Ayodhya Kanda

Sarga 53: Rama's mind goes back to Kaikeyi and to Kausalya and Sumitra asks Lakshmana to go back Lakshmana declines

अयोध्याकाण्डम् · सर्ग 53

35 shlokas

ShlokaShloka 1
स तं वृक्षं समासाद्य सन्ध्यामन्वास्यपश्चिमाम्। रामो रमयतां श्रेष्ठ इति होवाच लक्ष्मणम्।।2.53.1।।
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उस वृक्ष के नीचे पहुँचकर आनन्द प्रदान करने वालों में श्रेष्ठ श्रीराम ने सायंकाल की संध्योपासना करके लक्ष्मण से इस प्रकार कहा-
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On reaching the foot of the tree, Rama offered oblations to Sandhya of the west. And then he who is the best in keeping people in good humour said to Lakshmana:
ShlokaShloka 2
अद्येयं प्रथमा रात्रिर्याता जनपदाद्बहिः। या सुमन्त्रेण रहिता तां नोत्कण्ठितुमर्हसि।।2.53.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमित्रानन्दन! आज हमें अपने जनपद से बाहर यह पहली रात प्राप्त हुई है। जिसमें सुमन्त्र हमारे साथ नहीं हैं। इस रात को पाकर तुम्हें नगर की सुख सुविधाओं के लिये उत्कण्ठित नहीं होना चाहिये
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We will have to spend this first night without Sumantra and away from human habitation. (Yet) you need not worry.
ShlokaShloka 3
जागर्तव्यमतन्द्रिभ्यामद्यप्रभृति रात्रिषु। योगक्षेमौ हि सीताया वर्तेते लक्ष्मणावयोः।।2.53.3।।
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“लक्ष्मण! आज से हम दोनों भाइयों को आलस्य छोड़कर रात में जागना होगा; क्योंकि सीता के योग क्षेम हम दोनों के ही अधीन हैं
Show English Translation
O Lakshmana, from now on we must be sleeplessly vigilant at night. The welfare and safety of Sita depend on us both.
ShlokaShloka 4
रात्रिं कथञ्चिदेवेमां सौमित्रे वर्तयामहे। अपावर्तामहे भूमावास्तीर्य स्वयमार्जितैः।।2.53.4।।
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‘सुमित्रानन्दन! यह रात हमलोग किसी तरह बितायँगे और स्वयं संग्रह करके लाये हुए तिनकों और पत्तों की शय्या बनाकर उसे भूमिपर बिछाकर उस पर किसी तरह सो लेंगे’
Show English Translation
O Lakshmana, we will have to somehow pass this night, sleeping on the ground spread with whatever we have procured.
ShlokaShloka 5
स तु संविश्य मेदिन्यां महार्हशयनोचितः। इमाः सौमित्रये रामो व्याजहार कथाः शुभाः।।2.53.5।।
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‘लक्ष्मण! आज महाराज निश्चय ही बड़े दुःख से सो रहे होंगे; परंतु कैकेयी सफल मनोरथ होने के कारण बहुत संतुष्ट होगी
Show English Translation
Rama who deserved a luxurious bed lay down on the ground and uttered these beneficial words to Lakshamana:
ShlokaShloka 6
ध्रुवमद्य महाराजो दुःखं स्वपिति लक्ष्मण। कृतकामा तु कैकेयी तुष्टा भवितुमर्हति।।2.53.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! आज महाराज निश्चय ही बड़े दुःख से सो रहे होंगे; परंतु कैकेयी सफल मनोरथ होने के कारण बहुत संतुष्ट होगी
Show English Translation
O Lakshmana, the maharaja must be having a painful sleep tonight. But Kaikeyi with her desires fulfilled, ought to feel satisfied.
ShlokaShloka 7
सा हि देवी महाराजं कैकेयी राज्यकारणात्। अपि न च्यावयेत्प्राणान् दृष्ट्वा भरतमागतम्।।2.53.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज का कोई रक्षक न होने के कारण वे इस समय अनाथ हैं, बूढ़े हैं और उन्हें मेरे वियोग का सामना करना पड़ा है। उनकी कामना मन में ही रह गयी तथा वे कैकेयी के वश में पड़ गये हैं; ऐसी दशा में वे बेचारे अपनी रक्षा के लिये क्या करेंगे?
Show English Translation
After the arrival of Bharata, I hope queen Kaikeyi does not deprive the king of his life for the sake of the kingdom?
