Ayodhya Kanda

Sarga 45: Rama reaches the banks of Tamasa river.

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 45

33 shlokas

ShlokaShloka 1
अनुरक्ता महात्मानं रामं सत्यपराक्रमम्। अनुजग्मुः प्रयान्तं तं वनवासाय मानवाः।।2.45.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
उधर सत्यपराक्रमी महात्मा श्रीराम जब वन की ओर जाने लगे, उस समय उनके प्रति अनुराग रखने वाले बहुत-से अयोध्यावासी मनुष्य वन में निवास करने के लिये उनके पीछे-पीछे चल दिये
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When the highsouled Rama whose strength was his sense of truth set out for the forest, the faithful people followed him.
ShlokaShloka 2
निवर्तितेऽपि च बलात्सुहृद्वर्गे च राजनि। नैव ते संन्यवर्तन्त रामस्यानुगता रथम्।।2.45.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
जिसके जल्दी लौटने की कामना की जाय, उस स्वजन को दूर तक नहीं पहुँचाना चाहिये’–इत्यादि रूप से बताये गये सुहृद्धर्म के अनुसार जब राजा दशरथ बलपूर्वक लौटा दिये गये, तब भी जो श्रीरामजी के रथ के पीछे-पीछे लगे हुए थे, वे अयोध्यावासी अपने घर की ओर नहीं लौटे
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The king and the hosts of friends were forcibly sent back but they did not return. They continued to follow the chariot of Rama.
ShlokaShloka 3
अयोध्यानिलयानां हि पुरुषाणां महायशाः। बभूव गुणसम्पन्नः पूर्णचन्द्र इव प्रियः।।2.45.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
उन प्रजाजनों ने श्रीराम से घर लौट चलने के लिये बहुत प्रार्थना की; किंतु वे पिता के सत्य की रक्षा करने के लिये वन की ओर ही बढ़ते गये
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The illustrious and virtuous Rama was as dear to the inhabitants of Ayodhya as the full Moon.
ShlokaShloka 4
स याच्यमानः काकुत्स्थः स्वाभिः प्रकृतिभिस्तदा। कुर्वाणः पितरं सत्यं वनमेवान्वपद्यत।।2.45.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
उन प्रजाजनों ने श्रीराम से घर लौट चलने के लिये बहुत प्रार्थना की; किंतु वे पिता के सत्य की रक्षा करने के लिये वन की ओर ही बढ़ते गये
Show English Translation
Although entreated by his subjects (not to go) Rama proceeded to the forest to make his father's vow come true.
ShlokaShloka 5
अवेक्षमाणः सस्नेहं चक्षुषा प्रपिबन्निव। उवाच रामः स्नेहेन ताः प्रजाः स्वाः प्रजा इव।।2.45.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अयोध्यानिवासियों का मेरे प्रति जो प्रेम और आदर है, वह मेरी ही प्रसन्नता के लिये भरत के प्रति और अधिक रूप में होना चाहिये
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Looking at the people with love as if they were his own children and as though drinking them with his glances, Rama appealed to them:
ShlokaShloka 6
या प्रीतिर्बहुमानश्च मय्ययोध्यानिवासिनाम्। मत्प्रियार्थं विशेषेण भरते सा निवेश्यताम्।।2.45.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अयोध्यानिवासियों का मेरे प्रति जो प्रेम और आदर है, वह मेरी ही प्रसन्नता के लिये भरत के प्रति और अधिक रूप में होना चाहिये
Show English Translation
O citizens of Ayodhya may the love and respect you have shown to please me be bestowed specially on Bharata
ShlokaShloka 7
स हि कल्याणचारित्रः कैकेय्यानन्दवर्धनः। करिष्यति यथावद्वः प्रियाणि च हितानि च।।2.45.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उनका चरित्र बड़ा ही सुन्दर और सबका कल्याण करने वाला है। कैकेयी का आनन्द बढ़ाने वाले भरत आप लोगों का यथावत् प्रिय और हित करेंगे
Show English Translation
Bharata, enhancer of the delight of Kaikeyi, possesses an auspicious character. He will do for you everything appropriate, agreeable and beneficial.
