Ayodhya Kanda

Sarga 115: Bharata proceeds to Nandigrama along with Satrughna -- Consecration of Rama's sandals.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 115

27 shlokas

ShlokaShloka 1
ततो निक्षिप्य मातृ़ स्स अयोध्यायां दृढ व्रतः। भरत श्शोकसन्तप्तो गुरूनिदमथाब्रवीत्।।2.115.1।।
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‘अब मैं नन्दिग्राम को जाऊँगा, इसके लिये आप सब लोगों की आज्ञा चाहता हूँ। वहाँ श्रीराम के बिना प्राप्त होने वाले इस सारे दुःख को सहन करूँगा
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After keeping his mothers in Ayodhya, the griefstricken Bharata who was firm in his vows, said to the elders:
ShlokaShloka 2
नन्दिग्रामं गमिष्यामि सर्वानामन्त्रयेऽद्य वः। तत्र दुःखमिदं सर्वं सहिष्ये राघवं विना।।2.115.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब मैं नन्दिग्राम को जाऊँगा, इसके लिये आप सब लोगों की आज्ञा चाहता हूँ। वहाँ श्रीराम के बिना प्राप्त होने वाले इस सारे दुःख को सहन करूँगा
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I take leave of all of you. I am going to Nandigrama where I shall keep company with grief on account of Rama's absence.
ShlokaShloka 3
गतश्च वा दिवं राजा वनस्थश्च गुरुर्मम। रामं प्रतीक्षे राज्याय स हि राजा महायशाः।।2.115.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अहो! महाराज (पूज्य पिताजी) तो स्वर्ग को सिधारे और वे मेरे गुरु (पूजनीय भ्राता) श्रीरामचन्द्रजी वन में विराज रहे हैं। मैं इस राज्य के लिये वहाँ श्रीराम की प्रतीक्षा करता रहूँगा; क्योंकि वे महायशस्वी श्रीराम ही हमारे राजा हैं
Show English Translation
King Dasaratha has gone to heaven. My elder brother and guru is in the forest. I shall await his return for ruling the kingdom since he alone is the illustrious king of Ayodhya.
ShlokaShloka 4
एतच्छ्रुत्वा शुभं वाक्यं भरतस्य महात्मनः। अब्रुवन्मन्त्रिणस्सर्वे वसिष्ठश्च पुरोहितः।।2.115.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
महात्मा भरत का यह शुभ वचन सुनकर सब मन्त्री और पुरोहित वसिष्ठ जी बोले-
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Hearing the auspicious words of the magnanimous Bharata the counsellors, priests including Vasistha replied:
ShlokaShloka 5
सुभृशं श्लाघनीयं च यदुक्तं भरत त्वया। वचनं भ्रातृवात्सल्यादनुरूपं तवैव तत्।।2.115.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भरत! भ्रातृभक्ति से प्रेरित होकर तुमने जो बात कही है, वह बहुत ही प्रशंसनीय है वास्तव में वह तुम्हारे ही योग्य है
Show English Translation
O Bharata, the words you have uttered out of devotion to your brother which befit you alone are highly praiseworthy.
ShlokaShloka 6
नित्यं ते बन्धुलुब्धस्य तिष्ठतो भ्रातृसौहृदे। आर्यमार्गं प्रपन्नस्य नानुमन्येत कः पुमान्।।2.115.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
मन्त्रियों का अपनी रुचि के अनुरूप प्रिय वचन सुनकर भरत ने सारथि से कहा—’मेरा रथ जोतकर तैयार किया जाय’
Show English Translation
You are always attached to your relations, firmly established in the welfare of your brothers and are pursuing a noble path. Who would not approve of this?
ShlokaShloka 7
मन्त्रिणां वचनं श्रुत्वा यथाभिलषितं प्रियम्। अब्रवीत्सारथिं वाक्यं रथो मे युज्यतामिति।।2.115.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
मन्त्रियों का अपनी रुचि के अनुरूप प्रिय वचन सुनकर भरत ने सारथि से कहा—’मेरा रथ जोतकर तैयार किया जाय’
Show English Translation
On hearing the pleasing words of the counsellors which were in conformity with his desire, Bharata said to his charioteer, 'Harness my chariot'.
