Ayodhya Kanda

Sarga 88: Guha relates to Bharata about Rama's life in the forest contrary to the life in Ayodhya.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 88

24 shlokas

ShlokaShloka 1
तच्छ्रुत्वा निपुणं सर्वं भरत स्सह मन्त्रिभिः। इङ्गुदीमूलमागम्य रामशय्यामवेक्ष्य ताम्।।2.88.1।। अब्रवीज्जननी स्सर्वा इह तेन महात्मना। शर्वरी शयिता भूमाविदमस्य विमर्दितम्।।2.88.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराजों के कुल में उत्पन्न हुए परम बुद्धिमान् महाभाग राजा दशरथ ने जिन्हें जन्म दिया है, वे श्रीराम इस तरह भूमि पर शयन करने के योग्य नहीं हैं
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After listening to all that Guha had said, Bharatha reached the foot of the ingudi tree accompanied by his ministers and gazing at Rama's bed, said to all his mothers the magnanimous Rama rested that night here on this ground in that crushed bed.
ShlokaShloka 2
तच्छ्रुत्वा निपुणं सर्वं भरत स्सह मन्त्रिभिः। इङ्गुदीमूलमागम्य रामशय्यामवेक्ष्य ताम्।।2.88.1।। अब्रवीज्जननी स्सर्वा इह तेन महात्मना। शर्वरी शयिता भूमाविदमस्य विमर्दितम्।।2.88.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराजों के कुल में उत्पन्न हुए परम बुद्धिमान् महाभाग राजा दशरथ ने जिन्हें जन्म दिया है, वे श्रीराम इस तरह भूमि पर शयन करने के योग्य नहीं हैं
Show English Translation
After listening to all that Guha had said, Bharatha reached the foot of the ingudi tree accompanied by his ministers and gazing at Rama's bed, said to all his mothers the magnanimous Rama rested that night here on this ground in that crushed bed.
ShlokaShloka 3
महाभागकुलीनेन महाभागेन धीमता। जातो दशरथेनोर्व्यां न रामस्स्वप्तु मर्हति।।2.88.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराजों के कुल में उत्पन्न हुए परम बुद्धिमान् महाभाग राजा दशरथ ने जिन्हें जन्म दिया है, वे श्रीराम इस तरह भूमि पर शयन करने के योग्य नहीं हैं
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Rama, son of highly fortunate and sagacious Dasaratha, born of a noble lineage does not deserve to rest on this naked earth.
ShlokaShloka 4
अजिनोत्तरसंस्तीर्णे वरास्तरणसंचये। शयित्वा पुरुषव्याघ्रः कथं शेते महीतले।।2.88.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो पुरुषसिंह श्रीराम मुलायम मृगचर्म की विशेष चादर से ढके हुए तथा अच्छे-अच्छे बिछौनों के समूह से सजे हुए पलंग पर सदा सोते आये हैं, वे इस समय पृथ्वी पर कैसे शयन करते होंगे?
Show English Translation
How could Rama, the best among men used to a bed made of a pile of excellent spreads and overspread with deer skin, sleep on the bare ground?
ShlokaShloka 5
प्रासादाग्रविमानेषु वलभीषु च सर्वदा। हैमराजतभौमेषु वरास्तरणशालिषु।।2.88.5।। पुष्पसञ्चयचित्रेषु चन्दनागरुगन्धिषु। पाण्डुराभ्रप्रकाशेषु शुकसङ्घरूतेषुच।।2.88.6।। प्रासादवरवर्येषु शीतवत्सु सुगन्धिषु। उषित्वामेरुकल्पेषु कृतकाञ्चन भित्तिषु।।2.88.7।। गीतवादित्रनिर्घोषैर्वराभरणनिस्स्वनैः। मृदङ्गवरशब्दैश्च सततं प्रतिबोधितः।।2.88.8।। वन्दिभिर्वन्दितः काले बहुभि स्सूतमागधैः। गाथाभिरनुरूपाभि स्स्तुतिभिश्च परन्तपः।।2.88.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो सदा विमानाकार प्रासादों के श्रेष्ठ भवनों और अट्टालिकाओं में सोते आये हैं तथा जिनकी फर्श सोने और चाँदी की बनी हई है, जो अच्छे बिछौनों से सुशोभित हैं, पुष्पराशि से विभूषित होने के कारण जिनकी विचित्र शोभा होती है, जिनमें चन्दन और अगुरु की सुगन्ध फैली रहती है, जो श्वेत बादलों के समान उज्ज्वल कान्ति धारण करते हैं, जिनमें शुकसमूहों का कलरव होता रहता है, जो शीतल हैं एवं कपूर आदि की सुगन्ध से व्याप्त होते हैं, जिनकी दीवारों पर सुवर्ण का काम किया गया है तथा जो ऊँचाई में मेरु पर्वत के समान जान पड़ते हैं, ऐसे सर्वोत्तम राजमहलों में जो निवास कर चुके हैं, वे श्रीराम वन में पृथ्वी पर कैसे सोते होंगे?
