Ayodhya Kanda

Sarga 86: Guha's reminiseesces.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 86

23 shlokas

ShlokaShloka 1
आचचक्षेऽथ सद्भावं लक्ष्मणस्य महात्मनः। भरतायाप्रमेयाय गुहो गहनगोचरः।।2.86.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
वनचारी गुह ने अप्रमेय शक्तिशाली भरत से महात्मा लक्ष्मण के सद्भाव का इस प्रकार वर्णन किया—
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Then Guha, the forest ranger, described to Bharata the countless qualities of the goodnatured, magnanimous Lakshmana:
ShlokaShloka 2
तं जाग्रतं गुणैर्युक्तं शरचापासिधारिणम्। भ्रातृगुप्त्यर्थमत्यन्तमहं लक्ष्मणमबृवम्।।2.86.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण अपने भाई की रक्षा के लिये श्रेष्ठ धनुष और बाण धारण किये अधिक कालतक जागते रहे। उस समय उन सद्गुणशाली लक्ष्मण से मैंने इस प्रकार कहा—
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I spoke to the virtuous Lakshmana, who was holding arrows, bow and sword in his hand and keeping awake completely for the protection of his brother.
ShlokaShloka 3
इयं तात सुखा शय्या त्वदर्थमुपकल्पिता। प्रत्याश्वसिहि शेष्वास्यां सुखं राघवनन्दन।।2.86.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तात रघुकुलनन्दन! मैंने तुम्हारे लिये यह सुखदायिनी शय्या तैयार की है। तुम इसपर सुखपूर्वक सोओ और भलीभाँति विश्राम करो। यह (मैं) सेवक तथा इसके साथ के सब लोग वनवासी होने के कारण दुःख सहन करने के योग्य हैं (क्योंकि हम सबको कष्ट सहने का अभ्यास है); परंतु तुम सुख में ही पले होने के कारण उसी के योग्य हो। धर्मात्मन्! हमलोग श्रीरामचन्द्रजी की रक्षा के लिये रातभर जागते रहेंगे
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My friend, Lakshmana, the delight of the Raghavas this comfortable couch has been arranged for you. Lie down peacefully without any anxiety.
ShlokaShloka 4
उचितोऽयं जनस्सर्वो दुःखानां त्वं सुखोचितः। धर्मात्मंस्तस्य गुप्त्यर्थं जागरिष्यामहे वयम्।।2.86.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तात रघुकुलनन्दन! मैंने तुम्हारे लिये यह सुखदायिनी शय्या तैयार की है। तुम इसपर सुखपूर्वक सोओ और भलीभाँति विश्राम करो। यह (मैं) सेवक तथा इसके साथ के सब लोग वनवासी होने के कारण दुःख सहन करने के योग्य हैं (क्योंकि हम सबको कष्ट सहने का अभ्यास है); परंतु तुम सुख में ही पले होने के कारण उसी के योग्य हो। धर्मात्मन्! हमलोग श्रीरामचन्द्रजी की रक्षा के लिये रातभर जागते रहेंगे
Show English Translation
O righteous one you are used to conforts where as all of our people are accustomed to hardships. So we will stay awake and protect Rama.
ShlokaShloka 5
नहि रामात्प्रियतरो ममास्ति भुवि कश्चन। मोत्सुकोऽभूर्ब्रवीम्येतदप्यसत्यं तवाग्रतः।।2.86.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं तुम्हारे सामने सत्य कहता हूँ कि इस भूमण्डल में मुझे श्रीराम से बढ़कर प्रिय दूसरा कोई नहीं है; अतः तुम इनकी रक्षा के लिये उत्सुक न होओ
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To me, there is none on earth dearer than Rama. Do not have any anxiety. I am telling you the truth.
ShlokaShloka 6
अस्य प्रसादादाशंसे लोकेऽस्मिन् सुमहद्यशः। धर्मावाप्तिं च विपुलामर्थकामौ च केवलम्।।2.86.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इन श्रीरघुनाथजी के प्रसाद से ही मैं इस लोक में महान् यश, प्रचुर धर्मलाभ तथा विशुद्ध अर्थ एवं भोग्य वस्तु पाने की आशा करता हूँ
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By the grace of Rama, I want to acquire in this world great renown, abundance of righteousness, absolute artha (prosperity) and kama (pleasure).
