Ayodhya Kanda

Sarga 57: Sumantra returns to Ayodhya and reports to king Dasaratha -- Dasaratha and Kausalya fall into a swoon on hearing about Rama in exile.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 57

34 shlokas

ShlokaShloka 1
कथयित्वा सुदुःखार्तस्सुमन्त्रेण चिरं सह। रामे दक्षिणकूलस्थे जगाम स्वगृहं गुहः।।2.57.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
इधर, जब श्रीराम गङ्गा के दक्षिण तट पर उतर गये, तब गुह दुःख से व्याकुल हो सुमन्त्र के साथ बड़ी देरतक बातचीत करता रहा। इसके बाद वह सुमन्त्र को साथ ले अपने घर को चला गया
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Until Rama reached the southern bank, Guha kept talking with Sumantra for long and returned home with great sorrow.
ShlokaShloka 2
भरद्वाजाभिगमनं प्रयागे च सहाऽसनम्। आगिरेर्गमनं तेषां तत्रस्थैरुपलक्षितम्।।2.57.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीरामचन्द्रजी का प्रयाग में भरद्वाज के आश्रम पर जाना, मुनि के द्वारा सत्कार पाना तथा चित्रकूट पर्वत पर पहुँचना—ये सब वृत्तान्त शृङ्गवेर के निवासी गुप्तचरों ने देखे और लौटकर गुह को इन बातों से अवगत कराया
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Positioned there, they could mark their arrival at Bharadwaja's at Prayaga, their stay (nighthalt) and their onward journey to Chitrakuta mountain.
ShlokaShloka 3
अनुज्ञातस्सुमन्त्रोऽथ योजयित्वा हयोत्तमान्। अयोध्यामेव नगरीं प्रययौ गाढदुर्मनाः।।2.57.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे मार्ग में सुगन्धित वनों, नदियों, सरोवरों, गाँवों और नगरों को देखते हुए बड़ी सावधानी के साथ शीघ्रतापूर्वक जा रहे थे
Show English Translation
Permitted by Rama to leave, Sumantra harnessed the best of horses and set out for the city of Ayodhya with a heavy heart.
ShlokaShloka 4
स वनानि सुगन्धीनि सरितश्च सरांसि च। पश्यन्नतिययौ शीघ्रं ग्रामाणि नगराणि च।।2.57.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे मार्ग में सुगन्धित वनों, नदियों, सरोवरों, गाँवों और नगरों को देखते हुए बड़ी सावधानी के साथ शीघ्रतापूर्वक जा रहे थे
Show English Translation
Beholding the fragrancefilled forests, rivers, lakes, villages and towns on the way, Sumantra quickly crossed them.
ShlokaShloka 5
तत स्सायाह्न समये तृतीयेऽहनि सारथिः। अयोध्यां समनुप्राप्य निरानन्दां ददर्श ह।।2.57.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
शृङ्गवेरपुर से लौटने के दूसरे दिन सायंकाल में अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या पहुँचकर उन्होंने देखा, सारी पुरी आनन्दशून्य हो गयी है
Show English Translation
The charioteer reached Ayodhya on the third day at dusk and found the city cheerless.
ShlokaShloka 6
स शून्यामिव निश्शब्दां दृष्ट्वा परमदुर्मनाः। सुमन्त्रश्चिन्तयामास शोकवेगसमाहतः।।2.57.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
वहाँ कहीं एक शब्द भी सुनायी नहीं देता था। सारी पुरी ऐसी नीरव थी, मानो मनुष्यों से सूनी हो गयी हो। अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या की ऐसी दशा देखकर सुमन्त्र के मन में बड़ा दुःख हुआ। वे शोक के वेग से पीड़ित हो इस प्रकार चिन्ता करने लगे-
Show English Translation
Beholding the silent city, almost empty, the deeply depressed Sumantra, afflicted with gushing tears reflected:
ShlokaShloka 7
कच्चिन्न सगजा साऽश्वा सजना सजनाधिपा। रामसन्तापदुःखेन दग्धा शोकाग्निना पुरी।।2.57.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि श्रीराम के विरहजनित संताप के दुःख से व्यथित हो हाथी, घोड़े, मनुष्य और महाराजसहित सारी अयोध्यापुरी शोकाग्नि से दग्ध हो गयी हो
Show English Translation
Has the city along with its elephants, horses, people and its king perished in the fire of grief for Rama?