ShlokaShloka 8
प्रहृष्टवदन स्सर्वा मातृ़ स्समभिवाद्य सः। आरुरोह रथं श्रीमान् शत्रुघ्नेन समन्वितः।।2.115.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
फिर उन्होंने प्रसन्नवदन होकर सब माताओं से बातचीत करके जाने की आज्ञा ली। इसके बाद शत्रुघ्न के सहित श्रीमान् भरत रथ पर सवार हुए
Show English Translation
With a cheerful countenance illustrious Bharata paid obeisance to all his mothers and, acompanied by Satrughna, ascended the chariot.
ShlokaShloka 9
आरुह्य च रथं शीघ्रं शत्रुघ्नभरतावुभौ। ययतुः परमप्रीतौ वृतौ मन्त्रिपुरोहितैः।।2.115.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
रथ पर आरूढ़ होकर परम प्रसन्न हुए भरत और शत्रुघ्न दोनों भाई मन्त्रियों तथा पुरोहितों से घिरकर शीघ्रतापूर्वक वहाँ से प्रस्थित हुए
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Highly pleased, Bharata and Satrughna ascended the chariot and, surrounded by counsellors and priests, set out speedily.
ShlokaShloka 10
अग्रतो गुरव: सर्वे वसिष्ठप्रमुखा द्विजाः। प्रययुः प्राङ्ग्मुखा स्सर्वे नन्दिग्रामो यतोऽभवत्।।2.115.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
आगे-आगे वसिष्ठ आदि सभी गुरुजन एवं ब्राह्मणचल रहे थे। उन सब लोगों ने अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या से पूर्वाभिमुख होकर यात्रा की और उस मार्ग को पकड़ा, जो नन्दिग्राम की ओर जाता था
Show English Translation
Preceded by preceptors, like Vasistha and other brahmins, all of them proceeded eastward in the direction of Nandigrama.
ShlokaShloka 11
बलं च तदनाहूतं गजाश्वरथसङ्कुलम्। प्रययौ भरते याते सर्वे च पुरवासिनः।।2.115.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
भरत के प्रस्थित होने पर हाथी, घोड़े और रथों से भरी हुई सारी सेना भी बिना बुलाये ही उनके पीछे पीछे चल दी और समस्त पुरवासी भी उनके साथ हो लिये
Show English Translation
When Bharata left, the army with hordes of elephants, horses and chariots and inhabitants of Ayodhya followed him unbidden.
ShlokaShloka 12
रथस्थः स तु धर्मात्मा भरतो भ्रातृवत्सलः। नन्दिग्रामं ययौ तूर्णं शिरस्यादाय पादुके।।2.115.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
धर्मात्मा भ्रातृवत्सल भरत अपने मस्तक पर भगवान् श्रीराम की चरणपादु का लिये रथ पर बैठकर बड़ी शीघ्रता से नन्दिग्राम की ओर चले
Show English Translation
Righteous Bharata who was deeply attached to his brother proceeded speedily towards Nandigrama on the chariot bearing the sandals of Rama on his head.
ShlokaShloka 13
ततस्तु भरतः क्षिप्रं नन्दिग्रामं प्रविश्य सः। अवतीर्य रथात्तूर्णं गुरूनिदमुवाच ह।।2.115.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
नन्दिग्राम में शीघ्र पहुँचकर भरत तुरंत ही रथ से उतर पड़े और गुरुजनों से इस प्रकार बोले-
Show English Translation
Bharata entered Nandigrama quickly, alighted from the chariot and then, addressing, the preceptors, said:
ShlokaShloka 14
एतद्राज्यं मम भ्रात्रा दत्तं सन्नयासवत्स्वयम्। योगक्षेमवहे चेमे पादुके हेमभूषिते।।2.115.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे भाई ने यह उत्तम राज्य मुझे धरोहर के रूपमें दिया है, उनकी ये सुवर्णविभूषित चरणपादुकाएँ ही सबके योगक्षेम का निर्वाह करनेवाली हैं’
Show English Translation
My brother gave me this kingdom as a trust. He gave me the sandals decorated with gold for securing the prosperity and security (of the kingdom).