ShlokaShloka 8
ज्ञानवृद्धो वयोबालो मृदुर्वीर्यगुणान्वितः। अनुरूपः स वो भर्ता भविष्यति भयापहः।।2.45.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे अवस्था में छोटे होने पर भी ज्ञान में बड़े हैं। पराक्रमोचित गुणों से सम्पन्न होने पर भी स्वभाव के बड़े कोमल हैं। वे आपलोगों के लिये योग्य राजा होंगे और प्रजा के भय का निवारण करेंगे
Show English Translation
Though tender in age Bharata is mature in intellect. Gentle, valiant and virtuous, he will dispel all your fears and act as a true protector.
ShlokaShloka 9
स हि राजगुणैर्युक्तो युवराजः समीक्षितः। अपि चापि मया शिष्टैः कार्यं वो भर्तृशासनम्।।2.45.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे मुझसे भी अधिक राजोचित गुणों से युक्त हैं, इसीलिये महाराज ने उन्हें युवराज बनाने का निश्चय किया है; अतः आपलोगों को अपने स्वामी भरत की आज्ञा का सदा पालन करना चाहिये
Show English Translation
Endowed with kingly qualities, he is recognised as heirapparent. Therefore, as I did, all of you should obey the order of the king.
ShlokaShloka 10
न च सन्तप्येद्यथा चासौ वनवासं गते मयि। महाराजस्तथा कार्यो मम प्रियचिकीर्षया।।2.45.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
समस्त पुरवासी अत्यन्त दीन होकर आँसू बहा रहे थे और लक्ष्मणसहित श्रीराम मानो अपने गुणों में बाँधकर उन्हें खींचे लिये जा रहे थे
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If you desire to please me, act in such a way that the king does not grieve after I have gone to the forest.
ShlokaShloka 11
यथा यथा दाशरथि र्धर्म एवास्थितोऽभवत्। तथा तथा प्रकृतयो रामं पतिमकामयन्।।2.45.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
समस्त पुरवासी अत्यन्त दीन होकर आँसू बहा रहे थे और लक्ष्मणसहित श्रीराम मानो अपने गुणों में बाँधकर उन्हें खींचे लिये जा रहे थे
Show English Translation
The more the son of Dasaratha (Rama) committed to righteousness, the more the subjects desired that he should be their king.
ShlokaShloka 12
बाष्पेण पिहितं दीनं रामः सौमित्रिणा सह। चकर्षेव गुणैर्बद्ध्वा जनं पुरनिवासिनम्।।2.45.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
समस्त पुरवासी अत्यन्त दीन होकर आँसू बहा रहे थे और लक्ष्मणसहित श्रीराम मानो अपने गुणों में बाँधकर उन्हें खींचे लिये जा रहे थे
Show English Translation
Rama along with Lakshmana attracted the citydwellers who, choked with tears, were looking miserable. It appeared they were bound with his virtues.
ShlokaShloka 13
ते द्विजास्त्रिविधं वृद्धा ज्ञानेन वयसौजसा। वयः प्रकम्पशिरसो दूरादूचुरिदं वचः।।2.45.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
उनमें बहुत-से ब्राह्मण थे, जो ज्ञान, अवस्था और तपोबल–तीनों ही दृष्टियों से बड़े थे। वृद्धावस्था के कारण कितनों के तो सिर काँप रहे थे। वे दूर से ही इस प्रकार बोले-
Show English Translation
Those brahmins who were senior (to him) on three counts like age, wisdom and spirtuality spoke to him from a distance with their heads shaking with age:
ShlokaShloka 14
वहन्तो जवना रामं भो भो जात्यास्तुरङ्गमाः। निवर्तध्वं न गन्तव्यं हिता भवत भर्तरि।।2.45.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अरे! ओ तेज चलने वाले अच्छी जाति के घोड़ो!तुम बड़े वेगशाली हो और श्रीराम को वन की ओर लिये जा रहे हो, लौटो! अपने स्वामी के हितैषी बनो! तुम्हें वन में नहीं जाना चाहिये
Show English Translation
O horses of noble breed, turn back Do not carry your master swiftyly any farther. Do good to him.
ShlokaShloka 15
कर्णवन्ति हि भूतानि विशेषेण तुरङ्गमाः। यूयं तस्मान्निवर्तध्वं याचनां प्रतिवेदिताः।।2.45.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यों तो सभी प्राणियों के कान होते हैं, परंतु घोड़ों के कान बड़े होते हैं; अतः तुम्हें हमारी याचना का ज्ञान तो हो ही गया होगा; इसलिये घर की ओर लौट चलो
Show English Translation
All animals, especially horses have a keen sense of hearing. Therefore, having listened to our entreaty, turn back.