ShlokaShloka 8
अनाथश्च हि वृद्धश्च मया चैव विनाकृतः। किं करिष्यति कामात्मा कैकेयी वशमागतः।।2.53.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाराज का कोई रक्षक न होने के कारण वे इस समय अनाथ हैं, बूढ़े हैं और उन्हें मेरे वियोग का सामना करना पड़ा है। उनकी कामना मन में ही रह गयी तथा वे कैकेयी के वश में पड़ गये हैं; ऐसी दशा में वे बेचारे अपनी रक्षा के लिये क्या करेंगे?
Show English Translation
That lustful king, having come under the hold of Kaikeyi, has been deprived of my presence. What can that forlorn and aged king do?
ShlokaShloka 9
इदं व्यसनमालोक्य राज्ञश्च मतिविभ्रमम्। काम एवार्थधर्माभ्यां गरीयानिति मे मतिः।।2.53.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अपने ऊपर आये हुए इस संकट को और राजा की मतिभ्रान्ति को देखकर मुझे ऐसा मालूम होता है कि अर्थ और धर्म की अपेक्षा काम का ही गौरव अधिक है
Show English Translation
Reflecting on the calamity and mental aberration of the king, I think passion is stronger than wealth and righteousness.
ShlokaShloka 10
को ह्यविद्वानपि पुमान् प्रमदायाः कृते त्यजेत्। छन्दानुवर्तिनं पुत्रं तातो मामिव लक्ष्मण।।2.53.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण ! पिताजी ने जिस तरह मुझे त्याग दिया है, उस प्रकार अत्यन्त अज्ञ होने पर भी कौन ऐसा पुरुष होगा, जो एक स्त्री के लिये अपने आज्ञाकारी पुत् का परित्याग कर दे?
Show English Translation
O Lakshmana, will even an illiterate man for the sake of a woman ever abandon his son like me who is faithful and obedient, as did my father?
ShlokaShloka 11
सुखी बत सभार्यश्च भरतः केकयीसुतः। मुदितान् कोसलानेको यो भोक्ष्यत्यधिराजवत्।।2.53.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पिताजी अत्यन्त वृद्ध हो गये हैं और मैं वन में चला आया हूँ, ऐसी दशा में केवल भरत ही समस्त राज्य के श्रेष्ठ सुख का उपभोग करेंगे
Show English Translation
Bharata, son of Kaikeyi, with his wife will alone enjoy like an emperor this kingdom of Kosala full of happy people.
ShlokaShloka 12
स हि सर्वस्य राज्यस्य मुखमेकं भविष्यति। ताते च वयसाऽतीते मयि चारण्यमास्थिते।।2.53.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पिताजी अत्यन्त वृद्ध हो गये हैं और मैं वन में चला आया हूँ, ऐसी दशा में केवल भरत ही समस्त राज्य के श्रेष्ठ सुख का उपभोग करेंगे
Show English Translation
The king is advanced in age and I have to dwell in the forest. Therefore, Bharata alone will be the chief of this entire kingdom.
ShlokaShloka 13
अर्थधर्मौ परित्यज्य य काममनुवर्तते। एवमापद्यते क्षिप्रं राजा दशरथो यथा।।2.53.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सच है, जो अर्थ और धर्म का परित्याग करके केवल काम का अनुसरण करता है, वह उसी प्रकार शीघ्र ही आपत्ति में पड़ जाता है, जैसे इस समय महाराज दशरथ पड़े हैं
Show English Translation
Any king who abandons dharma and artha and adopts a life of pleasure will very soon reach this state as Dasaratha has attained.
ShlokaShloka 14
मन्ये दशरथान्ताय मम प्रव्राजनाय च। कैकेयी सौम्य सम्प्राप्ता राज्याय भरतस्य च।।2.53.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्य! मैं समझता हूँ कि महाराज दशरथ के प्राणों का अन्त करने, मुझे देश निकाला देने और भरत को राज्य दिलाने के लिये ही कैकेयी इस राजभवन में आयी थी
Show English Translation
O handsome Lakshmana I think Kaikeyi has come to our house for the destruction of Dasaratha, for my banishment and enthronement of Bharata in the kingdom.
ShlokaShloka 15
अपीदानीं तु कैकेयी सौभाग्यमदमोहिता। कौसल्यां च सुमित्रां च सम्प्रबाधेत मत्कृते।।2.53.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस समय भी सौभाग्य के मद से मोहित हुई कैकेयी मेरे कारण कौसल्या और सुमित्रा को कष्ट पहुँचा सकती है
Show English Translation
Intoxicated with her good fortune will not Kaikeyi torment Kausalya and Sumitra for my sake?