ShlokaShloka 8
इति चिन्तापरस्सूतो वाजिभिश्शीघ्रपातिभिः। नगरद्वारमासाद्य त्वरितः प्रविवेश ह।।2.57.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
इसी चिन्ता में पड़े हुए सारथि सुमन्त्र ने शीघ्रगामी घोड़ों द्वारा नगर द्वार पर पहुँचकर तुरंत ही पुरी के भीतर प्रवेश किया।
Show English Translation
Absorbed in these thoughts, the charioteer came to the citygate, carried by the swiftfooted horses, and quickly entered the city.
ShlokaShloka 9
सुमन्त्रमभियान्तं तं शतशोऽथ सहस्रशः। क्व ���ाम इति पृच्छन्तस्सूतमभ्यद्रवन्नराः।।2.57.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र को देखकर सैकड़ों और हजारों पुरवासी मनुष्य दौड़े आये और ‘श्रीराम कहाँ हैं?’ यह पूछते हुए उनके रथ के साथ-साथ दौड़ने लगे
Show English Translation
Meanwhile as the charioteer was moving towards the city, hundreds and thousands of men came pouring towards him enquiring, 'Where is Rama?'
ShlokaShloka 10
तेषां शशंस गङ्गायामहमापृच्छ्य राघवम्। अनुज्ञातो निवृत्तोऽस्मि धार्मिकेण महात्माना।।2.57.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र ने उनकी बातें सुनीं। वे झुंड-के-झुंड खड़े होकर कह रहे थे—’हाय! निश्चय ही हमलोग मारे गये; क्योंकि अब हम यहाँ श्रीरामचन्द्रजी को नहीं देख पायेंगे
Show English Translation
I took leave of the great, righteous Rama on the bank of the Ganga and have returned with his permission. (replied Sumantra).
ShlokaShloka 11
ते तीर्णा इति विज्ञाय बाष्पपूर्णमुखा जनाः। अहो धिगिति निश्श्वस्य हा रामेति च चुक्रुशुः।।2.57.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र ने उनकी बातें सुनीं। वे झुंड-के-झुंड खड़े होकर कह रहे थे—’हाय! निश्चय ही हमलोग मारे गये; क्योंकि अब हम यहाँ श्रीरामचन्द्रजी को नहीं देख पायेंगे
Show English Translation
Hearing that they had (the trio) crossed the river Ganga, the people, with their faces filled with tears sighed and saying 'Fie upon us Alas, Rama' cried out aloud.
ShlokaShloka 12
शुश्राव च वचस्तेषां बृन्दं बृन्दं च तिष्ठताम्। हतास्म खलु ये नेह पश्याम इति राघवम्।।2.57.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र ने उनकी बातें सुनीं। वे झुंड-के-झुंड खड़े होकर कह रहे थे—’हाय! निश्चय ही हमलोग मारे गये; क्योंकि अब हम यहाँ श्रीरामचन्द्रजी को नहीं देख पायेंगे
Show English Translation
He saw them gathering in groups, saying, Henceforth we will not be able to see Rama and without him, we are lost indeed.
ShlokaShloka 13
दानयज्ञविवाहेषु समाजेषु महत्सु च। न द्रक्ष्यामः पुन र्जातु धार्मिकं राममन्तरा।।2.57.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘दान, यज्ञ, विवाह तथा बड़े-बड़े सामाजिक उत्सवों के समय अब हम कभी धर्मात्मा श्रीराम को अपने बीच में खड़ा हुआ नहीं देख सकेंगे
Show English Translation
No longer will we see Rama at sacrifices, weddings, great assemblies and at places of charitable activity.