ShlokaShloka 16
धर्मतः स विशुद्धात्मा वीरः शुभदृढव्रतः। उपवाह्यस्तु वो भर्ता नापवाह्��ः पुराद्वनम्।।2.45.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तुम्हारे स्वामी श्रीराम विशुद्धात्मा, वीर और उत्तम व्रत का दृढ़ता से पालन करने वाले हैं, अतः तुम्हें इनका उपवहन करना चाहिये—इन्हें बाहर से नगर के समीप ले चलना चाहिये। नगर से वन की ओर इनका अपवहन करना—इन्हें ले जाना तुम्हारे लिये कदापि उचित नहीं है’
Show English Translation
Your master has a purity of heart. He is righteous, virtuous, brave and firm in resolve, carry him backward and not forward from the city into the forest.
ShlokaShloka 17
एवमार्तप्रलापांस्तान् वृद्धान् प्रलपतो द्विजान्। अवेक्ष्य सहसा रामो रथादवततार ह।।2.45.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे सीता और लक्ष्मण के साथ पैदल ही चलने लगे। ब्राह्मणों का साथ न छूटे, इसके लिये वे अपना पैर बहुत निकट रखते थे-लंबे डग से नहीं चलते थे। वन में पहुँचना ही उनकी यात्रा का परम लक्ष्य था।
Show English Translation
Having seen the aged brahmins muttering pitiful lamentations in this manner, Rama immediately alighted from the chariot.
ShlokaShloka 18
पद्भ्यामेव जगामाथ ससीत स्सहलक्ष्मणः। सन्निकृष्टपदन्यासो रामो वनपरायणः।।2.45.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे सीता और लक्ष्मण के साथ पैदल ही चलने लगे। ब्राह्मणों का साथ न छूटे, इसके लिये वे अपना पैर बहुत निकट रखते थे-लंबे डग से नहीं चलते थे। वन में पहुँचना ही उनकी यात्रा का परम लक्ष्य था।
Show English Translation
Then Rama along with Sita and Lakshmana began walking on foot with slow steps towards the forest.
ShlokaShloka 19
द्विजातींस्तु पदातींस्तान् रामश्चारित्रवत्सलः। न शशाक घृणाचक्षुः परिमोक्तुं रथेन सः।।2.45.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीरामचन्द्रजी के चरित्र में वात्सल्य-गुण की प्रधानता थी। उनकी दृष्टि में दया भरी हुई थी; इसलिये वे रथ के द्वारा चलकर उन पैदल चलने वाले ब्राह्मणों को पीछे छोड़ने का साहस न कर सके
Show English Translation
Rama a man of probity and compassion could not ride off in his chariot while those brahmins were trudging far behind.
ShlokaShloka 20
गच्छ���्तमेव तं दृष्ट्वा रामं सम्भ्रान्तचेतसः। ऊचुः परमसन्तप्ता रामं वाक्यमिदं द्विजाः।।2.45.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम को अब भी वन की ओर ही जाते देख वे ब्राह्मण मन-ही-मन घबरा उठे और अत्यन्त संतप्त होकर उनसे इस प्रकार बोले-
Show English Translation
Having seen Rama thus going towards the forest, those brahmins, highly agitated and distressed, said to him:
ShlokaShloka 21
ब्राह्मण्यं सर्वमेतत्त्वां ब्रह्मण्यमनुगच्छति। द्विजस्कन्धाधिरूढास्त्वामग्नयोऽप्यनुयान्त्यमी।।2.45.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! तुम ब्राह्मणों के हितैषी हो, इसीसे यह सारा ब्राह्मण-समाज तुम्हारे पीछे-पीछे चल रहा है। इन ब्राह्मणों के कंधों पर चढ़कर अग्निदेव भी तुम्हारा अनुसरण कर रहे हैं
Show English Translation
This entire order of brahmins with the sacrificial fires on their hsoulders is following you, their wellwisher.