ShlokaShloka 16
मा स्म मत्���ारणाद्देवी सुमित्रा दुःखमावसेत्। अयोध्यामित एव त्वं काल्ये प्रविश ���क्ष्मण।।2.53.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं अकेला ही सीता के साथ दण्डक वन को जाऊँगा। तुम वहाँ मेरी असहाय माता कौसल्या के सहायक हो जाओगे
Show English Translation
O Lakshmana, because of me mother Sumitra should not live in sorrow. Therefore, tomorrow morning go back to Ayodhya from here itself.
ShlokaShloka 17
अहमेको गमिष्यामि सीतया सह दण्डकान्। अनाथाया हि नाथस्त्वं कौशल्याया भविष्यसि।।2.53.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं अकेला ही सीता के साथ दण्डक वन को जाऊँगा। तुम वहाँ मेरी असहाय माता कौसल्या के सहायक हो जाओगे
Show English Translation
I shall go with Sita into the Dandaka forest and you be the protector of the helpless, Kausalya.
ShlokaShloka 18
क्षुद्रकर्मा हि कैकेयी द्वेष्यमन्याय्यमाचरेत्। परिदद्याहि धर्मज्ञे भरते मम मातरम्।।2.53.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धर्मज्ञ लक्ष्मण! कैकेयी के कर्म बड़े खोटे हैं। वह द्वेषवश अन्याय भी कर सकती है। तुम्हारी और मेरी माता को जहर भी दे सकती है
Show English Translation
Kaikeyi who is a woman of heinous deeds may follow, out of hostility, an unjust way in respect of my mother. In that case my mother may be entrusted to the care of Bharata who is righteous.
ShlokaShloka 19
नूनं जात्यन्तरे कस्मिन् स्त्रियः पुत्रैर्वियोजिताः। जनन्या मम सौमित्रे तस्मादेतदुपस्थितम्।।2.53.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
“तात सुमित्राकुमार! निश्चय ही पूर्वजन्म में मेरी माता ने कुछ स्त्रियों का उनके पुत्रों से वियोग कराया होगा, उसी पाप का यह पुत्र-बिछोहरूप फल आज उन्हें प्राप्त हुआ है
Show English Translation
O Lakshmana, surely in one of her previous births did my mother separate women from their sons. That is why this (calamity) has befallen her.
ShlokaShloka 20
मया हि चिरपुष्टेन दुखसंवर्धितेन च। विप्रयुज्यत कौशल्या फलकाले धिगस्तु माम्।।2.53.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरी माता ने चिरकाल तक मेरा पालन-पोषण किया और स्वयं दुःख सहकर मुझे बड़ा किया। अब जब पुत्र से प्राप्त होने वाले सुखरूपी फल के भोगने का अवसर आया, तब मैंने माता कौसल्या को अपने से बिलग कर दिया मुझे धिक्कार है !
Show English Translation
Kausalya nurtured me for a long time and reared me with great difficulty. When she was going to enjoy the fruits of her labour, I have been separated from her. Fie upon me
ShlokaShloka 21
मा स्म सीमन्तिनी काचिज्जनयेत्पुत्रमीदृशम्। सौमित्रे योऽहमम्बाया दद्मि शोकमनन्तकम्।।2.53.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! मैं तो ऐसा मानता हूँ कि माता कौसल्या में मुझसे अधिक प्रेम उनकी पाली हुई वह सारिका ही करती है; क्योंकि उसके मुख से माँ को सदा यह बात सुनायी देती है कि ‘ऐ तोते! तू शत्रु के पैर को काट खा’ (अर्थात् हमें पालने वाली माता कौसल्या के शत्रु के पाँव को चोंच मार दे। वह पक्षिणी होकर माता का इतना ध्यान रखती है और मैं उनका पुत्र होकर भी उनके लिये कुछ नहीं कर पाता)
Show English Translation
O Lakshmana, I am causing endless sorrow to my mother. May no mother give birth to a son like me
ShlokaShloka 22
मन्ये प्रीतिविशिष्टा सा मत्तो लक्ष्मण शारिका। यस्यास्तच्छ्रूयते वाक्यं शुक पादमरेर्दश।।2.53.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! मैं तो ऐसा मानता हूँ कि माता कौसल्या में मुझसे अधिक प्रेम उनकी पाली हुई वह सारिका ही करती है; क्योंकि उसके मुख से माँ को सदा यह बात सुनायी देती है कि ‘ऐ तोते! तू शत्रु के पैर को काट खा’ (अर्थात् हमें पालने वाली माता कौसल्या के शत्रु के पाँव को चोंच मार दे। वह पक्षिणी होकर माता का इतना ध्यान रखती है और मैं उनका पुत्र होकर भी उनके लिये कुछ नहीं कर पाता)
Show English Translation
(On hearing my banishment) her myna would say to her parrot, 'O parrot, bite the foot of the enemy (Kaikeyi)'. I think that bird is a greater source of joy to my mother than I, O Lakshmana
ShlokaShloka 23
शोचन्त्या अल्पभाग्याया न किञ्चिदुपकुर्वता। पुत्रेण किमपुत्राया मया कार्यमरिन्दम।।2.53.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रुदमन! जो मेरे लिये शोकमग्न रहती है, मन्दभागिनी-सी हो रही है और पुत्र का कोई फल न पाने के कारण निपूती-सी हो गयी है, उस मेरी माता को कुछ भी उपकार न करने वाले मुझ-जैसे पुत्र से क्या प्रयोजन है ?