ShlokaShloka 14
किं समर्थं जनस्यास्य किं प्रियं किं सुखावहम्। इति रामेण नगरं पितृवत्परिपालितम्।।2.57.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अमुक पुरुष के लिये कौन-सी वस्तु उपयोगी है? क्या करने से उसका प्रिय होगा? और कैसे किसकिस वस्तु से उसे सुख मिलेगा, इत्यादि बातों का विचार करते हुए श्रीरामचन्द्रजी पिता की भाँति इस नगर का पालन करते थे’
Show English Translation
Rama looked after his people like a father always thinking what was good for them, dear to them and comfortable to them.
ShlokaShloka 15
वातायनगतानां च स्त्रीणामन्वन्तरापणम्। रामशोकाभितप्तानां शुश्राव परिदेवनम्।।2.57.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
बाजार के बीच से निकलते समय सारथि के कानों में स्त्रियों के रोने की आवाज सुनायी दी, जो महलों की खिड़कियों में बैठकर श्रीराम के लिये ही संतप्त हो विलाप कर रहीं थीं
Show English Translation
(He) heard wailings of women looking through the window and of the people in marketplaces burning with sorrow over Rama's exile.
ShlokaShloka 16
स राजमार्गमध्येन सुमन्त्रः पिहिताननः। यत्�� राजा दशरथस्तदेवोपययौ गृहम्।।2.57.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
राजमहल के पास पहुँचकर वे शीघ्र ही रथ से उतर पड़े और भीतर प्रवेश करके बहुत-से मनुष्यों से भरी हुई सात ड्योढ़ियों को पार कर गये
Show English Translation
Sumantra with his face muffled, drove along the highway straight to the palace of king Dasaratha.
ShlokaShloka 17
सोऽवतीर्य रथाच्छीघ्रं राजवेश्म प्रविश्य च। कक्ष्या स्सप्ताभिचक्राम महाजनसमाकुलाः।।2.57.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
राजमहल के पास पहुँचकर वे शीघ्र ही रथ से उतर पड़े और भीतर प्रवेश करके बहुत-से मनुष्यों से भरी हुई सात ड्योढ़ियों को पार कर गये
Show English Translation
Quickly alighting from the chariot, he entered the king's palace and crossed the seven courtyards overcrowded with people.
ShlokaShloka 18
हर्म्यै र्विमानैः प्रासादैरवेक्ष्याथ समागतम्। हाहाकारकृता नार्यो रामदर्शनकर्शिताः।।2.57.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
धनियों की अट्टालिकाओं, सतमंजिले मकानों तथा राजभवनों में बैठी हुईं स्त्रियाँ सुमन्त्र को लौटा हुआ देख श्रीराम के दर्शन से वञ्चित होने के दुःख से दुर्बल हो हाहाकर कर उठीं
Show English Translation
Women from mansions, sevenstoried buildings and from royal palaces, sighted him and pained at not seeing Rama cried out 'Alas, Alas'.
ShlokaShloka 19
आयतैर्विमलैर्नेत्रैरश्रुवेगपरिप्लुतैः। अन्योन्यमभिवीक्षन्तेऽव्यक्तमार्ततराः स्त्रियः।।2.57.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर राजमहलों में जहाँ-तहाँ से श्रीराम के शोक से संतप्त हुई राजा दशरथ की रानियों के मन्दस्वर में कहे गये वचन सुनायी पड़े
Show English Translation
The women in great anguish stood silently looking at one another, their large eyes flooded with overflowing tears.
ShlokaShloka 20
ततो दशरथस्त्रीणां प्रासादेभ्य स्तत स्ततः। रामशोकाभितप्तानां मन्दं शुश्राव जल्पितम्।।2.57.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर राजमहलों में जहाँ-तहाँ से श्रीराम के शोक से संतप्त हुई राजा दशरथ की रानियों के मन्दस्वर में कहे गये वचन सुनायी पड़े
Show English Translation
From different spots in the palace, Sumantra heard the sobs and whispers of Dasaratha's wives who were tormented with the sorrow of Rama's exile.