Show English Translation
Rama, scorcher of enemies, one who was accostomed to dwell in the attic of sevenstoreyed mansions with floors paved with gold, and silver, spread with excellent carpets, decked with bouquets of flowers and perfumed with sandal and agaru. The peaks of those palaces were bright like towering white clouds and echoed with cries of parrots. They were cool and fragrant with perfumes. The marvellous palaces made of golden walls are comparable to mount Meru. He used to wake up to the sounds of songs and musical instruments, the tinkling of finest ornaments and the splendid sounds of the drums. Many bards, genealogists and panegyrists singing befitting ballads and extolling his virtues at appropriate time used to salute him in reverence (Bharata lamented).
ShlokaShloka 6
अश्रद्धेयमिदं लोके न सत्यं प्रतिभाति मा। मुह्यते खलु मे भाव स्स्वप्नोऽयमिति मे मतिः।।2.88.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो सदा विमानाकार प्रासादों के श्रेष्ठ भवनों और अट्टालिकाओं में सोते आये हैं तथा जिनकी फर्श सोने और चाँदी की बनी हई है, जो अच्छे बिछौनों से सुशोभित हैं, पुष्पराशि से विभूषित होने के कारण जिनकी विचित्र शोभा होती है, जिनमें चन्दन और अगुरु की सुगन्ध फैली रहती है, जो श्वेत बादलों के समान उज्ज्वल कान्ति धारण करते हैं, जिनमें शुकसमूहों का कलरव होता रहता है, जो शीतल हैं एवं कपूर आदि की सुगन्ध से व्याप्त होते हैं, जिनकी दीवारों पर सुवर्ण का काम किया गया है तथा जो ऊँचाई में मेरु पर्वत के समान जान पड़ते हैं, ऐसे सर्वोत्तम राजमहलों में जो निवास कर चुके हैं, वे श्रीराम वन में पृथ्वी पर कैसे सोते होंगे?
Show English Translation
It is unbelievable that such a thing has happened to Rama in this world. It does not seem real to me and looks appears like a dream and my mind is bewildered.
ShlokaShloka 7
न नूनं दैवतं किंचित्कालेन बलवत्तरम्। यत्र दाशरथी रामो भूमावेव शयीत सः।।2.88.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो सदा विमानाकार प्रासादों के श्रेष्ठ भवनों और अट्टालिकाओं में सोते आये हैं तथा जिनकी फर्श सोने और चाँदी की बनी हई है, जो अच्छे बिछौनों से सुशोभित हैं, पुष्पराशि से विभूषित होने के कारण जिनकी विचित्र शोभा होती है, जिनमें चन्दन और अगुरु की सुगन्ध फैली रहती है, जो श्वेत बादलों के समान उज्ज्वल कान्ति धारण करते हैं, जिनमें शुकसमूहों का कलरव होता रहता है, जो शीतल हैं एवं कपूर आदि की सुगन्ध से व्याप्त होते हैं, जिनकी दीवारों पर सुवर्ण का काम किया गया है तथा जो ऊँचाई में मेरु पर्वत के समान जान पड़ते हैं, ऐसे सर्वोत्तम राजमहलों में जो निवास कर चुके हैं, वे श्रीराम वन में पृथ्वी पर कैसे सोते होंगे?
Show English Translation
Dasaratha's son, Rama had to rest on the ground would admittedly mean that no divine power is mightier than Time (Destiny).