Show English Translation
My mother has less fortune and more grief like a woman without a son, O Lakshmana, subduer of enemies For her, what is the use of a son like me who cannot render any service to her?
ShlokaShloka 24
अल्पभाग्या हि मे माता कौशल्या रहिता मया। शेते परमदुःखार्ता पतिता शोकसागरे।।2.53.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! यदि मैं कुपित हो जाऊँ तो अपने बाणों द्वारा अकेला ही अयोध्यापुरी तथा समस्त भूमण्डल को निष्कण्टक बनाकर अपने अधिकार में कर लूँ; परंतु पारलौकिक हित-साधन में बल-पराक्रम कारण नहीं होता है (इसीलिये मैं ऐसा नहीं कर रहा हूँ।)
Show English Translation
My mother is unlucky as she has been separated from me. Extremely distressed, she must have plunged into an ocean of grief.
ShlokaShloka 25
एको ह्यहमयोध्यां च पृथिवीं चापि लक्ष्मण। तरेयमिषुभिः क्रुद्धो ननु वीर्यमकारणम्।।2.53.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! यदि मैं कुपित हो जाऊँ तो अपने बाणों द्वारा अकेला ही अयोध्यापुरी तथा समस्त भूमण्डल को निष्कण्टक बनाकर अपने अधिकार में कर लूँ; परंतु पारलौकिक हित-साधन में बल-पराक्रम कारण नहीं होता है (इसीलिये मैं ऐसा नहीं कर रहा हूँ।)
Show English Translation
Once enraged, O Lakshmana I can overpower Ayodhya, even the whole world all by myself with my arrows. But exhibition of prowess without any reason is not desirable.
ShlokaShloka 26
अधर्मभयभीतश्च परलोकस्य चानघ। तेन लक्ष्मण नाद्याह मात्मानमभिषेचये।।2.53.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निष्पाप लक्ष्मण ! मैं अधर्म और परलोक के डर से डरता हूँ; इसीलिये आज अयोध्या वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई अाैर तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी । कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। " href="https://www.ramcharit.in/glossary/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/" data-gt-translate-attributes='[{"attribute":"data-cmtooltip", "format":"html"}]' tabindex='0' role='link'>अयोध्या के राज्यपर अपना अभिषेक नहीं कराता हूँ
Show English Translation
O sinless one, I did not get myself coronated owing to fear of unrighteous conduct and fear of the other world.
ShlokaShloka 27
एतदन्यश्च करुणं विलप्य विजने वने। अश्रुपूर्णमुखो रामो निशि तूष्णीमुपाविशत्।।2.53.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
विलाप से निवृत्त होने पर श्रीराम ज्वालारहित अग्नि और वेगशून्य समुद्र के समान शान्त प्रतीत होते थे। उस समय लक्ष्मण ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा –
Show English Translation
Like this and in many other ways Rama lamented pitifully in that desolate forest. When his face was filled with tears, he sat silently in the night.