ShlokaShloka 15
भरत श्शिरसा कृत्वा सन्न्यासं पादुके ततः। अब्रवीद्धुःखसंतप्त स्सर्वं प्रकृतिमण्डलम्।।2.115.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् भरत ने मस्तक झुकाकर उन चरणपादुकाओं के प्रति उस धरोहर रूप राज्य को समर्पित करके दुःख से संतप्त हो समस्त प्रकृतिमण्डल (मन्त्री, सेनापति और प्रजा आदि) से कहा-
Show English Translation
Then Bharata placed the sandals held in trust on his head and, overcome with grief, he addressed the concourse of subjects:
ShlokaShloka 16
छत्रं धारयत क्षिप्रमार्यपादाविमौ मतौ। आभ्यां राज्ये स्थितो धर्मः पादुकाभ्यां गुरोर्मम।।2.115.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप सब लोग इन चरणपादुकाओं के ऊपर छत्र धारण करें। मैं इन्हें आर्य रामचन्द्रजी के साक्षात् चरण मानता हूँ। मेरे गुरु की इन चरणपादुकाओं से ही इस राज्य में धर्म की स्थापना होगी
Show English Translation
Hold the royal paresol now. This is the accepted symbol of the exalted feet of my brother. These sandals shall establish righteousness in the kingdom.
ShlokaShloka 17
भ्रात्रा हि मयि संन्यासो निक्षिप्त स्सौहृदादयम्। तमिमं पालयिष्यामि राघवागमनं प्रति।।2.115.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे भाई ने प्रेम के कारण ही यह धरोहर मुझे सौंपी है, अतः मैं उनके लौटने तक इसकी भलीभाँति रक्षा करूँगा
Show English Translation
This kingdom has been given me by my brother out of affection as a trust. I shall safeguard it until Rama's return.
ShlokaShloka 18
क्षिप्रं संयोजयित्वातु राघवस्य पुनस्स्वयम्। चरणौ तौ तु रामस्य द्रक्ष्यामि सहपादुकौ।।2.115.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरघुनाथजी के आने पर उनसे मिलते ही मैं अपने उन गुरुदेव को यह राज्य समर्पित करके उनकी आज्ञा के अधीन हो उन्हीं की सेवा में लग जाऊँगा। राज्य का यह भार उन पर डालकर मैं हलका हो जाऊँगा
Show English Translation
'I myself shall see soon Rama's feet reunited with these sandals.
ShlokaShloka 19
ततो निक्षिप्तभारोऽहं राघवेण समागतः। निवेद्य गुरवे राज्यं भजिष्ये गुरुवृत्तिताम्।।2.115.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरघुनाथजी के आने पर उनसे मिलते ही मैं अपने उन गुरुदेव को यह राज्य समर्पित करके उनकी आज्ञा के अधीन हो उन्हीं की सेवा में लग जाऊँगा। राज्य का यह भार उन पर डालकर मैं हलका हो जाऊँगा
Show English Translation
The burden of this kingdom has been cast on me. On reunion with Rama, I shall hand it over to my brother, my guru and shall be engaged in his service.
ShlokaShloka 20
राघवाय च सन्यासं दत्त्वेमे वरपादुके। राज्यं चेदमयोध्यां च धूतपापो भवामि च।।2.115.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे पास धरोहर रूप में रखे हुए इस राज्य को, अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या को तथा इन श्रेष्ठ पादुकाओं को श्रीरघुनाथजी की सेवा में समर्पित करके मैं सब प्रकार के पापताप से मुक्त हो जाऊँगा
Show English Translation
Restoring the sacred sandals, the kingdom and this city of Ayodhya held as a trust by me, I shall be cleansed of the sin.