ShlokaShloka 21
सह रामेण निर्यातो विना राम मिहागतः। सूतः किन्नाम कौसल्यां शोचन्तीं प्रतिवक्ष्यति।।2.57.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये सारथि सुमन्त्र श्रीराम के साथ यहाँ से गये थे और उनके बिना ही यहाँ लौटे हैं, ऐसी दशा में करुण क्रन्दन करती हुई कौसल्या को ये क्या उत्तर देंगे?
Show English Translation
The charioteer left with Rama and returned without him. What can he say to the wailing Kausalya?
ShlokaShloka 22
यथा च मन्ये दुर्जीवमेवं न सुकरं ध्रुवम्। आच्छिद्य पुत्रे निर्याते कौसल्या यत्र जीवति।।2.57.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
रानियों की वह सच्ची बात सुनकर शोक से दग्ध से होते हुए सुमन्त्र ने सहसा राजभवन में प्रवेश किया
Show English Translation
I think it is indeed difficult for Kausalya to live wherever and whichever way she tries as she has been separated from her son. (the queens said).
ShlokaShloka 23
सत्यरूपं तु तद्वाक्यं राज्ञ: स्त्रीणां निशामयन्। प्रदीप्तमिव शोकेन विवेश सहसा गृहम्।।2.57.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
रानियों की वह सच्ची बात सुनकर शोक से दग्ध से होते हुए सुमन्त्र ने सहसा राजभवन में प्रवेश किया
Show English Translation
Listening to the correct words of the king's wives, he immediately entered the palace as if in flames (of grief).
ShlokaShloka 24
स प्रविश्याष्टमीं कक्ष्यां राजानं दीनमातुरम्। पुत्रशोकपरिम्लानमपश्यत्पाण्डुरे गृहे।।2.57.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
आठवीं ड्योढ़ी में प्रवेश करके उन्होंने देखा, राजा एक श्वेत भवन में बैठे और पुत्रशोक से मलिन, दीन एवं आतुर हो रहे हैं
Show English Translation
On entering the eighth courtyard, he saw in a pale white chamber king Dasaratha desolate, anguished and withered with the sorrow of separation from his son.
ShlokaShloka 25
अभिगम्य तमासीनं नरेन्द्रे मभिवाद्य च। सुमन्त्रो रामवचनं यथोक्तं प्रत्यवेदयत्।।2.57.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन्त्र ने वहाँ बैठे हुए महाराज के पास जाकर उन्हें प्रणाम किया और उन्हें श्रीरामचन्द्रजी की कही हुई बातें ज्यों-की-त्यों सुना दीं
Show English Translation
Sumantra approached the king who was seated, paid obeisance to him and conveyed Rama's words verbatim.
ShlokaShloka 26
स तूष्णीमेव तच्छ्रुत्वा राजा विभ्रान्तचेतनः। मूर्छितो न्यपतद्भूमौ रामशोकाभिपीडितः।।2.57.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
राजा ने चुपचाप ही वह सुन लिया, सुनकर उनका हृदय द्रवित (व्याकुल) हो गया। फिर वे श्रीराम के शोक से अत्यन्त पीड़ित हो मूर्च्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े
Show English Translation
The king silently listened to Rama's message. Bewildered and tormented by the grief of Rama's absence, he fell down on the ground in a swoon.
ShlokaShloka 27
ततोऽन्तःपुरमाविद्धं मूर्छिते ���ृथिवीपतौ। उद्धृत्य बाहू चुक्रोश नृपतौ पतितेक्षितौ।।2.57.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
महाराज के मूर्च्छित हो जाने पर सारा अन्तःपुर दुःख से व्यथित हो उठा। राजा के पृथ्वी पर गिरते ही सब लोग दोनों बाहें उठाकर जोर-जोर से चीत्कार करने लगे
Show English Translation
The moment the lord of the earth fell down on the ground unconscious, the women in the inner apartment burst into tears, raising their arms.
