक्षों से युक्त वन में प्रवेश करके फलमूल का भोजन करता हुआ वहाँ के पर्वतों, नदियों और सरोवरों को देख-देखकर सुखी होऊँगा; इसलिये आप अपने मन को शान्त कीजिये’
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The king, immersed in anguish and distressed with tears of grief embraced his son and then fell down unconscious on the floor and lay motionless.
ShlokaShloka 60
देव्यस्तत स्संरुरुदुस्समेता स्तां वर्जयित्वा नरदेवपत्नीम्। रुदन् सुमन्त्रोऽऽपि जगाम मूर्छां हाहाकृतं तत्र बभूव सर्वम्।।2.34.61।।
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श्रीराम के ऐसा कहने पर पुत्र-बिछोह के संकट में पड़े हुए राजा दशरथ ने दुःख और संताप से पीड़ित हो उन्हें छाती से लगाया और फिर अचेत होकर वे पृथ्वी पर गिर पड़े। उस समय उनका शरीर जड की भाँति कुछ भी चेष्टा न कर सका
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Thereupon all the queens except Kaikeyi, wailed loudly. Sumantra, too, cried and fell unconscious. The entire palace cried 'Alas, Alas'. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे चतुस्त्रिंशस्सर्गः।। Thus ends the thirtyfourth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.