ShlokaShloka 8
विदेहराजस्य सुता सीता च प्रियदर्शना। दयिता शयिता भूमौ स्नुषा दशरथस्य च।।2.88.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो गीतों और वाद्यों की ध्वनियों से, श्रेष्ठ आभूषणों की झनकारों से तथा मृदङ्गों के उत्तम शब्दों से सदा जगाये जाते थे, बहुत-से वन्दीगण समय-समय पर जिनकी वन्दना करते थे, सूत और मागध अनुरूप गाथाओं और स्तुतियों से जिनको जगाते थे, वे शत्रुसंतापी श्रीराम अब भूमि पर कैसे शयन करते होंगे?
Show English Translation
Sita, daughter of Janaka, king of Videha, and beloved daughterinlaw of Dasaratha who caused delight to the beholder, too had to rest on the bare ground.
ShlokaShloka 9
इयं शय्या मम भ्रातुरिदं हि परिवर्तितम्। स्थण्डिले कठिने सर्वं गात्रै र्विमृदितं तृणम्।।2.88.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो गीतों और वाद्यों की ध्वनियों से, श्रेष्ठ आभूषणों की झनकारों से तथा मृदङ्गों के उत्तम शब्दों से सदा जगाये जाते थे, बहुत-से वन्दीगण समय-समय पर जिनकी वन्दना करते थे, सूत और मागध अनुरूप गाथाओं और स्तुतियों से जिनको जगाते थे, वे शत्रुसंतापी श्रीराम अब भूमि पर कैसे शयन करते होंगे?
Show English Translation
This is my brother's couch and it is here where he had tossed about. The grass spread on this hard surface is crushed by his limbs.
ShlokaShloka 10
मन्ये साभरणा सुप्ता सीताऽस्मिञ्छयनोत्तमे। तत्र तत्र हि दृश्यन्ते सक्ताः कनकबिन्दवः।।2.88.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यह बात जगत् में विश्वास के योग्य नहीं है मुझे यह सत्य नहीं प्रतीत होती। मेरा अन्तःकरण अवश्य ही मोहित हो रहा है। मुझे तो ऐसा मालूम होता है कि यह कोई स्वप्न है
Show English Translation
Some particles of gold dust are seen stuck to this bed here and there. I think Sita might have rested on this excellent bed with all her jewellery.
ShlokaShloka 11
उत्तरीयमिहाऽसक्तं सुव्यक्तं सीतया तदा। तथा ह्येते प्रकाशन्ते सक्ताः कौशेयतन्तवः।।2.88.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निश्चय ही काल के समान प्रबल कोई दूसरा देवता नहीं है, जिसके प्रभाव से दशरथनन्दन श्रीराम को भी इस प्रकार भूमि पर सोना पड़ा
Show English Translation
That the upper garment of Sita might have been caught here is well evident from the shining silken threads stuck.
ShlokaShloka 12
मन्ये भर्तु स्सुखा शय्या येन बाला तपस्विनी। सु��ुमारी सती दुःखं न हि विजानाति मैथिली।।2.88.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उस काल के ही प्रभाव से विदेहराज की परम सुन्दरी पुत्री और महाराज दशरथ की प्यारी पुत्रवधू सीता भी पृथ्वी पर शयन करती हैं
Show English Translation
Hapless Sita is young and delicate. Being a chaste lady, she, even in these (adverse) circumstances, does not feel the brunt. Hence, maybe she thinks her husbands' (hard) bed comfortable to her.
ShlokaShloka 13
हा हन्ताऽस्मि नृशंसोऽहं यत्सभार्यः कृते मम। ईदृशीं राघवश्शय्यामधिशेते ह्यनाथवत्।।2.88.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यही मेरे बड़े भाई की शय्या है। यहीं उन्होंने करवटें बदली थीं। इस कठोर वेदी पर उनका शुभ शयन हुआ था, जहाँ उनके अङ्गों से कुचला गया सारा तृण अभी तक पड़ा है
Show English Translation
Alas, what suffering Because of a cruel man like me Rama along with his spouse was condemned to recline upon such bed like an orphan.