ShlokaShloka 7
सोऽहं प्रियसखं रामं शयानं सह सीतया। रक्षिष्यामि धनुष्पाणि स्सर्वै स्स्वैर्ज्ञातिभिस्सह।।2.86.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः मैं अपने समस्त बन्धु-बान्धवों के साथ हाथ में धनुष लेकर सीता के साथ सोये प्रिय सखा श्रीराम की (सब प्रकार से) रक्षा करूँगा
Show English Translation
As for me, bow in hand and all my kinsmen with me, I shall protect my dear friend Rama who is resting with Sita.
ShlokaShloka 8
न हि मेऽविदितं किञ्चिद्वनेऽस्मिंश्चरत स्सदा। चतुरङ्गं ह्यपि बलं प्रसहेम वयं युधि।।2.86.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
“इस वन में सदा विचरते रहने के कारण मुझसे यहाँ की कोई बात छिपी नहीं है। हमलोग यहाँ युद्ध में शत्रु की चतुरङ्गिणी सेना का भी अच्छी तरह सामना कर सकते हैं’
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Nothing is unknown to me in this forest in which I range about continually. We can withstand an army of four divisions in a battle.
ShlokaShloka 9
एवमस्माभिरुक्तेन लक्ष्मणेन महात्मना। अनुनीता वयं सर्वे धर्ममेवानुपश्यता।। 2.86.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हमारे इस प्रकार कहने पर धर्म पर ही दृष्टि रखने वाले महात्मा लक्ष्मण ने हम सब लोगों से अनुनयपूर्वक कहा-
Show English Translation
The magnanimous Lakshmana, established in dharma, replied:
ShlokaShloka 10
कथं दाशरथौ भूमौ शयाने सह सीतया। शक्या निद्रा मया लब्धुं जीवितं वा सुखानि वा।।2.86.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निषादराज ! जब दशरथनन्दन श्रीराम देवी सीता के साथ भूमिपर शयन कर रहे हैं, तब मेरे लिये उत्तम शय्या पर सोकर नींद लेना, जीवन-धारण के लिये स्वादिष्ट अन्न खाना अथवा दूसरे-दूसरे सुखों को भोगना कैसे सम्भव हो सकता है ?
Show English Translation
While Rama sleep on the ground with Sita, how can I find sleep or joy or comfort?
ShlokaShloka 11
यो न देवासुरैस्सर्वैश्शक्यः प्रसहितुं युधि। तं पश्य गुह संविष्टं तृणेषु सह सीतया।।2.86.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘गुह ! देखो, सम्पूर्ण देवता और असुर मिलकर भी युद्ध में जिनके वेग को नहीं सह सकते, वे ही श्रीराम इस समय सीता के साथ तिनकों पर सो रहे हैं
Show English Translation
O Guha behold Rama, whom gods and demons combined cannot withstand in a battle now lying on a bed of grass with Sita.
ShlokaShloka 12
महता तपसा लब्धो विविधैश्च परिश्रमैः। एको दशरथस्यैष पुत्रस्सदृशलक्षणः।।2.86.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महान् तप और नाना प्रकार के परिश्रमसाध्य उपायों द्वारा जो यह महाराज दशरथ को अपने समान उत्तम लक्षणों से युक्त ज्येष्ठ पुत्र के रूप में प्राप्त हुए हैं, उन्हीं इन श्रीराम के वन में आ जाने से राजा दशरथ अधिक काल तक जीवित नहीं रह सकेंगे जान पड़ता है निश्चय ही यह पृथ्वी अब शीघ्र विधवा हो जायगी
Show English Translation
Rama is the only one among the sons who resembles his father in various virtues. Dasaratha obtained him after a great deal of austerities and efforts as well.
ShlokaShloka 13
अस्मिन्प्रव्राजिते राजा न चिरं वर्तयिष्यति। विधवा मेदिनी नूनं क्षिप्रमेव भविष्यति।।2.86.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महान् तप और नाना प्रकार के परिश्रमसाध्य उपायों द्वारा जो यह महाराज दशरथ को अपने समान उत्तम लक्षणों से युक्त ज्येष्ठ पुत्र के रूप में प्राप्त हुए हैं, उन्हीं इन श्रीराम के वन में आ जाने से राजा दशरथ अधिक काल तक जीवित नहीं रह सकेंगे जान पड़ता है निश्चय ही यह पृथ्वी अब शीघ्र विधवा हो जायगी
Show English Translation
After Rama is exiled, king Dasaratha will not survive for long and surely the earth will soon be widowed.