ShlokaShloka 21
अभिषिक्ते तु काकुत्स्थे प्रहृष्टमुदिते जने। प्रीतिर्मम यशश्चैव भवेद्राज्याच्चतुर्गुणम्।।2.115.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ककुत्स्थकुलभूषण श्रीराम का अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या के राज्य पर अभिषेक हो जाने पर जब सब लोग हर्ष और आनन्द में निमग्न हो जायेंगे, तब मुझे राज्य पाने की अपेक्षा चौगुनी प्रसन्नता और चौगुने यश की प्राप्ति होगी’
Show English Translation
After Rama is coronated and the people are delighted and pleased, the renown and pleasure for me will be fourfold (what is obtained from ruling the kingdom).
ShlokaShloka 22
एवं तु विलपन्दीनो भरत स्समहायशाः। नन्दिग्रामेऽकरोद्राज्यं दुःखितो मन्त्रिभिस्सह।।2.115.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार दीनभाव से विलाप करते हुए दुःखमग्न महायशस्वी भरत मन्त्रियों के साथ नन्दिग्राम में रहकर राज्य का शासन करने लगे
Show English Translation
Thus lamenting in desolation and grief, the illustrious Bharata lived in Nandigrama along with his counsellors and started ruling the kingdom.
ShlokaShloka 23
स वल्कलजटाधारी मुनिवेषधरः प्रभुः। नन्दिग्रामेऽवसद्वीर स्ससैन्यो भरतस्तदा।।2.115.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
सेनासहित प्रभावशाली धीर-वीर भरत ने उस समय वल्कल और जटा धारण करके मुनिवेषधारी हो नन्दिग्राम में निवास किया
Show English Translation
Bharata, the warrior and lord, wore bark garments and matted locks and lived the life of an ascetic in Nandigrama along with his army.
ShlokaShloka 24
रामागमनमाकाङ्क्षन्भरतो भ्रातृवत्सलः। भ्रातुर्वचनकारी च प्रतिज्ञापारगस्तथा।।2.115.24।। पादुके त्वभिषिच्याथ नन्दिग्रामेऽवसत्तदा।
हिन्दी अर्थ देखें
भरतजी राज्य-शासनका समस्त कार्य भगवान् श्रीराम की चरणपादुकाओं को निवेदन करके करते थे तथा स्वयं ही उनके ऊपर छत्र लगाते और चँवर डुलाते थे
Show English Translation
Bharata who was attached to his brother and ever obedient to him, fulfilled his vow. He coronated the sandals and lived at Nandigrama longing for the return of Rama.
ShlokaShloka 25
स वालव्यजनं छत्रं धारयामास स स्वयं। भरत श्शासनं सर्वं पादुकाभ्यां निवेदयन्।।2.115.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
भरतजी राज्य-शासनका समस्त कार्य भगवान् श्रीराम की चरणपादुकाओं को निवेदन करके करते थे तथा स्वयं ही उनके ऊपर छत्र लगाते और चँवर डुलाते थे
Show English Translation
Bharata reported everything relating to the kingdom to the sandals first. Waving the chamaras (a fan made of yak tail) himself, he held the royal parasol over them.
ShlokaShloka 26
ततस्तु भरत शश्रीमानभिषिच्याऽऽर्यपादुके। तदधीनस्तदा राज्यं कारयामास सर्वदा।।2.115.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीमान् भरत बड़े भाई की उन पादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके सदा उनके अधीन रहकर उन दिनों राज्य का सब कार्य मन्त्री आदि से कराते थे।
Show English Translation
After the coronation of the sandals of his esteemed brother Rama, illustrious Bharata ruled the kingdom, subordianating himself to them.
ShlokaShloka 27
तदा हि यत्कार्यमुपैति किञ्चिदुपायनं चोपहृतं महार्हम्। स पादुकाभ्यां प्रथमं निवेद्य चकार पश्चाद्भरतो यथावत्।।2.115.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय जो कोई भी कार्य उपस्थित होता, जो भी बहुमूल्य भेंट आती, वह सब पहले उन पादुकाओं को निवेदन करके पीछे भरत जी उसका यथावत् प्रबन्ध करते थे
Show English Translation
Whenever an issue, however small, arose, Bharata kept the sandals informed. Whenever a valuable gift was presented, he offered it to the sandals before he accepted it. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे पञ्चदशोत्तरशततमस्सर्गः।। Thus ends the hundredfifteenth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.