ShlokaShloka 14
सार्वभौमकुले जात स्सर्वलोकस्य सम्मतः। सर्वलोकप्रियस्त्यक्त्वा राज्यं सुखमनुत्तम्।।2.88.18।। कथमिन्दीवरश्यामो रक्ताक्षः प्रियदर्शनः। सुखभागी न दुःखार्ह श्शयितो भुवि राघवः।।2.88.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जान पड़ता है, शुभलक्षणा सीता शय्यापर आभूषण पहने ही सोयी थीं; क्योंकि यहाँ यत्र-तत्र सुवर्ण के कण सटे दिखायी देते हैं
Show English Translation
How could such Rama sleep on the ground? He was born in the house of emperors, worthy of reverence by the entire world and beloved of all the worlds, with the complexion of a blue lotus, with red eyes, and pleasing looks, one who deserves to be happy and not to suffer by renouncing the kingdom and excellent comforts.
ShlokaShloka 15
धन्यः खलु महाभागो लक्��्मण श्शुभलक्षणः। भ्रातरं विषमे काले यो राममनुवर्तते।।2.88.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यहाँ उस समय सीता की चादर उलझ गयी थी, यह साफ दिखायी दे रहा है; क्योंकि यहाँ सटे हुए ये रेशम के तागे चमक रहे हैं
Show English Translation
Surely Lakshmana of great merit and auspicious virtues is fortunate since he is accompanying his brother Rama in times of adversity.
ShlokaShloka 16
सिद्धार्था खलु वैदेही पतिं याऽनुगता वनम्। वयं संशयिता स्सर्वे हीनास्तेन महात्मना।।2.88.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हाय! मैं मर गया—मेरा जीवन व्यर्थ है। मैं बड़ा क्रूर हूँ, जिसके कारण सीतासहित श्रीराम को अनाथ की भाँति ऐसी शय्या पर सोना पड़ता है
Show English Translation
Sita has, indeed, accomplished her object by accompanying her husband (to the forest). Bereft of that magnanimous Rama, all of us are in doubt (if he will accept our services).
ShlokaShloka 17
आकर्णधारा पृथिवी नौः इव प्रतिभाति मा। गते दशरथे स्वर्गं रामे चारण्यमाश्रिते।।2.88.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हाय! मैं मर गया—मेरा जीवन व्यर्थ है। मैं बड़ा क्रूर हूँ, जिसके कारण सीतासहित श्रीराम को अनाथ की भाँति ऐसी शय्या पर सोना पड़ता है
Show English Translation
King Dasaratha having ascended to heaven and Rama taken shelter in the forest, this kingdom appears to me like a ship without a helmsman.
ShlokaShloka 18
न च प्रार्थयते कच्चिन्मनसापि वसुन्धराम्। वनेऽपि वसतस्तस्य बाहुवीर्याभिरक्षिताम्।।2.88.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो चक्रवर्ती सम्राट् के कुल में उत्पन्न हुए हैं, समस्त लोकों को सुख देने वाले हैं तथा सबका प्रिय करने में तत्पर रहते हैं, जिनका शरीर नीले कमल के समान श्याम, आँखें लाल और दर्शन सबको प्रिय लगने वाला है तथा जो सुख भोगने के ही योग्य हैं, दुःख भोगने के कदापि योग्य नहीं हैं, वे ही श्रीरघुनाथ जी परम उत्तम प्रिय राज्य का परित्याग करके इस समय पृथ्वी पर शयन करते हैं
Show English Translation
No one, even in thought, would ever desire this kingdom, protected by the strength of his arms even while residing in the forest.
ShlokaShloka 19
शून्यसंवरणारक्षामयन्त्रितहयद्विपाम्। अपावृतपुरद्वारां राजधानीमरक्षिताम्।।2.88.24।। अप्रहृष्टबलां शून्यां विषमस्थामनावृताम्। शत्रवो नाभिमन्यन्ते भक्षान्विषकृतानिव।।2.88.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो चक्रवर्ती सम्राट् के कुल में उत्पन्न हुए हैं, समस्त लोकों को सुख देने वाले हैं तथा सबका प्रिय करने में तत्पर रहते हैं, जिनका शरीर नीले कमल के समान श्याम, आँखें लाल और दर्शन सबको प्रिय लगने वाला है तथा जो सुख भोगने के ही योग्य हैं, दुःख भोगने के कदापि योग्य नहीं हैं, वे ही श्रीरघुनाथ जी परम उत्तम प्रिय राज्य का परित्याग करके इस समय पृथ्वी पर शयन करते हैं
Show English Translation
Now the gates of our capital city (Ayodhya) are wide open. The city is unprotected and endangered. There are no guards to keep vigil over the ramparts. The horses and elephants are not in control (hence unprepared for battle). The army is unhappy and demoralised. At this state even the enemies will not like to seize the city, they will shun it like food mixed with poison.