ShlokaShloka 14
विनद्य सुमहानादं श्रमेणोपरताः स्त्रियः। निर्घोषो विरतो नूनमध्य राजनिवेशने।।2.86.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अवश्य ही अब रनिवास की स्त्रियाँ बड़े जोर से आर्तनाद करके अधिक श्रम के कारण अब चुप हो गयी होंगी और राजमहल का वह हाहाकार इस समय शान्त हो गया होगा
Show English Translation
The women of the inner apartment who lamented loudly, must have stopped weeping out of weariness. By now, the clamour in the king's palace would have surely subsided.
ShlokaShloka 15
कौसल्या चैव राजा च तथैव जननी मम। नाशंसे यदि जीवेयुस्सर्वे ते शर्वरीमिमाम्।।2.86.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महारानी कौसल्या, राजा दशरथ तथा मेरी माता सुमित्रा—ये सब लोग आज की इस रात तक जीवित रह सकेंगे या नहीं यह मैं नहीं कह सकता
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I doubt whether the king, Kausalya and my mother Sumitra and the rest of them will outlive this night.
ShlokaShloka 16
जीवेदपि च मे माता शत्रुघ्नस्यान्ववेक्षया। दुःखिता या तु कौसल्या वीरसूर्विनशिष्यति।।2.86.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रुघ्न की बाट देखने के कारण सम्भव है, मेरी माता सुमित्रा जीवित रह जायँ; परंतु पुत्र के विरह से दुःख में डूबी हुई वीर-जननी कौसल्या अवश्य नष्ट हो जायँगी
Show English Translation
My mother might live, looking at Satrughna. But Kausalya, who is the mother of a hero, will die from extreme grief.
ShlokaShloka 17
अतिक्रान्तमतिक्रान्तमनवाप्य मनोरथम्। राज्ये राममनिक्षिप्य पिता मे विनशिष्यति।।2.86.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उनकी उस मृत्यु का समय उपस्थित होने पर जो लोग वहाँ रहेंगे और मेरे मरे हुए पिता महाराज दशरथ का सभी प्रेतकार्यों में संस्कार करेंगे, वे ही सफल मनोरथ और भाग्यशाली हैं
Show English Translation
My father, king Dasaratha, failing to fulfil his cherished desires one after another and unable to place Rama on the throne, will pass away.
ShlokaShloka 18
सिद्धार्थाः पितरं वृत्तं तस्मिन्काले ह्युपस्थिते। प्रेतकार्येषु सर्वेषु संस्करिष्यन्ति भूमिपम्।।2.86.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उनकी उस मृत्यु का समय उपस्थित होने पर जो लोग वहाँ रहेंगे और मेरे मरे हुए पिता महाराज दशरथ का सभी प्रेतकार्यों में संस्कार करेंगे, वे ही सफल मनोरथ और भाग्यशाली हैं
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When the moment of death arrives for my father, those who perform the funeral rites for him would have fulfilled their desire.
ShlokaShloka 19
रम्यचत्वरसंस्थानां सुविभक्तमहापथाम्। हर्म्यप्रासादम्पन्नां सर्वरत्नविभूषिताम्।।2.86.19।। गजाश्वरथसंबाधां तूर्यनादविनादिताम्। सर्वकल्याणसंपूर्णां हृष्टपुष्टजनाकुलाम्।।2.86.20।। आरामोद्यानसंपूर्णां समाजोत्सवशालिनीम्। सुखिता विचरिष्यन्ति राजधानीं पितुर्मम।।2.86.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘(यदि पिताजी जीवित रहे तो) रमणीय चबूतरों और चौराहों के सुन्दर स्थानों से युक्त, पृथक्-पृथक् बने हुए विशाल राजमार्गों से अलंकृत, धनिकों की अट्टालिकाओं और देवमन्दिरों एवं राजभवनों से सम्पन्न, सब प्रकार के रत्नों से विभूषित, हाथियों,घोड़ों और रथों के आवागमन से भरी हुई, विविध वाद्यों की ध्वनियों से निनादित, समस्त कल्याणकारी वस्तुओं से भरपूर, हृष्ट-पुष्ट मनुष्यों से व्याप्त, पुष्पवाटिकाओं और उद्यानों से परिपूर्ण तथा सामाजिक उत्सवों से सुशोभित हुई मेरे पिता की राजधानी अयोध्यापुरी में जो लोग विचरेंगे, वास्तव में वे ही सुखी हैं
Show English Translation
There in the capital of my father with its lovely crossroads and squares, welllaid highways, full of mansions and palaces encrusted with all kinds of precious stones, teeming with elephants, horses and chariots, resounding with trumpets, and with wellbeing everywhere, and plenty of pleasuregardens, and parks and community festivals, people sound in health would be moving about in great comfort.