ShlokaShloka 22
वाजपेयसमुत्थानि छत्राण्येतानि पश्य नः। पृष्ठतोऽनुप्रयातानि मेघानिव जलात्यये।।2.45.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वर्षा बीतने पर शरद् ऋतु में दिखायी देने वाले सफेद बादलों के समान हमारे इन श्वेत छत्रों की ओर देखो, जो तुम्हारे पीछे-पीछे चल पड़े हैं। ये हमें वाजपेय-यज्ञ में प्राप्त हुए थे
Show English Translation
See these umbrellas acquired by us while performing Vajapeya sacrifice are following you like the clouds at the end of the rainy season.
ShlokaShloka 23
अनवाप्तातपत्रस्य रश्मिसन्तापितस्य ते। एभिश्छायां करिष्यामः स्वैश्छत्रैर्वाजपेयिकैः।।2.45.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तुम्हें राजकीय श्वेतच्छत्र नहीं प्राप्त हुआ, अतएव तुम सूर्यदेव की किरणों से संतप्त हो रहे हो। इस अवस्था में हम वाजपेय-यज्ञ में प्राप्त हुए इन अपने छत्रों द्वारा तुम्हारे लिये छाया करेंगे
Show English Translation
You do not have a royal umbrella and you are scorched by the rays of the Sun. We will offer you shade with the umbrellas acquired during Vajapeya sacrifice.
ShlokaShloka 24
या हि नः सततं बुद्धिर्वेदमन्त्रानुसारिणी। त्वत्कृते सा कृता वत्स वनवासानुसारिणी।।2.45.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वत्स! हमारी जो बुद्धि सदा वेदमन्त्रों के पीछे चलती थी—उन्हीं के चिन्तन में लगी रहती थी, वही तुम्हारे लिये वनवास का अनुसरण करने वाली हो गयी है।
Show English Translation
O dear child, our minds always pursue the study of vedic hymns. For your sake now they are made to follow the life in the forest.
ShlokaShloka 25
हृदयेष्वेव तिष्ठन्ति वेदा ये नः परं धनम्। वत्स्यन्त्यपि गृहेष्वेव दाराश्चारित्ररक्षिताः।।2.45.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो हमारे परम धन वेद हैं, वे हमारे हृदयों में स्थित हैं। हमारी स्त्रियाँ अपने चरित्रबल से सुरक्षित रहकर घरों में ही रहेंगी
Show English Translation
The Vedas are our greatest wealth and they reside in our hearts. Our wives, protected by their fidelity, shall stay at home.
ShlokaShloka 26
न पुनर्निश्चयः कार्यस्त्वद्गतौ सुकृता मतिः। त्वयि धर्मव्यपेक्षे तु किं स्याद्धर्मपथे स्थितम्।।2.45.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये वृक्ष अपनी जड़ों के कारण अत्यन्त वेगहीन हैं, इसी से तुम्हारे पीछे नहीं चल सकते; परंतु वायु के वेग से इनमें जो सनसनाहट पैदा होती है, उनके द्वारा ये ऊँचे वृक्ष मानो तुम्हें पुकार रहे हैं तुमसे लौट चलने की प्रार्थना कर रहे हैं
Show English Translation
We are not going to revoke our decision. We have made up our minds to follow you (into the forest). If you have no regard for this decision, then who will adhere to the path of righteousness?
ShlokaShloka 27
याचितो नो निवर्तस्व हंसशुक्लशिरोरुहैः। शिरोभिर्निभृताचार महीपतनपांसुलैः।।2.45.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये वृक्ष अपनी जड़ों के कारण अत्यन्त वेगहीन हैं, इसी से तुम्हारे पीछे नहीं चल सकते; परंतु वायु के वेग से इनमें जो सनसनाहट पैदा होती है, उनके द्वारा ये ऊँचे वृक्ष मानो तुम्हें पुकार रहे हैं तुमसे लौट चलने की प्रार्थना कर रहे हैं
Show English Translation
O Rama, you are firm in your duty.We beseech you, our heads bowed with swanwhite hair and soiled with dust, to return to Ayodhya.