ShlokaShloka 20
अद्यप्रभृति भूमौ तु शयिष्येऽहं तृणेषु वा। फलमूलाशनो नित्यं जटाचीराणि धारयन्।।2.88.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निश्चय ही विदेहनन्दिनी सीता भी कृतार्थ हो गयीं, जिन्होंने पति के साथ वन का अनुसरण किया है। हम सब लोग उन महात्मा श्रीराम से बिछुड़कर संशय में पड़ गये हैं (हमें यह संदेह होने लगा है कि श्रीराम हमारी सेवा स्वीकार करेंगे या नहीं)
Show English Translation
From today onwards, wearing matted hair and clad in robes made of bark and living on fruits and roots, I too shall sleep on the naked ground or on grass.
ShlokaShloka 21
तस्यार्थमुत्तरं कालं निवत्स्यामि सुखं वने। तं प्रतिश्रवमामुच्य नास्य मिथ्या भविष्यति।।2.88.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निश्चय ही विदेहनन्दिनी सीता भी कृतार्थ हो गयीं, जिन्होंने पति के साथ वन का अनुसरण किया है। हम सब लोग उन महात्मा श्रीराम से बिछुड़कर संशय में पड़ गये हैं (हमें यह संदेह होने लगा है कि श्रीराम हमारी सेवा स्वीकार करेंगे या नहीं)
Show English Translation
Taking upon myself the vow of Rama, I too shall live in the forest cheerfully for the rest of the term on behalf of him so that his vow shall not prove untrue.
ShlokaShloka 22
वसन्तं भ्रातुरर्थाय शत्रुघ्नो माऽनुवत्स्यति। लक्ष्मणेन सहत्वार्यो ह्ययोध्यां पालयिष्यति।।2.88.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज दशरथ स्वर्गलोक को गये और श्रीराम वनवासी हो गये, ऐसी दशा में यह पृथ्वी बिना नाविक की नौका के समान मुझे सूनी-सी प्रतीत हो रही है
Show English Translation
As I live in the forest on behalf of my brother Rama, Satrughna will live with me. My esteemed brother Rama will rule Ayodhya along with Lakshmana.
ShlokaShloka 23
अभिषेक्ष्यन्ति काकुत्स्थमयोध्यायां द्विजातयः। अपि मे देवताः कुर्युरिमं सत्यं मनोरथम्।।2.88.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन में निवास करने पर भी उन्हीं श्रीराम के बाहुबल से सुरक्षित हुई इस वसुन्धरा को कोई शत्रु मन से भी नहीं लेना चाहता है
Show English Translation
In Ayodhya the brahmins shall coronate Rama. Will the gods make this desire of mine true?
ShlokaShloka 24
प्रसाद्यमान श्शिरसा मया स्वयं बहुप्रकारं यदि नाभिपत्स्यते। ततोऽनुवत्स्यामि चिराय राघवम् वनेचरन्नार्हति मामुपेक्षितुम्।।2.88.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस समय अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या की चहारदीवारी की सब ओर से रक्षा का कोई प्रबन्ध नहीं है, हाथी और घोड़े बँधे नहीं रहते हैं—खुले विचरते हैं, नगर द्वार का फाटक खुला ही रहता है, सारी राजधानी अरक्षित है, सेना में हर्ष और उत्साह का अभाव है, समस्त नगरी रक्षकों से सूनी-सी जान पड़ती है, सङ्कट में पड़ी हुई है, रक्षकों के अभाव से आवरणरहित हो गयी है. तो भी शत्रु विषमिश्रित भोजन की भाँति इसे ग्रहण करने की इच्छा नहीं करते हैं। श्रीराम के बाहुबल से ही इसकी रक्षा हो रही है
Show English Translation
I will seek his grace in many ways by bowing down my head. Even then if Rama does not grant my wish, I shall also live with him as long as it takes. He will not be able to ignore a forester like me. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे अष्टाशीतितमस्सर्गः।। Thus ends the eightyeigth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.