ShlokaShloka 28
विलप्योपरतं रामं गतार्चिषमिवानलम्। समुद्रमिव निर्वेगमाश्वासयत लक्ष्मणः।।2.53.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
विलाप से निवृत्त होने पर श्रीराम ज्वालारहित अग्नि और वेगशून्य समुद्र के समान शान्त प्रतीत होते थे। उस समय लक्ष्मण ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा –
Show English Translation
Lakshmana consoled Rama who ceased to lament like fire with extinguished flames or like a motionless sea:
ShlokaShloka 29
ध्रुवमद्य पुरी राजन्नयोध्यायुधिनां वर। निष्प्रभा त्वयि निष्क्रान्ते गतचन्द्रेव शर्वरी।।2.53.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अस्त्रधारियों में श्रेष्ठ श्रीराम! आपके निकल आने से निश्चय ही आज अयोध्यापुरी चन्द्रहीन रात्रि के समान निस्तेज हो गयी
Show English Translation
O Rama, foremost of warriors, it is certain that since your departure, the city of Ayodhya must be lustreless like night without the Moon.
ShlokaShloka 30
नैतदौपयिकं राम यदिदं परितप्यते। विषादयसि सीतां च मां चैव पुरुषर्षभ।।2.53.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुरुषोत्तम श्रीराम! आप जो इस तरह संतप्त हो रहे हैं, यह आपके लिये कदापि उचित नहीं है। आप ऐसा करके सीता को और मुझको भी खेद में डाल रहे हैं।
Show English Translation
This is not the way you should lament, O Rama. O foremost of men, by doing so you are disheartening me and Sita as well.
ShlokaShloka 31
न च सीता त्वया हीना न चाहमपि राघव। मुहूर्तमपि जीवावो जलान्मत्स्याविनोद्धृतौ।।2.53.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रघुनन्दन! आपके बिना सीता और मैं दोनों दो घड़ी भी जीवित नहीं रह सकते। ठीक उसी तरह, जैसे जल से निकाले हुए मत्स्य नहीं जीते हैं
Show English Translation
Without you Sita or I will not survive even for a moment like a fish taken out of water, O Rama
ShlokaShloka 32
नहि तातं न शत्रुघ्नं न सुमित्रां परन्तप। द्रष्टुमिच्छेयमद्याहं स्वर्गं चापि त्वया विना।।2.53.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर वहाँ बैठे हुए धर्मवत्सल सीता और श्रीराम ने थोड़ी ही दूरपर वटवृक्ष के नीचे लक्ष्मण द्वारा सुन्दर ढंग से निर्मित हुई शय्या देखकर उसीका आश्रय लिया (अर्थात् वे दोनों वहाँ जाकर सो गये।)
Show English Translation
Without you, O Rama, tormentor of enemies, I wish to see neither father nor Satrughna nor Sumitra nor even heaven itself
ShlokaShloka 33
ततस्तत्र सुखासीनौ नातिदूरे निरीक्ष्य ताम्। न्यग्रोधे सुकृतां शय्यां भेजाते धर्मवत्सलौ।।2.53.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर वहाँ बैठे हुए धर्मवत्सल सीता और श्रीराम ने थोड़ी ही दूरपर वटवृक्ष के नीचे लक्ष्मण द्वारा सुन्दर ढंग से निर्मित हुई शय्या देखकर उसीका आश्रय लिया (अर्थात् वे दोनों वहाँ जाकर सो गये।)
Show English Translation
Thereafter Rama and Sita, the duo, nurturers of righteousness, from their comfortable seats moved to the bed wellmade under the banyan tree not far (from there where they were sitting) and lay down (to sleep).
ShlokaShloka 34
स लक्ष्मणस्योत्तमपुष्कलं वचो निशम्य चैवं वनवासमादरात्। समाः समस्ता विदधे परन्तपः प्रपद्य धर्मं सुचिराय राघवः।।2.53.34।।
Show English Translation
Rama, the tormentor of enemies, listened, out of love, to the excellent and copious words of Lakshmana and permitted him to live in the forest for the entire period of fourteen years by observing the prescribed code of conduct as enjoined on life in the forest.
ShlokaShloka 35
ततस्तु तस्मिन् विजने वने तदा महाबलौ राघववंशवर्धनौ। न तौ भयं सम्भ्रममभ्युपेयतु र्यथैव सिंहौ गिरिसानुगोचरौ।।2.53.35।।
Show English Translation
Then the two mighty perpetuators of the Raghu race, who were like two lions dwelling on the slopes of mountains, lived in that lonely forest without fear or hesitation. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे त्रिपञ्चाशस्सर्गः।। Thus ends the fiftythird sarga of Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.