ShlokaShloka 20
अपिसत्यप्रतिज्ञेन सार्धं कुशलिना वयं। निवृत्ते समये ह्यस्मिन् सुखिताः प्रविशेमहि।।2.86.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘(यदि पिताजी जीवित रहे तो) रमणीय चबूतरों और चौराहों के सुन्दर स्थानों से युक्त, पृथक्-पृथक् बने हुए विशाल राजमार्गों से अलंकृत, धनिकों की अट्टालिकाओं और देवमन्दिरों एवं राजभवनों से सम्पन्न, सब प्रकार के रत्नों से विभूषित, हाथियों,घोड़ों और रथों के आवागमन से भरी हुई, विविध वाद्यों की ध्वनियों से निनादित, समस्त कल्याणकारी वस्तुओं से भरपूर, हृष्ट-पुष्ट मनुष्यों से व्याप्त, पुष्पवाटिकाओं और उद्यानों से परिपूर्ण तथा सामाजिक उत्सवों से सुशोभित हुई मेरे पिता की राजधानी अयोध्यापुरी में जो लोग विचरेंगे, वास्तव में वे ही सुखी हैं
Show English Translation
Can we ever reenter Ayodhya happily after safely fulfilling the vow and completing the term of exile?
ShlokaShloka 21
परिदेवयमानस्य तस्यैवं सुमहात्मनः। तिष्ठतो राजपुत्रस्य शर्वरी साऽत्यवर्तत।।2.86.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘(यदि पिताजी जीवित रहे तो) रमणीय चबूतरों और चौराहों के सुन्दर स्थानों से युक्त, पृथक्-पृथक् बने हुए विशाल राजमार्गों से अलंकृत, धनिकों की अट्टालिकाओं और देवमन्दिरों एवं राजभवनों से सम्पन्न, सब प्रकार के रत्नों से विभूषित, हाथियों,घोड़ों और रथों के आवागमन से भरी हुई, विविध वाद्यों की ध्वनियों से निनादित, समस्त कल्याणकारी वस्तुओं से भरपूर, हृष्ट-पुष्ट मनुष्यों से व्याप्त, पुष्पवाटिकाओं और उद्यानों से परिपूर्ण तथा सामाजिक उत्सवों से सुशोभित हुई मेरे पिता की राजधानी अयोध्यापुरी में जो लोग विचरेंगे, वास्तव में वे ही सुखी हैं
Show English Translation
While the highminded prince was lamenting this way and was waiting, the night passed off.
ShlokaShloka 22
प्रभाते विमले सूर्ये कारयित्वा जटा उभौ। अस्मिन् भागीरथीतीरे सुखं सन्तारितौ मया।।2.86.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘क्या वनवास की इस अवधि के समाप्त होने पर सकुशल लौटे हुए सत्यप्रतिज्ञ श्रीराम के साथ हमलोग अयोध्यापुरी में प्रवेश कर सकेंगे’
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The next morning when the Sun shone bright, both of them matted their hair on the bank of the river Bhagirathi (Ganga) and I ferried them across comfortably.
ShlokaShloka 23
जटाधरौ तौ द्रुमचीरवाससौ महाबलौ कुञ्जरयूथपोपमौ। वरेषुचापासिधरौ परन्तपौ व्यपेक्षमाणौ सह सीतया गतौ।।2.86.25।।
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‘इस प्रकार विलाप करते हुए महामनस्वी राजकुमार लक्ष्मण की वह सारी रात जागते ही बीती
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Rama and Lakshmana, slayers of enemies, who are as strong as bull elephants, with their hair matted, wearing robes made of bark, armed with excellent bows, arrows and swords went along with Sita looking around (vigilantly). इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे षडशीतितमस्सर्गः।। Thus ends the eightysixth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.