ShlokaShloka 28
बहूनां वितता यज्ञा द्विजानां य इहागताः। तेषां समाप्तिरायत्ता तव वत्स निवर्तने।।2.45.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये वृक्ष अपनी जड़ों के कारण अत्यन्त वेगहीन हैं, इसी से तुम्हारे पीछे नहीं चल सकते; परंतु वायु के वेग से इनमें जो सनसनाहट पैदा होती है, उनके द्वारा ये ऊँचे वृक्ष मानो तुम्हें पुकार रहे हैं तुमसे लौट चलने की प्रार्थना कर रहे हैं
Show English Translation
Many of those brahmins who arrived here have commenced their sacrifices. O dear child, their consummation depends on your return.
ShlokaShloka 29
भक्तिमन्ति हि भूतानि जङ्गमाजङ्गमानि च। याचमानेषु राम त्वं भक्तिं भक्तेषु दर्शय।।2.45.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये वृक्ष अपनी जड़ों के कारण अत्यन्त वेगहीन हैं, इसी से तुम्हारे पीछे नहीं चल सकते; परंतु वायु के वेग से इनमें जो सनसनाहट पैदा होती है, उनके द्वारा ये ऊँचे वृक्ष मानो तुम्हें पुकार रहे हैं तुमसे लौट चलने की प्रार्थना कर रहे हैं
Show English Translation
O Rama, all these living beings, movable and immovable, are devoted to you and are entreating you with devotion to return. Show consideration to those supplicants.
ShlokaShloka 30
अनुगन्तुमशक्ता स्त्वां मूलैरुद्धतवेगिनः। उन्नता वायुवेगेन विक्रोशन्तीव पादपाः।।2.45.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये वृक्ष अपनी जड़ों के कारण अत्यन्त वेगहीन हैं, इसी से तुम्हारे पीछे नहीं चल सकते; परंतु वायु के वेग से इनमें जो सनसनाहट पैदा होती है, उनके द्वारा ये ऊँचे वृक्ष मानो तुम्हें पुकार रहे हैं तुमसे लौट चलने की प्रार्थना कर रहे हैं
Show English Translation
Although the trees uplifted by the speed of the wind, intend to follow you, their movement is stalled by their roots. Unable, they appear to be weeping.
ShlokaShloka 31
निश्चेष्टाहारसञ्चारा वृक्षैकस्थानविष्ठिताः। पक्षिणोऽपि प्रयाचन्ते सर्वभूतानुकम्पिनम्।।2.45.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो सब प्रकार की चेष्टा छोड़ चुके हैं, चारा चुगने के लिये भी कहीं उड़कर नहीं जाते हैं और निश्चित रूप से वृक्ष के एक स्थान पर ही पड़े रहते हैं, वे पक्षी भी तुमसे लौट चलने के लिये प्रार्थना कर रहे हैं; क्योंकि तुम समस्त प्राणियों पर कृपा करने वाले हो’
Show English Translation
Even the birds instead of foraging for food are sitting motionless on the trees at one place. They are imploring you, you who are compassionate to all creatures, to return to Ayodhya.
ShlokaShloka 32
एवं विक्रोशतां तेषां द्विजातीनां निवर्तने। ददृशे तमसा तत्र वारयन्तीव राघवम्।।2.45.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीराम से लौटने के लिये पुकार मचाते हुए उन ब्राह्मणों पर मानो कृपा करने के लिये मार्ग में तमसा नदी दिखायी दी, जो अपने तिर्यक्-प्रवाह (तिरछी धारा) से श्रीरघुनाथजी को रोकती हुई-सी प्रतीत होती थी
Show English Translation
While those brahmins were thus crying out, river Tamasa came into view as if seeking Rama to turn back to Ayodhya.
ShlokaShloka 33
ततः सुमन्त्रोऽपि रथाद्विमुच्य श्रान्तान्हयान्सम्परिवर्त्य शीघ्रम्। पीतोदकांस्तोयपरिप्लुताङ्गा नचारयद्वै तमसाविदूरे।।2.45.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
वहाँ पहुँचने पर सुमन्त्र ने भी थके हुए घोड़ों को शीघ्र ही रथ से खोलकर उन सबको टहलाया, फिर पानी पिलाया और नहलाया, तत्पश्चात् तमसा के निकट ही चरने के लिये छोड़ दिया
Show English Translation
Then Sumantra also unyoked the fatigued horses from the chariot and quickly allowed them to roll and relax on the ground. Having made the horses drink and dip in water, he released them for grazing not far from Tamasa river. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे पञ्चचत्वारिंशस्सर्गः।। Thus ends the fortyfifth sarga of Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.