ShlokaShloka 28
सुमित्रया तु सहिता कौसल्या पतितं पतिम्। उत्थापयामास तदा वचनं चेदमब्रवीत्।।2.57.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय कौसल्या ने सुमित्रा की सहायता से अपने गिरे हुए पति को उठाया और इस प्रकार कहा-
Show English Translation
Having seen her husband collapsed on the ground, Kausalya assisted by Sumitra lifted him up and said to him thus:
ShlokaShloka 29
इमं तस्य महाभाग दूतं दुष्करकारिणः। वनवासादनुप्राप्तं कस्मान्न प्रतिभाषसे।।2.57.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाभाग! ये सुमन्त्रजी दुष्कर कर्म करने वाले श्रीराम के दूत होकर उनका संदेश लेकर वनवास से लौटे हैं आप इनसे बात क्यों नहीं करते हैं?
Show English Translation
O distinguished king, why are you not enquiring from the messenger about him (Rama) who is capable of performing arduous tasks?
ShlokaShloka 30
अद्यैवमनयं कृत्वा व्यपत्रपसि राघव। उत्तिष्ठ सुकृतं तेस्तु शोके नस्या त्सहायता।।2.57.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! पुत्रको वनवास दे देना अन्याय है। यह अन्याय करके आप लज्जित क्यों हो रहे हैं? उठिये, आपको अपने सत्य के पालन का पुण्य प्राप्त हो जब आप इस तरह शोक करेंगे, तब आपके सहायकों का समुदाय भी आपके साथ ही नष्ट हो जायगा
Show English Translation
O descendant of the Raghus are you ashamed of having done an injustice? Arise. you may be a blessed one (for fulfilling your promise). If you grieve, none will help you.
ShlokaShloka 31
देव यस्या भयाद्रामं नानुपृच्छसि सारथिम्। नेह तिष्ठिति कैकेयी विस्रब्धं प्रतिभाष्यताम्।।2.57.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देव! आप जिसके भय से सुमन्त्रजी से श्रीराम का समाचार नहीं पूछ रहे हैं, वह कैकेयी यहाँ मौजूद नहीं है; अतः निर्भय होकर बात कीजिये’
Show English Translation
Kaikeyi for fear of whom you dare not ask the charioteer about Rama, O king is not here. You may speak to him without fear.
ShlokaShloka 32
सा तथोक्त्वा महाराजं कौसल्या शोकलालसा। धरण्यां निपपाताऽशु बाष्पविप्लुतभाषिणी।।2.57.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
महाराज से ऐसा कहकर कौसल्या का गला भर आया। आँसुओं के कारण उनसे बोला नहीं गया और वे शोक से व्याकुल होकर तुरंत ही पृथ्वी पर गिर पड़ीं
Show English Translation
Absorbed in grief, Kausalya spoke to the maharaja in a voice choked with tears and then collapsed on the floor.
ShlokaShloka 33
एवं विलपतीं दृष्ट्वा कौसल्यां पतितां भुवि। पतिं चावेक्ष्य ता स्सर्वा सुस्वरं रुरुदुः स्त्रियः।।2.57.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
अन्तःपुर से उठे हुए उस आर्तनाद को देख सुनकर नगर के बूढ़े और जवान पुरुष रो पड़े। सारी स्त्रियाँ भी रोने लगीं। वह सारा नगर उस समय सब ओर से पुनः शोक से व्याकुल हो उठा
Show English Translation
All those women saw weeping Kausalya as well as their husband fallen on the ground and wailed loudly in a chorus.
ShlokaShloka 34
तत स्तमन्तःपुरनादमुत्थितं समीक्ष्य वृद्धा स्तरुणाश्च मानवाः। स्त��रियश्च सर्वा रुरुदु स्समन्ततः पुरं तदासीत्पुनरेव सङ्कुलम्।।2.57.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
अन्तःपुर से उठे हुए उस आर्तनाद को देख सुनकर नगर के बूढ़े और जवान पुरुष रो पड़े। सारी स्त्रियाँ भी रोने लगीं। वह सारा नगर उस समय सब ओर से पुनः शोक से व्याकुल हो उठा
Show English Translation
Having heard the sound emanating from the inner apartment, people, old, young and women, of the city lamented. The city was crowded again. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे सप्तपञ्चाशस्सर्गः।। Thus ends the fiftyseventh sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.